05 सितंबर 2025 भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि& श्रावण नक्षत्र और शोभना योग का संयोग & शुक्रवार को अभिजीत मुहूर्त 11:51 − 12:41 मिनट तक & राहुकाल सुबह 10:42 − 12:16 मिनट तक रहेगा। ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 04:52 मिनट से 05:38 मिनट तक & अभिजीत मुहूर्त- दोपहर12:12 मिनट से 01:02 मिनट तक & प्रदोष काल की पूजा का शुभ मुहूर्त- शाम 06:50 मिनट से 07:59 मिनट तक & सूर्योदय: सुबह 6:०७ बजे & शुक्र प्रदोष व्रत की पूजा 5 सितंबर के दिन शाम 6 बजकर 38 मिनट से रात 8 बजकर 55 मिनट के बीच किया जाएगा। & प्रदोष काल में भोलेनाथ पर दही और दूध अर्पित करते हैं आर्थिक संकट दूर & CHANDRA SHEKHAR JOSHI Mob. 9412932030
चंद्र ग्रहण 7 सितंबर को लग रहा है, लेकिन इसके एक दिन पहले राहु के कारण ऐसा खतरनाक योग बनेगा जो कुछ राशियों का जीवन उथल-पुथल कर सकता है,
5 सितंबर को प्रदोष काल शाम 06 बजकर 50 मिनट से शुरू होगा और 07 बजकर 59 मिनट तक रहेगा।

प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव की पूजा प्रदोष काल के दौरान करना बेहद शुभ होता है। प्रदोष काल के दिन आपको सुबह और शाम दोनों समय पूजा करनी चाहिए। हालांकि इस दिन पूजा के लिए शाम का वक्त यानि प्रदोष काल बेहद शुभ माना जाता है। इस दिन स्नान-ध्यान के बाद आपको स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए। इसके बाद भगवान शिव का पूजन शुरू करना चाहिए। पूजन में भगवान शिव को फूल, अक्षत, जल, भांग-धतूरा, बेलपत्र आपको अर्पित करने चाहिए। संभव हो तो शिवलिंग का जलाभिषेक भी अवश्य करें। इसके बाद शिव चालीसा और शिव जी के मंत्रों का जप आपको करना चाहिए। पूजा के दौरान प्रदोष व्रत की कथा कथा का पाठ भी अवश्य करें। पूजा के अंत में भगवान शिव की आरती का पाठ करना चाहिए और प्रसाद का वितरण करना चाहिए।
7 सितंबर 2025 को चंद्र ग्रहण
7 सितंबर 2025 को चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। खास बात ये है कि इस ग्रहण को भारत के लोग भी देख पाएंगे। चंद्र ग्रहण की शुरुआत 7 सितंबर की रात 9 बजकर 58 मिनट पर होगी और इसका समापन रात 1 बजकर 26 मिनट पर होगा। स्थानीय ग्रहण की अवधि 03 घण्टे 28 मिनट्स 02 सेकण्ड्स की होगी। चूंकि ये ग्रहण भारत में दिख रहा है इसलिए इसका सूतक भी माना जाएगा।
चंद्र ग्रहण 7 सितंबर 2025 की रात 9 बजकर 58 मिनट पर शुरू होगा और इसकी समाप्ति देर रात 1 बजकर 26 मिनट पर होगी। इस चंद्र ग्रहण का सूतक काल भी लगेगा। जिसकी शुरुआत 7 सितंबर की दोपहर 12 बजकर 58 मिनट पर होगी और समाप्ति ग्रहण के खत्म होने के साथ होगी। ग्रहण कुंभ राशि और पूर्व भाद्रपद नक्षत्र में लगने जा रहा है।
चंद्र ग्रहण का सूतक 7 सितंबर 2025 की दोपहर 12 बजकर 19 मिनट पर शुरू होगा और इसकी समाप्ति 8 सितंबर की देर रात 1 बजकर 26 मिनट पर होगी। बच्चों, बूढ़ों और अस्वस्थ लोगों के लिए सूतक शाम 6 बजकर 36 मिनट पर शुरू होगा और समाप्ति ग्रहण के साथ होगी।

भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 5 सतंबर को सुबह 4 बजकर 8 मिनट पर शुरू हो रही है। वहीं, इस तिथि का समापन 6 सितंबर को प्रातः 3 बजकर 12 मिनट पर होने जा रहा है। ऐसे में प्रदोष व्रत शुक्रवार 5 सितंबर को किया जाएगा।
सूर्य ग्रहण और चन्द्र ग्रहण से पूर्व की एक निश्चित समयावधि को सूतक के रूप में जाना जाता है। चंद्र ग्रहण का सूतक ग्रहण लगने से 9 घंटे पहले शुरू हो जाता है तो वहीं सूर्य ग्रहण का सूतक 12 घंटे पहले लग जाता है। हिन्दु मान्यताओं के अनुसार सूतक काल के समय पृथ्वी का वातावरण दूषित हो जाता है इसलिए सूतक के अशुभ दोषों से सुरक्षित रहने हेतु विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
धन, समृद्धि की प्राप्ति के लिए एक कच्चे मिट्टी के घड़े में गेहूं भरकर, उस पर ढक्कन लगाकर, घड़े को किसी सुपात्र ब्राह्मण को दान कर दें और अपनी बेहतरी के लिये उनके पैर छूकर आशीर्वाद लें.
ब्रह्म मुहूर्त में उठकर सभी कामों को निवृत्त होकर स्नान आदि कर लें। इसके बाद साफ-सुथरे और सूखे वस्त्र धारण कर लें। प्रदोष व्रत के दिन शिव जी की कृपा के लिए पूजा के दौरान शिवलिंग का पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, और शक्कर) से अभिषेक करें। इसी के साथ शिव जी को बेलपत्र, फल, फूल, धूप-दीप और नैवेद्य आदि चढ़ाएं। गन्ने के रस से शिवलिंग का अभिषेक करने से मां लक्ष्मी की कृपा मिलती है। रात्रि में शिव मंदिर में दीपक जलाने का विशेष महत्व है, जिससे धन प्राप्ति के योग बनते हैं। धन की कमी को दूर करने के लिए, शिवलिंग पर अक्षत, गंगाजल, दूध, दही, घी, शहद, और शक्कर चढ़ाना शुभ माना जाता है। इसके अलावा, बेलपत्र, धतूरा और सुगंधित तेल चढ़ाने से भी धन-धान्य की वृद्धि होती है। शिवलिंग पर सुगंधित तेल चढ़ाने से व्यक्ति को धन-धान्य और भौतिक सुख प्राप्त होते हैं। शिवलिंग पर लौंग का जोड़ा, सफेद चंदन या अरहर दाल चढ़ाने से भी धन की कमी दूर होती है और आर्थिक स्थिति में सुधार होता है। इस दिन पर आप शिव चालीसा के साथ-साथ शिव जी के मंत्रों का भी जप कर सकते हैं। महादेव को खीर, दही या फिर सूजी के हलवे का भोग लगाएं और घी का दीपक जलाकर शिव जी की आरती करें।
राशियों के लिए ; चंद्रग्रहण का मीन राशि पर शुभ प्रभाव पड़ेगा। आपकी आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। कई माध्यमों से धन प्राप्त करने में सफल रहेंगे। किसी भी काम में की गई मेहनत रंग लाएगी।
चंद्र ग्रहण के सूतक में क्या ना करें
- पूजा, हवन, यज्ञ, मूर्ति स्थापना, विवाह, गृह प्रवेश जैसे शुभ कार्य न करें।
- सूतक काल में भोजन पकाना या खाना नहीं चाहिए।
- बाल कटवाना, नाखून काटना, दाढ़ी बनाना या अन्य शारीरिक शुद्धिकरण के कार्य नहीं करने चाहिए।
- अनावश्यक यात्रा से बचना चाहिए, खासकर यदि आप लंबी यात्रा पर जा रहे हों।
- कोई नया व्यवसाय, परियोजना या निवेश शुरू नहीं करना चाहिए।
- मांस, मदिरा, लहसुन, प्याज जैसे तामसिक पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए।
- गर्भवती महिलाओं को इस दौरान सुई, चाकू या किसी भी तरह की नुकीली वस्तुओं का उपयोग नहीं करना चाहिए।
चंद्र ग्रहण के सूतक में क्या करना चाहिए?
- भगवान का नाम जपें, जैसे “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” या “महामृत्युंजय मंत्र” का जाप कर सकते हैं।
- बुरे प्रभाव से बचने के लिए ग्रहण के बाद गरीबों को दान जरूर देना चाहिए।
- ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान करें और घर में गंगाजल का छिड़काव करें।