भाजपा नेता प्रतिपक्ष अजय भटट राग अलाप रहे हैं कि सरकार का आपदा प्रबन्धन तंत्र पूरी तरह से फेल है क्योंकि उनके पास टार्च तक उपलब्ध नहीं थे और न ही सेटेलाईट फोन थे परन्तु इस बयान को देते समय वह यह भूल गये कि छह माह पूर्व तो उनकी सरकार पांच साल रही, हां यह बात अलग है कि उस समय वह चुनाव हारने के कारण वनवास में थे,
नेता प्रतिपक्ष, श्री अजय भट्ट ने अवगत कराया है कि वे कल दिनांक ०६-०८-२०१२ को उत्तरकाशी से देहरादून लौट रहे थे किन्तु मार्ग में मलवा आने से वे धराशू बैण्ड पर फॅस गये थे जिस कारण आज विधानसभा भवन में दोपहर ०१ः०० बजे रखी प्रेस वार्ता स्थगित करनी पडी।
श्री भट्ट ने अवगत कराया है कि उन्होंने आज दिनांक ०७-०८-२०१२ को प्रातः मा० नेता प्रतिपक्ष लोकसभा, श्रीमती सुषमा स्वराज जी एवं मा० नेता प्रतिपक्ष, राज्यसभा श्री अरूण जेटली से भी उत्तराखण्ड में आई दैवीय आपदा के सम्बन्ध में वार्ता की और बताया कि विगत ३० घण्टे से भी अधिक समय से राष्ट्रीय राजमार्ग जो सीधे चाईना बार्डर नेलन तक जाता है बन्द होने से हजारों यात्री फॅसे हुए हैं जिन्हें यथाशीघ्र निकाला जाना आवश्यक है क्योंकि अभी कई यात्रिय एवं यहॉ की जनता को खतरा बना हुआ है जिस क्रम में मा० सुषमा स्वराज जी ने तत्काल मा० केन्द्रीय गृह मंत्री श्री सिंधे जी से वार्ता कर उत्तराखण्ड को फौरी मदद दिलाये जाने का अनुरोध किया जिस पर मा० सिंधे जी ने कहा कि आज राज्यसभा का मतदान होने के पश्चात वे यथाशीघ्र उत्तराखण्ड को सेना सहित अन्य मदद देंगे।
श्री भट्ट ने कहा कि सरकार के कार्य की गति का अनुमान इससे लगाया जा सकता है कि चाईना बार्डर वाला मुख्य मार्ग विगत ३० घण्टे से भी अधिक समय से बन्द पडा है वे स्वयं व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष कई घण्टों तक फॅसे रहे। उन्होंने कहा कि सरकार का आपदा प्रबन्धन तंत्र पूरी तरह से फेल है क्योंकि उनके पास टार्च तक उपलब्ध नहीं थे और न ही सेटेलाईट फोन थे जबकि उत्तरकाशी में बिजली, पानी व टेलीफोन आदि की सेवायें अभी भी ठप पडी हुई हैं।
श्री भट्ट ने कहा कि बी०आर०ओ० के पास ऐसे साधन नहीं थे जिससे तत्काल कार्य हो सकें जबकि आधुनिक युग में ऐसी मशीनें हैं जिनसे महीनों का कार्य घण्टों में पूर्ण किया जा सकता है। सरकार की आपदा के सम्बन्ध में हो रहे बडे-बडे दावों की पोल खुल गयी है।
श्री भट्ट ने कहा कि वे स्वयं समस्त शिविरों में गये वहॉ पर लोग मात्र अपने एक पहने हुए कपडों में अपना घर छोडकर अपनी जान बचाने शिविरों में पडे हुए हैं किन्तु इस मद में सरकार द्वारा दी जाने वाली अहेतुक राशि मात्र २७०० रूपये नाकाफी है इसे बढाया जाना चाहिए। उन्होंने अवगत कराया है कि ज्ञानसू गैस गोदाम के नीचे टैक्सी स्टैण्ड के पास राजस्थान के लोहा पीटने वाले कारीगरों के तम्बू लगे थे जिनका कोई पता नहीं है कि वे कहॉ बहे। संगम चट्टी में एक पटवारी तक नहीं है जबकि संगम चट्टी में कई एकड जंगल नदी में बह गये हैं जिससे कई मोटे-मोटे पेड उत्तरकाशी के मकानों और होटलों के ऊपर गिर गये और कई मकान भागीरथी नदी में झूल रहे हैं राष्ट्रीय राजमार्ग मल्ला लाटा के बीच चार जगह पर अत्यधिक ध्वस्त हो गया है सैंन मनेरी के बीच में खिपा और भाटुकसौंण में २०० मीटर से अधिक रोड बह गयी है। भटवाडी में गब्बर कालोनी के सारे मकान नदी में समा गये हैं ग०मं०वि०नि० का अतिथि गृह भागीरथी नदी में लटक रहा है।
श्री भट्ट ने कहा कि मा० मुख्यमंत्री जी केन्द्र सरकार को ६०० करोड के नुकसान का आंकलन बता रहे हैं जबकि मा० वित्त मंत्री जी १,००० करोड का उन्होंने कहा कि सरकार के लिए शायद यह आपदा कोई गम्भीर बात नहीं है उन्होंने कहा कि जब तक स्थिति सामान्य नहीं हो जाती तब तक आंकलन नहीं लगाया जा सकता कि कितने जन-धन की हानि हुई है। श्री भट्ट ने अवगत कराया कि गंगोरी से गंगोत्री तक लगभग १०० किमी० मार्ग से सम्फ बिल्कुल समाप्त हो गया है वहॉ की तो खबर भी किसी के पास नहीं है पुल टुटने से वहॉ की आवाजाही बिल्कुल समाप्त हो गयी है संज्ञान में आया है कि वहॉ देश के हजारों यात्री फॅसे हुए हैं।
श्री भट्ट ने सरकार से आग्रह किया कि वे केन्द्र सरकार की मदद लेकर फॅसे हुए यात्रियों को हैलीकॉप्टर की मदद से सुरक्षित स्थानों पर पहचायें साथ ही उन्होंने इस बात बार भारी आक्रोश व्यक्त किया कि अत्यन्त दुःखद बात है कि उत्तरकाशी शिविरों में अभी तक सरकार का कोई आदमी नहीं पहच पाया है मा० आपदा प्रबन्धन मंत्री हवाई यात्रा से आधे रास्ते में से ही वापस लौट आये जबकि वहॉ पर हजारों यात्री जहॉ-तहॉ फॅसें हैं शिविरों में लोगों को दोनों समय उबला हुआ दाल चावल दिया जा रहा है कई लोगों ने बताया कि भोजन भी कच्चा दिया जा रहा है इसके अलावा उनके लिए वहॉ किसी भी प्रकार की कोई व्यवस्था नहीं है सरकार को इतनी बडी आपदा आने के बाद भी कोई चिन्ता दूर-दूर तक दिखाई नहीं दे रही है, जो गम्भीर बात है श्री भट्ट ने कहा कि मा० मुख्यमंत्री जी को स्वयं वहॉ जाकर वहॉ की वास्तविक जानकारी लेनी चाहिए हवाई यात्रा करके स्थिति का जायजा नहीं लिया जा सकता और न ही लोगों के वास्तविक दर्द को देखा जा सकता है सरकार इस दिशा में पूर्ण तरह से असफल हो चूकी है।
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