पाकिस्तान का पानी रोकने में कितना लगेगा वक्त? नहीं है ये आसान- सिंधु जल समझौते को रद्द करना

पाकिस्तान का पानी रोकने में कितना लगेगा वक्त? नहीं है ये आसान, क्या सिंधु जल समझौते को रद्द करना इतना आसान है?
हरीश टांक गुजरात, दिल्ली स्थानीय सम्पादक
क्या भारत रातोंरात तीनों नदियों का पानी रोक सकता है? भारत को इन तीनों नदियों का पानी रोकने में कितना वक्त लगेगा
भारत के पास हाल-फिलहाल यह इंफ्रास्ट्रक्चर मौजूद नहीं है, जिससे इस पानी को रातोंरात पाकिस्तान पहुंचने से रोका जा सके. अगर भारत डैम बनाकर या पानी स्टोर करके ऐसा करता भी है तो जम्मू-कश्मीर और पंजाब जैसे राज्यों में भीषण बाढ़ आ सकती है.
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एक्सपर्ट्स का मानना है कि भारत के लिए पश्चिमी नदियों के पानी के प्रवाह को रोकना लगभग असंभव है. क्योंकि इसके लिए बड़ी स्टोरेज और इतनी मात्रा में पानी का प्रवाह मोड़ने के लिए जितनी नहरों की ज़रूरत है उतनी का भारत के पास फ़िलहाल अभाव है.
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सिंधु जल समझौते को निलंबित करने का साफ मतलब है कि भारत अब पश्चिमी नदियों यानी झेलम, चिनाब और सिंधु नदी के पानी को पाकिस्तान को इस्तेमाल नहीं करने देगा, लेकिन सवाल यह है कि क्या यह इतना आसान है?
भारत में जो बुनियादी ढांचा है वो ज़्यादातर नदी पर चलने वाले हाइड्रोपावर प्लांट्स का है जिन्हें बड़ी स्टोरेज की ज़रूरत नहीं है.”
ऐसे हाइड्रोपावर प्लांट बड़ी मात्रा में पानी नहीं रोकते और बहते पानी के फोर्स का इस्तेमाल करके टर्बाइनों को घुमाते हैं और बिजली पैदा करते हैं.
भारतीय एक्सपर्ट्स का कहना है कि बुनियादी ढांचे की कमी के कारण भारत संधि के तहत मिलने वाले झेलम, चिनाब और सिंधु नदी के 20 फीसदी हिस्से का इस्तेमाल भी नहीं कर पा रहा है.
इसी वजह से स्टोरेज के निर्माण की वकालत की जाती रही है. लेकिन पाकिस्तान संधि के प्रावधानों का हवाला देकर इसका विरोध करता है.
एक्सपर्ट्स का मानना है कि भारत अब पाकिस्तान को सूचित किए बिना मौजूदा बुनियादी ढांचे में बदलाव कर सकता है या फिर नए ढांचे का निर्माण कर सकता है. इससे ज़्यादा पानी को रोका जा सकता है या फिर उसका रास्ता बदला जा सकता है.
भारत और पाकिस्तान ने 1960 में सिंधु जल प्रणाली की नदियों के पानी के इस्तेमाल को लेकर एक समझौता किया था. इस समझौते के तहत तीन पूर्वी नदियों सतलज, ब्यास और रावी नदी का पानी भारत इस्तेमाल कर सकता है. वहीं, पश्चिमी नदियां झेलम, चिनाब और सिंधु के पानी पर पाकिस्तान को अधिकार दिया गया. यहां गौर करने वाली बात यह है कि सिंधु जल समझौते के तहत भारत ने पाकिस्तान के साथ जो समझौता किया, उसमें पूरी नदी प्रणाली का सिर्फ 20 फीसदी पानी ही अपने पास रखा. भारत ने शांति के बदले पाकिस्तान को 80 फीसदी पानी पाकिस्तान को इस्तेमाल करने दिया.
दरअसल, पाकिस्तान के सिंध और पंजाब प्रांत की 90 फीसदी खेती योग्य जमीन, पानी की जरूरतों के लिए सिंधु जल समझौते के तहत मिलने वाली पानी पर ही निर्भर है. ऐसे में अगर भारत चिनाब, झेलम और सिंधु जैसी नदियों के पानी को रोकता है तो पाकिस्तान में हाहाकार मच सकता है. पानी रोके जाने से पाकिस्तान की न सिर्फ खेती योग्य जमीन सूखने की कगार पर आ जाएगी, बल्कि पीने के पानी से लेकर बिजली परियोजनाओं को भी बड़ा झटका लगेगा. भारत के इस कदम से पाकिस्तान को आर्थिक बदहाली का दंश झेलना पड़ेगा. हालांकि, अब सवाल यह है कि क्या सिंधु जल समझौते को रद्द करना इतना आसान है? क्या भारत रातोंरात तीनों नदियों का पानी रोक सकता है? भारत को इन तीनों नदियों का पानी रोकने में कितना वक्त लगेगा?
भारत और पाकिस्तान ने 1960 में सिंधु जल प्रणाली की नदियों के पानी के इस्तेमाल को लेकर एक समझौता किया था. इस समझौते के तहत तीन पूर्वी नदियों सतलज, ब्यास और रावी नदी का पानी भारत इस्तेमाल कर सकता है. वहीं, पश्चिमी नदियां झेलम, चिनाब और सिंधु के पानी पर पाकिस्तान को अधिकार दिया गया. यहां गौर करने वाली बात यह है कि सिंधु जल समझौते के तहत भारत ने पाकिस्तान के साथ जो समझौता किया, उसमें पूरी नदी प्रणाली का सिर्फ 20 फीसदी पानी ही अपने पास रखा. भारत ने शांति के बदले पाकिस्तान को 80 फीसदी पानी पाकिस्तान को इस्तेमाल करने दिया.
भारत ने सिंधु जल समझौते को निलंबित कर जो फैसला लिया है, उसका साफ मतलब है कि भारत अब पश्चिमी नदियों यानी झेलम, चिनाब और सिंधु नदी के पानी को पाकिस्तान को इस्तेमाल नहीं करने देगा, लेकिन सवाल यह है कि क्या यह इतना आसान है? दरअसल, भारत के पास हाल-फिलहाल यह इंफ्रास्ट्रक्चर मौजूद नहीं है, जिससे इस पानी को रातोंरात पाकिस्तान पहुंचने से रोका जा सके. अगर भारत डैम बनाकर या पानी स्टोर करके ऐसा करता भी है तो जम्मू-कश्मीर और पंजाब जैसे राज्यों में भीषण बाढ़ आ सकती है.
मौजूदा हालातों को देखें तो भारत ने तीनों पश्चिमी नदियों पर चार प्रोजेक्ट की योजना बनाई है. इसमें दो चालू हैं और दो की तैयारी चल रही है. भारत ने पाकिस्तान के हिस्से वाली चिनाब पर बगलीहार डैम और रतले प्रोजेक्ट शुरू किया है. चिनाब की एक और सहायक नदी मारुसूदर पर पाकल डुल प्रोजेक्ट और झेलम की सहयक नदी नीलम पर किशनगंगा प्रोजेक्ट शुरू किया है. इसमें से सिर्फ बगलीहार डैम और किशनगंगा प्रोजेक्ट चालू है. ऐसे में अगर भारत पाकिस्तान के हिस्से वाली तीनों नदियों का पानी रोकता है तो इसमें काफी वक्त लगने की संभावना है. दरअसल, इन तीनों नदियों से मिलने वाली लाखों क्यूसेक पानी के इस्तेमाल के लिए भारत को इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना होगा. यही बात पाकिस्तान एक्सपर्ट भी कर रहे हैं. पाकिस्तानी नेताओं का कहना है कि भारत रातोंरात सिंधु जल समझौते से मिलने वाले पानी को रोक नहीं सकता है, ऐसे में उनके पास भारत के इस फैसले के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ने का पर्याप्त समय है.
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