रामपुर की बेगम का जनाजा इराक दफन होगा
रामपुर। उत्तर प्रदेश में रामपुर के नवाब मरहूम मुर्तजा अली की बेगम आफताब जमानी की लाश को कैद से आजादी मिलने की नौबत आ ही गई। दो मुल्कों के बीच की पाबंदियों और खानदान के विवादों से साढ़े अट्ठारह साल से एक खास परिसर के कमरे में सील बेगम की लाश को मंगलवार को बाहर निकालने का काम शुरू हो गया। बुधवार को इसे इराक ले जाया जाएगा।
बेगम आफताब जमानी की तीन अगस्त 1993 में मौत हो गई थी। बेगम ने जिंदा रहते खुद को इराक के कर्बला में दफन करने की वसीयत की थी। नवाब खानदान के ज्यादातर लोग करबला में ही दफन होते रहे हैं, लेकिन इराक के हालात अच्छे न होने के कारण लाश को करबला नहीं ले जाया जा सका। तब से उनकी लाश यहां इमामबाड़ा खास बाग के एक सीलबंद कमरे में रखी थी। कई साल तक इस लाश की रखवाली के लिए पुलिस भी तैनात रही।
आफताब जमानी बेगम की बेटी निखत बी और उनके बेटे मुराद मिया अपनी मां की लाश को इराक ले जाने के लिए प्रयासरत थे, लेकिन कामयाबी नहीं मिल पा रही थी। पिछले दिनों इराक दूतावास की ओर से करबला ले जाने की अनुमति मिल गई।
साथ ही दूतावास की ओर से स्थानीय प्रशासन से भी एनओसी मांगी गई थी। कागजी प्रक्रिया के बाद प्रशासन ने दूतावास को एनओसी भेज दी थी। मंगलवार को आफताब जमानी के बेटे मुराद मिया और उनकी बेटी निखत बी अन्य परिजनों के साथ रामपुर पहुंचीं। सील कमरे को तोड़कर ताबूत निकाल कर जनाना इमामबाड़े में रखा गया। हालांकि ताबूत को खोला नहीं गया। ताबूत के पास मोमबत्ताी जलाकर रोशनी की गई।
इस दौरान मौलाना सैयद अली तकबी ने मजलिस पढ़ी। लाश को बुधवार फज्र की नमाज के बाद यहां से दिल्ली ले जाया जाएगा, इसके बाद हवाई जहाज से दफन के लिए इराक।
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