29 अगस्त, शुक्रवार, बलराम जयंती,ग्रहों और योग का राशियों पर प्रभाव

29 अगस्त 2025 को भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि &  29 अगस्त 2025 को भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि & इस तिथि पर स्वाति नक्षत्र और ब्रह्मा योग का संयोग & शुक्रवार को अभिजीत मुहूर्त 11:56 − 12:46 मिनट तक & राहुकाल सुबह 10:46 − 12:21 मिनट तक रहेगा।   रवि योग , नक्षत्र : स्वाती – 11:38 ए एम तक,  शुक्ल पक्ष & आज बन रहे हैं कई शुभ योग

आज का मंत्र-ॐ द्रां द्रीं द्रौं स: शुक्राय नम:। लक्ष्मी मंदिर में मखाने की खीर चढ़ाएं। गूलर के वृक्ष में जल चढ़ाएं। जयंती/त्योहार/व्रत/मुहूर्त-श्रीबलदेव छठ/सूर्यषष्ठी यात्रा शकुन-शुक्रवार को मीठा दही खाकर यात्रा पर निकलें। आज का मंत्र-ॐ द्रां द्रीं द्रौं स: शुक्राय नम:।

श्री बलदेव छठ भगवान बलराम के जन्मदिन का प्रतीक है, जो भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है। इसे देवछठ भी कहते हैं, और इस दिन श्री बलदेव जी की विशेष पूजा की जाती है। यह ब्रज और हरियाणा में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है, जहाँ बलदेव जी के मंदिरों में विशेष दर्शन होते हैं और बड़े मेले लगते हैं। 

 29 अगस्त को भाद्रपद माह की शुक्ल पक्ष की षष्ठी और सप्तमी तिथि है। साथ ही स्वाति नक्षत्र, विशाखा नक्षत्र, ब्रह्म योग, इन्द्र योग, कौलव करण, तैतिल करण और गर करण का निर्माण हो रहा है। हालांकि शुक्रवार को किसी भी ग्रह का राशि गोचर नहीं होगा, लेकिन ग्रहों और योग का राशियों पर प्रभाव जरूर पड़ेगा। 

सूर्य अयन -दक्षिणायन विक्रम संवत -2082 शक संवत -1947 संवत्सर -पिघल
दिशाशूल -पश्चिम ऋतु -वर्षा नक्षत्र -स्वाति योग – ब्रह्म करण -कुलव चंद्रराशि -सिंह सूर्यराशि –

ज्योतिष के अनुसार आज का पंचांग दैनिक हिंदू कैलेंडर ही है जो आज की तिथि के बारे में बताता है, और इसके बीच शुभ और अशुभ समय की जानकारी देता है। यह विजय विश्व पंचांग पर आधारित है, जो पंचांग में सबसे दुर्लभ है, जिसका उपयोग विशेषज्ञ ज्योतिषियों द्वारा सैकड़ों वर्षों से किया जा रहा है। दैनिक पंचांग के माध्यम से, आप एक शुभ कार्य या एक नया उद्यम शुरू करने के लिए सबसे उपयुक्त समय निर्धारित करने के लिए समय, तिथि और दिन के बारे में सभी तरह की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं और सभी नकारात्मक प्रभावों और अनावश्यक परेशानियों को दूर कर सकते हैं।

पंचांग या पंचागम् हिन्दू कैलेंडर है जो भारतीय वैदिक ज्योतिष में दर्शाया गया है। पंचांग मुख्य रूप से 5 अवयवों का गठन होता है, अर्थात् तिथिवारनक्षत्रयोग एवं करण। पंचांग मुख्य रूप से सूर्य और चन्द्रमा की गति को दर्शाता है। हिन्दू धर्म में हिन्दी पंचांग के परामर्श के बिना शुभ कार्य जैसे शादी, नागरिक सम्बन्ध, महत्वपूर्ण कार्यक्रम, उद्घाटन समारोह, परीक्षा, साक्षात्कार, नया व्यवसाय या अन्य किसी तरह के शुभ कार्य नहीं किये जाते ।

प्राचीन ऋषियों और वेदों के अनुसार, जब कोई व्यक्ति पर्यावरण के साथ सामंजस्य स्थापित करता है, तो वह सकारात्मक तरीके से प्रतिक्रिया देता है और व्यक्ति को उसके कार्य को सफलतापूर्वक पूरा करने में मदद करता है। हिन्दू दैनिक पंचांग इस सौहार्द को स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और इसके उपयोग से व्यक्ति को तिथि, योग और शुभ-अशुभ समयों में ज्योतिषीय अंतर्दृष्टि प्राप्त होती है। जिससे हम सूक्ष्म संचार के आधार पर उपयुक्त समय के बारे में जान सकते हैं और अपने समय और कार्य का अधिकतम लाभ उठा सकते हैं।

ज्योतिषी लोगों को सुझाव देते हैं कि वे अपने दैनिक पंचांग को रोजाना देखें और किसी भी नए काम को शुरू करने के लिए इसका पालन करें जैसे कि वैवाहिक समारोह, सामाजिक मामलों, महत्वपूर्ण कार्यक्रमों, उद्घाटन, नए व्यापार उपक्रम आदि जैसे शुभ कार्यक्रम इसके अनुसार करें।

वैदिक ज्योतिष के अनुसार, एक चंद्र माह में 30 तिथि या पूर्ण चंद्र दिवस होते हैं। इन्हें आगे इन्हें 2 पक्ष या चंद्र चरणों में विभाजित किया गया है, जिन्हें ‘कृष्ण पक्ष’ और ‘शुक्ल पक्ष’ कहा जाता है। प्रत्येक पक्ष में 15 तिथियां होती हैं।

ब्रज के राजा दाऊजी महाराज के जन्म के विषय में ‘गर्ग पुराण’ के अनुसार देवकी के सप्तम गर्भ को योगमाया ने संकर्षण कर रोहिणी के गर्भ में पहुँचाया। भाद्रपद शुक्ल षष्ठी के स्वाति नक्षत्र में वसुदेव की पत्नी रोहिणी जो कि नन्दबाबा के यहाँ रहती थी, के गर्भ से अनन्तदेव ‘शेषावतार’ प्रकट हुए। इस कारण श्री दाऊजी महाराज का दूसरा नाम ‘संकर्षण‘ हुआ। भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि बुधवार के दिन मध्याह्न 12 बजे तुला लग्न तथा स्वाति नक्षत्र में बल्देव जी का जन्म हुआ। उस समय पाँच ग्रह उच्च के थे। इस समय आकाश से छोटी-छोटी वर्षा की बूँदें और देवता पुष्पों की वर्षा कर रहे थे।

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