भाजपा का ब्रहमासत्र राहुल के आस्तिक कवच को भेद पाएगा?

भाजपा का ब्रहमासत्र राहुल के आस्तिेक कवच को भेद नही पा रहा#  कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की कैलाश मानसरोवर यात्रा में भाजपा ने ब्रहमासत्र चलाया, राहुल गांधी के नॉनवेज खाने की अफवाह फैलाई गई परन्तुर चल नही पाया, कांग्रेस कार्यकर्ताओं से खचाखच भरे स्टेडियम में राहुल गांधी अपना भाषण खत्म करके लौट गए थे. लेकिन अचानक वह अपनी सीट से उठे और माइक तक आकर कहा कि पिछले दिनों उनका विमान अचानक गिरने लगा. जब विमान तेजी से गिर रहा था, तो उनको लगा कि अब तो गाड़ी गई. जब वह उस दुर्घटना से बाल-बाल बच गए तो उन्होंने मन ही मन कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जाने का फैसला किया. विमान के दुर्घटना से बचने की यह घटना 26 अप्रैल की थी. अब इसकी जांच में यह बात सामने आ चुकी है कि राहुल वाकई जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे.

Presented by- हिमालयायूके- हिमालय गौरव उत्‍तराखण्‍ड   www.himalayauk.org 

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी कैलाश मानसरोवर तीर्थयात्रा पर निकले हुए हैं. इसी के तहत राहुल गांधी 31 अगस्त को नेपाल पहुंचे थे. राहुल गांधी नेपाल की ओर से कैलाश मानसरोवर यात्रा कर रहे हैं नेपाल पहुंचते ही कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी एक बार फिर विवादों में फंस गए. एक बार फिर उनके खाने को लेकर विवाद शुरू हो गया.
यह पहली बार नहीं है कि राहुल गांधी के खाने को लेकर विवाद हुआ है. कर्नाटक चुनाव कैंपेन के दौरान भी मंदिर जाने से पहले राहुल गांधी के नॉनवेज खाने की अफवाह फैलाई गई थी. हालांकि इस बात की कोई पुष्टिल नहीं हुई थी.
नेपाल पहुंचकर राहुल गांधी ने काठमांडू के आनंद भवन स्थिीत वूटू फूड बुटिक में खाना खाया. राहुल गांधी के इसी खाने पर विवाद हो गया. नेपाली मीडिया में खबर छपी कि राहुल गांधी ने नॉनवेज यानी मांसाहारी खाना खाया. नेपाली मीडिया के अनुसार राहुल ने इस रेस्टोरेंट की फेमस नॉनवेज डिश नेवारी डिश खाई जिसके तहत उन्होंने चिकन मोमो, चिकन कुरकुरे और बंदेल की डिश ऑडर की थी. इसके बाद विवाद हो गया कि राहुल गांधी ने हिंदुओं की भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया है. सोशल मीडिया पर राहुल गांधी के खिलाफ मैसेज शेयर होने लगे.

रेस्टोरेंट के अनुसार राहुल गांधी ने वेज खाना खाया. रेस्टोरेंट की ओर से कहा गया कि मीडिया की तरफ से काफी पूछताछ की जा रही है कि कांग्रेस अध्यक्ष ने वूटू में क्या खाया. उन्होंने मेन्यू देखकर शुद्ध शाकाहारी भोजन ऑर्डर किया था. वूटू ने उनके खाने के संबंध में किसी मीडिया संस्थान को कोई बयान जारी नहीं किया है राहुल गांधी ने रेस्टोरेंट में फेमस वेज थाली संडेको वेज प्लेटर ऑर्डर की थी. इसमें कई तरह की सब्जिेयां और साग परोसी जाती है.

रेस्टोरेंट के अनुसार राहुल गांधी ने वेज खाना खाया. रेस्टोरेंट की ओर से कहा गया कि मीडिया की तरफ से काफी पूछताछ की जा रही है कि कांग्रेस अध्यक्ष ने वूटू में क्या खाया. उन्होंने मेन्यू देखकर शुद्ध शाकाहारी भोजन ऑर्डर किया था. वूटू ने उनके खाने के संबंध में किसी मीडिया संस्थान को कोई बयान जारी नहीं किया है राहुल गांधी ने रेस्टोरेंट में फेमस वेज थाली संडेको वेज प्लेटर ऑर्डर की थी. इसमें कई तरह की सब्जिेयां और साग परोसी जाती है.
हालांकि विवाद के बाद वूटू Vootoo Food Voutique ने अपने फेसबुक पेज पर सफाई दी. रेस्टोरेंट के अनुसार राहुल गांधी ने वेज खाना खाया. रेस्टोरेंट की ओर से कहा गया कि मीडिया की तरफ से काफी पूछताछ की जा रही है कि कांग्रेस अध्यक्ष ने वूटू में क्या खाया. उन्होंने मेन्यू देखकर शुद्ध शाकाहारी भोजन ऑर्डर किया था. वूटू ने उनके खाने के संबंध में किसी मीडिया संस्थान को कोई बयान जारी नहीं किया है राहुल गांधी ने रेस्टोरेंट में फेमस वेज थाली संडेको वेज प्लेटर ऑर्डर की थी. इसमें कई तरह की सब्जिेयां और साग परोसी जाती है. रेस्टोरेंट के अनुसार राहुल ने अचारी आलू और सादा वेज खाना खाया, जिसमें क्रिहस्पी कॉर्न आदि शामिल था. कांग्रेस के अनुसार जब होटल प्रबंधन ने कहा दिया कि राहुल गांधी ने शुद्ध शाकाहारी खाना खाया तो फिर बाकी का विवाद बेकार है. ये बीजेपी का अजेंडा है. बीजेपी राहुल गांधी की मानसरोवर यात्रा में विघ्न पैदा करना चाहती है. ये देव और दानवों की लड़ाई है.

राहुल गांधी की कैलाश मानसरोवर यात्रा 12 दिन की है. वह दिल्ली से उड़ान भरकर 31 अगस्त शुक्रवार को शाम 5.30 बजे काठमाण्डू आए थे और काठमाण्डू के होटेल यार्डिीसन में ठहरे थे. मानसरोवर यात्रा के दौरान राहुल गांधी काठमांडू होते हुए चीन की तरफ गए हैं.
यह पहली बार नहीं है कि राहुल गांधी के खाने को लेकर विवाद हुआ है. कर्नाटक चुनाव कैंपेन के दौरान भी मंदिर जाने से पहले राहुल गांधी के नॉनवेज खाने की अफवाह फैलाई गई थी. हालांकि इस बात की कोई पुष्टिल नहीं हुई थी.

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की कैलाश मानसरोवर यात्रा – राहुल गांधी ने इस साल 29 अप्रैल को कांग्रेस महाधिवेशन में दिल्ली के इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में बड़े नाटकीय ढंग से इस यात्रा का व्रत लेने की बात कही थी.
कांग्रेस कार्यकर्ताओं से खचाखच भरे स्टेडियम में राहुल गांधी अपना भाषण खत्म करके लौट गए थे. लेकिन अचानक वह अपनी सीट से उठे और माइक तक आकर कहा कि पिछले दिनों उनका विमान अचानक गिरने लगा. जब विमान तेजी से गिर रहा था, तो उनको लगा कि अब तो गाड़ी गई. जब वह उस दुर्घटना से बाल-बाल बच गए तो उन्होंने मन ही मन कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जाने का फैसला किया. विमान के दुर्घटना से बचने की यह घटना 26 अप्रैल की थी. अब इसकी जांच में यह बात सामने आ चुकी है कि राहुल वाकई जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे.

जाहिर है ऐसे लम्हे में किसी को भी भगवान की ही याद आएगी. लेकिन राहुल गांधी ने कांग्रेस के अधिवेशन में इसकी घोषणा की तो इसका राजनैतिक मतलब होना ही था. अब जब वह 12 दिन की यात्रा पर निकल गए हैं और उनके यात्रा मार्ग को सुरक्षा कारणों से गुप्त रखा गया है, तो देश में आरोप प्रत्यारोप का दौर चल रहा है. बीजेपी ने तो उन्हें ‘चाइनीज गांधी’ तक कह दिया.
अब राहुल भले ही भोले बाबा के भक्त बनकर कैलाश मानसरोवर की यात्रा कर रहे हों, लेकिन देश में मंदिर-मस्जिद के इर्द-गिर्द घूमने वाली राजनीति में उनकी यात्रा के चुनावी नफे नुकसान देखे जा रहे हैं. राहुल गांधी ने पिछले कुछ वर्ष में जिस तरह मंदिर-दर्शन को अपने राजनैतिक कार्यक्रमों का अभिन्न अंग बना लिया है, उससे बड़ी मेहनत से कांग्रेस पर थोपी गई मुस्लिमपरस्ती की छवि जरा धूमिल हुई है. अब जब वे कैलाश मानसरोवर पहुंच रहे हैं तो उनकी आस्तिक हिंदू की छवि और मजबूत होगी, जो व्हाट्सएप पर लंबे समय से रची गई उनकी एक दूसरी छवि का भंजन करेगी. और इस बात में कोई दोराय नहीं होना चाहिए की राहुल इस छवि का भंजन करने के मिशन में लगे हुए हैं.

जानकारों की मानें तो पिछले दिनों उन्होंने अपने करीबियों से कहा था कि ‘‘उनकी पप्पू वाली छवि गढ़ने में उनकी प्रतिद्वंद्वी पार्टी ने एक हजार करोड़ रुपये खर्च किए हैं.   राहुल अपने करीबी लोगों से यह भी कहते सुने गए हैं कि उनके खिलाफ इतना षडयंत्र हो चुका है कि उन्हें किसी तरह के आरोप से बिलकुल डर नहीं लगता. वह डंके की चोट पर कह रहे हैं कि 2019 में बाजी पलट जाएगी. वैसे बाजी का पलटना या न पलटना तो जनता के हाथ में है. लेकिन राहुल जैसे ही मंदिर या किसी धार्मिक कार्यक्रम में शामिल होते हैं, उनके विरोधी बहुत तेजी से सक्रिय हो जाते हैं. इसका इतना मतलब तो है ही कि उनके विरोधी उनके मंदिर दर्शन से कहीं न कहीं चुनौती महसूस कर रहे हैं.

जानकारों की मानें तो पिछले दिनों उन्होंने अपने करीबियों से कहा था कि ‘‘उनकी पप्पू वाली छवि गढ़ने में उनकी प्रतिद्वंद्वी पार्टी ने एक हजार करोड़ रुपये खर्च किए हैं.   राहुल अपने करीबी लोगों से यह भी कहते सुने गए हैं कि उनके खिलाफ इतना षडयंत्र हो चुका है कि उन्हें किसी तरह के आरोप से बिलकुल डर नहीं लगता. वह डंके की चोट पर कह रहे हैं कि 2019 में बाजी पलट जाएगी. वैसे बाजी का पलटना या न पलटना तो जनता के हाथ में है. लेकिन राहुल जैसे ही मंदिर या किसी धार्मिक कार्यक्रम में शामिल होते हैं, उनके विरोधी बहुत तेजी से सक्रिय हो जाते हैं. इसका इतना मतलब तो है ही कि उनके विरोधी उनके मंदिर दर्शन से कहीं न कहीं चुनौती महसूस कर रहे हैं.

जाहिर है, इस यात्रा से लौटने के तुरंत बाद राहुल गांधी खुद को तीन राज्यों के विधानसभा चुनाव में झोंक देंगे. इस दौरान होने वाली चुनावी सभाओं में वे कैलाश मानसरोवर यात्रा के कुछ प्रसंग जरूर सुनाएंगे. और इस तरह खुद को पक्के आस्तिक हिंदू की तरह पेश करते हुए, वे संघ और भाजपा पर हमले बोलेंगे. और लोगों को हिंदू धर्म और हिंदुत्व का फर्क बताएंगे. इस सारे ज्ञान चिंतन का निश्चित तौर पर राजनैतिक अर्थ होगा ही. असल में अपने इस नए आस्तिक अवतार के जरिये राहुल ने भाजपा के सामने यक्ष प्रश्न खड़ा कर दिया है. यह एक ऐसा प्रश्न है जिससे निपटने के लिए भाजपा को राजीव गांधी के जमाने से चली आ रही अपनी नीति को बदलना पड़ेगा. कांग्रेस को मुसलमानों की पार्टी कहने का भाजपा का ब्रह्मास्त्र राहुल के नए आस्तिक कवच को भेद नहीं पा रहा है.
राहुल की कांग्रेस सिर्फ मंदिर दर्शन तक नहीं सिमटी है. उसने तीन तलाक जैसे मुद्दे पर भाजपा को खुला मैदान देकर, इस मुद्दे के सांप्रदायिक इस्तेमाल की गुंजाइश बहुत सीमित कर दी. इसी तरह अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के मुद्दे पर राहुल ने ऐसी चुप्पी साधी है कि इस मामले में तमाम कोशिशों के बावजूद कांग्रेस को मंदिर विरोधी बताना कठिन हो रहा है. जबकि, एक जमाने में गर्भगृह का ताला खुलवाने के बावजूद राजीव गांधी इस आरोप से बच नहीं पाए थे.
लेकिन बीजेपी इस मैदान की पक्की खिलाड़ी है. बहुत संभव है कि राहुल के कैलाश मानसरोवर से लौटने तक उसके पास राहुल के स्वागत के लिए नए शॉट्स हों. फिलहाल आस्था की राजनीति के टेनिस में राहुल ने कुछ पॉइंट तो बटोर ही लिए हैं.

इसी बीच आज पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने  कहा कि पार्टी एकजुट है और राहुल गांधी के साथ है. देश में मौजूदा समय में जो हालात नजर आ रहे हैं, उसे देखते हुए राहुल गांधी 2019 के चुनाव के बाद प्रधानमंत्री बन सकते हैं. वही एससी-एसटी एक्ट में संशोधन कर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलटने वाले सरकार के कदम का विरोध तेज हो रहा है अब सवर्ण संगठनों का विरोध सरकार और बीजेपी के लिए परेशानी का कारण बनता जा रहा है. सबसे ज्यादा विरोध मध्यप्रदेश में दिख रहा है, जहां, दो महीने के भीतर विधानसभा का चुनाव होना है.  बीजेपी नेता प्रभात झा, नरेंद्र सिंह तोमर जैसे कई दूसरे नेताओं को भी सवर्ण संगठनों की तरफ से घेरा जा रहा है. उनसे जवाब मांगा जा रहा है. लेकिन, बीजेपी के इन सवर्ण नेताओं के लिए उन्हें समझा पाना मुश्किल हो रहा है. विरोध की आग मध्यप्रदेश से आगे भी पहुंच रही है. बिहार और यूपी समेत दूसरे प्रदेशों में एससी-एसटी एक्ट के मुद्दे पर विरोध हो रहा है. बिहार के बेगूसराय, गया, नालंदा और बाढ़ जिलों में सवर्ण संगठनों ने बंद भी बुलाया. कई जगह पर नेशनल हाईवे भी जाम किया और जमकर विरोध किया. इससे सबसे ज्यादा नुकसान बीजेपी को होता दिख रहा है. इन सवर्ण संगठनों की तरफ से विरोध के क्रम में अगले चुनाव में नोटा दबाने की अपील की जा रही है.  बीजेपी को अबतक सवर्णों की पार्टी कहा जाता रहा है. ब्राम्हण –बनिया की पार्टी कही जाने वाली बीजेपी ने धीरे-धीरे समाज के हर तबके में अपना विस्तार भी किया है  अब बीजेपी को सबसे बडा नुकसान होने जा रहा है बीजेपी सशंकित भी है और चिंतित भी. तभी तो पार्टी नेताओं और मुख्यमंत्रियों को सवर्ण तबके को समझाने की जिम्मेदारी दी गई है लेकिन, सवर्ण मतदाताओं के भीतर अब यह बात घर कर गई है कि एससी-एसटी तबके को साधने के लिए सरकार ने उनके साथ अन्याय किया है. अब इस बात को लेकर उनका विरोध शुरू हो गया है. जिसका सीधा सीधा लाभ कैलाश मानसरोवर यात्रा से लौटे राहुल ले उडे तो कोई आश्‍चर्यजनक नही होगा-

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