मौलिक अधिकार जम्मू-कश्मीर के निवासियों को भी मिले: भीमसिंह

भारतीय संविधान में दिये गये मौलिक अधिकार जम्मू-कश्मीर के निवासियों को भी मिलने चाहिए: भीमसिंह

नेशनल पैंथर्स पार्टी के मुख्य संरक्षक एवं सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता प्रो. भीमसिंह ने भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी को लिखे एक पत्र में उनसे अनुरोध किया है कि जम्मू-कश्मीर में सक्रिय सभी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की बैठक बुलायी जाए। उन्होंने कहा कि इस बैठक में हुर्रियत कांफ्रेंस के प्रतिनिधियों को भी बिना किसी शर्त के आमंत्रित किया जाए, जिससे जम्मू-कश्मीर के सभी मान्यताप्रात राजनीतिक दल, वर्तमान स्थिति में जब जम्मू-कश्मीर में बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं, व्यवसाय ठप हैं, जनता खुद को असुरक्षित महसूस कर रही है, जम्मू-कश्मीर के सीमावर्ती क्षेत्रों में सरकार पूर्णरूप से विफल हो चुकी है, समस्याओं का समाधान हल ढूंढ सकें।

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जम्मू-कश्मीर में आज क्या हो रहा है, सरकार का तत्काल ध्यान देने योग्य है और बिना किसी देरी के जागने की जरूरत है। उन्होंने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि वे कल के बारे में सोचें और यह सुनिश्चित करके एक रास्ता खोज लें कि लद्दाख, कश्मीर घाटी या जम्मू क्षेत्र में सभी लोगों को न्याय के साथ जम्मू-कश्मीर में शांति बहाल हो।

पत्र में प्रधानमंत्री से आग्रह किया गया है कि वह नई दिल्ली में सार्वजनिक राय लेने के लिए बैठक बुलाएं कि जम्मू-कश्मीर को पड़ोसी पाकिस्तान से होने वाली तबाही और मौतों से बचाने के लिए सरकार को क्या कदम उठाने चाहिएं। उन्होंने पत्र में लिखा है कि जम्मू-कश्मीर में आज क्या हो रहा है, सरकार का तत्काल ध्यान देने योग्य है और बिना किसी देरी के जागने की जरूरत है। उन्होंने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि वे कल के बारे में सोचें और यह सुनिश्चित करके एक रास्ता खोज लें कि लद्दाख, कश्मीर घाटी या जम्मू क्षेत्र में सभी लोगों को न्याय के साथ जम्मू-कश्मीर में शांति बहाल हो।
उन्होंने प्रधानमंत्री से पत्र में यह भी कहा कि नियंत्रण रेखा के दोनों ओर के राजनीतिक और सामाजिक प्रतिनिधियों की ‘दिल से दिल की बातचीत‘ करने के लिए 2005 में स्थापित की गयी समन्वय समिति को, जिसने 2005 और फिर 2007 में ‘दिल से दिल की बातचीत‘ का आयोजन किया था, जिनमें जम्मू-कश्मीर के विधायक, राजनीतिक प्रतिनिधियों और सामाजिक समूह के शामिल हुए थे और पाक-अधिकृत कश्मीर, गिलगित-बल्तिस्तान के और अन्य सामाजिक समूहों से बातचीत की थी, फिर से ‘दिल से दिल की बातचीत‘ के आयोजन करने की अनुमति दी जाए, जिससे सीमा के दोनों ओर के प्रसिद्ध सामाजिक और राजनीतिक प्रतिनिधि इसमें शामिल होकर नियंत्रण रेखा इत्यादि मुद्दों का समाधान ढूंढ कर सकें। उन्होंने कहा कि युद्ध किसी भी समस्या का समाधान नहीं हो सकती बातचीत से समस्याओं को हल किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि मैं अक्टूबर, 2017 को नई दिल्ली में तृतीय ‘दिल से दिल की बातचीत‘ का आयोजन करना चाहूंगा।
उन्होंने प्रधानमंत्री से कहा कि वह राष्ट्रपति से अनुरोध प्रकट करें कि वह जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल को सलाह दें कि वे जम्मू-कश्मीर के लोगों के हित में वहां राज्यपाल शासन लागू कर दें। उन्होंने कहा कि वर्तमान विधानसभा शीघ्र भंग कर दिया जाना चाहिए, जिसका जम्मू-कश्मीर संविधान की धारा-53 के तहत राज्यपाल को विशेष अधिकार प्राप्त है। उन्होंने कहा कि भारत के सभी नागरिकों की तरह जम्मू-कश्मीर के भारतीय नागरिकों को भी सभी मौलिक अधिकार मिलने चाहिएं, जिसकी गारंटी भारत के संविधान में दी गई है।

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