28 अगस्त, गुरुवार का दिन है. गणेश चतुर्थी के एक दिन बाद आती है.भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि है और इस दिन ऋषि पंचमी मनाई जाती है.. पंचांग के अनुसार आज रवि योग बन रहा है ऋषि पंचमी सप्त ऋषियों के प्रति सम्मान व्यक्त करने और जाने-अनजाने में किए गए पापों से मुक्ति पाने के लिए मनाई जाती है, खासकर महिलाओं के लिए, जो मासिक धर्म के दौरान की गई भूलों का प्रायश्चित कर सकती हैं. इस दिन सप्त ऋषियों (कश्यप, अत्रि, भारद्वाज, विश्वामित्र, गौतम, जमदग्नि और वशिष्ठ) की पूजा की जाती है, और इस व्रत को करने से सभी प्रकार के पापों से मुक्ति मिलने की मान्यता है.
‘कश्यपोत्रिर्भरद्वाजो विश्वामित्रोथ गौतमः। जमदग्निर्वसिष्ठश्च सप्तैते ऋषयः स्मृताः॥ दहन्तु पापं सर्व गृह्नन्त्वर्ध्यं नमो नमः’॥ गृह्णन्त्वर्ध्य मया दत्तं तुष्टा भवत मे सदा। By Chandra Shekhar Joshi Chief Editor; Himalayauk News (Leading Newsportal & youtube Channel & Daily Newspaper) Mob. 9412932030
रजस्वला के दौरान एक महिला भोजन बनाती है। इससे ऋषि क्रोधित हो जाते हैं। यह पर्व सप्त ऋषियों को श्रद्धांजलि देने और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए मनाया जाता है. इस व्रत को करने से जाने-अनजाने में हुए पापों से मुक्ति मिलती है और व्यक्ति शुद्ध हो जाता है. यह व्रत खासकर महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है. धर्म शास्त्रों के अनुसार, मासिक धर्म के दौरान हुई किसी भी प्रकार की अपवित्रता या भूलों के प्रायश्चित के लिए इस व्रत को किया जाता है.

28 अगस्त 2025 को भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि है। चित्रा नक्षत्र और शुक्ला योग का संयोग रहेगा। दिन के शुभ मुहूर्त की बात करें तो गुरुवार को अभिजीत मुहूर्त 11:56 − 12:47 मिनट तक रहेगा। राहुकाल दोपहर 13:56 − 15:32 मिनट तक रहेगा। त्यौहार और व्रत ऋषि पंचमी
ऋषिपंचमी का त्यौहार हिन्दू पंचांग के भाद्रपद महीने में शुक्ल पक्ष पंचमी को मनाया जाता है।यह त्यौहार गणेश चतुर्थी के अगले दिन होता है। इस त्यौहार में सप्त ऋषियों के प्रति श्रद्धा भाव व्यक्त किया जाता है। कश्यप अत्रि भारद्वाज विश्वामित्र गौतम जमदग्नि वशिष्ठ
पंचांग ज्योतिष के पांच अंगों का मेल है। जिसमें तिथि,वार, करण,योग और नक्षत्र का जिक्र होता है। इसकी मदद से हम दिन के हर बेला के शुभ और अशुभ समय का पता लगाते हैं। उसके आधार पर अपने खास कर्मों को इंगित करते हैं।
भाद्रपद शुक्ल पक्ष पंचमी, कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082, शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), भाद्रपद | पंचमी तिथि 05:57 PM तक उपरांत षष्ठी | नक्षत्र चित्रा 08:43 AM तक उपरांत स्वाति | शुक्ल योग 01:18 PM तक, उसके बाद ब्रह्म योग | करण बालव 05:57 PM तक, बाद कौलव | अगस्त 28 गुरुवार को राहु 02:02 PM से 03:36 PM तक है | विक्रम संवत – 2082, कालयुक्त शक सम्वत – 1947, विश्वावसु पूर्णिमांत – भाद्रपद अमांत – भाद्रपद
प्रदोष काल-06:31 PM से 07:41 PM अभिजीत मुहूर्त-12:03 PM से 12:53 PM अमृत का मुहूर्त-01:45 AM – 03:33 AM ब्रह्म मुहूर्त-04:35 AMसे 05:23 AM विजय मुहूर् गोधूलि मुहूर्त 12:01:02 से 13:37:51 तक निशिता काल-11:17 PM से 12:09 AM, 29 अगस्त
28 अगस्त 2025 भाद्रपद शुक्ल पक्ष पंचमी,कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,गुरुवार आज के दिन कोई भी शुभ काम करना हो तो कर सकते हैं। आज का दिन हर दृष्टि से शुभ फलदायी है।
भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि ऋषि पंचमी के दिन मैं आप सभी के समक्ष सप्त ऋषि की कथा प्रस्तुत कर रही हूं। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को ऋषि पंचमी कहा जाता है। #ऋषिपंचमी व्रत करने से मासिक धर्म के दौरान भोजन करने से पापों से मुक्ति मिलती है। इस दिन ऋषि-मुनियों का स्मरण कर ऋषि पंचमी की कहानी है | श्रद्धापूर्वक ऋषि पंचमी का व्रत करता है और ऋषि पंचमी की व्रत कथा करता है, वह समस्त साम्य सुखों का भोग कर बैकुंठ को मिलता है। ऋषि पंचमी हिंदू कैलेंडर के भाद्रपद महीने का दिन है। ऋषि पंचमी सप्तऋषि की एक पारंपरिक पूजा है। रजस्वला दोष से शुद्ध होने के लिए ऋषिपंचमी पर महिलाएं व्रत रखती हैं और #ऋषिपंचमीव्रतकथा सुनती हैं। ऋषि पंचमी की व्रत कथा के अनुसार रजस्वला के दौरान एक महिला भोजन बनाती है। इससे ऋषि क्रोधित हो जाते हैं।
ऋषि पंचमी की कथा के अनुसार, एक नगरी में एक कृषक और उसकी पत्नी रहती थी। एक बार उसकी पत्नी रजस्वला हो गई, लेकिन यह जानने के बावजूद वह अपने कार्यों में लगी रही। जिस कारण उसे दोष लग गया, चूंकि उसका पति भी इस दौरान उसके संपर्क में आ गया, तो वह भी इस दोष का शिकार हो गया, जिस कारण वह दोनों अगले जन्म में जानवर बन गए।
ऋषि पंचमी के दिन लोग सप्त ऋषियों की पूजा करते हैं और उनका आशीर्वाद पाने के बाद अपने पापों को क्षमा करने की प्रार्थना करते हैं. शास्त्रों में इन सप्त ऋषियों के नाम कश्यप, अत्रि, भारद्वाज, विश्वामित्र, गौतम, जमदग्नि और वशिष्ठ बताए गए हैं.