01 JUNE 2025 # भाजपा अध्यक्ष पद की रेस में कई नाम सुर्खियों में है। अलग-अलग समीकरण भी बताई जा रहे हैं।# जून के आखिर तक भारतीय जनता पार्टी को अपना नया राष्ट्रीय अध्यक्ष मिल जाएगा।#भाजपा का जो राष्ट्रीय अध्यक्ष बनेगा, उसके ऊपर 2029 आम चुनाव भी होगा। इसके अलावा हाल के दिनों में देखें तो बिहार, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, असम में महत्वपूर्ण विधानसभा चुनाव है जो भाजपा के लिए बेहद अहम है। ऐसे में पार्टी आगे किस तरीके की रणनीति बनाकर चलती है, #जून बीजेपी का अगला अध्यक्ष? #जून का महीना बीजेपी के लिए राजनीतिक रूप से बेहद अहम # कश्मीर के एलजी मनोज सिन्हा, धर्मेंद्र प्रधान, भूपेंद्र यादव पार्टी संगठन में प्रमुख भूमिका? अध्यक्ष पद के लिए चर्चा में #विशेषज्ञों का मानना है कि नया अध्यक्ष पार्टी के आगामी मिशनों, विशेष रूप से 2026 के राज्य विधानसभा चुनावों और 2029 के आम चुनाव की रणनीति तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा. ऐसे में यह चुनाव महज एक औपचारिकता न होकर, पार्टी की भविष्य की दिशा तय करने वाला कदम माना जा रहा है. #लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजों के बाद से ही पार्टी संगठन के पुनर्गठन की कवायद में है। वर्तमान में जेपी नड्डा पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं, जिनका कार्यकाल पहले ही एक बार बढ़ाया जा चुका है। नड्डा जनवरी 2020 में अध्यक्ष बने थे और उनका कार्यकाल 2023 में ही लोकसभा चुनाव तक के लिए बढ़ाया गया था। अब आम चुनाव सम्पन्न हो चुके हैं, पार्टी नेतृत्व में संभावित बदलाव को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है।
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आम चुनाव के लगभग 1 साल बीत जाने के बावजूद भी भाजपा को अब तक नया अध्यक्ष नहीं मिल पाया है। हालांकि, इस तरीके की खबरें थी कि अप्रैल या मई महीने में भाजपा को नया राष्ट्रीय अध्यक्ष मिल सकता है। लेकिन भारत-पाकिस्तान तनाव के बीच इसको लेकर निर्णय नहीं लिया जा सका। हालांकि, अब इस मामले में एक नया अपडेट सामने आया है।
सूत्रों का कहना है कि भाजपा जून के दूसरे सप्ताह में राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव के लिए अधिसूचना जारी की जा सकती है. इसके तहत विभिन्न राज्यों में संगठनात्मक चुनाव संपन्न किए जाएंगे, जिसके बाद राष्ट्रीय स्तर पर चुनाव संपन्न होगा. चुनाव की प्रक्रिया पार्टी के संविधान के अनुरूप होगी, जिसमें नामांकन, स्क्रूटनी और मतदान की पूरी प्रक्रिया शामिल होगी.
बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव जून के तीसरे या चौथे हफ्ते में संपन्न हो सकता है। इसके लिए जरूरी चुनावी प्रक्रिया जून के दूसरे हफ्ते से शुरू हो सकती है। पार्टी नेतृत्व में संभावित बदलाव को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है। 27 के चुनाव से पहले मनोज सिन्हा अब यूपी आने को बेकरार है। और अगर उनका आगमन उत्तर प्रदेश में हो गया तोफिर से त्रिकोण सिद्धान्त का व्योम बनता हुआ दिखाई दे सकता है।
जम्मू-कश्मीर के एलजी मनोज सिन्हा को कथित तौर पर पार्टी संगठन में प्रमुख भूमिका देने पर बात चल रही है। अध्यक्ष पद के लिए चर्चा में है।
राजस्थान से सांसद भूपेंद्र यादव भी राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए एक मजबूत विकल्प माने जा रहे हैं। वे पर्यावरण, वन तथा जलवायु परिवर्तन मंत्रालय का नेतृत्व कर रहे हैं और संगठनात्मक कार्यों में विशेष दक्षता रखते हैं। संघ से उनके जुड़ाव और रणनीतिक क्षमताओं की वजह से पार्टी के अंदर उनका भी नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है।
धर्मेंद्र प्रधान का नाम काफी समय से अध्यक्ष पद के लिए चर्चा में है। उनके पास आरएसएस से जुड़ाव, संगठकीय दक्षता तथा चुनावी रणनीति में पारंगता जैसी तमाम खूबियाँ हैं। वो वर्तमान में संबलपुर (ओडिशा) से सांसद हैं और भाजपा की चुनावी तैयारियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं।
बीजेपी नेतृत्व इस बार समय पर चुनाव प्रक्रिया को पूरा करने के मूड में है. बीजेपी के अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर अन्य दलों की भी नजर बनी हुई है, क्योंकि इससे पार्टी की नीति, संगठनात्मक प्राथमिकताओं और भावी रणनीतियों का संकेत मिलेगा. फिलहाल पार्टी कार्यकर्ता और नेता दोनों ही संभावित बदलाव को लेकर उत्सुक हैं. जून का महीना बीजेपी के लिए राजनीतिक रूप से बेहद अहम साबित हो सकता है.