12 मई पीपल पर जल अर्पित 7 बार परिक्रमा करें और पति-पत्नी विवाद न करें. 12 मई 2025 को वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि, दिन शुभ है; HIMALAYAUK.ORG (LEADING NEWSPORTAL & DAILY NEWS PAPER & YOUTUBE CHANEL & BROAD CASTING GROU & INSTRAGRAM & FB PAGE . Chandra Shekhar Joshi Chief Editor
12 मई का दिन धार्मिक दृष्टि से बेहद खास है. इस दिन वैशाख पूर्णिमा मनाई जाएगी, इस तिथि पर भगवान बुद्ध का जन्म हुआ था. इस दिन रवि योग, वरीयान और स्वाती नक्षत्र जैसे महत्वपूर्ण ग्रह-नक्षत्र बन रहे हैं. वैखाख पूर्णिमा को नृसिंह जयंती के अगले दिन मनाया जाता है. स्कंद पुराण में वैशाख माह को सभी मासों में श्रेष्ठ माना जाता है
दोपहर के समय पीपल पर जल अर्पित करें, वृक्ष की सात बार परिक्रमा करें और दीपक में सरसों का तेल व काले तिल डालकर जलाएं.
12 May Ka Panchang: 12 मई 2025 को वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि है। इस दिन उत्तर स्वाति नक्षत्र और वरीघा योग का संयोग रहेगा। दिन के शुभ मुहूर्त की बात करें तो सोमवार को अभिजीत मुहूर्त 11:44 − 12:36 मिनट तक रहेगा। राहुकाल 07:17 − 08:55 मिनट तक रहेगा। वैशाख शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि- 12 मई 2025 को रात 10 बजकर 26 मिनट तक रहेगी
पूर्णिमा पर गंगा स्नान के साथ दान-पुण्य और भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने से सुख, समृद्धि और संपन्नता आती है. साथ ही पितरों के निमित्त छाता, जल, अन्न, खीर, घी का दान करें.
सफेद कौड़ी खरीदकर लाएं और हल्दी से रंगकर इन्हें मां लक्ष्मी को अर्पित करें.
- वैशाख पूर्णिमा का दिन बहुत मंगलकारी माना जाता है. यह दिन भगवान बुद्ध के जन्म, ज्ञान प्राप्ति और महापरिनिर्वाण का प्रतीक है.
- पूर्णिमा मां लक्ष्मी की जन्म तिथि है, इस दिन श्रीसूक्त का पाठ करने पर धन प्राप्ति के रास्ते खुलते हैं.
12 मई को वैशाख शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि और सोमवार का दिन है। पूर्णिमा तिथि आज रात 10 बजकर 26 मिनट तक रहेगी। आज पूरा दिन, पूरी रात पार कर कल सुबह 5 बजकर 53 मिनट तक वरीयान योग रहेगा। साथ ही आज पूरा दिन पूरी रात पार कर कल सुबह 9 बजकर 9 मिनट तक विशाखा नक्षत्र रहेगा। इसके अलावा आज वैशाखी पूर्णिमा है। पूर्णिमा तिथि के दिन देवी-देवताओं की पूजा के साथ ही दान-पुण्य और ध्यान करना भी बेहद शुभ माना जाता है। इस दिन धार्मिक कार्य करने से शुभ फलों की प्राप्ति व्यक्ति को होती है।
वैशाख माह की पूर्णिमा तिथि पर बुद्ध जयंती मनाई जाती है. इस दिन को गौतम बुद्ध की जयंती के रूप में मनाया जाता है. साल 2025 में वैशाख माह की पूर्णिमा 12 मई, सोमवार के दिन मनाई जाएगी.
वैशाख पूर्णिमा के दिन भगवान सत्यनारायण का व्रत किया जाता है और उनकी पूजा- अर्चना की जाती है. इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने का बहुत महत्व होता है. इस दिन भगवान बुद्ध की भी आराधना की जाती हैं जिन्हें विष्णु जी का 9वां अवतार माना जाता है.
- सूर्योदय- सुबह 5:32 am सूर्यास्त- शाम 7:02 pm
12 मई 2025 को वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि (रात 22:24 तक) रहेगी, जिसमें स्वाति नक्षत्र (सुबह 06:10 तक), वरीघा योग (रात 29:46 तक), और तुला राशि में चंद्रमा का संचरण होगा. प्रथम करण विष्टि (सुबह 09:14 तक) और द्वितीय करण बावा (रात 22:24 तक) रहेगा. सोमवार को सूर्योदय सुबह 05:39 बजे और सूर्यास्त शाम 18:41 बजे होगा. राहुकाल सुबह 07:17 से 08:55 तक रहेगा, जबकि अभिजीत मुहूर्त 11:44 से 12:36 तक होगा. विक्रमी संवत् 2082 और शक संवत् 1947 (विश्वावसु) के इस दिन शुभ कार्यों के लिए अभिजीत मुहूर्त का उपयोग किया जा सकता है.
- भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी के सामने घी का दीपक जलाएं.
- फल, फूल, खीर, पंचामृत आदि अर्पित करें.
- दिन में जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या दक्षिणा दान करें.
त्यौहार और व्रत
- चैत्र पूर्णिमा
- सत्य व्रत
- बुद्ध पूर्णिमा (बुद्ध जयंती)
- सत्य व्रत
- पूर्णिमा व्रत
- पूर्णिमा
- कूर्म जयंती
- पीतल के लोटे में 4 या 5 तुलसी की पत्तियां डालें और गंगा जल डालें. फिर उसके बाद घर के प्रवेश द्वार पर छिड़क दें. इससे नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है.
- इस दिन दोपहर के समय पीपल पर जल अर्पित करें, वृक्ष की सात बार परिक्रमा करें और दीपक में सरसों का तेल व काले तिल डालकर जलाएं.
चंद्र रेखांक के सूर्य रेखांक से 12 अंश ऊपर जाने में लगने वाला समय तिथि कहलाता है. एक माह में 30 तिथियां होती हैं, जो शुक्ल और कृष्ण पक्ष में बंटी होती हैं. शुक्ल पक्ष की अंतिम तिथि पूर्णिमा और कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि अमावस्या होती है.
तिथियों के नाम: प्रतिपदा, द्वितीया, तृतीया, चतुर्थी, पंचमी, षष्ठी, सप्तमी, अष्टमी, नवमी, दशमी, एकादशी, द्वादशी, त्रयोदशी, चतुर्दशी, अमावस्या/पूर्णिमा.
नक्षत्र:
आकाश में तारा समूह को नक्षत्र कहते हैं. कुल 27 नक्षत्र होते हैं, जिनका स्वामित्व नौ ग्रहों को प्राप्त है.
नक्षत्रों के नाम: अश्विन, भरणी, कृत्तिका, रोहिणी, मृगशिरा, आर्द्रा, पुनर्वसु, पुष्य, आश्लेषा, मघा, पूर्वाफाल्गुनी, उत्तराफाल्गुनी, हस्त, चित्रा, स्वाति, विशाखा, अनुराधा, ज्येष्ठा, मूल, पूर्वाषाढ़ा, उत्तराषाढ़ा, श्रवण, घनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद, रेवती.
वार:
वार का अर्थ दिन से है. सप्ताह में सात वार होते हैं, जो ग्रहों के नाम पर हैं: सोमवार, मंगलवार, बुधवार, गुरुवार, शुक्रवार, शनिवार, रविवार.
योग:
सूर्य और चंद्र की विशेष दूरी की स्थिति को योग कहते हैं. कुल 27 योग होते हैं.
योगों के नाम: विष्कुम्भ, प्रीति, आयुष्मान, सौभाग्य, शोभन, अतिगण्ड, सुकर्मा, धृति, शूल, गण्ड, वृद्धि, ध्रुव, व्याघात, हर्षण, वज्र, सिद्धि, व्यातीपात, वरीयान, परिघ, शिव, सिद्ध, साध्य, शुभ, शुक्ल, ब्रह्म, इन्द्र, वैधृति.