हिन्दू नव वर्ष-29 March;-वर्ष का राजा शनि- क्‍या होगा बडा असर ?

#राजनीतिक क्षेत्र में बडा असर डाल रहा है#भष्टाचारियो के लिए वर्ष अशुभ #इस राजनेता को अजेय रखेगा-शनि #प्रसिद्व ज्‍योतिषविद नेे कहा- #Nav Varsh Samvat or Hindi New Year –  March 29, 2017 #हिन्दू नव वर्ष 2072 का प्रारम्भ शनिवार को होने से वर्ष का राजा शनि  #असर- न्याय दिलाएंगे व कानून का पालन सख्ती से  #इस वर्ष का राजा न्याय प्रिय ग्रह शनि #पूरे संवत्सर के राजा शनिदेव  #राजा शनि कार्यों में स्थायित्व प्रदान करेंगे #जबकि मंत्री मंगल अनुशासन को बढ़ावा देंगे #पूरे वर्ष में माह मई, अगस्त और अक्टूबर ऐसे होंगे, जिनमें पांच शनिवार # बड़े पर्व शनिवार को होने से इस वार के स्वामी शनिदेव का वर्चस्व  #ठगी से पहले सौ बार सोचना होगा #वर्ष का राजा शनि कर्म के अनुसार परिणाम देने वाला है  #भ्रष्टाचारियो के लिए आने वाला वर्ष अशुभ #क्योंकि 2017 के शुरूआत से शनि का अहम रोल #क्योंकि शनि न्याय के देवता है   #2017 में राजनीतिक मोर्चे पर बहुत कुछ होना है #29 March; हिन्दू नव वर्ष 2072 -वर्ष का राजा शनि-क्‍या होगा असर ? #ज्‍योतिषों का कहना है कि भष्टाचारियो के लिए वर्ष  बहुत अशुभ है – अगर राजनीतिक क्षेत्र से है तो चुनाव की तैयारी फिर से कर ले- शनि उनको चैन से नही बैठने देगे#  ऐसा कैसे संभव है- इसको जानने के लिए हिमालयायूके की दूसरी रिपोर्ट जरूर पढे-  

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विक्रमी संवत का पहला दिन: उसी राजा के नाम पर संवत् प्रारंभ होता था जिसके राज्य में न कोई चोर हो, न अपराधी हो, और न ही कोई भिखारी हो। साथ ही राजा चक्रवर्ती सम्राट भी हो। सम्राट विक्रमादित्य ने 2067 वर्ष पहले इसी दिन राज्य स्थापित किया था।  

हिन्दू नव वर्ष 2072 का प्रारम्भ शनिवार को होने से वर्ष का राजा शनि होगा जो की देश दुनिया में न्याय दिलाएंगे व कानून का पालन सख्ती से होगा नया साल 2015 जैसी करनी वैसी भरनी वाला होगा। इस वर्ष का राजा न्याय प्रिय ग्रह शनि है।यह सबको समान दृष्टि से देखता है। वर्ष वैसे तो व्यापारियों के लिए अच्छा होगा। पूरे संवत्सर के राजा शनिदेव ही होंगे। 15 अगस्त को मनाने वाला राष्ट्रीय पर्व स्वतंत्रता दिवस भी इस वर्ष शनिवार के दिन ही है। इस पूरे वर्ष में माह मई, अगस्त और अक्टूबर ऐसे होंगे, जिनमें पांच शनिवार होंगे। 
नए साल में प्रशासनिक क्षेत्रों में राजा शनि कार्यों में स्थायित्व प्रदान करेंगे, जबकि मंत्री मंगल अनुशासन को बढ़ावा देंगे। जिन लोगों पर शनि की साढ़े साती ढैया चल रही है, उन्हें हनुमान जी की पूजा करने से लाभ होगा। ज्योतिषियों की मानें तो नए वर्ष में अधिकांश बड़े पर्व शनिवार को होने से इस वार के स्वामी शनिदेव का वर्चस्व रहेगा। शनि पूरे वर्ष में कभी वक्री तो कभी मार्गी होगा। वर्तमान में शनि मंगल के आधिपत्य वाली राशि वृश्चिक में हैं। लेकिन उत्पादन करने वालों को मिलावट या उपभोक्ता से ठगी से पहले सौ बार सोचना होगा। वर्ष का राजा शनि कर्म के अनुसार परिणाम देने वाला है। ऎसे में व्यापार के हर कार्य का परिणाम कर्म के अनुरूप होगा। ज्योतिष के जानकारों की माने तो नए साल में राजनीति में स्थिरता रहेगी, वहीं मंगल का प्रभाव भी दिखाई होगा।

विक्रम संवत 2072 का राजा शनि होगा। ज्योतिषीय गणना के अनुसार विक्रम संवत्सर जिस वार को शुरू होता है, पूरे वर्ष उसी वार का स्वामी राजा होता है। मंत्री मंगल, दुर्गेश चंद्रमा होंगे। इससे देश में सुख-शांति अधिक खाद्यान्न उत्पादन की आशा की जा सकती है .. मंगल के प्रभाव से रक्त जनित बीमारियों की आशंका बढ़ सकती है। ऎसे में खासकर खान-पान ध्यान रखना होगा। नया साल व्यापारियों और किसानों के लिए समृद्धि लाने वाला होगा।दो आषाढ़ का साल 13 माह का होगा हिन्दू नव वर्ष सामान्यत: अंग्रेजी और हिन्दी महिनों में 12 माह होते है लेकिन विक्रम संवत 2072 अधिकमास है।
सूर्य के एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश को संक्रांति होना कहते हैं। सौर मास 12 और राशियां भी 12 होती हैं। जब दो पक्षों में संक्रांति नहीं होती, तब अधिकमास होता है। आमतौर पर यह स्थिति 32 माह और 16 दिन में एक बार यानी हर तीसरे वर्ष में बनती है। ऐसा सूर्य और पृथ्वी की गति में होने वाले परिवर्तन से तिथियों का समय घटने-बढऩे के कारण होता है। नए वर्ष में आषाढ़ 3 जून को शुरू होकर 30 जुलाई तक रहेगा। इस अवधि में 17 जून से 16 जुलाई तक की अवधि को अधिकमास माना जाएगा। इसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। मौजूदा वर्ष की तुलना में पर्वों की तारीख हर तीन साल में घट-बढ़ गईं हैं। अब साल 2015 में आने वाले त्योहार 20 दिन बाद तक 10 दिन पहले आएंगे। ये पर्व वर्ष 2015 में अधिकमास के कारण बदल रहे हैं। त्योहारों की तिथियों का गणित, आषाढ़ के दो महीने पहले से आने के कारण हुआ है। सूर्य और पृथ्वी की गति में होने वाले परिवर्तन से तिथियों का समय घटने-बढऩे के कारण होता है। नए वर्ष में आषाढ़ 3 जून को शुरू होकर 30 जुलाई तक रहेगा। इस अवधि में 17 जून से 16 जुलाई तक की अवधि को अधिकमास माना जाएगा। इसे पुरूषोत्तम मास भी कहा जाता है।
जानकारों के अनुसार हर तीन साल में एक अधिकमास आता है। इस पुरूषोतम मास भी कहा जाता है। इसमें दान पुण्य, धार्मिक पूजा पाठ आदि तो किए जा सकते है लेकिन शुभ कार्य वर्जित होते है।पांचांग के मुताबिक पहला आषाढ़ कृष्ण 3 जून से 16 जून तक और द्वितीय आषाढ़ शुक्ल 17 जुलाई से 31 जुलाई तक रहेगा। अधिकमास का प्रथम आषाढ़ शुक्ल 17 जून बुधवार से शुरु होगा, जो द्वितीय आषाढ़ कृष्ण अमावस्या 16 जुलाई तक रहेगा। इससे पहले अधिमास संवत 2069 (सन 2012) में था। अब इसके बाद संवत 2075 (सन 2018) में होगा। इस दौरान 17 जुलाई से गुप्त नवरात्र भी होंगे जिसमें मां भगवती की पूजा अनुष्ठान करने से 100 फीसदी लाभ मिलता है।

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प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य ज्योतिष गुरु एवं शनिधाम के संचालक  हरिदयाल मिश्र के अनुसार भ्रष्टाचारियो के लिए आने वाला वर्ष अशुभ है क्योंकि 2017 के शुरूआत से शनि का अहम रोल है क्योंकि शनि न्याय के देवता है  ज्योतिषशास्त्र के दार्शनिक खंड अनुसार सूर्य पुत्र शनि को पापी ग्रह माना गया है और इसे नवग्रह में न्यायाधीश की उपलब्धि प्राप्त है ने रोग, दुख, संघर्ष, बाधा, मृत्यु, दीर्घायु, भय, व्याधि, पीड़ा, नंपुसकता व क्रोध का कारक माना गया है। मकर व कुंभ राशियों के स्वामी हैं। ज्योतिषशास्त्र की गोचर प्रणाली अनुसार शनि गुरुवार दिनांक 26.01.17 को रात 09:34 पर वृश्चिक से धनु राशि में प्रवेश करेंगे। शनि के इस राशि परिवर्तन से मकर राशि हेतु शनि की साढ़ेसाती शुरू होगी। वृश्चिक राशि हेतु यह अंतिम चरण की साढ़ेसाती होगी व तुला राशि साढ़ेसाती से मुक्त होंगे। शनि के धनु में आते ही कन्या राशि हेतु लघु कल्याणि शुरू होगी व वृष राशि हेतु अष्ठम शनि की ढ्य्या शुरू होगी। शनि धनु राशि में पहले केतु के नक्षत्र मूल में आकर बाद में शुक्र व सूर्य के नक्षत्र में भ्रमण करेंगे।  साल 2017 में शनि का गोचर अत्यधिक अस्थिर रहेगा क्योंकि यह कुछ समय के लिए वक्री हो कर पुनः वृश्चिक राशि में आकर दोबारा मार्गी होकर धनु राशि में प्रवेश करेंगे। साल 2017 में शनि अपनी वक्र अवस्था से बुधवार दिनांक जून 21.06.17 को रात 01:37 पर धनु से वृश्चिक में जाएंगे तथा पुनः सक्रिय होकर गुरुवार दिनांक 26.10.17 को वृश्चिक से धनु में प्रवेश करेंगे। 

पीएम मोदी को शनि 2017 में अजेय रखेगा; प्रसिद्व ज्‍योतिष ने कहा- 

भारत के इतिहास में बड़ी ज्योतिष भविष्यवाणिया करने वाले हरिदयाल मिश्र  ने कहा है कि राहुल गाँधी के लिए बेहतर है कि वो चुप ही बैठें , नहीं तो उनकी विश्‍वसनीयता ही दांव पे ही बनी रहेगी. वैसे इस दुनिया में बहुत कम लोग ऐसे होंगे जो ज्योतिष और भविष्यवाणी में यकीन करते होंगे . ये भविष्यवाणी किसी और ने नहीं बल्कि अयोध्या के जाने माने ज्योतिषाचार्य हरिदयाल मिश्र ने की है.  इससे पहले भी ये संजय गाँधी और इंदिरा गाँधी की मौत सहित बहुत सी बड़ी राजनैतिक भविष्यवाणियां भी कर चुके हैं और वह सत्य भी हुई है .  हरिदयाल मिश्र ने सोनिया गाँधी के साथ बैठकर उनको भी कांग्रेस पार्टी के लिए सचेत किया था.  इसी ज्योतिषाचार्य ने संजय गांधी और इंदरा गांधी की मौत की भविष्यवाणी की थी जो बिल्कुल सच साबित हुई। अयोध्या के जाने माने ज्योतिषाचार्य हरिदयाल मिश्र  को संजय गांधी और इंदरा गांधी की मौत कि सटीक भविष्यवाणी करने के कारण सीबीआई जांच से भी गुजरना पड़ा था।  ज्योतिषाचार्य हरिदयाल मिश्र की बातों को गंभीरता से लिया जाता है। सटीक भविष्यवाणियां करने वाले ज्योतिषाचार्य हरिदयाल मिश्र ने पीएम मोदी को लेकर जो भविष्यवाणी की है कि पीएम मोदी कई सालों तक देश की सेवा करेेगे । ज्योतिषाचार्य ने कहा है कि पीएम मोदी को शनि 2017 में अजेय रखेगा, उन्हें किसी चुनाव में हार का सामना नहीं करना पड़ेगा। वहीं राहुल गांधी को लेकर ज्योतिषाचार्य ने कहा कि उनका समय ठीक नहीं चल रहा उन्हें अब शांत बैठना चाहिए।  अयोध्या के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य हरिदयाल मिश्र कई अन्य राजनैतिक भविष्यवाणियां भी कर चुके हैं और वह सब सच हुई हैं। 

 

चैत्र नवरात्र का शुभारंभ 21 मार्च शनिवार को और नवमी पर समापन भी 28 मार्च शनिवार को। आने वाले साल 2015 में प्रमुख त्योहारों की तिथियां काफी बदला हुआ रहेगा। 2015 के जनवरी से जून तक आने वाले त्योहार इस साल 2014 के मुकाबले कुछ दिन पहले की तारीखों में पड़ेंगे। यह स्थिति अधिकमास के कारण बनेगी। यानि गत 18 अगस्त से 13 सितंबर 2012 में अधिकमास होने के कारण दो भादों थे और 2015 में दो आषाढ़ होंगे, जबकि 2018 में 16 मई से 13 जून तक दो जेठ होंगे। यानी नए वर्ष के शुरू के छह माह में त्योहार गत वर्ष की अपेक्षा दस दिन पहले और बाद के छह माह में देरी से होंगे। ज्योतिषी इसकी वजह नए साल में दो आषाढ़ होना मान रहे हैं। वहीं जानकार भी नए साल में दो आषाढ़ मास होने की बात कह रहे हैं। यानी जून में अधिक मास की स्थिति बनेगी, इसलिए इसके खत्म होने के बाद जो त्योहार आएंगे, वे दस से 20 दिन की देरी से होंगे। जब दो पक्षों में संक्रांति नहीं होती, तब अधिकमास होता है। आमतौर पर यह स्थिति 32 माह और 16 दिन में एक बार यानी हर तीसरे वर्ष में बनती है। ऐसा सूर्य और पृथ्वी की गति में होने वाले परिवर्तन से तिथियों का समय घटने-बढऩे के कारण होता है। नए वर्ष में आषाढ़ 3 जून को शुरू होकर 30 जुलाई तक रहेगा। इस अवधि में 17 जून से 16 जुलाई तक की अवधि को अधिकमास माना जाएगा। इसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। मौजूदा वर्ष की तुलना में पर्वों की तारीख हर तीन साल में घट-बढ़ गईं हैं। अब साल 2015 में आने वाले त्योहार 20 दिन बाद तक 10 दिन पहले आएंगे। ये पर्व वर्ष 2015 में अधिकमास के कारण बदल रहे हैं। त्योहारों की तिथियों का गणित, आषाढ़ के दो महीने पहले से आने के कारण हुआ है। सूर्य और पृथ्वी की गति में होने वाले परिवर्तन से तिथियों का समय घटने-बढऩे के कारण होता है। नए वर्ष में आषाढ़ 3 जून को शुरू होकर 30 जुलाई तक रहेगा। इस अवधि में 17 जून से 16 जुलाई तक की अवधि को अधिकमास माना जाएगा। इसे पुरूषोत्तम मास भी कहा जाता है।

ज्‍योतिषों का कहना है कि भष्टाचारियो के लिए वर्ष  इतना अशुभ है – अगर वो सत्‍ता में आये तो जनता की अदालत में फिर से जाना पड सकता है- उन्‍हें दोबारा चुनाव में जाना पड सकता है #  इसको जानने के लिए हिमालयायूके की दूसरी रिपोर्ट जरूर पढे-  

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