भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्ता अब किस दिशा में जाएगा? किसकी सहानुभूति पाकिस्तान के साथ है और किसकी भारत के साथ जबकि कौन पूरी तरह से तटस्थ है.

भारत के ख़िलाफ़ ऑपरेशन ‘बुनयान अल मरसूस’ पाकिस्तान को एक अरब डॉलर का आईएमएफ़ लोन, उसके चंद घंटों के बाद ही सीज़फ़ायर का ऐलान % अमेरिकी विदेश मंत्रालय के नोट के अनुसार वह लंबित मामलों में कश्मीर को भी शामिल कर सकता है. यह भारत के हित में नहीं होगा —-

दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं – अमेरिका और चीन से भारत का द्विपक्षीय व्यापार 100 अरब डॉलर के पार है जबकि खाड़ी के अहम देश यूएई से भी भारत का द्विपक्षीय व्यापार 100 अरब डॉलर पार हो चुका है. वहीं सऊदी अरब से भी भारत का सालाना द्विपक्षीय व्यापार क़रीब 50 अरब डॉलर पहुँच चुका है.  रूस से भी भारत का द्विपक्षीय व्यापार बढ़कर 65 अरब डॉलर पार कर चुका है. भारत के तीन सबसे बड़े ट्रेड पार्टनर और सऊदी अरब या तो पाकिस्तान के दोस्त हैं या दोस्त थे.

12 मई 2025 पहलगाम हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा था. धीरे-धीरे यह तनाव नज़दीकी संघर्ष में बदल रहा था. विदेश नीति मामलों के जानकार और विश्लेषक माइकल कूगलमैन ने कहा था, “भारत और पाकिस्तान युद्ध के बहुत क़रीब पहुंच गए, पाकिस्तान ने शुक्रवार रात भारत के ख़िलाफ़ ऑपरेशन ‘बुनयान अल मरसूस’ शुरू कर दिया, लेकिन शनिवार शाम होते-होते दोनों देशों ने सभी तरह की सैन्य कार्रवाई रोकने की घोषणा कर दी.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को सोशल मीडिया पर घोषणा की कि चार दिनों तक सीमा पर संघर्ष के बाद भारत और पाकिस्तान “पूर्ण और तत्काल संघर्ष विराम” पर सहमत हो गए हैं.  सीज़फ़ायर या हमले रोकने से जुड़ी कोई बात भारत की तरफ से आती, उससे पहले ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने “भारत और पाकिस्तान के बीच तत्काल और पूर्ण संघर्षविराम पर सहमति बनने” की जानकारी सोशल मीडिया ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट कर दी अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट कर कहा कि भारत और पाकिस्तान ने व्यापक मुद्दों पर बातचीत शुरू करने पर राज़ी हो गए हैं.

ट्रंप ने ये भी कहा, “मुझे गर्व है कि अमेरिका इस ऐतिहासिक फ़ैसले तक पहुंचने में आपकी मदद कर पाया.”

भारत के विदेश मंत्रालय ने दोनों पक्षों के बीच हमले रोकने को लेकर बनी सहमति की बात तो स्वीकार की, लेकिन अमेरिका का नाम नहीं लिया.

अमरीका की डेलावेयर यूनिवर्सिटी में अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार प्रोफ़ेसर मुक़्तदर ख़ान कहते हैं कि मुझे लगता है कि अमेरिका ने तत्काल सीज़फ़ायर करने के लिए पाकिस्तान को रिश्वत दे दी है लेकिन भारत के साथ उन्होंने कैसे मैनेज किया, यह अभी समझ में नहीं आ रहा है. पाकिस्तान को एक अरब डॉलर का आईएमएफ़ लोन दिया गया है, उसके चंद घंटों के बाद ही सीज़फ़ायर का ऐलान हुआ है. ट्रंप के पास यह मौक़ा था कि अगर पाकिस्तान उनकी बात से इंकार करता तो फिर शायद उसे लोन नहीं मिलता

साल 1971 में भारत- पाकिस्तान के बीच हुए युद्ध के बाद यह पहला मौक़ा था कि भारतीय सशस्त्र बलों ने कराची, लाहौर और रावलपिंडी जैसे पाकिस्तानी शहरों पर हवाई हमले किए. इसके जबाव में पाकिस्तान ने पठानकोट, बठिंडा, जम्मू, अमृतसर और आदमपुर जैसी कई जगहों पर हमले करने की कोशिश की. भारतीय सेना के अनुसार हमले नाकाम कर दिए गए थे.

पाकिस्तान के विदेश मंत्री इसहाक़ डार ने पाकिस्तानी मीडिया को बताया कि इस कूटनीति में “तीन दर्जन देश” शामिल हैं – इनमें तुर्की, सऊदी अरब और अमेरिका भी शामिल हैं.
पाकिस्तान में विशेषज्ञों का कहना है कि जब तनाव बढ़ा तो पाकिस्तान ने ‘दोहरे संकेत’ दिए – एक तरफ़ सैन्य जवाबी कार्रवाई और दूसरी तरफ़ नेशनल कमांड अथॉरिटी (एनसीए) की बैठक बुलाना जो कि परमाणु क्षमता की याद दिलाने का संकेत देना था.
पाकिस्तान कमांड ऑथोरिटी, देश के परमाणु हथियारों पर नियंत्रण रखती है और उसके इस्तेमाल संबंधी फ़ैसले लेती है.
यह वही समय था जब अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने हस्तक्षेप किया.

गया: यह थे संबंध
1971 में युद्ध के दौरान अमेरिका ने अपने नौसेनिकों का बेड़ा बंगाल की खाड़ी की ओर भेजा था.

इंदिरा गांधी ने बाद में इतालवी पत्रकार ओरियाना फ़लाची को दिए गए इंटरव्यू में कहा था, ”अगर अमेरिकियों ने एक भी गोली चलाई होती या अमेरिकी बंगाल की खाड़ी में बैठने के अलावा कुछ और करते तो, तीसरा विश्व युद्ध शुरू हो सकता था. लेकिन आपको सच बताऊँ मेरे दिमाग में एक बार भी ये डर नहीं आया.”

एडमिरल एसएम नंदा ने अपनी आत्मकथा ‘द मैन हू बॉम्ब्ड कराची’ में लिखा था, ”दिसंबर के पहले हफ़्ते में ही सोवियत संघ का एक विध्वंसक और माइन्सस्वीपर मलक्का की खाड़ी से इस इलाके में पहुंच चुका था. सोवियत बेड़ा तब तक अमेरिकी बेड़े के पीछे लगा रहा जब तक वो जनवरी, 1972 के पहले सप्ताह में वहाँ से चला नहीं गया

अमेरिकी बेड़ा और 1971 युद्ध : तुरंत रूसी बेड़ा पहुंच गया: यह थे संबंध
1971 में युद्ध के दौरान अमेरिका ने अपने नौसेनिकों का बेड़ा बंगाल की खाड़ी की ओर भेजा था.

इंदिरा गांधी ने बाद में इतालवी पत्रकार ओरियाना फ़लाची को दिए गए इंटरव्यू में कहा था, ”अगर अमेरिकियों ने एक भी गोली चलाई होती या अमेरिकी बंगाल की खाड़ी में बैठने के अलावा कुछ और करते तो, तीसरा विश्व युद्ध शुरू हो सकता था. लेकिन आपको सच बताऊँ मेरे दिमाग में एक बार भी ये डर नहीं आया.”

एडमिरल एसएम नंदा ने अपनी आत्मकथा ‘द मैन हू बॉम्ब्ड कराची’ में लिखा था, ”दिसंबर के पहले हफ़्ते में ही सोवियत संघ का एक विध्वंसक और माइन्सस्वीपर मलक्का की खाड़ी से इस इलाके में पहुंच चुका था. सोवियत बेड़ा तब तक अमेरिकी बेड़े के पीछे लगा रहा जब तक वो जनवरी, 1972 के पहले सप्ताह में वहाँ से चला नहीं गया

16 दिसंबर, 1971 को जब भारत ने पाकिस्तान के साथ युद्धविराम की पेशकश की तो उसे पाकिस्तान ने तुरंत स्वीकार कर लिया.
इंदिरा गाँधी ने कश्मीर के बड़े भूभाग पर कब्ज़ा किए बिना युद्धविराम का ऐलान कर दिया.

लेकिन किसिंजर ने कहा, ” मेरा ये मानना है कि भारत ने झिझकते हुए सोवियत दबाव में ये फ़ैसला लिया है. सोवियत फ़ैसला भी अमेरिकी दबाव के चलते आया है जिसमें अमेरिका के सातवें बेड़े का बंगाल की खाड़ी में भेजा जाना और अमेरिकी राष्ट्रपति की प्रस्तावित सोवियत यात्रा को रद्द किया जाना शामिल है.”

लेकिन 1971 की लड़ाई में पाकिस्तान का खुलेआम समर्थन किए जाने के बावजूद पाकिस्तान के शासकों ने हेनरी किसिंजर से दूरी बना कर रखी. ज़ुल्फ़िकार अली भट्टो अपने अपदस्थ होने और फ़ाँसी पर चढ़ाए जाने तक हेनरी किसिंजर को इसका ज़िम्मेदार मानते रहे.

उनकी बेटी बेनज़ीर भुट्टो ने अपनी आत्मकथा ‘डॉटर ऑफ़ द ईस्ट’ में लिखा, ” मेरे पिता ने निजी तौर पर अपने पतन के लिए किसिंजर को ज़िम्मेदार ठहराया. जब बेनज़ीर भुट्टो पाकिस्तान की प्रधानमंत्री बनीं तो उन्होंने अमेरिका का समर्थन तो किया लेकिन हेनरी किसिंजर के प्रति अपने पिता की दुश्मनी को उन्होंने बरकरार रखा

भारत ने किया सीजफायर का ऐलान; ट्रंप ने किया था समझौते में मध्यस्थता का दावा
HIMALAYAUK BUREAU & MEDIA REPORT
पाकिस्तान ने शनिवार (10 मई, 2025) को सीजफायर का ऐलान किया, जिस पर भारत सरकार ने सहमति जताई है. हालांकि भारत की ओर से आ रहीं पाकिस्तान की मुश्किलें अभी भी खत्म नहीं हुई हैं. भारत ने सिर्फ काइनेटिक यानि किसी भी सैन्य कार्रवाई के लिए शर्तों के साथ युद्धविराम किया है.
ट्रंप ने किया था समझौते में मध्यस्थता का दावा
पाकिस्तान ने भारत संग शांति-सुलह कराने के लिए दुनियाभर के देशों से गुहार लगाई थी. इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट के जरिए भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर होने का दावा किया.
भारत सरकार ने साफ किया कि भारत और पाकिस्तान के बीच गोलाबारी और सैन्य कार्रवाई रोकने का फैसला दोनों देशों के बीच सीधे तौर पर हुआ है.
भारत ने पाकिस्तानी एयरबेस पर निर्णायक अंतिम हमलों की एक श्रृंखला के बाद युद्ध विराम पर सहमति जताई है. पाकिस्तानी सैन्य संचालन महानिदेशक (DGMO) की ओर से अपने भारतीय समकक्ष को किए गए कॉल में पाकिस्तान ने स्पष्ट रूप से कहा कि वह आगे कोई हमला नहीं करेगा और औपचारिक रूप से युद्ध विराम का अनुरोध किया.
संयुक्त राज्य अमेरिका ने पाकिस्तान पर सीधा दबाव डालकर तनाव कम करने में भूमिका निभाई. युद्ध विराम की तत्काल स्वीकृति के लिए अमेरिका की ओर से 1 बिलियन डॉलर के आईएमएफ की तरफ से दिए जाने वाले कर्ज को जारी करने से रोकने का दबाव बनाया.

सूत्रों के मुताबिक, भारत ने जो पाकिस्तान पर जल, व्यापार, कूटनीतिक और वित्तीय प्रतिबंध लगा रखे हैं, उन पर कोई बात नहीं हुई है. वो अभी भी उसी तरह से जारी रहेंगे. 22 अप्रैल, 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद से भारत एक्शन लेते हुए सिंधु जल संधि, पाकिस्तानी वीजा, ट्रेड, डिप्लोमेटिक और वित्तीय प्रतिबंध लगा थे.
विदेश मंत्रालय के सचिव विक्रम मिसरी ने इस बारे में जानकारी देते हुए कहा कि शनिवार (10 मई,2025) की दोपहर पाकिस्तान डीजीएमओ ने फोन कॉल कर पहल की, जिसके बाद चर्चा हुई और सहमति बनी. उन्होंने कहा कि किसी अन्य मुद्दे पर किसी अन्य स्थान पर बातचीत करने का कोई निर्णय नहीं हुआ है. उन्होंने कहा, “पाकिस्तान के सैन्य संचालन महानिदेशक (DGMO) ने आज दोपहर 15:35 बजे भारतीय DGMO को फोन किया. उनके बीच सहमति बनी कि दोनों पक्ष भारतीय मानक समयानुसार 17:00 बजे से जमीन, हवा और समुद्र में सभी तरह की गोलीबारी और सैन्य कार्रवाई बंद कर देंगे. आज दोनों पक्षों को इस सहमति को लागू करने के निर्देश दिए गए हैं. सैन्य संचालन महानिदेशक 12 मई को 12:00 बजे फिर से बात करेंगे.”
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया था कि अमेरिका की मध्यस्थता के चलते दोनों देशों के बीच सीजफायर समझौता हुआ है. उन्होंने कहा, ”संयुक्त राज्य अमेरिका की मध्यस्थता में एक लंबी रात की बातचीत के बाद मुझे यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि भारत और पाकिस्तान पूर्ण और तत्काल युद्धविराम पर सहमत हो गए हैं. दोनों देशों को बधाई. इस मामले पर आपके ध्यान के लिए धन्यवाद.”
पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार की ओर से एक्स पर पोस्ट करके बताया गया है कि पाकिस्तान और भारत ने तत्काल प्रभाव से युद्ध विराम पर सहमति जताई है. हालांकि उन्होंने भारत पर किए गए नाकाम हमलों की कोशिशों पर माफी नहीं मांगी. उन्होंने आगे दावा करते हुए कहा कि पाकिस्तान ने हमेशा अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता से समझौता किए बिना क्षेत्र में शांति और सुरक्षा के लिए प्रयास किया है

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