03 सितंबर 2025 भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी पंचांग जीवन में शुभ-अशुभ की जानकारी ;आध्यात्मिक समाचार –  अनंत चतुर्दशी 6 सितंबर शनिवार  

आज का पंचांग आपके दैनिक जीवन में शुभ-अशुभ की जानकारी देता है &  परिवर्तिनी एकादशी व्रत कथा: भाद्रपद शुक्ल एकादशी को परिवर्तिनी एकादशी कहते हैं। इसे पार्श्व एकादशी, पद्म एकादशी आदि नामों से भी जाना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के वामन अवतार की पूजा की जाती है। मान्यता है इस एकादशी पर भगवान विष्णु शयन करते हुए करवट भी लेते हैं। & ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधाय नम:। (इस मंत्र का जाप करने से बुध ग्रह की कृपा मिलती है।) & मूंग के सवाकिलो लड्डू भेंट करें।  & अपामार्ग के वृक्ष में जल चढ़ाएं। (यह उपाय आपके जीवन में सकारात्मकता लाएगा। & विशेष- पद्मा (पार्श्वपरिवर्तनी) एकादशी व्रत-(स्मार्त/वैष्णव)/डोल ग्यारस & हरे फ़ल खाकर अथवा दूध पीकर यात्रा पर निकलें।

कच्चे धागे में 14 गांठें लगाकर, हल्दी या केसर से रंगा हुआ धागा बांधते हैं & सितंबर 2025 के महीने में दो ग्रहण &  21 सितंबर 2025 को सूर्य ग्रहण

अनंत चतुर्दशी 2025 में 6 सितंबर को शनिवार & । भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि 6 सितंबर को लगभग 03:12 AM बजे से शुरू होगी। इस तिथि का समापन 7 सितंबर को लगभग 01:41 AM पर होगा। & अनंत चतुर्दशी की तिथि में 6 सितंबर को 09:25 PM से 01:44 AM (रात 7–8 सितंबर की मध्यरात्रि तक) के बीच का समय भी अच्छा है। इसके अलावा 7 सितंबर को 04:36 AM से 06:02 AM के बीच का समय भी शुभ है।

2025 में परिवर्तिनी एकादशी का व्रत 3 सितंबर को बुधवार &  तांबा, चांदी, चावल और दही का दान फलदायी & मान्यता है कि परिवर्तिनी एकादशी पर चातुर्मास के दौरान शयन करते हुए भगवान विष्णु करवट लेते हैं। इसलिए इस दिन भगवान विष्णु का पूजन करना चाहिए। इस दिन तांबा, चांदी, चावल और दही का दान फलदायी माना जाता है। वहीं यह व्रत वैवाहिक जीवन के लिए भी शुभ माना गया है।

 03 सितंबर 2025 को भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि है। इस तिथि पर पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र और आयुष्मान योग का संयोग बन रहा है। बुधवार को अभिजीत मुहूर्त नहीं रहेगा। राहुकाल दोपहर 12:16 − 13:50 मिनट तक

 भाद्रपद शुक्ल एकादशी पर परिवर्तिनी एकादशी का व्रत रखा जाता है। इसे पद्मा एकादशी पार्श्व एकादशी ( जयंती एकादशी जल झुलनी एकादशी और वामन एकादशी भी कहा जाता है। 2025 में परिवर्तिनी एकादशी का व्रत 3 सितंबर को बुधवार के दिन । मान्यता है कि इस एकादशी के दिन भगवान विष्णु के वामन रूप की पूजा करने से पाप और कष्ट दूर होते हैं।

यह पर्व भगवान विष्णु और गणपति – दोनों को समर्पित है। इस दिन भगवान विष्णु के अनंत रूप की पूजा की जाती है। व्रतधारी अपनी कलाई पर अनंत सूत्र (कच्चे धागे में 14 गांठें लगाकर, हल्दी या केसर से रंगा हुआ धागा) बांधते हैं। वहीं महाराष्ट्र और देश के अन्य भागों में गणेशोत्सव के अंतिम दिन अनंत चतुर्दशी को ही गणपति विसर्जन भी होता है।

भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को इस एकादशी की व्रत कथा सुनाई

भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को इस एकादशी की व्रत कथा सुनाई थी। श्रीकृष्ण कहते हैं कि हे राजन! त्रेतायुग में बलि नामक एक दैत्य मेरा परम भक्त था। वो विधि विधान मेरा पूजन किया करता था और रोजाना ही ब्राह्मणों का पूजन और यज्ञ के आयोजन करता था। लेकिन इंद्र से द्वेष के कारण उसने इंद्रलोक को जीत लिया।

इस कारण सभी देवता एकत्र होकर भगवान के पास गए। बृहस्पति सहित इंद्रादिक देवता वेद मंत्रों द्वारा भगवान का पूजन और स्तुति करने लगे। देवताओं की पूजा से प्रसन्न होकर मैंने वामन रूप धारण लिया और फिर राजा बलि को जीत लिया।

इतनी वार्ता सुनकर युधिष्ठिर बोले कि हे जनार्दन! आपने वामन रूप धारण करके उस महाबली दैत्य को किस प्रकार जीता? आगे श्रीकृष्ण ने कहा कि मैने वामन रूप धारण करके राजा बलि की परीक्षा ली। बलि ने तीनों लोकों पर अपना अधिकार कर लिया था। लेकिन उसके अंदर एक सबसे बड़ा गुण था कि वह कभी किसी ब्राह्मण को खाली हाथ नहीं जाने देता था। वह ब्राह्मण को दान में मांगी वस्तु अवश्य देता था। मैंने वामन रूप में बलि से तीन पग भूमि मांगी। बलि ने वामन स्वरूप भगवान विष्णु की प्रार्थना को स्वीकार कर लिया और उसने तीन पग जमीन देने का वचन दे दिया।

वचन मिलते ही मैंने विराट रूप धारण किया और एक पांव से पृथ्वी तो दूसरे पांव की एड़ी से स्वर्ग और पंजे से ब्रह्मलोक को नाप लिया। अभी तीसरा पग बचा था और राजा बलि के पास देने को कुछ भी नहीं बचा था। इसलिए बलि ने वचन पूरा करते हुए अपना सिर मेरे पैरों के नीचे रख दिया और इस तरह से भगवान वामन ने तीसरा पैर राजा बलि के सिर पर रख दिया। राजा बलि की वचन प्रतिबद्धता से प्रसन्न होकर भगवान वामन ने उसे पाताल लोक का स्वामी बना दिया।

 21 सितंबर 2025 को रविवार – कृष्ण पक्ष की अमावस्या -सूर्य ग्रहण भी लगने जा रहा है

 21 सितंबर 2025 को रविवार का दिन है। पंचांग के अनुसार, 21 सितंबर, 2025 को आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि होगी। इस दिन सूर्योदय सुबह 6:09 बजे और सूर्यास्त शाम के 6:19 बजे पर होगा। दिन के नक्षत्र पूर्वाफाल्गुनी और फिर उत्तराफाल्गुनी होंगे, जबकि चंद्रमा सिंह राशि में और फिर कन्या राशि में संचार करेंगे। 21 सितंबर 2025 को साल का दूसरा और अंतिम सूर्य ग्रहण भी लगने जा रहा है।

 यह आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या की तिथि होगी। 21 सितंबर को सूर्य ग्रहण रात 11:00 PM से शुरू होगा और 22 सितंबर की सुबह करीब 3:24 AM तक ग्रहण जारी रहेगा। इस तरह सूर्य ग्रहण सितंबर 2025 की अवधि करीब 4.5 घंटे की रहेगी।

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