<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
		>
<channel>
	<title>Comments for Himalaya Gaurav Uttarakhand</title>
	<atom:link href="http://himalayauk.org/comments/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>http://himalayauk.org</link>
	<description></description>
	<lastBuildDate>Fri, 18 May 2012 07:35:50 +0000</lastBuildDate>
	<sy:updatePeriod>hourly</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>1</sy:updateFrequency>
		<item>
		<title>Comment on चंडीगढ़ में गढ़वाली नाट्य मंच और गढ़ कला संगम by D.D.Sundriyal "shailaj"</title>
		<link>http://himalayauk.org/2012/05/chandigarh-news/#comment-1135</link>
		<dc:creator>D.D.Sundriyal "shailaj"</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 18 May 2012 07:35:50 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://himalayauk.org/?p=32975#comment-1135</guid>
		<description>thanks for writing about chandigarh natya manch in the portal.  There is a editing mistkae in it. Pl correct it.  In drama &quot; choli chakhuli&quot; wowmen roles were done by women for the first time in Chandigarh stage. Late Maheswari Lakheda w/o Sh N D Lakheeda and late Shushila Negi w/o Thakur Singh Negi broke the ice from the matured generation while savitri bisht and shiv singh bisht played lead roles.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>thanks for writing about chandigarh natya manch in the portal.  There is a editing mistkae in it. Pl correct it.  In drama &#8221; choli chakhuli&#8221; wowmen roles were done by women for the first time in Chandigarh stage. Late Maheswari Lakheda w/o Sh N D Lakheeda and late Shushila Negi w/o Thakur Singh Negi broke the ice from the matured generation while savitri bisht and shiv singh bisht played lead roles.</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>Comment on New Vice Chancellor of Aligarh Muslim University by Ali Muzaffar</title>
		<link>http://himalayauk.org/2012/05/vice-chancellor-of-aligarh-muslim-university/#comment-1130</link>
		<dc:creator>Ali Muzaffar</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 15 May 2012 14:36:16 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://himalayauk.org/?p=32760#comment-1130</guid>
		<description>I am an Alig and i would say ,We have a lot of expectations sir , we have been going through a time where we dont know where we are heading ...Dark or LIght ? Hope you will show us the way ...Congratulations!! and Best of Luck Sir ..</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>I am an Alig and i would say ,We have a lot of expectations sir , we have been going through a time where we dont know where we are heading &#8230;Dark or LIght ? Hope you will show us the way &#8230;Congratulations!! and Best of Luck Sir ..</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>Comment on नौकरशाहों को रिटायर नहीं होने देते सत्‍तारूढ दल by beniwal</title>
		<link>http://himalayauk.org/2012/05/uk-officer-never-retirement/#comment-1108</link>
		<dc:creator>beniwal</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 10 May 2012 12:08:09 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://himalayauk.org/?p=32668#comment-1108</guid>
		<description>This being done because these ex-officers very experienced and knows how to loot the state smoothly. Congress and BJP both will rule the state in turn and loot through these same officials and their ex- juniors. Simple rule and belief- Mil baant ke khana.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>This being done because these ex-officers very experienced and knows how to loot the state smoothly. Congress and BJP both will rule the state in turn and loot through these same officials and their ex- juniors. Simple rule and belief- Mil baant ke khana.</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>Comment on वरिष्ठ नेताओं ने षड़यंत्र  रचा- शैलेंद्र सिंह रावत by amit</title>
		<link>http://himalayauk.org/2012/04/shelender-rawat/#comment-1073</link>
		<dc:creator>amit</dc:creator>
		<pubDate>Wed, 25 Apr 2012 11:18:12 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://himalayauk.org/?p=32340#comment-1073</guid>
		<description>भितरघात, ये एक शब्द आजकल उत्तराखंड कि राजनीति में जैसे हार जीत कि सफाई देने का अमोघ अस्त्र बन गया है. यों तो बहुत से जीते हारे नेताओं ने भितरघात शब्द का प्रयोग किया लेकिन इस एक शब्द का जितना राजनैतिक फ़ायदा खंडूरी और उनकी टोली ने उठाया उतना किसी ने नहीं. आज प्रदेश क्या देश भर  के हर छोटे बड़े पत्रकार  के लिए भितरघात खंडूरी कि हार का पर्याय बन कर रह गया है. आखिर क्या हो गया ऐसा खंडूरी के साथ? अपने सैनिक होने का बखान वो गाहे बगाहे करते ही रहते हैं,तो फिर क्यों एक सैनिक कि भांति अपनी हार स्वीकार कर  अपनी कमजोरियों को नहीं तलाशते? क्यों इस हार का ठीकरा वो निशंक के सर पर फोड़ना चाहते हैं ? जो खंडूरी उनकी पार्टी द्वारा राज्य भर में जरूरी कह कर प्रचारित किये गए, कोटद्वार कि जनता के लिए वो इतने गैर जरूरी कैसे हो गए कि उन्हें लगभग ५००० वोट   के बड़े मार्जिन से शिकस्त मिली ? खंडूरी यदि इतने ही जरूरी थे तो एक निशंक तो क्या पूरी केंद्र कि सत्ता भी उन्हें हराने पर अमादा हो जाती तब भी वो जीत जाते. और इसका जीता जागता उदाहरण है १९८१ का लोकसभा उपचुनाव. कुछ लोग ( पत्रकारों सहित)  जो आजकल खंडूरी के हारने पर आंसू बहा रहे हैं उन्हें उस चुनाव कि याद दिलाना बहुत जरूरी है. हो सकता है इन लोगों में से तब तक कुछ लोग पैदा भी नहीं हुए होंगे और कुछ के दूध के दांत भी न टूटे हों. कांग्रेस पार्टी एवं लोकसभा सीट से त्यागपत्र देने के बाद स्वर्गीय बहुगुणा ने गढ़वाल लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा था. कहने को तो स्वर्गीय चन्द्रमोहन सिंह नेगी उनके विरुद्ध इस उपचुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार  थे लेकिन तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती गाँधी ने इसे प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया और ये चुनाव इंदिरा वर्सेस बहुगुणा बन गया.   ये बात आज भी निर्विवाद रूप से सत्य है कि श्रीमती गाँधी से  अधिक शक्तिशाली प्रधानमंत्री न पहले कोई हुआ और गठबंधन कि राजनीति के चलते भविष्य में भी होने कि सम्भावना नगण्य ही  है. जो लोग उस वक्त इस लोकसभा क्षेत्र में रह रहे थे उन्हें याद होगा कि पूरे गढ़वाल क्षेत्र को कैसे छावनी बना दिया गया था. कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व सब कार्य छोड़कर गढ़वाल में डेरा जमाये बैठा था. राज्य में जातिवाद कि घिनौनी राजनीति का बीज भी उसी समय बोया गया. यंहा तक कि चुनाव के दिन ब्राह्मण बहुल गांवो में देश के विभिन्न क्षेत्रों  से आये गुंडों द्वारा मतदाताओं को अपने मत का प्रयोग करने से भी रोका गया. लेकिन परिणाम जो रहा वो एक इतिहास है. जब उस विकट परिस्थिति में बहुगुणा जीत सकते थे तो खंडूरी के सामने ऐसी कौन सी परिस्थिति थी जो वो चुनाव हार गए? वो तो स्वयं मुख्यमंत्री थे और तथाकथित रूप से लोकप्रिय भी. और यदि निशंक इतने भ्रष्टाचारी थे और उनकी छवि इतनी ख़राब थी तो उनकी अपील का लोगों पर असर भी नहीं होना चाहिए था. पूरे प्रदेश क्या देश भर में ऐसा माहौल बना दिया गया था जैसे राज्य में सब कुछ गड़बड़ है और निशंक जैसा भ्रष्टाचारी न कभी पूर्व में हुआ न भविष्य में होगा. जो ऊर्जा खंडूरी ने निशंक को भ्रष्टाचारी सिद्ध करने में खर्च की उसकी आधी भी अगर कांग्रेस के केंद्र में हुए भ्रष्टाचार को मुद्दा बनाने में  की होती तो आज स्थिति कुछ और ही होती. 

इसलिए भितरघात के असली आरोपी तो खंडूरी हैं जिन्होंने विपक्षी भ्रष्टाचार को मुद्दा बनाने के स्थान पर अपनी ही पार्टी के तथाकथित भ्रष्टाचार ( तथाकथित इसलिए की किसी भी जाँच एजेंसी , न्यायालय या प्राधिकरण द्वारा निशंक के विरुद्ध कोई चार्जशीट दाखिल नहीं की गयी) को मुद्दा बनाया और स्वयं तो डूबे ही पार्टी को भी ले डूबे. 

इसलिए खंडूरी जी भितरघात  का रोना छोडिये , साहसी बनिए और स्वीकार कीजिये कि आप में ही कमी थी. दूसरों को दोष देकर आप स्वयं को भी कमजोर कर रहे हैं और अपनी उस सैनिक वर्दी को भी जो इस देश की शान है.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>भितरघात, ये एक शब्द आजकल उत्तराखंड कि राजनीति में जैसे हार जीत कि सफाई देने का अमोघ अस्त्र बन गया है. यों तो बहुत से जीते हारे नेताओं ने भितरघात शब्द का प्रयोग किया लेकिन इस एक शब्द का जितना राजनैतिक फ़ायदा खंडूरी और उनकी टोली ने उठाया उतना किसी ने नहीं. आज प्रदेश क्या देश भर  के हर छोटे बड़े पत्रकार  के लिए भितरघात खंडूरी कि हार का पर्याय बन कर रह गया है. आखिर क्या हो गया ऐसा खंडूरी के साथ? अपने सैनिक होने का बखान वो गाहे बगाहे करते ही रहते हैं,तो फिर क्यों एक सैनिक कि भांति अपनी हार स्वीकार कर  अपनी कमजोरियों को नहीं तलाशते? क्यों इस हार का ठीकरा वो निशंक के सर पर फोड़ना चाहते हैं ? जो खंडूरी उनकी पार्टी द्वारा राज्य भर में जरूरी कह कर प्रचारित किये गए, कोटद्वार कि जनता के लिए वो इतने गैर जरूरी कैसे हो गए कि उन्हें लगभग ५००० वोट   के बड़े मार्जिन से शिकस्त मिली ? खंडूरी यदि इतने ही जरूरी थे तो एक निशंक तो क्या पूरी केंद्र कि सत्ता भी उन्हें हराने पर अमादा हो जाती तब भी वो जीत जाते. और इसका जीता जागता उदाहरण है १९८१ का लोकसभा उपचुनाव. कुछ लोग ( पत्रकारों सहित)  जो आजकल खंडूरी के हारने पर आंसू बहा रहे हैं उन्हें उस चुनाव कि याद दिलाना बहुत जरूरी है. हो सकता है इन लोगों में से तब तक कुछ लोग पैदा भी नहीं हुए होंगे और कुछ के दूध के दांत भी न टूटे हों. कांग्रेस पार्टी एवं लोकसभा सीट से त्यागपत्र देने के बाद स्वर्गीय बहुगुणा ने गढ़वाल लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा था. कहने को तो स्वर्गीय चन्द्रमोहन सिंह नेगी उनके विरुद्ध इस उपचुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार  थे लेकिन तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती गाँधी ने इसे प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया और ये चुनाव इंदिरा वर्सेस बहुगुणा बन गया.   ये बात आज भी निर्विवाद रूप से सत्य है कि श्रीमती गाँधी से  अधिक शक्तिशाली प्रधानमंत्री न पहले कोई हुआ और गठबंधन कि राजनीति के चलते भविष्य में भी होने कि सम्भावना नगण्य ही  है. जो लोग उस वक्त इस लोकसभा क्षेत्र में रह रहे थे उन्हें याद होगा कि पूरे गढ़वाल क्षेत्र को कैसे छावनी बना दिया गया था. कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व सब कार्य छोड़कर गढ़वाल में डेरा जमाये बैठा था. राज्य में जातिवाद कि घिनौनी राजनीति का बीज भी उसी समय बोया गया. यंहा तक कि चुनाव के दिन ब्राह्मण बहुल गांवो में देश के विभिन्न क्षेत्रों  से आये गुंडों द्वारा मतदाताओं को अपने मत का प्रयोग करने से भी रोका गया. लेकिन परिणाम जो रहा वो एक इतिहास है. जब उस विकट परिस्थिति में बहुगुणा जीत सकते थे तो खंडूरी के सामने ऐसी कौन सी परिस्थिति थी जो वो चुनाव हार गए? वो तो स्वयं मुख्यमंत्री थे और तथाकथित रूप से लोकप्रिय भी. और यदि निशंक इतने भ्रष्टाचारी थे और उनकी छवि इतनी ख़राब थी तो उनकी अपील का लोगों पर असर भी नहीं होना चाहिए था. पूरे प्रदेश क्या देश भर में ऐसा माहौल बना दिया गया था जैसे राज्य में सब कुछ गड़बड़ है और निशंक जैसा भ्रष्टाचारी न कभी पूर्व में हुआ न भविष्य में होगा. जो ऊर्जा खंडूरी ने निशंक को भ्रष्टाचारी सिद्ध करने में खर्च की उसकी आधी भी अगर कांग्रेस के केंद्र में हुए भ्रष्टाचार को मुद्दा बनाने में  की होती तो आज स्थिति कुछ और ही होती. </p>
<p>इसलिए भितरघात के असली आरोपी तो खंडूरी हैं जिन्होंने विपक्षी भ्रष्टाचार को मुद्दा बनाने के स्थान पर अपनी ही पार्टी के तथाकथित भ्रष्टाचार ( तथाकथित इसलिए की किसी भी जाँच एजेंसी , न्यायालय या प्राधिकरण द्वारा निशंक के विरुद्ध कोई चार्जशीट दाखिल नहीं की गयी) को मुद्दा बनाया और स्वयं तो डूबे ही पार्टी को भी ले डूबे. </p>
<p>इसलिए खंडूरी जी भितरघात  का रोना छोडिये , साहसी बनिए और स्वीकार कीजिये कि आप में ही कमी थी. दूसरों को दोष देकर आप स्वयं को भी कमजोर कर रहे हैं और अपनी उस सैनिक वर्दी को भी जो इस देश की शान है.</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>Comment on दिल्‍ली नगर निगम चुनावों में कांग्रेस की कुम्भकर्णी नींद न खुलने का हश्र by RK VIKRAMA SHARMA</title>
		<link>http://himalayauk.org/2012/04/delhi-mcd-election/#comment-1058</link>
		<dc:creator>RK VIKRAMA SHARMA</dc:creator>
		<pubDate>Sun, 22 Apr 2012 17:17:49 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://himalayauk.org/?p=32195#comment-1058</guid>
		<description>VINAYAK JI KA YE LEKH SRKAR KI BHRI UDASINT DRSHATA HAI AB VOCHAHE FRJ KO LEKR HAI YA KRJ KO LEKR HAI SB HL HO JATA HAI.....SRKAR KE NAITIK PRN KA YE DRPAN HAI......RK VIKRMA SHRMA  BUREAU JOUNRALIST TODAY CHANDIGARH 9872886540</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>VINAYAK JI KA YE LEKH SRKAR KI BHRI UDASINT DRSHATA HAI AB VOCHAHE FRJ KO LEKR HAI YA KRJ KO LEKR HAI SB HL HO JATA HAI&#8230;..SRKAR KE NAITIK PRN KA YE DRPAN HAI&#8230;&#8230;RK VIKRMA SHRMA  BUREAU JOUNRALIST TODAY CHANDIGARH 9872886540</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>Comment on राज्यसभा सांसद और वकील अभिषेक मनु सिंघवी की कथित सीडी बाजार में आई है। इसमें उन्हें एक महिला के साथ आपत्तिजनक अवस्था में देखा गया है। वह महिला को जज बनाने का प्रलोभन देते हुए नजर आ रहे हैं। हालांकि दिल्ली हाईकोर्ट ने इस सीडी के प्रसारण पर रोक लगा दी है। by MANIRAM SHARMA</title>
		<link>http://himalayauk.org/2012/04/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%b8%e0%a4%ad%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a4%a6-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%b5%e0%a4%95%e0%a5%80%e0%a4%b2-%e0%a4%85%e0%a4%ad/#comment-1053</link>
		<dc:creator>MANIRAM SHARMA</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 19 Apr 2012 12:20:28 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://himalayauk.org/?p=32205#comment-1053</guid>
		<description>यह हमारे देश के नेतृत्व और वकालत के पेशे का उत्कृष्ट नमूना है &#124; साथ ही यह भी उजागर होता है कि उच्च न्यायालयों के न्यायाधीश बनने  के लिए किन कठिन परीक्षाओं से गुजरना पड़ता है&#124; धन्य है भारत भूमि !</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>यह हमारे देश के नेतृत्व और वकालत के पेशे का उत्कृष्ट नमूना है | साथ ही यह भी उजागर होता है कि उच्च न्यायालयों के न्यायाधीश बनने  के लिए किन कठिन परीक्षाओं से गुजरना पड़ता है| धन्य है भारत भूमि !</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>Comment on हिमालय दर्शन by amit</title>
		<link>http://himalayauk.org/2012/04/himalaya/#comment-1044</link>
		<dc:creator>amit</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 17 Apr 2012 04:58:59 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://himalayauk.org/?p=31863#comment-1044</guid>
		<description>Kripaya ye bhi batayen ki ye tasveer kis sthan ki hai.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>Kripaya ye bhi batayen ki ye tasveer kis sthan ki hai.</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>Comment on Uttrakhand Caste Detail: by jyoti</title>
		<link>http://himalayauk.org/2009/09/uttrakhand-caste-detail/#comment-1043</link>
		<dc:creator>jyoti</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 17 Apr 2012 00:04:38 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://himalayauk.org/?p=653#comment-1043</guid>
		<description>B  :- Baloni</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>B  :- Baloni</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>Comment on कोर्ट की निर्मल बाबा को जमकर लताड by kuldeep</title>
		<link>http://himalayauk.org/2012/04/nirmal-baba-3/#comment-1035</link>
		<dc:creator>kuldeep</dc:creator>
		<pubDate>Wed, 11 Apr 2012 10:58:17 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://himalayauk.org/?p=31769#comment-1035</guid>
		<description>मानहानि के एक मुकदमे की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने महाठग निर्मल बाबा को जमकर लताड लगाई और कोर्ट को गुमराह करने का केस दर्ज करने का आदेश दिया… मित्रों, एक मानहानी के केस मे निर्मल के वकील ने निर्मल की तरफ से कोर्ट ने एफिडेविट दिया था कि उसका मुवक्किल निर्मलजीत सिंह नरुला विश्व का एक जाना माना आध्यात्मिक गुरु है और उसके कार्यक्रमों का विश्व मे 40 टीवी चैनेलो पर प्रसारण होता है… बस इसी मुद्दे पर सामने वाले वकील ने कोर्ट का ध्यान खीचा… सामने वाले वकील ने जज से रिक्वेस्ट किया कि ये प्रसारण नही है बल्कि खरीदे हुए टाइम स्लोट मे एक एडवरटाइज है… जैसे संधिसुधा तेल या स्लिम सोना बेल्ट बेचा जाता है… वैसे ही ये किरिपा या कृपा बेचा जा रहा है… फिर कोर्ट ने निर्मलजीत उर्फ निर्मल बाबा के वकील से कहा कि क्या वो कम से कम पांच टीवी चैनल की तरफ से एक पत्र कोर्ट ने जमा करवा सकते है, जिसमे लिखा हो कि आपका टीवी का कार्यक्रम चैनल वाले जनहित मे मुफ्त मे प्रसारण करते है.? इस पर निर्मल बाबा के वकील को सांप सूंघ गया और उसने स्वीकार किया कि एफिडेविट गलत है प्रसारण नही बल्कि एडवरटाइज होना चाहिए था… और फिर कोर्ट ने निर्मल बाबा की तरफ से दायर की गयी मानहानी के मुकदमे को तुरंत ख़ारिज करते हुए निर्मल बाबा पर कोर्ट को गुमराह करने के आरोप मे दस हजार रूपये जुर्माना लगाया.
बाबा जी का एक व्यक्ति का सत्संग का फीस 2००० है अगर एक दिन में कम से कम 1500 लोग आते है तो उस हिसाब से ये लगभग तीस लाख कमाते है…
जो व्यक्ति तीस लाख रुपये प्रतिदिन कमाता हो उससे उनके भक्तो नहीं कभी पुछा की बाबा जी आपका इस देश के लिए क्या योगदान है.????..
ये बाबा राजनेताओ के बनाए हुए लोग होते है कयोंकि एक बार बाबा ने बोल दिया की इस पार्टी को वोट डाल दो तो फीर भगवान खुद इनके भक्तो को आकर भी मना करंगे तो भी इनके भक्त नहीं मानेगे और अगर इनको राजनेतिक संरक्षण नहीं मिला होता तो ये लोग करोडो की ठगी रोज कर रहे है लेकिन इनसे कोई इन्कमटेक्स पूछने वाला नहीं है है….
जिस देश में 500 रुपये कमाने वाले को भी टैक्स देना पड़ता है उसी देश में ये लोग खुले आम ठगी करते है
कुछ मित्रो अगर आपको इन बाबाओ के खिलाफ मेरे लिखने से तकलीफ है तो मै उनसे छमा चाहूँगा जो भी बाबा के भक्त है उनके लिए मेने बाबा का बेंक अकाउंट डिटेल भी देदिया वो अपनी इच्छा अनुसार अपनी भावनाए उन तक पंहुचा सकते है…</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>मानहानि के एक मुकदमे की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने महाठग निर्मल बाबा को जमकर लताड लगाई और कोर्ट को गुमराह करने का केस दर्ज करने का आदेश दिया… मित्रों, एक मानहानी के केस मे निर्मल के वकील ने निर्मल की तरफ से कोर्ट ने एफिडेविट दिया था कि उसका मुवक्किल निर्मलजीत सिंह नरुला विश्व का एक जाना माना आध्यात्मिक गुरु है और उसके कार्यक्रमों का विश्व मे 40 टीवी चैनेलो पर प्रसारण होता है… बस इसी मुद्दे पर सामने वाले वकील ने कोर्ट का ध्यान खीचा… सामने वाले वकील ने जज से रिक्वेस्ट किया कि ये प्रसारण नही है बल्कि खरीदे हुए टाइम स्लोट मे एक एडवरटाइज है… जैसे संधिसुधा तेल या स्लिम सोना बेल्ट बेचा जाता है… वैसे ही ये किरिपा या कृपा बेचा जा रहा है… फिर कोर्ट ने निर्मलजीत उर्फ निर्मल बाबा के वकील से कहा कि क्या वो कम से कम पांच टीवी चैनल की तरफ से एक पत्र कोर्ट ने जमा करवा सकते है, जिसमे लिखा हो कि आपका टीवी का कार्यक्रम चैनल वाले जनहित मे मुफ्त मे प्रसारण करते है.? इस पर निर्मल बाबा के वकील को सांप सूंघ गया और उसने स्वीकार किया कि एफिडेविट गलत है प्रसारण नही बल्कि एडवरटाइज होना चाहिए था… और फिर कोर्ट ने निर्मल बाबा की तरफ से दायर की गयी मानहानी के मुकदमे को तुरंत ख़ारिज करते हुए निर्मल बाबा पर कोर्ट को गुमराह करने के आरोप मे दस हजार रूपये जुर्माना लगाया.<br />
बाबा जी का एक व्यक्ति का सत्संग का फीस 2००० है अगर एक दिन में कम से कम 1500 लोग आते है तो उस हिसाब से ये लगभग तीस लाख कमाते है…<br />
जो व्यक्ति तीस लाख रुपये प्रतिदिन कमाता हो उससे उनके भक्तो नहीं कभी पुछा की बाबा जी आपका इस देश के लिए क्या योगदान है.????..<br />
ये बाबा राजनेताओ के बनाए हुए लोग होते है कयोंकि एक बार बाबा ने बोल दिया की इस पार्टी को वोट डाल दो तो फीर भगवान खुद इनके भक्तो को आकर भी मना करंगे तो भी इनके भक्त नहीं मानेगे और अगर इनको राजनेतिक संरक्षण नहीं मिला होता तो ये लोग करोडो की ठगी रोज कर रहे है लेकिन इनसे कोई इन्कमटेक्स पूछने वाला नहीं है है….<br />
जिस देश में 500 रुपये कमाने वाले को भी टैक्स देना पड़ता है उसी देश में ये लोग खुले आम ठगी करते है<br />
कुछ मित्रो अगर आपको इन बाबाओ के खिलाफ मेरे लिखने से तकलीफ है तो मै उनसे छमा चाहूँगा जो भी बाबा के भक्त है उनके लिए मेने बाबा का बेंक अकाउंट डिटेल भी देदिया वो अपनी इच्छा अनुसार अपनी भावनाए उन तक पंहुचा सकते है…</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>Comment on अभी बची च आस- गढवाली व्‍यंग्‍य by असिस कुकरेती भारद्वाज</title>
		<link>http://himalayauk.org/2010/05/%e0%a4%85%e0%a4%ad%e0%a5%80-%e0%a4%ac%e0%a4%9a%e0%a5%80-%e0%a4%9a-%e0%a4%86%e0%a4%b8-%e0%a4%97%e0%a4%a2%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e2%80%8d%e0%a4%af%e0%a4%82%e0%a4%97/#comment-1033</link>
		<dc:creator>असिस कुकरेती भारद्वाज</dc:creator>
		<pubDate>Wed, 11 Apr 2012 04:50:35 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://himalayauk.org/?p=10004#comment-1033</guid>
		<description>गढवाळ खुण चैह्णू च एक यन क्रांति जेक बलबूता फर गढवाल राज्य बण जाल
गढवळी भासा पूर उत्तराखंडक  भोत बड इलाका मा बुली जांद अर येक अलवा पूरबी हिमाचलप्रदेश मा बी यदि युँ इलाकौँ थै मिलैकन संयुक्त गढवाळ बणाय जांद त इँ भासाक अपर प्रांत ह्वाल
वन मी थुम(&#039;तुम&#039;क अर्थ च भोत सर्या तू पर थुमक अर्थ च आप) थै एक बात होर बते दूँ कि कुमउणी भासा अलग च
अर होर एक बात बताण च के या हिंदी भासाक कारण से ई गढवळी भासाक विकास रुक ग्याइ
नी त गढवळीक आज व्याकरण हूंद
सिर्फ गढवळी ई किले राजपुतनी मालवी कुमउणी कांगड़ी शिना लादाखी अवधी मगही हरियाणाक सरसुती या बांगरो मैथिली संथाली बुंदेली मेघालयक खासि गारो अरुणाचलक मोनपा मेँबा अका आदि निकोबारी त्रिपुराक काकबोरक अर गुजरात अर दादराक भिल्ली या भिल्लोदी आदि भोत सी भासाँक कुई राज्य नी च अर यूँ सब्या इलाकोँ मा हिंदी थोप्याल
ये कारण से मी हिंदी से घिन(घृणा) करुद छौँ/छंव</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>गढवाळ खुण चैह्णू च एक यन क्रांति जेक बलबूता फर गढवाल राज्य बण जाल<br />
गढवळी भासा पूर उत्तराखंडक  भोत बड इलाका मा बुली जांद अर येक अलवा पूरबी हिमाचलप्रदेश मा बी यदि युँ इलाकौँ थै मिलैकन संयुक्त गढवाळ बणाय जांद त इँ भासाक अपर प्रांत ह्वाल<br />
वन मी थुम(&#8216;तुम&#8217;क अर्थ च भोत सर्या तू पर थुमक अर्थ च आप) थै एक बात होर बते दूँ कि कुमउणी भासा अलग च<br />
अर होर एक बात बताण च के या हिंदी भासाक कारण से ई गढवळी भासाक विकास रुक ग्याइ<br />
नी त गढवळीक आज व्याकरण हूंद<br />
सिर्फ गढवळी ई किले राजपुतनी मालवी कुमउणी कांगड़ी शिना लादाखी अवधी मगही हरियाणाक सरसुती या बांगरो मैथिली संथाली बुंदेली मेघालयक खासि गारो अरुणाचलक मोनपा मेँबा अका आदि निकोबारी त्रिपुराक काकबोरक अर गुजरात अर दादराक भिल्ली या भिल्लोदी आदि भोत सी भासाँक कुई राज्य नी च अर यूँ सब्या इलाकोँ मा हिंदी थोप्याल<br />
ये कारण से मी हिंदी से घिन(घृणा) करुद छौँ/छंव</p>
]]></content:encoded>
	</item>
</channel>
</rss>

