31 अगस्त 2025 को भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि है। इस तिथि पर अनुराधा नक्षत्र और वैधृति योग के संयोग में राधा अष्टमी का पर्व मनाया जाएगा। दिन के शुभ मुहूर्त की बात करें तो रविवार को अभिजीत मुहूर्त 11:55 − 12:46 मिनट तक रहेगा। राहुकाल शाम 17:04 − 18:39 मिनट तक रहेगा राधा अष्टमी के दिन कई शुभ योग भी रहने वाला है. इस दिन सिंह राशि में बुध ग्रह रहेंगे, जिससे बुधादित्य योग बनेगा. इसके साथ ही सिंह राशि केतु, सूर्य और बुध की उपस्थिति में त्रिग्रही योग का भी निर्माण होगा. इस शुभ योगों में किए पूजा का भक्तों को लाभ मिलेगा. ^ मंदिर की सफाई

BY CHANDRA SHEKHAR JOSHI CHIEF EDITOR; Himalayauk News (Leading Newsportal & Daily Newspaper & youtube Channel. Mob. 9412932030
धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण की प्रेम संगिनी राधा रानी का जन्म भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को हुआ था, जोकि इस साल रविवार, 31 अगस्त 2025 को पड़ रही है. इस दिन राधा रानी की पूजा अर्चना की जाती है. & भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि की शुरुआत 30 अगस्त रात 10 बजकर 46 मिनट पर होगी और 1 सितंबर को सुबह 12.57 तक रहेगी. 31 अगस्त को सुबह 11:05 से 1:38 तक का समय पूजा के लिए शुभ रहेगा.
श्रीजी शब्द ‘श्री’ से बना है, जिसका अर्थ है देवी लक्ष्मी, शोभा, वैभव, और चमक। ‘श्रीजी’ का अर्थ है वह व्यक्ति जिसका सम्मान किया जाता है, अर्थात दिव्य, पूजनीय व्यक्ति, या सम्माननीय व्यक्ति।

राधा अष्टमी जन्माष्टमी के 15 दिन बाद भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है. हर साल राधा अष्टमी का पर्व भादो महीने की शुक्ल अष्टमी को होती है. लेकिन इस साल अष्टमी तिथि दो दिन पड़ रही है, जिस कारण भक्तों में असमंजस है कि राधा अष्टमी 30 अगस्त को मनाई जाएगी या 31 अगस्त को. आपको बता दें कि, राधा अष्टमी का पर्व इस साल रविवार, 31 अगस्त 2025 को है.
राधा रानी के जन्म दिन को हर साल राधा अष्टमी या राधा जयंती के रूप मे मनाया जाता है. इस दिन राधा जी की पूजा पाठ करने के साथ ही कुछ शुभ चीजों को घर पर लाना चाहिए. इन पवित्र चीजों को घर पर लाने से सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है और धन की कमी दूर होती है.
बांसुरी- श्रीकृष्ण हमेशा बांसुरी बजाते थे, जिसकी धुन किशोरी जी को बहुत पसंद थी. इसलिए राधा अष्टमी के दिन घर पर बांसुरी लाना शुभ माना जाता है. श्रीकृष्ण के प्रतीक बांसुरी को घर पर रखने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार बढ़ता है.

कंबद का पौधा- राधा अष्टमी के दिन घर पर कंबद का पौधा लाभा भी शुभ होता है. ऐसी मान्यता है कि, इसी वृक्ष की डालियों पर बैठकर कान्हा बंसी (बांसुरी) बजाया करते थे. इसलिए राधाष्टमी के दिन कंबद का पौधा लाकर घर पर इसका रोपण करें. इससे सुख-समृद्धि और शोभा में वृद्धि होती है. इसे आप घर के आंगन या बालकनी कहीं भी रख सकते हैं.
मोरपंख- भगवान कृष्ण ने मोरपंख को अपने माथे पर सुशोभित किया है. साथ यह राधा रानी को भी अतिप्रिय है. राधा अष्टमी पर श्रीकृष्ण से जुड़ी इन चीजों को लाने से राधा-कृष्ण की कृपा परिवार पर बरसती है.
- भाद्रपद शुक्ल अष्टमी आरंभ- 30 अगस्त 2025, रात 10:46
- भाद्रपक्ष शुक्ल अष्टमी समाप्त- 1 सितंबर 2025, देर रात 12:57
- राधा अष्टमी तिथि – रविवार, 31 अगस्त 2025 (उदयातिथि के अनुसार)
- पूजा का शुभ मुहूर्त- 31 अगस्त सुबह 11:05 से दोपहर 01:38 तक.
31 अगस्त 2025 को भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि है। इस तिथि पर अनुराधा नक्षत्र और वैधृति योग के संयोग में राधा अष्टमी का पर्व मनाया जाएगा। रविवार को अभिजीत मुहूर्त 11:55 − 12:46 मिनट तक रहेगा। राहुकाल शाम 17:04 − 18:39 मिनट तक रहेगा।
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:02 से 12:52 बजे तक अमृत काल: सुबह 5:48 से 7:35 बजे तक ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:36 से 5:24 बजे तक

31 अगस्त 2025 को रविवार है। इस दिन भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि है तो राधा अष्टमी का पर्व है। राधारानी का जन्म मध्याह्न काल का माना जाता है। इस लिहाज से उनकी पूजा दोपहर में की जाती है। दृक पंचांग के अनुसार, 2025 में राधा अष्टमी की तिथि 30 अगस्त को रात 10:46 बजे से आरंभ होगी। इसका समापन 1 सितंबर 2025, रात 12:58 am पर होगी। 31 अगस्त को राधा अष्टमी 2025 की पूजा का मुहूर्त सुबह 11:50 बजे से दोपहर 2:17 बजे तक का रहेगा। इस पूजन की अवधि लगभग 2 घंटे 27 मिनट की रहेगी।
राधा अष्टमी के दिन पूजा करने के बाद मंदिर में अन्न और धन समेत आदि चीजों का दान करें। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इन चीजों का दान करने से साधक को जीवन में कभी भी किसी की कमी का सामना नहीं करना पड़ता है और हमेशा धन से तिजोरी भरी रहती है।
राधा अष्टमी की पूजा में सच्चे मन से राधा रानी के 108 नामों का मंत्र जप करें। सुख-समृद्धि में वृद्धि के लिए कामना करें। ऐसा माना जाता है कि इस उपाय को करने से साधक को लाड़ली जी का आशीर्वाद प्राप्त होता है और जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।
- विक्रम संवत: 2082 (कालायुक्त), शक संवत: 1947 (विश्वावसु)
- वार (दिन): रविवार
- तिथि: शुक्ल पक्ष अष्टमी: 30 अगस्त शाम 10:46 बजे से आरंभ
- नक्षत्र: अनुराधा: सुबह से शाम 5:27 बजे तक, फिर ज्येष्ठा
- करण- विष्टि: तिथि प्रारंभ से सुबह 11:55 बजे तक, बव: सुबह 11:55 बजे से रात 12:58 बजे तक, बालव: अगले दिन दोपहर 1:54 बजे तक
- योग: वैधृति: तिथि प्रारंभ से दोपहर 3:58 बजे तक, विष्कम्भ: दोपहर 3:58 बजे से अगले दिन तक
- त्योहार / व्रत: राधाष्टमी, दुर्गाष्टमी व्रत (मासिक), महालक्ष्मी व्रत प्रारंभ
- सूर्योदय: प्रातः 6:12 बजे
- सूर्यास्त: सांय 6:41 बजे
- चन्द्रोदय: दोपहर 1:02 बजे
- चन्द्रास्त: रात 11:41 बजे