23 मार्च को चैत्र शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि और सोमवार & सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित है और चैत्र शुक्ल पंचमी को ‘श्री पंचमी’ या ‘लक्ष्मी पंचमी’ के रूप में भी मनाया जाता है। आज के दिन धन की देवी लक्ष्मी और भगवान शिव की पूजा करने से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। BY CHANDRA SHEKHAR JOSHI CHIEF EDITOR Mob 9412932030

23 मार्च का दिन है और चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि & सोमवार को चैत्र नवरात्रि का पांचवां दिन है। नवरात्रि के पांचवें दिन मां दुर्गा के पंचम स्वरूप मां स्कदमाता की पूजा करने का विधान होता है। सोमवार को शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि शाम 06 बजकर 40 मिनट तक रहेगी। वहीं कृतिका नक्षत्र का भी संयोग रहेगा।
23 मार्च को चैत्र शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि और सोमवार का दिन है। पंचमी तिथि सोमवार शाम 6 बजकर 39 मिनट तक रहेगी। 23 मार्च को चैत्र नवरात्र का पांचवां दिन है। सोमवार दोपहर 12 बजकर 22 मिनट तक विष्कुम्भ योग रहेगा । साथ ही 23 मार्च को रात 8 बजकर 50 मिनट तक कृतिका नक्षत्र रहेगा। इसके अलावा सोमवार को राम राज्य महोत्सव और श्री लक्ष्मी पंचमी भी मनाई जाएगी। सूर्योदय-सुबह 6:21 am सूर्यास्त- शाम 6:33 pm

चंद्र ग्रह 23 मार्च की सुबह मेष राशि निकलकर अपनी उच्च राशि वृषभ में गोचर कर जाएंगे। चंद्रमा का यह गोचर 23 मार्च की सुबह 4 बजकर 14 मिनट पर होगा। उच्च राशि में चंद्रमा का होना कुछ राशियों के लिए बेहद साबित हो सकता है।
- चैत्र शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि- 23 मार्च 2026 को शाम 6 बजकर 39 मिनट तक
- विष्कुम्भ योग- 23 मार्च 2026 को दोपहर 12 बजकर 22 मिनट तक
- कृतिका नक्षत्र- 23 मार्च 2026 को रात 8 बजकर 50 मिनट तक
- 23 मार्च 2026 व्रत-त्यौहार- श्री लक्ष्मी पंचमी , चैत्र नवरात्रि का पांचवां दिन, राम राज्य महोत्सव
स्कंदमाता की पूजा नवरात्रि के पांचवें दिन की जाती है। भगवान कार्तिकेय की माता होने के कारण मां के इस रूप को स्कंदमाता कहा जाता है। माता धन-धान्य, सुख-शांति और संतान सुख प्रदान करने वाली हैं। नवरात्रि के पांचवें दिन स्कंदमाता की पूजा के साथ ही आप कुछ मंत्रों का जप करने से भी आप माता का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं। आइए जानते हैं इन राशियों के बारे में।

HIMALAYA GAURAV UTTRAKHAND; YR CONTRIBUTION;
लक्ष्मी पंचमी पंचमी का व्रत 23 मार्च 2026 को रखा जाएगा। हर वर्ष चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को यह व्रत रखा जाता है। जिस तरह बसंत पंचमी के दिन माता सरस्वती की पूजा की जाती है उसी तरह लक्ष्मी पंचमी या फिर श्री पंचमी के दिन माता लक्ष्मी की पूजा करना शुभ होता है। चैत्र माह से हिंदू नववर्ष की भी शुरुआत होती है, ऐसे में साल के प्रथम माह में देवी लक्ष्मी की पूजा करके आप पूरे साल भर धन-धान्य की प्राप्त कर सकते हैं।
लक्ष्मी पंचमी का व्रत रखने और इस दिन माता लक्ष्मी की पूजा करने से आपको आर्थिक क्षेत्र में उन्नति मिलती है। इसके साथ ही पारिवारिक जीवन में भी शुभ फल आपको प्राप्त होते है। वहीं लक्ष्मी पंचमी का व्रत रखने से कुंडली में मौजूद धन से जुड़े दोष भी दूर हो जाते हैं। लक्ष्मी पंचमी के व्रत के प्रभाव से आपके जीवन में आर्थिक संकट भी नहीं आते। माता लक्ष्मी की विधि-विधान से इस दिन पूजा करने से भगवान विष्णु की कृपा भी आपको प्राप्त होती है। घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह भी मां लक्ष्मी की पूजा से होता है।
ज्योतिष गणना के अनुसार चंद्रमा और गुरु की युति 25 मार्च 2026 को होने जा रही है और 27 मार्च तक ये युति बनी रहेगी। ये युति गजकेसरी योग का निर्माण करेगी। जिससे कुछ राशियों को खूब लाभ प्राप्त होगा। ये योग 4 राशियों के लिए कुबेर का खजाना खोलने वाला साबित होगा।
स्कंदमाता को प्रसन्न करने के लिए मंत्र
1. ॐ ऐं ह्रीं क्लीं स्कन्दमातायै नमः।
नवरात्रि के पांचवें दिन स्कंदमाता की पूजा के दौरान आपको इस मंत्र का जप भी अवश्य करना चाहिए। यह माता का बीज मंत्र है और इसके जप से आपको मानसिक शांति का अनुभव होता है।
2. या देवी सर्वभूतेषु माँ स्कन्दमाता रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।
यह स्कंदमाता का स्तुति मंत्र है। इसका निरंतर जप करने से माता की कृपा दृष्टि आपको प्राप्त होती है। इस मंत्र के जप करने से माता प्रसन्न होती हैं और आपकी मनोकामनाएं पूरी करती हैं। साथ ही संतान सुख की चाहता रखने वालों की इच्छा भी पूरी होती है।
3. ॐ ह्रीं सहा स्कंदमात्र्यै नमः।
इस मंत्र का जप उन लोगों को करना चाहिए जो मानसिक और शारीरिक शक्ति की कामना करते हैं। इस मंत्र का जप करने से बौद्धिक विकास होता है। विद्यार्थियों के लिए इस मंत्र का जप करना बेहद शुभ साबित हो सकता है।
4. सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया। शुभदास्तु सदा देवी स्कंदमाता यशस्विनी।
यह स्कंदमाता का ध्यान मंत्र है। इस मंत्र का जप करने से माता आपके जीवन की सभी दुख-विपदाओं को दूर करती हैं। इस मंत्र का जप करने से आपको धन-धान्य और संतान सुख की प्राप्ति भी हो सकती है।
5. सिहासनगता नित्यं पद्माश्रित करद्वया। शुभदास्तु सदा देवी स्कंद माता यशस्विनी॥
यह माता का प्रार्थना मंत्र है। इस मंत्र का जप करने से माता आपके जीवन में सुख-शांति लाती हैं। इस मंत्र का जप करते हुए माता को सफेद फूल चढ़ाने से आपके जीवन की सभी समस्याओं का हल आपको प्राप्त हो सकता है।