बटरिंग का मतलब जानते हो, जीवन के उस मोड पर पहुंचकर सिर्फ बगला मुखी महामाई की साधना करो, इन स्वार्थी नेताओं से दूरी बनाओ & पीतांबरा श्री बगलामुखी नाम लेने मात्र से जाग्रत होने वाली महामाई का अदभुत चमत्कार: श्री अर्जुन कुमार (पूर्व मंत्री सिक्किम) जी ने चन्द्रशेखर जोशी (संस्थापक अध्यक्ष बगलामुखी पीठ देहरादून उत्तराखंड) के सिक्किम के मजीठा शहर आगमन पर पीतांबरा अंग वस्त्र पहना कर अभिवादन किया था दिनांक 20 जुलाई 25 , और आज 26 जुलाई को महामाई की कृपा से अर्जुन कुमार जी को विशेष सम्मान से गंगटोक में नवाजा जा रहा है:

यह सावन का महीना है और इस दौरान शिवलिंग पर कुछ भी अर्पित करने और प्रार्थना करने से विशेष फल मिलता है।
इस प्रदोष काल में शिवलिंग के समक्ष अपनी मनोकामना बोलिए, भगवान शिव आपकी प्रार्थना सुनेंगे और आपकी मनोकामना पूरी करेंगे।
फोटो सिक्किम सिद्ध मंदिर से कर चन्द्रशेखर

कलयुग में, जहां नकारात्मकता और मानसिक संघर्ष अधिक होते हैं, बगलामुखी की पूजा हमेशा विजय प्राप्त करने और नकारात्मक शक्तियों को दूर करने में मदद करती है. बगला मुखी पीठ देहरादून से चंद्रशेखर जोशी
बगला मुखी पीठ में अदभुत अलौकिक सावन कार्यक्रम, आप को अग्रिम सूचना: 27 को महिला तीज पर्व पर महिलाओं का कार्यक्रम और 29 जुलाई को पार्थिव पूजन विशेषज्ञों ब्राह्मणों द्वारा, & 31 जुलाई को 3 बजे सांय से महिलाओं द्वारा विशेष कीर्तन , आरती प्रसाद वितरण: चंद्रशेखर जोशी

हरियाली तीज 2025 में 27 जुलाई, रविवार को बगला मुखी पीठ, स्थान नंदा देवी एनक्लेव राणा कॉलोनी कुंज बिहार, बंजारा वाला देहरादून में मनाई जाएगी,

हिंदू पंचांग के अनुसार, हर साल श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरियाली तीज का व्रत रखा जाता है। इस दिन सुहागिन महिलाएं पति की लंबी आयु और अच्छे सौभाग्य के लिए व्रत रखती हैं और कुंवारी कन्याएं मनचाहा वर पाने के लिए इस व्रत को रखती हैं। इस दिन मां पार्वती और शिव जी की पूजा करने का विधान है

सावन में हरियाली तीज, नाग पंचमी, श्रावणी पूर्णिमा, रक्षाबंधन जैसे महत्वपूर्ण पर्व भी आते हैं, जिनका धार्मिक और सामाजिक दृष्टि से गहरा महत्व होता है।

26 जुलाई 2025- चंद्र दर्शन
27 जुलाई 2025- हरियाली तीज

28 जुलाई 2025- सावन का तीसरा सोमवार, विनायक चतुर्थी
29 जुलाई 2025- सावन का तीसरा मंगलवार, तीसरा मंगला गौरी व्रत और नाग पंचमी

30 जुलाई 2025- स्कंद षष्ठी और कल्कि जयंती
31 जुलाई 2025- तुलसीदास जयंती

01 अगस्त 2025- मासिक दुर्गाष्टमी
03 अगस्त 2025- मित्रता दिवस

04 अगस्त 2025- सावन का चौथा सोमवार
05 अगस्त 2025- सावन का चौथा मंगलवार, चौथा मंगला गौरी व्रत, पुत्रदा एकादशी और दामोदर द्वादशी

06 अगस्त 2025- बुध प्रदोष व्रत
08 अगस्त 2025- वरलक्ष्मी व्रत और हयग्रीव जयंती

09 अगस्त 2025- रक्षाबंधन, गायत्री जयंती, नारली पूर्णिमा और सावन पूर्णिमा

Honoured to be a Part of a Memorable program
It was my proud privilege to attend the Grand Welcome & Congratulatory Program for the newly appointed Advisors, Chairpersons, APS, and OSDs of all four constituencies of Gyalshing District, organised by the SKM Party District Committee in coordination with the State Organisation Team at Gyalshing Party Office.
The event was graced by Hon’ble Minister Shri Bhim Hang Subba, Hon’ble Advisors Shri Loknath Sharma & Shri Sudesh Subba, and senior organisation leaders.
My heartfelt gratitude to the organisers for the warm welcome and well-orchestrated program.
Grateful for the warm reception and inspiring gathering.
Salute to all dedicated SKM Party members for their tireless service and unity!
कलकत्ता से पधारे अंतराष्ट्रीय बौद्ध सन्त के साथ 22 जुलाई को लंच आंध्रा भवन नई दिल्ली की कैंटीन में लिया

सावन में शिव के रुद्र रूप का अवतरण दिवस
दिव्य संरक्षण, शक्ति और आध्यात्मिक परिवर्तन प्राप्त करने में मदद मिलती है : भगवान शिव के दिव्य रूप है जो ब्रह्मांडीय ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करते हैं। रुद्राष्टकम – रुद्र का दिव्य स्तोत्र अदभुत अलौकिक है।

सिक्किम में चार धाम आध्यात्मिक स्थलों में सोमनाथ महादेव मंदिर में पूजा करने, शंख वादन का सौभाग्य प्राप्त हुआ: चंद्रशेखर
सावन शिवरात्रि में भगवान शिव के रुद्र रूप का अवतरण एक महत्वपूर्ण धार्मिक घटना है। इस दिन भगवान शिव के 11 रुद्र अवतारों का पूजन किया जाता है। भगवान शिव के 11 रुद्र अवतार, जिन्हें एकादश रुद्र के नाम से जाना जाता है, शिव पुराण में वर्णित शक्तिशाली अवतार हैं। रुद्र का शाब्दिक अर्थ है “वह जिसकी पुकार भयानक हो। प्रत्येक अवतार एक विशिष्ट ब्रह्मांडीय शक्ति का प्रतीक है, इन रुद्रों को समझने से आध्यात्मिक अंतर्दृष्टि गहरी होती है, सर्वोच्च देवता हैं, जो सृष्टि और संहार करते हैं और प्रत्येक जीव की देखभाल का दायित्व उन्हीं पर है।
पवित्र पुराण के अनुसार, शिव ने असुरों के विरुद्ध युद्ध में देवताओं की सहायता के लिए ग्यारह रुद्रों का रूप धारण किया था। रुद्रों का जन्म ऋषि कश्यप की पत्नी सुरभि से हुआ था, वेदों में रुद्र की तुलना एक दिव्य सत्ता के रूप में अग्नि (अग्नि देवता) और सूर्य (सूर्य देव) से की गई है और उन्हें सभी प्राणियों के लिए ऊर्जा के स्रोत और दुष्टों के भक्षक के रूप में पूजनीय माना जाता है।
सावन का महीना भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है और इस महीने में आने वाली शिवरात्रि का विशेष महत्व है।
भगवान शिव के 11 रुद्र अवतार हैं, जो विभिन्न पुराणों में वर्णित हैं। ये सभी रुद्र, देवताओं के कार्य सिद्ध करने के लिए शिव के रूप में उत्पन्न हुए थे। हनुमान जी को भी भगवान शिव का 11वां रुद्र अवतार माना गया है।
रुद्र शिव का एक प्रारंभिक वैदिक रूप है, जो उग्र, विनाशकारी और सुरक्षात्मक गुणों का प्रतीक है। , ,रुद्र पूजा करने से पापों को दूर करने, नकारात्मकता को दूर करने तथा दिव्य संरक्षण, शक्ति और आध्यात्मिक परिवर्तन प्राप्त करने में मदद मिलती है।

और सबसे मुख्य बात जो मैं बता रहा हूं,, ईनके बारे में सुनने या पढ़ने से जीवन से पाप और नकारात्मकता दूर होने की मान्यता है।
रुद्राष्टक : रुद्र अवतरण दिवस पर विशेष;
हे भगवन ईशान को मेरा प्रणाम ऐसे भगवान जो कि निर्वाण रूप हैं जो कि महान ॐ के दाता हैं जो सम्पूर्ण ब्रह्माण में व्यापत हैं जो अपने आपको धारण किये हुए हैं जिनके सामने गुण अवगुण का कोई महत्व नहीं, जिनका कोई विकल्प नहीं, जो निष्पक्ष हैं जिनका आकार आकाश के समान हैं जिसे मापा नहीं जा सकता उनकी मैं उपासना करता हूँ |
जिनका कोई आकार नहीं, जो ॐ के मूल हैं, जिनका कोई राज्य नहीं, जो गिरी के वासी हैं, जो कि सभी ज्ञान, शब्द से परे हैं, जो कि कैलाश के स्वामी हैं, जिनका रूप भयावह हैं, जो कि काल के स्वामी हैं, जो उदार एवम् दयालु हैं, जो गुणों का खजाना हैं, जो पुरे संसार के परे हैं उनके सामने मैं नत मस्तक हूँ |
सिक्किम में स्थित चार धाम में महारुद्र पूजा और कल्याण की प्रार्थना की, सावन 2025 में, रुद्र अवतरण 23 जुलाई को होगा, जो सावन शिवरात्रि का दिन है. सावन का महीना 11 जुलाई से शुरू हुआ और 9 अगस्त को समाप्त होगा. इस दौरान, 23 जुलाई को सावन शिवरात्रि मनाई जाएगी, जिस दिन भगवान शिव के रुद्र रूप का अवतरण है. इस दिन रुद्राभिषेक करना अति शुभ होता है, इसका विशेष मंत्र मेरे द्वारा: ,,,, माननीय राज्यपाल उत्तराखंड उपराष्ट्रपति पद पर विराजमान हो, रुद्र अवतरण दिवस पर मेरी विशेष प्रार्थना होगी: चंद्रशेखर संस्थापक बगला मुखी पीठ देहरादून 9412932030
कांवड़ यात्रा भगवान शिव को समर्पित है त्रेता युग में भगवान परशुराम ने गढ़मुक्तेश्वर से गंगाजल लाकर पुरा महादेव मंदिर में भगवान शिव का जलाभिषेक किया था. रावण ने भी विष के प्रभाव को कम करने के लिए कांवड़ से गंगाजल लाकर भगवान शिव का अभिषेक किया था, जिससे इस यात्रा की शुरुआत हुई.
कांवड़ यात्रा: यह एक धार्मिक यात्रा है, कांवड़ियों को “भोले” इसलिए कहा जाता है क्योंकि वे भगवान शिव (जिन्हें भोलेनाथ भी कहा जाता है) के भक्त होते हैं और कांवड़ यात्रा भगवान शिव को समर्पित है
सिक्किम में स्थित चार धाम में महारुद्र को पूजा और कल्याण की प्रार्थना की, सावन 2025 में, रुद्र अवतरण 23 जुलाई को होगा, जो सावन शिवरात्रि का दिन है. सावन का महीना 11 जुलाई से शुरू हुआ और 9 अगस्त को समाप्त होगा. इस दौरान, 23 जुलाई को सावन शिवरात्रि मनाई जाएगी, जिस दिन भगवान शिव के रुद्र रूप का अवतरण माना जाता है. इस दिन रुद्राभिषेक करना अति शुभ होता है, इसका विशेष मंत्र मुझसे पूछना चाहे:
इसके अलावा आज मैं आपको कांवड़ का माहात्म्य बताता हु: चंद्रशेखर संस्थापक बगला मुखी पीठ देहरादून 9412932030
कांवड़ यात्रा भगवान शिव को समर्पित है इसकी शुरुआत त्रेता युग में भगवान परशुराम ने की थी, जब उन्होंने गढ़मुक्तेश्वर से गंगाजल लाकर पुरा महादेव मंदिर में भगवान शिव का जलाभिषेक किया था. एक अन्य मान्यता के अनुसार, रावण ने भी विष के प्रभाव को कम करने के लिए कांवड़ से गंगाजल लाकर भगवान शिव का अभिषेक किया था, जिससे इस यात्रा की शुरुआत हुई.
कांवड़ यात्रा: यह एक धार्मिक यात्रा है, कांवड़ियों को “भोले” इसलिए कहा जाता है क्योंकि वे भगवान शिव (जिन्हें भोलेनाथ भी कहा जाता है) के भक्त होते हैं और कांवड़ यात्रा भगवान शिव को समर्पित है। “बोल बम” का जाप करने से भक्तों को यात्रा के दौरान किसी भी प्रकार की शारीरिक या मानसिक पीड़ा नहीं होती है और उनकी यात्रा मंगलमय होती है।
आध्यात्मिक ऊर्जा को जगा सकते हैं : चंद्रशेखर; जुलाई माह में ध्यान, जाप कर आध्यात्मिक ऊर्जा संचित करेंगे: सिक्किम से लौट कर चन्द्रशेखर.संस्थापक अध्यक्ष बगलामुखी पीठ देहरादून 22 जुलाई को दिल्ली उपलब्ध
अच्छे कर्म आपको आध्यात्मिक रूप से विकसित होने में मदद करते हैं। जब आप दूसरों की मदद करते हैं और सत्य के मार्ग पर चलते हैं, तो आप अपने भीतर शांति और ज्ञान प्राप्त करेंगे।
सिक्किम के पूर्व मंत्री और विधायक अपने पुण्य कर्मों के प्रभाव से चन्द्रशेखर जोशी संस्थापक बगला मुखी पीठ देहरादून उत्तराखंड से मिलने यू ही नहीं आ गए, उन पर अदभुत कृपा हो गई: चंद्रशेखर ने कहा कि राष्टीय शख्सियत बनोगे एक दिन,, और राष्टीय वैदिक तंत्र गुरु डॉक्टर शैलेश तिवारी जी के नई दिल्ली निवास में दिनांक 22 जुलाई को महामाई के 2 साधकों की मुलाकात से सकारात्मक भक्तों का कल्याण होगा और कलकत्ता से पहुंच रहे है इंटरनेशनल बौद्ध संत,
यह सच है कि आपके पुण्य कर्म ही आपके काम आएंगे। इसका मतलब है कि अच्छे कर्मों का फल हमेशा अच्छा होता है, और बुरे कर्मों का फल बुरा। जब आप अच्छे काम करते हैं, तो आपको सुख और शांति मिलती है, और जब आप बुरे काम करते हैं, तो आपको दुख और परेशानी मिलती है।
यह एक बहुत ही सामान्य और व्यापक रूप से स्वीकृत धार्मिक और दार्शनिक अवधारणा है, जो कर्म के सिद्धांत पर आधारित है। कर्म का सिद्धांत कहता है कि हर क्रिया का एक प्रतिक्रिया होती है।
इसलिए, यदि आप अपने जीवन में सुख और शांति चाहते हैं, तो आपको अच्छे कर्म करने चाहिए। अच्छे कर्मों में दूसरों की मदद करना, दयालु होना, सत्य बोलना और अहिंसा का पालन करना शामिल है।