भारतीय चुनाव आयोग द्वारा एमपी मंत्री अयोग्य

आप के 21 विधायक की सदस्‍यता जायेगी ?#पेड न्यूज मामले में शिवराज के मंत्री नरोत्तम मिश्रा को चुनाव आयोग ने घोषित किया अयोग्य, लगा तीन साल का बैन#आम आदमी पार्टी को  चुनाव आयोग से झटका # चुनाव आयोग ने कहा कि आप के 21 विधायक संसदीय सचिव हैं जो कि लाभ का पद है. इसलिए उनकी याचिका खारिज कर दी # संविधान के अनुच्‍छेद 102(1)(A) और 191(1)(A) के अनुसार संसद या फिर विधानसभा का कोई सदस्य अगर लाभ के किसी पद पर होता है तो उसकी सदस्यता जा सकती है. यह लाभ का पद केंद्र और राज्य किसी भी सरकार का हो सकता है.

भारतीय चुनाव आयोग ने शनिवार को मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री नरोत्तम मिश्रा को चुनाव खर्च की गलत जानकारी को लेकर अयोग्य घोषित कर दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, मंत्री नरोत्तम मिश्रा पर आरोप था कि उन्होंने चुनाव के दौरान पेड न्यूज पर किए गए खर्च को छुपाया था। चुनाव आयोग के समक्ष सूबत पेश किए गए, जिसके बाद आयोग ने मिश्रा को दोषी मानते हुए तीन साल के लिए अयोग्य घोषित किया।
शिकायतकर्ता राजेंद्र भारती ने 2012 में चुनाव आयोग से शिकायत करते हुए मिश्रा पर आरोप लगाया था कि उन्होंने साल 2008 में पेड न्यूज के खर्च को छुपाया था। चुनाव आयोग ने इस मामले में जांच शुरू की थी, जिसके खिलाफ नरोत्तम मिश्रा ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हालांकि मध्य प्रदेश हाईकोर्ट और इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने भी याचिका को खारिज कर दिया था। बता दें कि नरोत्तम मिश्रा को मध्य प्रदेश की शिवराज सिंह कैबिनेट में दूसरे नंबर पर माना जाता है। मिश्रा के पास जनसंपर्क, जल संसाधन और संसदीय कार्य के पदभार भी संभाले हुए थे।

चुनाव आयोग ने पाया कि उन्होंने  साल 2008 के विधानसभा चुनाव में पेड न्यूज पर खर्च की गई रकम को अपने चुनावी खर्च में नहीं दर्शाया था. कांग्रेस के पूर्व विधायक राजेंद्र भारती की 2009 में की गई शिकायत पर यह फैसला आया. उन्होंने नरोत्तम मिश्रा पर 2008 के चुनावों के दौरान करप्ट प्रैक्टिस  और पेड न्यूज का आरोप लगाया था. चुनाव आयोग ने जनवरी 2013 में नोटिस जारी कर नरोत्तम मिश्रा से जवाब मांगा था.

उन्होंने ग्वालियर हाईकोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया था लेकिन उन्हें वहां से भी राहत नहीं मिली थी. इसके बाद वह सुप्रीम कोर्ट भी गए लेकिन उन्हें वहां से भी राहत नहीं मिल पाई. पिछले साल नरोत्तम से दिल्ली में चुनाव आयोग ने सवाल किए थे. गौरतलब है कि फिलहाल उनके पास जल संसाधन, जनसंपर्क और संसदीय कार्य मंत्रालय का जिम्मा है. वह दतिया से जीतकर आते हैं.

वही दूसरी ओर 

आम आदमी पार्टी को ‘ऑफिस ऑफ प्रॉफिट’ यानि लाभ के पद मामले में चुनाव आयोग से झटका लगा है. चुनाव आयोग ने 21 विधायकों की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें उन्होंने केस को रद्द करने की मांग की थी. इन विधायकों की दलील थी कि चूकि दिल्ली हाईकोर्ट उनकी नियुक्ति को अवैध मानते हुए रद्द कर दिया है तो फिर इस चुनाव आयोग में केस चलाने का कोई आधार नही है. लेकिन चुनाव आयोग ने साफ कहा है कि आम आदमी पार्टी के विधायकों के खिलाफ आफिस आफ प्राफिट का केस चलता रहेगा. 

मार्च 2015 का है जब अरविंद केजरीवाल ने अपने 21 विधायकों को संसदीय सचिव बना दिया. विपक्ष ने विधायक रहते हुए इन्हें लाभ का पद देने का आरोप लगाया. प्रशांत पटेल नाम के सामाजिक कार्यकर्ता ने इसकी शिकायत राष्ट्रपति के यहां दी. अपनी पिटीशन में उन्होंने आरोप लगाया कि केजरीवाल की पार्टी के 21 विधायक संसदीय सचिव बनाए गए हैं जो कि लाभ के पद हैं. इसलिए इनकी सदस्यता रद्द की जाए. प्रशांत पटेल की ये शिकायत राष्ट्रपति ने  चुनाव आयोग के पास भेजी. चुनाव आयोग ने इस मामले की सुनवाई शुरू की.

दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार ने अपने विधायकों को बचाने के लिए इन पदों को लाभ के पद से बाहर रखने के लिए कानून भी बनाने की कोशिश की. लेकिन राष्ट्रपति ने उसे मंजूरी नही दी. दिल्ली हाई कोर्ट में केन्द्र औऱ दिल्ली सरकार की तकरार पर चल रही सुनवाई में केन्द्र ने साफ किया था कि दिल्ली में इतने संसदीय सचिव नही रखे जा सकते. इसका कोई प्रावधान नही है.  जिसके बाद  8 सितंबर 2016 को दिल्ली हाइकोर्ट ने 21 संसदीय सचिवों की नियुक्ति रद्द कर दी थी. आम आदमी पार्टी इसी आर्डर आधार पर चुनाव आयोग से केस खत्म करने की अपील कर रही थी जिसे आयोग ने खारिज कर दिया.

चुनाव आयोग का आदेश 

आयोग ने अपने आदेश में कहा है कि विधायक 13 मार्च 2015 से 8 सितंबर 2016 तक संसदीय सचिव के पद पर रहे हैं. ऐसे में उनके पास आयी शिकायत पर सुनवाई जारी रहेगी.  दिल्ली हाईकोर्ट ने 8 सितंबर 2016 को विधायकों की संसदीय सचिव के तौर पर नियुक्ति को अवैध करार दिया था. चुनाव आयोग ने कहा है कि 21 विधायकों में से एक जरनैल सिंह ने जनवरी 2017 में इ्स्तीफा दे दिया था इसलिए उन्हे छोड़ बचे 20 विधायकों पर आफिस आफ प्राफिट का केस चलता रहेगा. चुनाव आयोग के सामने इन विधायकों के ये साबित करना होगा कि वो लाभ के पद पर नही थे. आयोग ने कहा है कि जल्द ही सुनवाई की अगली तारीख संबंधित पक्षों को बता दी जाएगी.

आम आदमी पार्टी की प्रतिक्रिया

आम आदमी पार्टी ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया करते हुए कहा है, ‘चुनाव आयोग के हालिया आदेश का गलत अर्थ नहीं निकाला जाना चाहिए. दिल्ली हाईकोर्ट ने 21 संसदीय सचिवों की नियुक्ति के आदेश को रद्द घोषित कर दिया था. इसलिए, दिल्ली हाईकोर्ट के अनुसार इस विषय के संबंध में याचिका पर सुनवाई का कोई सवाल ही नहीं बनता है. हालांकि, चुनाव आयोग ने आदेश दिया है कि वह अभी इस याचिका पर सुनवाई करेंगे. चुनाव आयोग के इस आदेश को चुनौती देने के लिए सभी उपाय उपलब्ध हैं, हम माननीय हाईकोर्ट के साथ ही माननीय चुनाव आयोग के आदेशों का सम्मान करते हैं.’

इस मामले में शिकायतकर्ता प्रशांत पटेल ने चुनाव आयोग के इस कदम पर एबीपी न्यूज़ को प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अब आम आदमी पार्टी के इन सभी विधायकों की सदस्यता का रद्द होना तय है.

 

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