आईना भारत में समाचार पत्रों के लिए एक महत्वपूर्ण संगठन,चन्द्रशेखर जोशी अध्यक्ष उत्तराखण्ड ; ऑल इंडिया न्यूज़पेपर एसोसिएशन आईना नियुक्त

चन्द्रशेखर जोशी राजनीतिक तथा मीडिया जगत से सम्बद्ध । सामाजिक तथा राजनैतिक व मीडिया के क्षेत्र में काम करने के फलस्वरुप अनेकों वरिष्ठ व केन्द्रीय नेताओं द्वारा सराहा गया । कार्यो का कुछ विवरण निम्नांकित है।

चन्द्रशेखर जोशी राजनीतिक तथा मीडिया जगत से सम्बद्ध । सामाजिक तथा राजनैतिक व मीडिया के क्षेत्र में काम करने के फलस्वरुप अनेकों वरिष्ठ व केन्द्रीय नेताओं द्वारा सराहा गया । कार्यो का कुछ विवरण निम्नांकित है।

नाम: चन्द्रशेखर जोशी

पिता का नाम ः स्व0 देवीदत्त जोशी

पितामह (दादा) का नाम ः स्व0 त्रिलोक चन्द्र जोशी (अरसे तक ग्राम प्रधान रहे)

पितामह की ओर से मूल रुप से ः ग्राम बरसायत कोली, पो0 पतेत, तहसील डीडीहाट जनपद पिथौरागढ़

स्वयं का मूल पता ः ग्राम व पो0 कुण्ड़ेश्वरी तहसील- काशीपुर जिला ऊधम सिंह नगर, उत्तराखण्ड

वर्तमान स्थाई पता ः 567, 3/08, बंजारावाला, निकट अग्रवाल बिल्डर, टी-स्टेट, देहरादून

शैक्षिक व तकनीकी योग्यता ः स्नातकोत्तर व कम्प्यूटर डिप्लोमा

अनुभव ः 24 वर्षो से समाचार पत्रों में काम करने का अनुभव

विदेश अनुभव ः साढ़े चार वर्ष खाड़ी देश में जापानी कम्पनी में कम्पनी मैनेजर के पद पर कार्य किया

तथा अरबी भाषा बोलने में महारत हासिल की।

राजनीतिक व सामाजिक क्रियाकलाप ः

1- उत्तराखण्ड क्रांति दल- केन्द्रीय संयुक्त सचिव- वर्तमान में कार्यरत

1- उत्तराखण्ड क्रांति दल -निवर्तमान प्रदेश प्रवक्ता (स्थानीय निकाय प्रकोष्ठ) तथा

पूर्व केन्द्रीय मीडिया प्रबन्धन समिति व मीडिया प्रभारी

2- पूर्व प्रदेश प्रमुख महासचिव व प्रवक्ता- जनता दल यूनाइटेड, उत्तराखण्ड

3- पूर्व प्रदेश महासचिव व प्रवक्ता तथा अध्यक्ष-कुमाऊॅं मण्डल – समता पार्टी

2- पूर्व सदस्य-अनुशासन समिति तथा सदस्य- चुनावी घोषणा पत्र समिति – समता पार्टी-उत्तराखण्ड

3- पूर्व प्रदेश अध्यक्ष- भारतीय दलित समाज पार्टी -उत्तराखण्ड

4- श्री जार्ज फर्नांण्डिस द्वारा गठित लोक मंच द्वारा आयोजित

”नैशनल कांफ्रेंस आॅन इम्प्लायमेंट जेनरेशन“ में दिल्ली में अनेक साथियों सहित भाग लिया

व उत्तराखण्ड प्रदेश का संयोजक नियुक्त हुआ था।

5- सचिव- कूर्मांचल सांस्कृतिक एवं कल्याण परिषद शिवालिक रेंज माजरा, शाखा, देहरादून, उत्तराखण्ड

6- महा सचिव-केन्द्रीय कूर्मांचल सांस्कृतिक एवं कल्याण परिषद

7- सचिव- प्रचार-प्रसार- ”पर्वतीय रामलीला कमेटी देहरादून“

8- महासचिव- – ”पर्वतीय रामलीला कमेटी देहरादून“

जनहितकारी संघर्ष-ः (समस्त कार्यो की फोटो उपलब्ध हैं)

1- काशीपुर जिला ऊधम सिंह नगर में रेलवे हाल्ट बनाने की मांग को लेकर 11 मई, 2002 को रेल रोको आन्दोलन मेरे द्वारा शुरु किया गया।

2- अम्बेडकर जयंती समारोह काशीपुर में मेरे नेतृत्व में प्रथम बार मनाया गया।

3- मेरे नेतृत्व में काशीपुर में आईजीएल के समीप अम्बेडकर पार्क प्रस्तावित कराया गया।

4- मेरे नेतृत्व में कुमायूं मण्डल में शराब विरोधी आन्दोलन सफलतापूर्वक चलाया गया।

5- सम्पूर्ण राज्य से भलीभांति वाकिफ तथा जनता से व्यापक सम्पर्क

6- उत्तराखण्ड राज्य में पिथौरागढ़ जनपद से पितामह की ओर से सम्पर्क। तराई – ऊधम सिंह नगर में जन्म भूमि तथा कर्म भूमि के नाते विस्तृत सम्पर्क। वर्तमान में राजधानी देहरादून में विगत आठ वर्षो से निवास व वर्तमान कर्म क्षेत्र। इसके अलावा देहरादून- गढ़वाल मण्डल में वैवाहिक सम्बन्ध व स्थायी निवास।

7- कुमाऊॅ मण्डल -उत्तराखण्ड राज्य में गैस वितरण का कार्य कुमाऊॅं मण्डल विकास निगम से लेकर इण्डियन आॅयल कार्पोरेशन द्वारा निजी क्षेत्र को देने से सैकड़ों कर्मचारियों के बेरोजगार होने की आशंका उत्पन्न होने पर तथा स्थानीय जनता के आक्रोशित होने पर उनकी लड़ाई को दिल्ली तक पहुंचाया तथा तत्कालीन एनडीए संयोजक माननीय जार्ज फर्नांडिस के माध्यम से तत्कालीन श्रीमान राम नाईक पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री भारत सरकार से कार्रवाई करवायी, जिससे कर्मचारियों से भी सम्पर्क बढ़ा।

8- जिम कार्बेट नैशनल पार्क मंें वन्य जीव जन्तुओं की हत्या का सिलसिला नहीं रूकने पर तत्कालीन एनडीए संयोजक श्रीमान जार्ज फर्नांडीस व तत्कालीन पर्यावरण व वनमंत्री श्रीमान टी0आर0 बालू- को अवगत कर सख्त कार्यवाही की मांग कर जनता को जागरुक किया। एनडीए के तत्कालीन संयोजक श्रीमान जार्ज द्वारा कार्रवाई हेतु पर्यावरण व वनमंत्री को पत्र लिखा। क्षेत्रीय जनता को लाभान्वित किया।

9- उत्तराखण्ड में प्रशिक्षित बेरोजगारों द्वारा रोजगार देने की मांगों को लेकर चलाये जा रहे धरने को पूर्ण समर्थन देकर आन्दोलन को आगे बढ़ाया।

10- उत्तराखण्ड में हर वर्ग के साथ व्यापक सम्पर्क।

11- काशीपुर में रेलवे की जमीन पर कब्जा कर रहे प्रोपर्टी डीलरों के खिलाफ आवाज उठायी। काशीपुर में प्रोपर्टी डीलरों ने रेलवे की बेकार पड़ी एक एकड़ से ज्यादा जमीन की बिक्री शुरु कर दी थी, जिसका मूल्य एक करोड़ से ज्यादा था। इसके विरोध में जबर्दस्त आवाज बुलंद की। परिणाम स्वरुप रेलवे ने मुकदमा कायम कराया।

12- काशीपुर जनपद ऊधम सिंह नगर स्थित इण्डिया ग्लायकोल्स लि0 के रसायनयुक्त जल से कई मौतें होने पर उ0प्र0 सरकार व उत्तराखण्ड सरकार तथा श्रीमान जार्ज साहब तत्कालीन रक्षामंत्री के समक्ष मामले को रख कर आवाज उठाई, जिससे उद्योग उचित कदम उठाने को तैयार हुआ।

13- एक सम्पादक के नाते राज्य की हर समस्या व हर वर्ग से प्रत्यक्ष जुडाव।

14. तत्कालीन पूर्व रक्षामंत्री श्रीमान जार्ज से अनेक समस्याओं के निवारण हेतु कार्रवाई करवायी।

15- वर्तमान में हर समस्या पर पैनी नजर। जनता के साथ सीधा संवाद। सम्पूर्ण उत्तराखण्ड से सम्पर्क। क्षेत्रीय भाषाओं की पूर्ण जानकारी।

16- प्रयासो की डा0 रमेष पोखरियाल निषंक द्वारा सराहना।

ऑल इंडिया न्यूज़ पेपर एसोसिएशन (आईना) भारत में समाचार पत्रों और पत्रिकाओं का प्रतिनिधित्व करने वाला एक संगठन है। यह 1929 में शुरू हुआ और अब एसोसिएशन का आधिकारिक अंग है. यह नियमित रूप से प्रकाशित होता है और व्यापक पाठकों तक पहुंचता है. यह समाचार पत्रों के मालिकों और संपादकों का एक संगठन है जो उद्योग के हितों की रक्षा करता है और समाचार पत्रों की स्वतंत्रता और मानवाधिकारों का समर्थन करता है.

यहाँ कुछ अतिरिक्त विवरण दिए गए हैं: स्थापना: 1929.

मुख्य उद्देश्य: समाचार पत्रों के हितों की रक्षा करना, समाचार पत्रों की स्वतंत्रता का समर्थन करना और मानवाधिकारों का समर्थन करना.

सदस्य: समाचार पत्रों के मालिक और संपादक.

कार्य:

उद्योग के लिए नीतिगत सलाह देना.

सरकार के साथ संवाद करना.

उद्योग के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करना.

उद्योग के लिए जागरूकता अभियान चलाना.

उद्योग के लिए पुरस्कार देना.

आईना एक साप्ताहिक पत्रिका भी प्रकाशित करता है जो हर सोमवार को प्रकाशित होती है.

आईना भारत में समाचार पत्रों के लिए एक महत्वपूर्ण संगठन है जो उद्योग के हितों की रक्षा करता है और समाचार पत्रों की स्वतंत्रता और मानवाधिकारों का समर्थन करता है

आल इण्डिया स्माल न्यूजपेपर्स की स्थापना सन 1982 मे की गई थी। लघु एवं मध्‍यम समाचार पत्रो एवं मध्यम समाचार पत्रो के मालिक, सम्पादक व पत्रकारों ने केन्द्र सरकार व राज्य सरकारों के द्वारा देश के लघु व मध्यम समाचार पञो पर किये जा रहे अत्याचार, उत्पीड़न व उपेक्षा से क्षुब्ध होकर आइसना संगठन की स्थापना कराकर एक केन्द्रीय समिति को गठित किया इसके बाद देश के सभी प्रदेशों और सभी प्रदेशों के अधिकाशं जिलों मे आइसना की समितियां गठित की। आप सब भली भांति इन तथ्यों से अवगत हैं कि यही लघु एवं मध्यम समाचार पत्र भारत सरकार व राज्य सरकार की ग्रामीण योजनाओं को सुदूर गांव मे जन-जन तक पहुचाने का कार्य करते हैं और गांधी जी के पंचायती राज सपने को साकार करने मे सतत प्रयासरत हैं फिर भी सरकारों द्वारा समाचार पत्रों को भारतीय संविधान मे प्रदक्त अधिकारों का हनन, स्‍वतंत्रता लेखनी पर रूकावट व समाचार संकलन के अधिकारों का हनन लगातार किया जा रहा है। आये दिन समाचार पत्रों के सम्पादकों व पत्रकारों की हत्या व मारपीट, अवमानना, अपहरण की घटनायें बराबर सरकार के नुमाइन्दों द्वारा अन्जाम दी जा रही हैं। इसी तरह से बडे-बडे उधोगपति भी अपने काले धन को सफेद धन मे परिर्वतित करने के लिए भारतीय समाचार पत्रें को खरीद कर उनका संचालन करवा रहे हैं और अपने समाचार पत्रों के पत्रकारों को भी बधुआ मजदूर की तरह उनका उपयोंग करते हुए उनकी स्वतंत्र् लेखनी निर्भीक पत्रकारिता को गिरवी रख लिया है, जिसके कारण यह पत्रकार निर्भीक स्वतंत्र् होकर किसी के काले कारनामों को उजागर नही कर पाते हैं क्योंकि इन पू‍जिपतियों ने अपने पत्रकारों की लेखनी पर अंकुश लगाने के लिए एक अपना संपादक मंडल बैठा रखा है जो उस पत्रकार के उसी समाचार को प्रकाशित होने देता है जिससे उसे आथिर्क लाभ हो। सरकार द्वारा लघु एवं मध्यम समाचार पत्रों को मिलने वाले विज्ञापन बजट का दुरूपयोग किया जा रहा है। विज्ञापन बजट को सरकारी नुमाइन्दे अपने व्यक्तिगत स्‍वार्थ पूर्ति मे आहारित कर देते हैं जिसके कारण लघु एवं मध्यम समाचार पत्रों को विभागों से मिलने वाला विज्ञापन नगण्य हो गया है समाचार पञों के मालिक, सम्पादक, पत्रकार भुखमरी के कगार पर पहुच चुके हैं।

उक्त समस्याओं के निराकरण मे आइसना हमेशा कार्यरत रहा है, धरना, प्रदार्न व रैली इसके प्रमुख उदाहरण हैं। आइसना ने सभी प्रदेशो के राज्य सरकारों व भारत सरकार के उत्पीड़न और भेदभावों के खिलाफ आवाज बुलन्द किया है। आज हम अपनी कमियों को उजागर करते हुए यह कहना चाहते हैं कि हममें से कुछ स्‍वार्थी साथियों ने अपने व्यक्तिगत लाभ के लिए चन्द लोगों का साथ लेकर उनको गुमराह करके समाचार पत्रों के अलग अलग संगठन बनाकर हमारी एकता, एकजुटता व अखंडता को विखंडित कर दिया है जिसके कारण हम सक्त होते हुए भी आसक्त होकर रह गये हैं जिसका फायदा शासन व प्रशासन उठा रहा है क्योंकि सरकारी नुमाइन्दों को यह विवास हो गया है कि हम सभी एकजुट नही हो सकते हैं और सरकार व प्रशासन को बना व बिगाड़ नही सकते हैं। आज हम अपने आइसना संगठन पर गौरवान्वित हैं कि हमारे सदस्य व पदाधिकारी एकजुट होकर भारी संख्या मे संगठित हैं। हमारे सदस्य व पदाधिकारियों को कोई अन्य संगठन गुमराह नही कर सकता। हमारी एकजुटता विशाल शक्ति का परीक्षण भारत देश की स्वतंत्र्ता के इतिहास मे लिखा जा चुका है। हमारे लघु व मध्यम समाचार पत्रों के मालिक, सम्पादक व पत्रकारों ने भारत ऎसे विशाल देश को आजाद कराने मे अपने प्राणों को न्यौछावर किया है, अंग्रेजों के लाठी डंडे व गोलियों को खाते हुए जेल की यातनाओं को सहन करते हुए अपनी लेखनी को कभी कमजोर नही होने दिया है। पूंजीपति भारतीय समाचार पत्र् तो अंग्रेजों के सामने नतमस्तक हो गये थे यह सभी को ज्ञात है। आज हम इतने साक्त व एकजुट हैं कि हमारी लेखनी सरकार को बना व बिगाड़ सकती है इसलिए हम सरकारी नुमाइन्दों को चेतावनी देते हैं कि वे लघु एवं मध्यम समाचार पत्रें कि उपेक्षा व उत्पीड़न बन्द कर दें अन्यथा मजबूर होकर हमे उनको कुर्सी से उतारना पड़ेगा। हम अपने प्रतिनिधियों से अनुरोध करते हैं कि अपने आइसना संगठन को साक्त बनाने के लिए आथिर्क योगदान करते हुए सालाना सदस्यता शुल्‍क को नियमित रूप से कैम्प कायार्लय मे भेजकर अपना नवीनीकरण कराते रहें ताकि सदस्यता बरकरार रहे साथ ही यह अनुरोध भी है कि प्रत्येक प्रदेश व प्रत्येक जिले मे प्रान्तीय व जनपदीय सम्मेलन करके खुद को व साथ ही साथ संगठन को साक्त करें। हम यह भी प्रयास कर रहे हैं कि संगठन का एक आथिर्क कोण बनाया जाये ताकि जरूरतमंद पत्रकार को उससे मदद प्रदान की जा सके और यह तभी संभव होगा जब आप आथिर्क सहायता करें। यह भी सुझाव है कि अपने समाचार पत्रें को सुदूर ग्राम पंचायतों को लगातार भेजते रहें ताकि ग्राम प्रधानों सं समाचार पत्रें के संचालन के लिए विज्ञापन मिल सके।

पत्रकारों से यह भी अनुरोध है कि कई समाचार पत्रें को प्रकाशित करने के बजाय अपने एक ही समाचार पत्र् को चुनकर प्रकाशित करने मे अपनी पूरी शक्ति लगायें व उसके कई संस्करण बनाकर अपने समाचार पत्र को जनपद व प्रदेशों मे प्रसारित करें। अब वह समय आ गया है कि हम सब को अपना रूख सुदूर गॉवों तक करना चाहिए क्योंकि गॉव के विकास से ही देश का विकास होगा व देश के विकास से ही हमारा विकास होगा।

(चन्द्रशेखर जोशी)

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