गुप्त नवरात्रि में & 10 महाविद्या की पूजा का महत्व & दुर्गा सप्तशती, देवी महात्म्य या श्री दुर्गा चालीसा का पाठ & महाकाली और बगलामुखी के मंदिर में दर्शन और यंत्र-साधना करने से अद्भुत लाभ
गुप्त नवरात्रि के दौरान, देवी दुर्गा की दस महाविद्याओं की साधना करते हैं। इन में
माँ काली, तारा, त्रिपुर सुन्दरी, भुरभुरी, छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला देवीशामिल हैं. ऐसा माना जाता है कि इन दस महाविद्याओं की साधना से लेकर साधकों की भावनाएं पूर्ण होती हैं और उन्हें सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
मोरपंख, चांदी का सिक्का, सुहाग का सामान, लाल चुनरी आदि ले आएं, जिसे काफी शुभ माना जाता है. प्रकट नवरात्रियों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधिपूर्वक पूजा की जाती है, जबकि गुप्त नवरात्रि तंत्र साधना और 10 महाविद्याओं की उपासना के लिए जानी जाती है। गुप्त नवरात्रि विशेष रूप से साधकों और तांत्रिक साधनाओं से जुड़े लोगों के लिए अत्यंत फलदायी मानी जाती है।
ऊर्जा बढ़ाना चाहते हैं, तो प्रतिदिन कम से कम 108 बार इन मंत्रों का जाप करें।
“ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे” (महाकाली मंत्र)
“ॐ ह्रीं बगलामुखी सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तंभय जिव्हां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्रीं ॐ स्वाहा” (बगलामुखी मंत्र)
“ॐ दुं दुर्गायै नमः” (दुर्गा बीज मंत्र)

13 JUNE 2025 HIMALAYAUK NEWS BY CHANDRA SHEKHAR JOSHI EDITOR Mob. 9412932030
26 जून 2025 को आषाढ़ महीने की गुप्त नवरात्रि शुरू होने जा रही है और समापन 04 जुलाई को होगा। यानी गुप्त नवरात्रि की घटस्थापना 26 जून को की जाएगी। हिंदू धर्म में नवरात्रि का पर्व बहुत ही धूमधाम, श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। सालभर में कुल चार बार नवरात्रि आती है। इनमें से दो को ‘प्रकट नवरात्रि’ और दो को ‘गुप्त नवरात्रि’ कहा जाता है।
प्रकट नवरात्रियों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधिपूर्वक पूजा की जाती है, जबकि गुप्त नवरात्रि तंत्र साधना और 10 महाविद्याओं की उपासना के लिए जानी जाती है। गुप्त नवरात्रि विशेष रूप से साधकों और तांत्रिक साधनाओं से जुड़े लोगों के लिए अत्यंत फलदायी मानी जाती है।
ज्योतिष बताते है कि गुप्त नवरात्रि में 10 महाविद्या की पूजा का महत्व है. आध्यात्मिक ऊर्जा सशक्त होगी और सकारात्मकता का वास होगा, हिंदू धर्म में मान्यता है कि आषाढ़ गुप्त नवरात्रि के दौरान भी बाल-दाढ़ी कटवाने से बचना चाहिए
ऐसा माना जाता है कि गुप्त नवरात्रि में गुप्त तरीके से माता दुर्गा की पूजा-अर्चना करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं, देवी दुर्गा खुश होती हैं और घर में सुख-समृद्धि बढ़ती है। लेकिन गुप्त नवरात्रि के दौरान कुछ ऐसी चीजें हैं जो भूलकर भी नहीं करनी चाहिए। इससे देवी दुर्गा नाराज हो सकती हैं और जीवन पर बुरा असर पड़ सकता है। ऐसे में आइए जानते है गुप्त नवरात्रि के दौरान क्या नहीं करना चाहिए?
गुप्त नवरात्रि के दौरान दक्षिण दिशा की यात्रा को अशुभ माना जाता है। संभव हो तो इस दिशा में जाने से बचें। ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि मां दुर्गा के रौद्र रूप की तस्वीर गुप्त नवरात्रि के दौरान नहीं लगानी चाहिए, इससे जीवन पर बुरा असर पड़ सकता है।
आध्यात्मिक ऊर्जा जागृत करनी है, तो रात्रि के समय ध्यान और जप करने से शक्ति अधिक तीव्र होती है। माँ काली, तारा, बगलामुखी, छिन्नमस्ता आदि महाविद्याओं की रोज़ सुबह और रात को 15-30 मिनट ध्यान करें। वैसे, अगर आप इन ऊर्जाओं को नहीं संभाल सकते, तो सामान्य तरीके से ही साधना करें। जिन्हें मंत्र सिद्धि करनी होती है, वो लोग रात में साधना करते हैं।
अंतिम दिन हवन करना विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है। गुप्त नवरात्रि में रोज़ गाय के घी का दीपक जलाएं और उसमें दुर्गा सप्तशती या महामृत्युंजय मंत्र का हवन करें। “ॐ नमो भगवती काली” मंत्र से हवन करने से ऊर्जा का जागरण होता है। गुप्त नवरात्रि में जितना संभव हो, मौन व्रत रखें। आत्म निरीक्षण करें कि कहाँ आपकी ऊर्जा बेकार खर्च हो रही है और कैसे इसे सकारात्मक रूप से प्रयोग करें। ब्रह्मचर्य का पालन करें, ताकि ऊर्जा भीतर संरक्षित रहे।
ज्योतिष बताते है कि, गुप्त नवरात्रि के दौरान ज्वार न बोने की परंपरा होती है। जबकि सामान्य नवरात्रि में घटस्थापना के समय ज्वार बोने की परंपरा होती है, लेकिन गुप्त नवरात्रि में इसे वर्जित माना गया है। ऐसा करना पुण्य की जगह पाप का कारण बन सकता है।
- घटस्थापना मुहूर्त प्रातः 04 बजकर 44 मिनट से 6 बजकर 58 मिनट तक. दूसरा मुहूर्त प्रातः 9 बजकर 16 मिनट से 11 बजकर 34 मिनट तक होगा. इस दिन प्रतिपदा तिथि 26 दोपहर 1 बजकर 24 मिनट तक रहेगी.
- इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग भी बन रहा है, जो 08 बजकर 46 मिनट से 27 तारीख प्रातः 5 बजकर 31 मिनट तक रहेगी. अगर आप इस योग में पूजा करते हैं, तो आपको सिद्धि प्राप्त हो सकती है.