उत्‍तराखण्‍ड राज्य में खनन नीति हमेशा से ही हंगामेदार क्‍यों ?

उत्‍तराखण्‍ड राज्य में खनन को लेकर हमेशा से ही हंगामा होता रहा #खनन  को लेकर हर बार कटघरे में खड़ा रहने को मजबूर  # उत्तराखंड में लचर खनन नीति #महंगा खनिज खरीदने को विवश  # महंगा तथा मुंहमागे रेट पर खरीदने को विवश  है राज्‍यवासी  # अक्‍टूबर में  उत्‍तराखण्‍ड राज्‍य सरकार का जवाब था कि सरकार ने इस बार ई-टेंडरिग की व्यवस्था की है#प्रदेश में एक अक्टूबर से खनन फिर से शुरू होने जा रहा है# इस बार ई-टेंडरिंग के जरिए खनन पट्टे आवंटित किए जाएंगे# खनन विभाग ने इसकी कार्ययोजना तैयार कर ली है#दिसम्बर तक नई खनन नीति न आने से जहां सरकार को राजस्व की हानि #वही अवैध खनन रात दिन चल रहा हैनिजी खनन काराबोरियों का हमेशा से ही जबरदस्त दबाव रहता आया है इसी कारण कैबिनेट तक मे यह नई नीति बाहर होती रही प्रमुख सचिव खनन आनंद वर्द्धन हरीश रावत सरकार की खनन नीति 2016 से ही काम चलाना चाह रहे हैं।

# Execlusive Story; www.himalayauk.org (Leading Digital Newsortal)  Bureau Report: 

अक्‍टूबर में खनन शुरू होता है, दिसम्‍बर चल रहा है, 3 माह में भी खनन पालिसी नही आने से राजकोष को नुकसान उठाना पड रहा है, वही राज्‍यवासियो को ब्‍लैक में, मुंहमांगे रेट पर खनिज खरीदने को विवश होना पड रहा है, खनन पालिसी 2016 हरीश रावत सरकार लाई थी, वही मार्च 2017 में भाजपा सरकार 9 माह बाद भी खनन नीति नही ला पाई है, सवाल उठ रहा है, इंतजार किसका, और क्‍यों,  पूर्ववर्ती हरीश रावत सरकार की खनन नीति 2016 से ही काम चलाया जायेगा, त्रिवेन्‍द्र रावत सरकार नई खनन नीति लाना संभव नही लग रहा

उत्तराखंड सरकार  खनन नीति ला नही पाई है, ई टेण्‍डरिग लाने की बात की जा रही है, ऐसे विरोधाभास के ही मायने है, नई खनन नीति आयेगी या ई टेण्‍डरिंग के बाद पूर्ववर्ती हरीश रावत सरकार की खनन नीति 2016 को ही क्रियान्‍वित किया , जनचर्चा गर्म है,
उत्‍तराखण्‍ड की भाजपा सरकार नई खनन नीति लायेगी तो 3 माह में अनावश्‍यक देरी कर करोडो रूपये का राजकोष का नुकसान क्‍यों किया गया और राज्‍यवासियों को महंगे खनिज खरीदने को क्‍यो मजबूर किया जा रहा है, यह चर्चा का विषय है,
वही गौरतलब है कि राज्‍य मे निर्माण कार्यो के लिए खनिज उ0प्र0 और हिमाचल से खरीदा जा रहा है, परन्‍तु उत्‍तराखण्‍ड से खनिज अधिक़त रूप से भेजा नही जा सकता है, क्‍योंकि राज्‍य सरकार अपनी खनिज नीति ही तय नही कर पायी है, इस तरह राज्‍य सरकार द्वारा खनिज नीति में निर्णय लेने में देरी का कितना बडा नुकसान उठाना पड रहा है, अंदाजा लगाया जा सकता है,
चर्चा है कि उत्‍तराखण्‍ड की भाजपा सरकार अपनी खनिज नीति लायेगी या ई टेण्‍डरिंग के बाद पूर्ववर्ती हरीश रावत सरकार की खनन नीति 2016 को ही क्रियान्‍वित किया जायेगा, जनचर्चा गर्म है, उत्‍तराखण्‍ड सरकार की नई खनन नीति अक्‍टूबर में आनी थी परन्‍तु   तीन माह की देरी कर पूरे सूबे में खनन के नाम पर लूटखसोट को अनावश्‍यक बढावा दे दिया, काम सब हो रहे है परन्‍तु इस समय सब दूसरे रास्‍ते से हो रहे है पुलिस के रहमोकरम से अवैध खनन धडलले से जारी है

 निजी खनन काराबोरियों का हमेशा से ही जबरदस्त दबाव रहता आया है इसी कारण कैबिनेट तक मे यह नई नीति बाहर होती रही # नौकरशाह हरीश रावत सरकार द्वारा लायी गयी खनन पालिसी 2016 को ही क्रियान्‍वित करने को ही उचित मान रहे हैं, क्‍योंकि ई-नीलामी के लिए कैबिनेट की स्वीकृति मिलने के बाद इसे क्रियान्‍वित करने में कम से कम छह माह लग जाएंगे। वहीं, खनन शुरू करने का समय शुरू होने के बावजूद यह पूर्ण रूप से शुरू नहीं हो पाया है। 

राज्य में खनिज और उपखनिज के खनन के पट्टे दिए जाते हैं. उपखनिज बालू, बजरी, बोल्डर के कुल 339 खनन पट्टे दिए जाते हैं. इनके अलावा खनिज सोप स्टोन के 105, खनिज मैग्नेसाइट के 03, खनिज लाइम स्टोन के 04, स्टोन क्रेशन और स्क्रीनिंग प्लांट के 276, प्लवराइजर प्लांट के 25 खनन पट्टे दिए जाते हैं. प्रदेश भर में उपखनिज के भंडारण के 465 लाइसेंस दिए जाते हैं. सरकार ने गत वर्ष की अपेक्षा इस वित्तीय वर्ष 2017-18 के लिए राजस्व वसूली का लक्ष्य पिछले साल की तुलना में करीब सवा सौ करोड़ रुपये बढ़ाकर 550 करोड़ सालाना रखा है. साल 2012-13 में खनन से राजस्व लक्ष्य था 109 करोड़ रुपये, 2013-14 में 248 करोड़ रुपये, 2014-15 में 224 करोड़ रुपये, 2015-16 में 272 करोड़ रुपये और 2016-17 राजस्व लक्ष्य था 329 करोड़ रुपये. खड़ि‍या का बहुत बड़ा बाजार है और सबसे अधिक अवैध कारोबार भी खड़ि‍या का ही होता है।

वही राज्‍य सरकार का कहना है कि नई खनन नीति से जहां अवैध खनन पर अंकुश लगने की संभावना है वहीं सरकार को राजस्व की प्राप्ति भी होगी।  खनन के हिसाब से प्रदेश को तीन जोन में बांटने का निर्णय लिया गया है।  सरकार जल्द ही राज्य की नदियों में खनन के लिए एक पारदर्शी नीति बनाएगी, जिससे राज्य को अच्छा राजस्व मिल सके.  खनन की प्रक्रिया को पारदर्शी व विवाद रहित बनाने के लिए खनन के पट्टे ई-नीलामी के जरिए देने का निर्णय लिया। 

नई खनन नीति को लेकर विरोध

नई खनन नीति को लेकर विरोध के स्वर भी उठे हैं. नई खनन नीति से खनिज महंगा होगा, क्योंकि खनन पर रॉयल्टी चार गुना बढ़ जाने के बाद खनन सामग्री चार गुना महंगे दामों पर मिलेगी. स्टेट गर्वमेंट ने अवैध खनन को रोकने के लिए नई खनन नीति बनाई है, जिसमें साफ है कि वाहनों में अवैध खनन पाए जाने पर दो लाख रुपए का जुर्माना होगा. नई खनन नीति से न केवल रेत, बजरी, पत्थर के दामों में उछाल आएगा बल्कि खनन के वैध कारोबार से जुड़े मजदूरों के सामने भी रोजी रोटी का संकट गहरा जाएगा. खनन काम से हजारों लोगों की आजीविका जुडी हैं, सैकड़ों वाहन खनिज में लगे है, नई खनन नीति के बाद यदि किसी वाहन में तय मात्रा से थोड़ा भी अधिक रेत बजरी या पत्थर पाया जाता है तो उसका दो लाख रुपए का चालान किया जाना कहीं से ठीक नहीं है.

HIMALAYA GAURAV UTTRAKHAND (www.himalayauk.org)  C S JOSHI= EDITOR 

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