हम प्रकृति द्वारा प्रदान की जाने वाली सेवाएं नहीं ले रहे हैं;योजना सचिव

सीआईआई यूकोस्ट 9वीं एनवायरमेंट समिट में इको सिस्टम सर्विस व प्लास्टिक वेस्ट पर चर्चा
एकल उपयोग प्लास्टिक उत्पाद की उपेक्षा करें

इकोसिस्टम सर्विस व प्लास्टिक वेस्ट विषय 9वींं एनवायरमेंट समिट सीआईआई यूकोस्ट का आयोजन
देहरादून
सीआईआई यूकोस्ट एनवायरमेंट समिट के उद्घाटन अवसर पर उत्तराखंड सरकार के योजना सचिव रणजीत सिन्हा ने कहा कि समुदाय जो प्रकृति पृथ्वी के साथ अनुकूल होगा लंबे समय तक बनाए रखेगा। उन्होंने व्यक्त किया कि, हम विभिन्न गतिविधियों को करते समय प्रकृति द्वारा प्रदान की जाने वाली सेवाएं नहीं ले रहे हैं; चाहे वह औद्योगिक गतिविधि हो, सरकारी सेवाएं इत्यादि हो और हमारी भविष्य की पीढ़ियों पर होने वाले बोझ पर विचार नहीं कर रहे हैं।

हम प्रकृति द्वारा प्रदान की जाने वाली सेवाएं नहीं ले रहे हैं;योजना सचिव; ने कहा कि समुदाय जो प्रकृति पृथ्वी के साथ अनुकूल होगा लंबे समय तक बनाए रखेगा। 

विश्व पर्यावरण दिवस पर इकोसिस्टम सर्विस व प्लास्टिक वेस्ट फ्री उत्तराखंड विषय पर 5 से 6 जून के बीच सीआईआई द्वारा दो दिवसीय 9वींं सीआईआई यूकोस्ट समिट का देहरादून में आयोजन किया गया।
समिट के पहले दिन वेल्यू इको सिस्टम सर्विस से जुड़े मुद्दों, चुनौतियों व संभावनाओं पर मंथन के साथ ही इसके प्रबंधन के लिए वित्तीय उपायों की पहचान को लेकर चर्चा की गई। दूसरा दिन इस वर्ष के विश्व पर्यावरण दिवस के थीम बीट प्लास्टिक पॉल्यूशन के अनुरूप प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट पर केंद्रित रहा।
इस अवसर पर उत्तराखंड बायोडायवर्सिटी बोर्ड के चेयरमैन डा. राकेश शाह ने अपने संबोधन में कहा कि जब तक हम सभी प्लास्टिक पैर प्रिंट को कम करने के लिए प्रतिज्ञा नहीं करते हैं, प्लास्टिक मुक्त दुनिया एक दूर सपना होगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि पानी हमारी ईको प्रणाली और प्लास्टिक द्वारा प्रदान की जाने वाली सबसे प्रमुख सेवा है जो हमारे पानी को प्रदूषित कर रही है और हमारी भूमि बांझ रही है, इसलिए हमें समझदारी से प्लास्टिक का उपयोग शुरू करना होगा।

इंडियन काउंसिल ऑफ फॉरेस्टरी रिसर्च एंड एजुकेशन के फॉरेस्ट एंड क्लाईमेट चेंज विभाग के अतिरिक्त निदेशक डा. वीआरएस रावत ने अपने संबोधन में कहा किभारत उन कुछ देशों में से एक है जहां हाल के वर्षों में जंगल के संरक्षण और टिकाऊ प्रबंधन के उद्देश्य से राष्ट्रीय नीतियों के कारण देश के जंगलों को शुद्ध सिंक मेंबदलने के लिए जंगल और पेड़ के कवर में वृद्धि हुई है।
डॉ। राजेंद्र दोभल, महानिदेशक यूसीओएसटी ने कहा कि प्लास्टिक मुक्त जीवन संभव नहीं है, क्योंकि आज के अधिकांश उत्पादों का उपभोग प्लास्टिक से बना है;हालांकि हम सबसे अच्छा कर सकते हैं प्लास्टिक उत्पादों को कम करने और प्रतिबंधित करने के लिए जो एक बार उपयोग करते हैं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि उत्तराखंड के इलाके पर विचार केवल 6% भूमि विकास गतिविधि के लिए उपलब्ध है, इसलिए हमें ईको सिस्टम सेवाओं के माध्यम से अधिकतम लाभ प्राप्त करना होगा।

सीआईआई उत्तराखंड स्टेट काउंसिल के चेयरमैन डा. विजय धस्माना ने कहा कि उत्तराखंड इसकी रिच बायोडायवर्सिटी व फॉरेस्ट कवर के लिए जाना जाता है जो सोशल, कल्चरल, हिस्टोरिक, इकोनोमिक व इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट में अहम भूमिका निभाता है तथा इकोलॉजी बैलेंस बनाए रखने में भी मदद करता है। प्रकृति द्वारा उपलब्ध करवाई जा रही इको सिस्टम सर्विस के वेल्यूएशन तथा प्रबंधन के साथ ही इसे समझना और पर्यावरण से मिलने वाले लाभ को संरक्षित करना तथा इसमें वृद्घि करना जरूरी है।
सीआईआई उत्तराखंड स्टेट काउंसिल के वाईस चेयरमैन राकेश अग्रवाल ने अपने संबोधन में कहा कि प्लास्टिक वेस्ट का सही प्रबंधन न करने का इकोलॉजी सेंसटिव क्षेत्र में प्रभाव ज्यादा होता है और इस समस्या को सुलझाने की जरूरत है जिसे हम सब को मिलकर और प्राथमिकता के आधार पर करना होगा।
पहला योजना सत्र वेल्यूएशन ऑफ इकोसिस्टम सर्विस:चैलेंज एंड ऑपरच्युनिटी फॉर उत्तराखंड विषय पर डा. राजेंद्र दोभल ने संभाला। इस अवसर पर उत्तराखंड बायोडायवर्सिटी बोर्ड व सीआईआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर सस्टनेबल डेवलपमेंट के एक्सपर्ट ने अपने विचार सांझा किए।
दूसरा योजना सत्र एक्शन फॉर मैनेजिंग इको सिस्टम सर्विस रहा जिसको सीआईआई उत्तराखंड स्टेट काउंसिल के पूर्व चेयरमैन राकेश ऑबरॉय ने संभाला। रिटायरर्ड पिं्रसीपल कंजरवेटर ऑफ फॉरेस्ट डा. आरबीएस रावत तथा टुपरवेयर इंडिया प्राईवेट लिमिटेड के निदेशक श्यामल चैटर्जी ने इस विषय पर अपने विचार सांझा किए।
तीसरा योजना सत्र उत्तराखंड को प्लास्टिक फ्री बनाने के तरीके व माध्यम पर केंद्रित रहा। सीआईआई उत्तराखंड स्टेट काउंसिल के पूर्व चेयरमैन राकेश अग्रवाल ने सत्र को संभाला। सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के एक्सपर्ट विपिन कुमार तथा इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम के सीएसआईआर के वेक्स रहियोलॉजी एरिया के हेड ऑफ एरिया व सीनियर साइंटिस्ट डा. सनत कुमार ने अपने विचार सांझा किए।
इस सम्मेलन में उद्योग, संस्थानों, एकेडमिया, एनजीओ व विभिन्न क्षेत्रों के 100 से अधिक प्रतिनिधियों व 14 एक्सपर्ट ने हिस्सा लिया।

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