परम धर्म संसद 1008 की शुरुआत -बिफरे साधु-संत

योध्या में विश्व हिंदू परिषद द्वारा आयोजित धर्म संसद की शुरुआत हुई. वहीं, काशी में भी शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के नेतृत्व में परम धर्म संसद 1008 की शुरुआत हुई.  धर्म सभा में शामिल होने के लिए शनिवार से ही साधु-संतों और रामभक्तों के आने का सिलसिला जारी है.  विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी), राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और बजरंग दल के हजारों कार्यकर्ता देश भर से बसों और ट्रेनों के जरिए धर्म सभा में हिस्सा लेने के लिए अयोध्या के कारसेवकपुरम में बड़े भक्तमाल की बगिया में इकट्ठा हो चुके हैं. इस सभा में आरएसएस के 1 लाख और वीएचपी के 1 लाख कार्यकर्ताओं के हिस्सा लेने का दावा किया जा रहा है. सिर्फ वाराणसी से 10000 बजरंगी (बजरंग दल) आयोध्या पहुंच रहे हैं.  मंच पर शामिल होने वालों में अहम संतों में जगतगुरु रामानंदाचार्य, स्वामी हंसदेवाचार्य, रामभद्राचार्य, रामेश्वर दास वैष्णव, राम जन्मभूमि न्यास के महंत नृत्य गोपाल दास का नाम शामिल है. बता दें कि इस धर्म सभा में किसी नेता के शामिल होने की अनुमति नहीं है.

अयोध्या में उमड़ा जनसैलाब, राम मंदिर के लिए भक्तों ने भरी हुंकार – अयोध्या में राम मंदिर को लेकर माहौल गरमा गया है. अयोध्या में रविवार को वीएचपी की धर्म सभा है. इससे पहले यहां लाखों की भीड़ जुटी है. महाराष्ट्र से लेकर उत्तर प्रदेश के कई इलाकों से हजारों भक्त यहां पहुंचे हैं. इन भक्तों की एक ही मांग है. इनका कहना है कि सरकार संसद में कानून बनाकर या फिर अध्यादेश लाकर मंदिर बनाए. शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने भी राम लला के दर्शन किए और कहा कि वे सरकार को कुंभकर्ण की नींद से जगाने आए हैं.

उत्तर प्रदेश के काशी में शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती की अगुवाई में परम धर्म संसद 1008 की शुरुआत हो गई है. साधु संतों ने पहले दिन की बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धोखा देने वाला व्यक्ति बताया जिसने गंगा की सफाई के बड़े-बड़े सपने दिखाए 4.5 साल के बाद भी गंगा की हालत जस की तस है.

3 दिनों तक चलने वाले इस धर्म संसद में चारों पीठों के शंकराचार्य के प्रतिनिधि, 543 संसदीय क्षेत्रों के प्रतिनिधि, देश और विदेश के साधु-संत समेत संसद में प्रतिनिधित्व कर रहे 36 राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया है.

काशी धर्म संसद में कई मुद्दों पर चर्चा हो रही है जिनमें मुख्य द्वार पर काशी में विकास के नाम पर मंदिरों और मूर्तियों को तोड़ा जाना कॉल गंगा की सफाई है. धर्म संसद में पहुंचे साधु-संतों ने उनके संसदीय क्षेत्र में मंदिरों और मूर्तियों के तोड़े जाने को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जमकर आलोचना की.

साधु-संतों ने पहले दिन की बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धोखा देने वाला व्यक्ति बताया जिसने गंगा की सफाई के बड़े-बड़े सपने दिखाए 4.5 साल के बाद भी गंगा की हालत जस की तस है.

शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के प्रतिनिधि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि धर्म संसद के दौरान अयोध्या में राम मंदिर बनने के मुद्दे पर भी चर्चा होगी.

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि केंद्र सरकार राम मंदिर के मुद्दे को लेकर लगातार राजनीति कर रही है और उसका मंदिर निर्माण का कोई इरादा नहीं है. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने सुप्रीम कोर्ट में चल रहे हैं राम मंदिर के मुद्दे पर भी कहा कि राम मंदिर के मुद्दे में राजनीतिक दलों के साथ साथ न्यायालय को भी इसमें हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए.

रामलला के दर्शन के बाद उद्धव की हुंकार, कहा- अगर मंदिर नहीं बना तो दोबारा सरकार बनना मुश्किल

उद्धव ठाकरे ने कल अयोध्या में कल परिवार सहित सरयू की आरती भी की थी. उद्धव ठाकरे ने बीजेपी पर हमला बोलते हुए कहा था कि मैं यहां कुंभकर्ण को नींद से जगाने आया हूं. हमें मंदिर निर्माण की तारीख चाहिए.

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर बनाना मुद्दा नहीं है बल्कि राम जन्मभूमि मुद्दा है और राम जन्मभूमि हिंदुओं की है.

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि राम जन्म भूमि की 67 एकड़ जमीन पहले से ही भारत सरकार के पास है और ऐसे में इस पर मंदिर बनाने के लिए अध्यादेश लेकर आने के बाद लोगों को मूर्ख बनाना है.

स्वामी ने कहा कि जब राम जन्म भूमि की सरस्वत एकड़ जमीन पहले से ही सरकार के पास है तो फिर किस चीज का अध्यादेश लाना है ? स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि अगर राम जन्मभूमि की 67 एकड़ जमीन किसी और के पास होती तो अध्यादेश लाने की बात सही होती. अयोध्या एक बार फिर राजनीति का अखाड़ा बन चुकी है. महाराष्ट्र में सियासी वजूद रखने वाले उद्धव ठाकरे कल से ‘रामनगरी’ में डेरा डाले हैं. इस बीच विश्व हिंदू परिषद (VHP) की ‘धर्म सभा’ भी शुरू हो चुकी है. सियासी हलचल के बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 221 मीटर ऊंची राम मूर्ति बनाने का फैसला किया है. वहीं वीएचपी और शिवसेना राम मंदिर की मांग पर अड़ी है. अयोध्या में भीड़ को देखते हुए सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किये गये हैं. ड्रोन कैमरों से नजर रखी जा रही है. घुड़सवार जवान लगातार गश्त कर रहे हैं. चप्पे-चप्पे पर पुलिसकर्मी तैनात हैं. कई वरिष्ठ अधिकारी पिछले कुछ दिनों से डटे हैं. ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके.

देश अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का मुद्दा सियासी मुद्दे में तब्दील हो चुका है। वही इस मांमले में आज आयोध्या में विश्व हिंदू परिषद की धर्मसभा होने वाली है। शिवसेना प्रमुख शनिवार से आयोध्या में मौजूद है। शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे रामलला के दर्शन करने मंदिर पहुंचे इस दौरान उनके साथ उनकी पत्नी रश्मी और बेटे आदित्या भी मौजूद हैं।

वहीं इस मामले में वीएचपी का उपाध्यक्ष चंपत राय ने कहा कि कुछ विद्वान ऐसा मानते हैं कि कि राम मंदिर मुद्दा बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद से शुरू हुआ है। लेकिन, यह लड़ाई पिछले 490 वर्षों से लगातार जारी है। और छीन कर गई जमीन पर नमाज हमें स्वीकार नहीं है। यह जमीन जबरदस्ती ली गई है। किसी को भी हमारे धैर्य की परीक्षा नहीं लेनी चाहिए। उद्धव ठाकरे अपनी अपनी प्रेस कांफ्रेंस शुरू करते हुआ कहा, संतों ने मुझे आज आशीर्वाद दिया, मैंने उनसे कहा था कि जो काम हम शुरू करने वाले हैं, उनके आशीर्वाद के बिना नहीं किया जा सकता है।

उन्होंने कहा, अयोध्या आने में मेरा कोई छुपा एजेंडा नहीं है। मैं भावनाओं को व्यक्त करने आया हूं दुनिया भर में सभी भारतीयों और हिंदुओं का। मैने सुना था की सीएम योगी जी ने कह की मंदिर थी, है और रहेगा। ये हमारी धारणा है, हमारा भाव है। दुःख इस बात का है की वो दिख नहीं रहा, वो मंदिर दिखेगा कब. जल्द से जल्द उसका निर्माण होना चाहिए। धर्मसभा की शुरुआत सुबह 11 बजे होनी है दोपहर 12 बजे संतों व विहिप के पदाधिकारियों का उद्बोधन शुरू होगा। जिसे मुख्य रूप से रामजन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपालदास , हरिद्वार के महंत सत्यनिष्ठा जी महाराज, चित्रकूट धाम के महंत श्री राम भद्राचार्य जी महाराज और विहिप के अंतरराष्ट्रीय महामंत्री चंपत राय सम्बोधित करेंगे।

 

अयोध्या में राम मंदिर निर्माण (Ram Mandir Issue) की मांग को लेकर होने वाली धर्म संसद (Dharm Sansad) से ठीक पहले शिव सेना प्रमुख उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) ने एक बार फिर मोदी सरकार पर निशाना साधा है. उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) ने अयोध्या (Ayodhya)  में रविवार सुबह एक प्रेस कांफ्रेंस की. उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray)  ने कहा कि केंद्र सरकार के पास पूरा अधिकार है कि वह इस बार राम मंदिर का निर्माण कराए. अगर वह ऐसा नहीं करती है तो मैं आपको दावे के साथ कह सकता हूं कि यह सरकार दोबारा नहीं बनेगी. लेकिन राम मंदिर (Ram Mandir Issue) जरूर बनेगा. उन्होंने कहा कि आज सुबह जब मैं रामलला के दर्शन करने जा रहा था तो मेरे मन में विचार आया कि मैं रामलला के दर्शन करने जा रहा हूं या कोई जेल जा रहा हूं. ठाकरे इस दौरान केंद्र सरकार पर हमला करते हुए कहा कि बीते चार साल में सरकार ने एक बार भी ऐसी कोशिश नहीं की कि वह राम मंदिर का निर्माण हो. अब जब चुनाव नजदीक है तो वह हिन्दुओं की भावनाओं से खेल रही है. उन्होंने इस दौरान पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को भी याद किया. उद्धव ने कहा कि अटल जी ने कहा था कि हिंदू मात नहीं खाएगा. मैं मानता हूं कि उस समय अटल जी की मिली जुली सरकार थी इसलिए चाह कर भी राम मंदिर के लिए कुछ नहीं कर पाए लेकिन अब तो केंद्र में पूर्ण बहुमत की सरकार है. उद्धव ठाकर ने कहा कि मैनें सुना था कि सीएम योगी जी ने कहा कि मंदिर था, है और रहेगा. ये तो हमारी धारना है, हमारी भावना है. दुख इस बात का है कि वो दिख नहीं रहा. वो मंदिर दिखेगा कब. जल्द से जल्द उसका निर्माण होना चाहिए

इतना ही नहीं उन्होंने आगे कहा कि मेरे अयोध्या आने के पीछे कोई छिपी हुई मंसा नहीं थी. मैं सिर्फ भारतीय और हिंदुओं के प्रति अपनी  भावना व्यक्त करना चाहता था. मोदी सरकार पर हमला करते हुए ठाकर ने कहा कि अगर मामला अदालत के पास ही जाना है तो चुनाव प्रचार के दौरान उसे इस्तेमाल ना करें और बता दो कि भाइयों और बहनों हमें माफ करो ये भी हमारा एक चुनावी जुमला था. हिंदुओं और उनकी भावनाओं के साथ खिलवाड़ ना करें यही कहने मैं यहां आया हं.

उन्होंने राम मंदिर निर्माण में देरी को लेकर केन्द्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, ‘श्रीराम जन्मभूमि में श्रीराम का मंदिर होना ही चाहिए. आज मैं सोये हुए कुंभकर्ण को जगाने आया हूं. कुंभकर्ण छह महीने सोता था और छह महीने जागता था.आज के कुंभकर्ण पिछले चार साल से सोये हुए हैं’. ठाकरे ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी जब प्रधानमंत्री थे, तब मिली जुली सरकार थी. उस समय यह कार्य कठिन हो सकता था, लेकिन आज की सरकार ताकतवर सरकार है, केन्द्र में भी और उत्तर प्रदेश में भी.अध्यादेश लाना चाहते हैं लाइये, कानून बनाना चाहते हैं, कानून बनाइये. शिवसेना उसका पूरा समर्थन करेगी’.उद्धव ठाकरे ने कहा था कि राम मंदिर श्रद्धा का मामला है. सरकार को राम मंदिर के लिए अदालत के फैसले से पहले कानून लाना चाहिए.

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भागवत की दो टूक से श्रीश्री नाराज? धर्म संसद से किनारा
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा था कि वो पहले ही श्री श्री रविशंकर को बता चुके हैं कि राम जन्मभूमि मामले में उनको दखल नहीं देनी चाहिए. उन्होंने कहा कि राम जन्मभूमि मामले में फैसले लेने के लिए धर्म संसद को अगुवाई करनी चाहिए, जबकि इस मसले पर श्री श्री रविशंकर खुद ही फैसले ले रहे हैं.
आध्यत्मिक गुरु श्रीश्री रविशंकर ने कर्नाटक के उडुपी में जारी तीन दिवसीय धर्म संसद में शामिल होने से इनकार कर दिया है. शुक्रवार को ही कार्यक्रम की शुरुआत में अपने संबोधन के दौरान संघ प्रमुख मोहन भागवत ने राम मंदिर की मध्यस्थता को लेकर श्रीश्री पर निशाना साधा था. इससे पहले कई हिन्दू धर्म गुरु भी श्री श्री रविशंकर पर राम मंदिर मामले को लेकर निशाना साध चुके हैं.

श्रीश्री को कार्यक्रम में शामिल होना था लेकिन ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि भागवत के बयान के बाद ही उन्होंने धर्म संसद से किनारा किया है. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा था कि वो पहले ही श्री श्री रविशंकर को बता चुके हैं कि राम जन्मभूमि मामले में उनको दखल नहीं देनी चाहिए. उन्होंने कहा कि राम जन्मभूमि मामले में फैसले लेने के लिए धर्म संसद को अगुवाई करनी चाहिए, जबकि इस मसले पर श्री श्री रविशंकर खुद ही फैसले ले रहे हैं.

बता दें कि ऑर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक रवि शंकर ने लंबे समय से चल रहे अयोध्या विवाद में मध्यस्थता करने की पेशकश की थी और वह इसे लेकर पहले ही कई पक्षकारों से बात कर चुके हैं. हालांकि श्रीश्री ने पिछले दिनों अपने अयोध्या दौरे पर यह जरूर कहा था कि मामला काफी गंभीर है और सभी पक्षों को सहमति के साथ एक मंच पर लाने में लंबा वक्त लग सकता है.

इस धर्म संसद में देशभर से दो हजार से ज्यादा संत, मठाधीश और वीएचपी नेता इस सम्मेलन में शामिल हो रहे हैं. उडुपी के पेजावर मठ के ऋषि श्री विश्वेष तीर्थ स्वामी ने बताया कि अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण, गौ रक्षा, छुआछूत का सफाया, समाज सुधार और धर्मांतरण को रोकने जैसे मुद्दों पर चर्चा की जाएगी. उन्होंने बताया कि धर्म संसद को राजनीति और राजनीतिक एजेंडे से पूरी तरह अलग रखा जाएगा और यह विशुद्ध रूप से हिंदु संतों का एक सम्मेलन होगा. एक विशाल हिंदू समाजोत्सव के साथ संसद का समापन होगा जहां योगी आदित्यनाथ मुख्य भाषण देंगे.

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