उपराज्‍यपाल का आप पार्टी का दफ्तर खाली करने का निर्देश

दफ़्तर छिन गया  (www.himalayauk.org) HIMALAYA GAURAV UTTRAKHAND
आम आदमी पार्टी को दिल्ली सरकार से मिला दफ़्तर छिन गया है. उपराज्‍यपाल ने पार्टी से उसका दफ्तर खाली करने को कहा है।
केजरीवाल सरकार ने राउस एवेन्‍यू में आप के लिए दफ्तर आवंटित किया था। उप राज्‍यपाल अनिल बैजल ने आदेश जारी कर इस ऑफिस का आवंटन रद्द कर दिया है. दरअसल, शुंगलू समिति की रिपोर्ट में इस दफ़्तर आवंटन पर सवाल उठाए गए थे और कहा गया था कि क्योंकि ज़मीन दिल्ली सरकार के अधिकार क्षेत्र नहीं, इसलिए वो किसी राजनीतिक दल को दफ़्तर/ज़मीन देने के लिए नीति नही बना सकती. आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ‘जिस पार्टी के विधानसभा में केवल तीन विधायक हैं उसके पास दफ़्तर है, जिस पार्टी का विधानसभा में एक भी विधायक नहीं, उसका दफ़्तर भी हमारे सामने है और जिस पार्टी की सरकार दिल्ली में उसका कोई दफ़्तर नही होगा! दिल्ली की जनता ये सब ‘डर्टी ट्रिक्स’ देख रही हैं… चुनाव में इसका जवाब देगी’. ज्यपाल के आदेश के बाद आप नेता संजय सिंह ने भाजपा को निशाने पर लिया है। उन्‍होंने कहा कि उनकी पार्टी के साथ भेदभाव किया जा रहा है। संजय सिंह ने कहा कि भाजपा को दफ्तर के लिए वह जमीन दे दी जिस पर स्‍कूल बनाया जाना था। आप के साथ अन्‍याय किया जा रहा ह। भाजपा को इतनी दुश्‍मनी नहीं निकालनी चाहिए।

उल्‍लेखनीय है कि शुंगलू समिति की रिपोर्ट में कहा गया कि दिल्ली में केजरीवाल सरकार ने आम आदमी पार्टी को दफ्तर देने के लिए जो प्रक्रिया अपनाई वह अवैध है. दिल्ली सरकार ने दिल्ली में आईटीओ के पास दीनदयाल उपाध्याय मार्ग पर 206, राउज़ एवेन्यू ‘आप’ को दफ्तर के लिए आवंटित किया है. शुंगलू समिति ने कहा कि दिल्ली सरकार ने इसके लिए पॉलिटिकल पार्टियों को दफ्तर के लिए जमीन देने की बाकायदा नई पॉलिसी बनाई, जिसमें ये भी कहा गया कि जमीन पाने योग्य पार्टियों को 5 साल तक कोई इमारत या बंगला दिया जा सकता है, क्योंकि इतने समय में वह अपनी आवंटित ज़मीन पर दफ़्तर बना सकते हैं.

समिति की रिपोर्ट में कहा गया है ‘लैंड दिल्ली सरकार का अधिकार क्षेत्र नहीं इसलिए आदेश रद्द होना चाहिए. यह साफ है कि पॉलिटिकल पार्टी को जमीन देने का फैसला इसलिए लिया गया ताकि आम आदमी पार्टी को सरकारी आवास मिल सके.’ शुंगलु कमिटी की रिपोर्ट में कहा गया है कि जिन मसलों पर केजरीवाल सरकार को उपराज्‍यपाल से सलाह लेनी चा‍हिए थी उन पर राय नहीं ली गई। इसकी रिपोर्ट में दफ्तर के लिए जमीन आवंटन को लेकर भी केजरीवाल सरकार को घेरा गया था। इसमें कहा गया था कि पार्टी दफ्तर बनाने के लिए जमीन आवंटन के फैसले को अवैध माना जाना चाहिए। पूर्व उपराज्‍यपाल नजीब जंग ने इस कमिटी का गठन किया था। जंग ने पद छोड़ते वक्‍त कहा था कि अनियमितताओं के चलते केजरीवाल पर आपराधिक केस चल सकता है।
शुंगलू समिति ने सरकार के कुल 440 फैसलों से जुड़ी फाइलों को खंगाला। इनमें से 36 मामलों में फैसले लंबित होने के कारण इनकी फाइलें सरकार को लौटा दी गई थीं। इसके लिए समिति ने सरकार के मुख्य सचिव, विधि एवं वित्त सचिव सहित अन्य अहम विभागीय सचिवों को तलब कर सरकार के इन फैसलों में संबद्ध अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अधिकारियों ने समिति को बताया कि उन्होंने इस बाबत सरकार को अधिकार क्षेत्र के अतिक्रमण के बारे में समय समय पर आगाह किया था।

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