वन विभाग ने प्राकृतिक तालाब बनाने का करोडों का बजट डकारा

प्यास से व्याकुल वन्य जीव.# मर रहे है या मारे जा रहे है #उत्तराखण्ड वन महकमे का नकारापन..# आबादी वाले क्षेत्रो मे आने को मजबूर प्यास से व्याकुल वन्य जीव..# वन विभाग की उदासीनता के कारण अकाल मौत का शिकार हो रहे है वन्य जीव..#वन्यजीवों की प्यास बुझाने के लिए करोड़ों रुपए की लागत से बनाए गए वाॅटर होल प्राकृतिक तालाब सूखे #अनेक क्षेत्रों में तो वॉटर होल ही नहीं बनाए जहां प्राकृतिक तालाब बने हूए है वहां नियमित रूप से पानी नही भरा जाता#
मोहन जोशी की हिमालयायूके न्‍यूज पोर्टल तथा दैनिक समाचार पत्र के लिए एक्‍सक्‍लूसिव रिपोर्ट

लालकुआ(नैनीताल)-
इस भीषण गर्मी में पानी की प्यास से व्याकुल वन्य जीव आबादी वाले क्षेत्रों में आने को मजबूर हो रहे हैं जंगलों में वन्यजीवों की प्यास बुझाने के लिए करोड़ों रुपए की लागत से बनाए गए वाॅटर होल, प्राकृतिक तालाब सूखे हुए हैं  तथा अनेक क्षेत्रों में तो वॉटर होल ही नहीं बनाए गए हैं इसे वन विभाग का नकारापन कहे या लापरवाही जिन पोखरों को बनाने व उन में पानी भरने के लिए विभाग को करोड़ों रुपए का बजट आवंटित किया जाता है उसके बावजूद भी कही वॉटर होल ही नहीं है और जहां है भी हैं तो उन में पानी ही नहीं है। इधर आरक्षित वन क्षेत्र टांडा की बात करे तो वहां कई वॉटर होल व प्राकृतिक तालाब बने हूए है लेकिन इनमे नियमित रूप से पानी नही भरा जाता है आरओ टांडा गणेश त्रिपाठी का दावा है कि वॉटर होल,तालाब मे नियमित रूप से टैंकर से पानी भरा जाता है ।इधर आरक्षित वन क्षेत्र गोला रेंज मे वन्य जीवों के पीने के पानी के लिए एक भी वॉटर होल वन विभाग द्वारा नही बनाए गए है, इस क्षेत्र मे जो प्राकृतिक गढढे या तालाब है बरसात मे तो भरे रहते है उसके बाद सूख जाते है आर ओ गौला चन्दन सिह अधिकारी ने बताया कि रेंज मे जहां भी वाॅटर होल,एवं प्राकृतिक तालाब है उसमे टैंकर से पानी भरा जाता है ।इधर आरक्षित वन क्षेत्र डौली में जगह-जगह वॉटर होल भी बनाए गए हालाकिं यहां विभाग द्वारा उनमे पर्याप्त मात्रा मे पानी की आपूर्ती की जा रही है यहां अनेक वॉटर होल व नेचुरल तालाब भी बने है जिनमे नियमित रुप से पानी भरे होने की जानकारी मिली है। आरओ डौली आरपी जोशी ने यहां आधा दर्जन आर्टीजन व टैंकर से वॉटर होल मे नियमित पानी भरने की बात कही उन्होने कहा यहां पर्याप्त मात्रा मे पानी की उपलब्धता है। कुल मिलाकर पूरा मामला देखा जाए तो जो तराई के क्षेत्र है जहां वॉटर लेबल ऊपर है तथा गौला नदी व नालो मे बारह महीने पानी रहता है वहां विभाग द्वारा समुचित व्यवस्था की गई है क्योकि आसानी से व कम खर्चे मे वन्य जीवों के लिए पेयजल आपूर्ती हो जाती है दूसरी ओर भावरी क्षेत्रो मे वाटर लेबल डाउन होने के कारण आर्टीजन आदि की सुविधा का अभाव है इन क्षेत्रो मे नदी,नाले भी गर्मी आते ही सूख जाते है यहां पानी की सप्लाई का जरिया एकमात्र टैंकर ही बचता है ऐसे क्षेत्रो मे वन विभाग द्वारा समुचित पानी की सप्लाई न होने से वन्य जीव प्यास से व्याकुल होकर रिहाईशी क्षेत्रो मे आने को मजबूर है। उधर तराई पूर्वी वन प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी नितीश मणी त्रिपाठी ने बताया की विभाग द्वारा जो वाॅटर होल बनाये गये है वह हम लगातार टैंकरों के माध्यम से पानी पहुॅचा रहे है इसके अलावा जहां पर जरूरत के हिसाब से वाॅटर होल बनाये जाने है वह इस वित्तीय वर्ष मे चिन्हित किये जायेगे ।

पराग मधुकर धकाते,वन संरक्षक- गर्मी मे पानी की समस्या तो है ही लेकिन विभाग ने इसके सारे इंतजाम कर रखे है हमने हर डिवीजन मे पन्द्रह से लेकर बीस वाॅटर होल बनवा रखें है सबसे अधिक तराई पूर्वी मे वाॅटर होल का निर्माण किया गया है जिनमे वन्यजीवों के लिए नियमित पानी की आपूर्ति की जा रही है। चूंकि जंगलो के नजदीक ग्रामीण क्षेत्र है इसलिए वन्यजीव पानी की तलाश मे कभी कभार आ जाते है लेकिन फिर भी जहां पर आवश्यक्ता होगी वहां पर उचित कार्यवाही की जायेगी ।
पानी की तलाश मे भटक रहे दो हाथियो ट्रेन से कटकर मौत..#

पंतनगर के हल्दी रेलवे स्टेशन के पास सोमवार की तडके दिल्ली रानीखेत एक्सप्रेस से दो हाथियों की टक्कर के बाद मौत हो गई घटना सुबह 4:30 बजे की है जब दिल्ली रानीखेत एक्सप्रेस पंतनगर के हल्दी रेलवे स्टेशन के पास पहुंची थी तभी दो हाथी जिनकी उम्र लगभग 2 वर्ष बताई जा रही है रानीखेत एक्सप्रेस ट्रेन से टकरा गई जिनकी मौत हो गई हाथियों की मौत की खबर से वन महकमे में हड़कंप मच गया मौके पर डीएफओ समेत तमाम वन विभाग के आला अधिकारी पहुंचे पर प्रथमदृष्टया यह बताया जा रहा है कि हाथी पानी की तलाश में इस और आए हो, क्योंकि टांडा रेंज में गर्मी के चलते वन विभाग के बनाए गए ज्यादातर पोखरे सूख गए हैं लिहाजा अब वन्य आबादी वाले इलाके की ओर रुख कर रहे हैं फिलहाल वन विभाग के तराई केंद्रीय वन प्रभाग प्रभागीय बना अधिकारी नितीश मणि त्रिपाठी का कहना है कि हाथी की उम्र 2 से 3 वर्ष है और इस मामले में वन विभाग में जांच भी शुरू कर दी है वहीं स्थानीय लोगों का कहना है की जंगलों में पानी की भारी कमी है लिहाजा वन्य जीव आबादी वाले इलाकों में पानी तलाशते हुए आ रहे हैं इससे पूर्व में दो हिरन पानी की तलाश में आबादी वाले इलाके में घुस गए थे जिनमें एक को कुत्तों ने अपना निवाला बना लिया था और दूसरे को स्थानीय लोगों ने बचा लिया था इसी तरह बिन्दुखत्ता क्षेत्र में तेंदुआ भी पानी की तलाश में आया था लेकिन वह 20 बकरियों का शिकार कर जंगल में छिप गया हालांकि अधिकारी जंगलों के नदी नालों में पर्याप्त पानी होने की बात कह रहे हैं लेकिन अगर जंगलों में पानी होता तो वन्य जीव आबादी का रूप नहीं करते ?

कुत्तों ने हिरण को घेर कर मारा

लालकुआं – पानी की तलाश में गोला रेंज के जंगल से अपने झुंड से भटक कर रविवार की सुबह बिन्दुखत्ता के इंदिरानगर क्षेत्र में घुस आए दो हिरणों में से एक को कुत्तों ने दोडा दोडा कर मार डाला। जबकि दूसरे हिरण को ग्रामीणों ने किसी तरह से पकड कर उसकी जान बचाई और पकड़ कर वन विभाग के हवाले कर दिया। जिसे बाद मे वन कर्मियों ने सुरक्षित जंगल में छोड़ दिया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार रविवार की प्रातः पानी की तलाश में गोला रेंज के जंगल से भटककर बिन्दुखत्ता के इंदिरानगर प्रथम स्थित आबादी वाले क्षेत्र में घुस आए दो हिरणों के पीछे क्षेत्र के कुत्ते दौड़ पड़े। कुत्तों ने उक्त हिरणों में से एक को बुरी तरह से घायल कर दिया जिससे एक की मौत हो गयी इस बीच मौंके पर पहुॅचे ग्रामीणों ने कुत्तों से घिरे दूसरे हिरण को किसी तरह से बचा लिया। मामले की सूचना ग्रामीणों द्वारा गोला रेंज के वन क्षेत्राधिकारी चंदन सिंह अधिकारी को दी गई। जिसके बाद मौके पर पहुंचे वन कर्मियों ने हिरण को एक वाहन में डालकर गोला के जंगल में छोड़ दिया। साथ ही मृत हिरण का पोस्टमार्टम कराकर उसे दफना दिया। मृतक हिरण की उम्र 1 वर्ष के आसपास बताई गई।

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