14 जनवरी 2026 -मकर संक्रांति- ग्रहों का दुर्लभ संयोग & षटतिला  एकादशी व्रत, मकर संक्रांति 14 और 15 & संक्रांति पर उपाय & भाग्य के बंद दरवाजे खोल सकता है. खास संयोग का लाभ उठाने के लिए..

14 जनवरी 2026, बुधवार को मकर संक्रांति का महापर्व मनाया जाएगा. इस दिन सूर्य देव अपने पुत्र शनिदेव की राशि मकर में प्रवेश करेंगे. ज्योतिष में सूर्य और शनि का यह मिलन बेहद प्रभावशाली माना जाता है, जो कई राशियों के भाग्य के बंद दरवाजे खोल सकता है. & खास संयोग का लाभ उठाने के लिए मकर संक्रांति के दिन शिवलिंग पर कच्चे दूध या गंगाजल में काले तिल मिलाकर अर्पित करें. साथ ही आलस्य का त्याग सेवा भाव आपके ‘गोल्डन पीरियड’ को और भी शानदार बना देगा. BY CHANDRA SHEKHAR JOSHI 9412932030

14  जनवरी को माघ कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि और बुधवार का दिन है। एकादशी तिथि बुधवार शाम 5 बजकर 53 मिनट तक रहेगी। इसके अलावा 14  जनवरी को षटतिला एकादशी का व्रत किया जाएगा। बुधवार देर रात 3 बजकर 4 मिनट तक अनुराधा नक्षत्र रहेगा। इसके अलावा 14  जनवरी को मकर संक्रांति का त्यौहार मनाया जाएगा।  14 जनवरी को दोपहर बाद 3 बजकर 6 मिनट पर सूर्यदेव धनु राशि से निकलकर मकर राशि में गोचर कर रहे हैं।  इसके बाद सूर्य 13 फरवरी की भोर 4 बजकर 8 मिनट तक मकर राशि में ही गोचर करते रहेंगे, उसके बाद कुंभ राशि में प्रवेश कर जाएंगे। सूर्य के मकर राशि में प्रवेश को मकर संक्रांति के नाम से भी जाना जाता है। लिहाजा बुधवार को मकर संक्रांति है। मकर संक्रांति को खिचड़ी भी कहा जाता है। 

 मकर संक्रांति का त्यौहार 14 जनवरी 2026 को मनाया जाएगा। मकर संक्रांति को उत्तरायण, खिचड़ी, तिल संक्रांत आदि नामों से जाना जाता है। इस वर्ष मकर संक्रांति का दिन बहुत ही फलदायी माना जा रहा है। दरअसल, इस दिन अनुराधा नक्षत्र का संयोग और सर्वार्थसिद्धि योग का शुभ संयोग बन रहा है। इतना ही नहीं मकर संक्रांति के दिन सूर्य और शुक्र की युति से शुक्रादित्य राजयोग का निर्माण भी होगा।

14  जनवरी 2026 का शुभ मुहूर्त माघ कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि-  14 जनवरी को शाम 5 बजकर 53 मिनट तक  अनुराधा नक्षत्र- 14 जनवरी को देर रात 3 बजकर 4 मिनट तक  14 जनवरी 2026 व्रत-त्यौहार- षटतिला  एकादशी व्रत, मकर संक्रांति  & माघ माह में मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है। हिंदू धर्म में यह दिन विशेष महत्व रखता है। इस दिन गंगा समेत अन्य पवित्र नदियों में स्नान का विधान है। कहते हैं मकर संक्रांति के दिन स्नान-दान करने से पुण्यकारी लाभ मिलते हैं। इतना ही नहीं व्यक्ति के धन-धान्य और मान-सम्मान में भी वृद्धि होती है। आपको बता दें कि जब सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं तब मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है।

14 जनवरी को माघ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि है। इस तिथि पर चंद्रमा वृश्चिक राशि मौजूद रहेंगे। इस राशि के स्वामी मंगलदेव होते हैं। वहीं इस दिन मकर संक्रांति का त्योहार भी है।

14 जनवरी 2026 को माघ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि है। इस एकादशी को षटतिला एकादशी के नाम से जाना जाता है। इसके अलावा मकर संक्रांति का त्योहार मनाया जाएगा। इस तिथि पर अनुराधा नक्षत्र और गांदा योग का संयोग बन रहा है। दिन के शुभ मुहूर्त की बात करें तो बुधवार को अभिजीत मुहूर्त नहीं रहेगा। राहुकाल दोपहर 12:26 − 13:44 मिनट तक रहेगा। चंद्रमा वृश्चिक राशि में संचरण करेंगे।

 संक्रांति इसलिए खास है क्योंकि न्याय के देवता शनिदेव कुछ चुनिंदा राशियों पर अपनी विशेष दृष्टि डालेंगे. सूर्य का शनि की राशि में जाना कर्मों का फल देने वाला समय है, जिससे लंबे समय से अटके हुए कार्य पूर्ण होने की संभावना है.
 शास्त्रों के अनुसार सूर्य जब भी एक से दूसरे राशि में प्रवेश करता है तो इसे संक्रांति कहा जाता है। इस बार कुछ पंचांग में मकर संक्रांति 14 जनवरी, तो वहीं कुछ में 15 जनवरी को बताया गया है। वैसे स्नानदान का ज्यादा महत्व सुबह के समय रहता है। लिहाजा मकर संक्रांति का स्नानदान 15 जनवरी के दिन किया जाना ज्यादा लाभ दायक सिद्ध होगा। लेकिन जो लोग गुरुवार को खिचड़ी नहीं खाते हैं वे 14 जनवरी को ही मकर संक्रांति मनाएंगे। 

पंचांग के माध्यम से समय और काल की सटीक गणना  & तिथि के नाम- प्रतिपदा, द्वितीया, तृतीया, चतुर्थी, पंचमी, षष्ठी, सप्तमी, अष्टमी, नवमी, दशमी, एकादशी, द्वादशी, त्रयोदशी, चतुर्दशी, अमावस्या/पूर्णिमा।

मेष राशि वालों के लिए ग्रहों का योग बहुत ही भाग्यशाली रहेगा। इस राशि के जो जातक नौकरी करते हैं उनका प्रमोशन का योग बन रहा है। साथ ही उन्हें अपने करियर में अपार सफलता भी प्राप्त होगा। सूर्य देव की कृपा से समाज में मान-सम्मान भी मिलेगा।

सिंह राशि वालों को किस्मत का भरपूर साथ मिलेगा। प्रतियोगी छात्रों को सफलता मिल सकती है। धन के मामले में सिंह राशि वालों को लाभ मिलेगा। अगर आप कुछ नया करना चाहते हैं तो यह समय अनुकूल है भाग्य आपका साथ देगा।

वृश्चिक राशि वालों के इस साल की मकर संक्रांति अत्यंत ही लाभदायकर रहेगी। उन्हें अचानक से धन की प्राप्ति होगी, जिससे आर्थित स्थिति में पहले से अधिक मजबूती आएगी। मानसिक शांति भी मिलेगी।

मकर राशि वालों के आय में बढ़ोतरी हो सकती है। इस राशि के कारोबारियों को व्यापार में कई गुना अधिक मुनाफा मिलेगा। रुके हुए सारे काम पूरे होंगे। परिवार में सुख-समृद्धि, संपन्नता और खुशहाली बनी रहेगी।

सूर्य के मकर राशि में प्रवेश को मकर संक्रांति के नाम से भी जाना जाता है। मकर संक्रांति को खिचड़ी भी कहा जाता है। सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करते ही खरमास या धनुर्मास भी समाप्त हो जाता है। लिहाजा शादी-ब्याह आदि शुभ कार्यों पर जो रोक लगी थी, वो सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करते ही हट जायेगी और फिर से शादियों का सीज़न शुरू हो जायेगा। कहीं-कहीं पर मकर संक्रान्ति को उत्तरायणी भी कहते हैं। उत्तरायण काल में दिन बड़े हो जाते हैं और रातें छोटी होने लगती हैं।

अशुभ फलों से बचने के लिये संक्रांति पर कौन–से उपाय : मेष राशि – करियर में आपको अपनी मेहनत का फल जरूर मिलेगा

सूर्यदेव आपके दसवें स्थान पर गोचर कर रहे है। जन्म कुंडली में यह स्थान आपके करियर और पिता की उन्नति से संबंध रखता है। सूर्य के इस गोचर से करियर में आपको अपनी मेहनत का फल जरूर मिलेगा। आप काफी आगे बढ़ेंगे। साथ ही इस दौरान आपके पिता की भी तरक्की सुनिश्चित होगी। लिहाजा इस दौरान सूर्य के शुभ फल बनाये रखने के लिये – सिर ढक्कर रखें। साथ ही काले और नीले रंग के कपड़े पहनना अवॉयड करें।

वृष राशि –

सूर्यदेव आपके नवे स्थान पर गोचर कर रहे है। जन्म कुंडली में नवा स्थान भाग्य का स्थान है। इस स्थान पर सूर्य के गोचर से आपके भाग्य में वृद्धि होगी। आप अपने काम में जितनी मेहनत करेंगे, उसका शुभ फल आपको अवश्य ही मिलेगा। साथ ही धार्मिक कार्यों में भी आपकी रुचि बढ़ेगी। लिहाजा अगले संक्रांति तक सूर्य के शुभ फलों को सुनिश्चित करने के लिये – घर में पीतल के बर्तनों का इस्तेमाल करें। साथ ही प्रतिदिन सूर्यदेव को नमस्कार करें।

मिथुन राशि – 

सूर्यदेव आपके आठवें स्थान पर गोचर कर रहे है। जन्म कुंडली में यह स्थान आयु से संबंध रखता है। इस स्थान पर सूर्य के गोचर से आपकी आयु में वृद्धि होगी और आपका स्वास्थ्य भी अच्छा रहेगा। लिहाजा इस दौरान सूर्य के शुभ फल सुनिश्ति करने के लिये-काली गाय या बड़े भाई की सेवा करें।

कर्क राशि – 

सूर्यदेव आपके सातवें स्थान पर गोचर कर रहे है। जन्म कुंडली में यह स्थान जीवनसाथी का होता है। इस स्थान पर सूर्य के गोचर से जीवनसाथी के साथ आपका तालमेल ठीक बना रहेगा और आपका वैवाहिक जीवन खुशहाल रहेगा। लिहाजा अगली संक्रांति तक सूर्यदेव के इस गोचर का शुभ फल बनाये रखने के लिये – स्वयं भोजन करने से पहले किसी दूसरे व्यक्ति को भोजन जरूर खिलाएं।

सिंह राशि –

सूर्यदेव आपके छठे स्थान पर गोचर कर रहे है। जन्म कुंडली में यह स्थान मित्र का होता है। इस स्थान पर सूर्य के गोचर से मित्रों के साथ अच्छे रिश्ते स्थापित करने के लिये आपको अधिक मेहनत करनी पड़ सकती है। आपको इस दौरान अपने शत्रु पक्ष से बचकर रहने की जरूरत है। साथ ही अगले 30 दिनों के दौरान सूर्य के अशुभ फलों से बचने के लिये और शुभ फल सुनिश्चित करने के लिये – मन्दिर में बाजरा दान करें।

कन्या राशि –

सूर्यदेव आपके पांचवें स्थान पर गोचर कर रहे है। जन्म कुंडली में यह स्थान विद्या, गुरु, विवेक, संतान और जीवन में रोमांस से संबंध रखता है। सूर्य के इस गोचर से आपको इस दौरान अपने गुरु से बनाकर रखनी चाहिए। आपकी कही बात उन्हें बुरी लग सकती है, इसलिए बात संभलकर करें और अपना विवेक बनाये रखें। साथ ही इस दौरान आप रोमांस के मामले में कुछ पिछड़ सकते हैं। लिहाजा इस दौरान सूर्य के अशुभ फलों से छुटकारा – जरूरतमंद लोगों को ऊनि वस्त्र दान करें।

तुला राशि –

सूर्यदेव आपके चौथे स्थान पर गोचर कर रहे है। जन्म कुंडली में यह स्थान माता, भूमि-भवन और वाहन के सुख से संबंध रखता है। सूर्य के इस गोचर से 13 फरवरी तक आपको अपने कार्यों में माता से पूरा सहयोग मिलेगा। वो आपके हर कदम में आपका साथ देंगी। साथ ही इस दौरान आपको भूमि-भवन और वाहन का सुख मिलने की भी पूरी उम्मीद है। लिहाजा इस 13 फरवरी तक सूर्य के शुभ फल सुनिश्चित करने के लिये – किसी जरूरतमंद को भोजन कराएं।

वृश्चिक राशि –

सूर्यदेव आपके तीसरे स्थान पर गोचर कर रहे है। जन्म कुंडली में यह स्थान भाई-बहन और आपकी अभिव्यक्ति से संबंध रखता है। सूर्य के इस गोचर से आपको भाई-बहनों से उम्मीद के अनुसार सहयोग मिलेगा। साथ ही आप अपनी बात को दूसरे के सामने अच्छे से एक्सप्रेस नहीं कर पायेंगे। लिहाजा सूर्य के अशुभ फलों से बचने के लिये और शुभ फल सुनिश्चित करने के लिये प्रतिदिन सूर्यदेव के इस मंत्र का 11 बार जप करें। मंत्र है – ऊँ घृणिः सूर्याय नमः।

धनु राशि – 

सूर्यदेव आपके दूसरे स्थान पर गोचर कर रहे है। जन्म कुंडली में यह स्थान धन से संबंध रखता है। सूर्य के इस गोचर से आपको धन की बढ़ोतरी के बहुत से साधन मिलेंगे। आपको अचानक से धन लाभ हो सकता है। इससे आपकी आर्थिक स्थिति अच्छी बनी रहेगी। लिहाजा सूर्य के शुभ फल सुनिश्चित करने के लिये – मन्दिर में नारियल का तेल या कच्चे नारियल का दान करें। 

मकर राशि – 

सूर्यदेव आपके पहले यानि लग्न स्थान पर गोचर कर रहे है। जन्म कुंडली में यह स्थान व्यक्ति का अपना स्थान होता है। इससे किसी व्यक्ति के प्रेम, मान-सम्मान, धन और संतान के न्यायलय संबंधी कार्यों पर विचार किया जाता है। इस स्थान पर सूर्य के गोचर से लवमेट के साथ आपके रिश्ते मजबूत होंगे। आपके पास पैसों की लगातार आवक बनी रहेगी। साथ ही आपकी संतान को भी न्यायलय संबंधी कार्यों से भरपूर लाभ मिलेगा। लिहाजा 13 फरवरी तक सूर्य के इन शुभ फलों का लाभ पाने के लिये – प्रतिदिन सुबह स्नान आदि के बाद सूर्यदेव को जल चढ़ाएं। 

कुंभ राशि –

सूर्यदेव आपके बारहवें स्थान पर गोचर कर रहे है। जन्म कुंडली में यह स्थान शैय्या सुख और व्यय से संबंध रखता है। सूर्य के इस गोचर से आपको शैय्या सुख की प्राप्ति तो होगी, लेकिन साथ ही आपके खर्चों में भी बढ़ोतरी होगी। लिहाजा आगली संक्रांति तक सूर्य के अशुभ प्रभावों से बचने के लिये और शुभ प्रभाव सुनिश्चित करने के लिये – धार्मिक कार्यों में अपना सहयोग दें।

मीन राशि – 

सूर्यदेव आपके ग्यारहवें स्थान पर गोचर कर रहे है। जन्म कुंडली में यह स्थान आमदनी और कामना पूर्ति से संबंध रखता है। सूर्य के इस गोचर से आपकी अच्छी आमदनी होगी। आपको आमदनी के नये स्रोत भी मिलेंगे। साथ ही आपकी जो भी इच्छा होगी, वो जरूर पूरी होगी। लिहाजा इस दौरान सूर्य के शुभ फल सुनिश्चित करने के लिये – मन्दिर में मूली का दान करें। 

  • सभी संक्रांति पर तीर्थस्थलों पर स्नान और दान का बड़ा ही महत्व है। मकर संक्रांति के दिन गंगा नदी में स्नान का विशेष महत्व है, लेकिन अगर आप वहां जाने में असमर्थ हैं, तो इस दिन घर पर ही सामान्य पानी से स्नान करना चाहिए और हो सके तो, उस जल में थोड़ा–सा पवित्र नदियों का जल मिलाना चाहिए। ऐसा करने से व्यक्ति का स्वास्थ्य उत्तम बना रहता है और उसे धन की कोई कमी नहीं होती। इस बात का भी ध्यान रखें कि संक्रांति के दिन दांतों को साफ करके जल में तिल मिलाकर स्नान करना चाहिए या स्नान से पहले तिल का तेल या तिल का उबटन लगाना चाहिए।
  • स्नान के बाद करें दान – कहते हैं संक्रांति के दिन दान दक्षिणा या धार्मिक कार्य का सौ गुना फल मिलता है। कहा भी गया है- माघे मासे महादेव: यो दास्यति घृतकम्बलम। स भुक्त्वा सकलान भोगान अन्ते मोक्षं प्राप्यति॥ इस दिन व्यक्ति को किसी गृहस्थ ब्राह्मण को भोजन या भोजन सामग्रियों से युक्त तीन पात्र देने चाहिए और संभव हो तो यम, रुद्र और धर्म के नाम पर गाय का दान करना चाहिए। यदि किसी के बस में ये सब दान करना नहीं है, तो वह केवल फल का दान करें, लेकिन कुछ न कुछ दान जरूर करें। साथ ही यह श्लोक पढ़ना चाहिए। श्लोक इस प्रकार है- ‘यथा भेदं न पश्यामि शिवविष्णवर्कपद्मजान्। तथा ममास्तु विश्वात्मा शंकरः शंकरः सदा।।’ इसका अर्थ है- मैं शिव एवं विष्णु तथा सूर्य एवं ब्रह्मा में अन्तर नहीं करता। वह शंकर, जो विश्वात्मा है, सदा कल्याण करने वाला हो।
  • ऐसे करें दान – संक्रांति के दिन काली उड़द की दाल और चावल का दान जरूर किया जाता है। घर की महिलाएं एक थाली में ये दोनों चीजें निकालकर मिक्स कर देती हैं और फिर घर के सभी सदस्य स्नान करने के बाद इस खिचड़ी को स्पर्श करते हैं। फिर इसे किसी ब्राह्मण को दान कर दिया जाता है। 
  • दूसरों को जरूर कराएं भोजन – संक्रांति के दिन उड़द की दाल और चावल के अलावा तिल, चिड़वा, सोना, ऊनी वस्त्र, कम्बल आदि का दान भी बेहद शुभ माना जाता है। दान के बाद बिना तेल वाला भोजन करना चाहिए और यथाशक्ति अन्य लोगों को भी भोजन देना चाहिए।
  • खिचड़ी का करें सेवन – इस दिन काली उड़द की दाल और चावल से बनी खिचड़ी भी जरूर खानी चाहिए। कहते हैं इस खिचड़ी के सेवन से सभी ग्रहों को मजबूती मिलती है।

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