राज्य सरकार द्वारा जारी बयान के मुताबिक मुख्यमंत्री ने नमामि गंगे एवं ग्रामीण जलापूर्ति विभाग की समीक्षा करते हुए कहा, ‘‘मानव सभ्यता का विकास सदैव नदियों के किनारे ही हुआ है मगर जिन जीवनदायिनी नदियों के किनारे हमारी संस्कृति फली-फूली, उन्हीं नदियों को हमने अनियोजित शहरीकरण और प्रदूषण के हवाले कर दिया।’’
आदित्यनाथ ने प्रदूषण की मार झेल रहीं संकटग्रस्त नदियों के पुनर्जीवन को जनांदोलन का स्वरूप देने की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि अब समय आ गया है जब हम नदी पुनरोद्धार को केवल परियोजना नहीं, बल्कि सामाजिक-सांस्कृतिक चेतना और जिम्मेदारी के रूप में स्वीकार करें।