07 सितंबर 2025 को भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि है। इस तिथि पर शतभिषा नक्षत्र और सुकर्मा योग का संयोग बन रहा है। दिन के शुभ मुहूर्त की बात करें तो रविवार को अभिजीत मुहूर्त 11:53 − 12:44 मिनट तक रहेगा। 7 सितंबर की शाम तक चंद्र ग्रहण के प्रभाव से .. & सत्यनारायण कथा ; BAGULA MUKHI PEETH 7 TO 9 AM BY CHANDRA SHEKHAR JOSHI; PRIEST; Mob., 9412932030 & ग्रहण के दोष समाप्त होते हैं. & सौभाग्य योग बन रहा है. & सुबह 6:30 से 10:30 बजे तक-सबसे उपयुक्त समय. ^ सूतक आरंभ (12:57 PM) से पहले पूजा और कथा पूरी कर लेना श्रेयस्कर. & दोपहर का अभिजित मुहूर्त (11:54–12:44 PM) उपलब्ध है, लेकिन 12:43 तक भद्रा रहने से व्यावहारिक रूप से कठिन. ^ श्रद्धापूर्वक सुनें & BAGULA MUKHI PEETH DHARMPUR VIDHAN SABHA, BANJARALA WALA DEHRADUN Mob. 9412932030
7 सितंबर की रात पूर्णिमा है और 8 सितंबर से पितृ पक्ष शुरू. यह संयोग इसलिए खास है कि पूर्णिमा को भगवान विष्णु की पूजा और सत्यनारायण कथा से पितरों की संतुष्टि भी होती है. अगले दिन पितृ पक्ष प्रारंभ होने से, कथा का पुण्य सीधे पितरों को समर्पित हो सकता है. ब्रह्मपुराण में कहा गया है कि जो व्यक्ति पितृ पक्ष से पहले सत्यनारायण की पूजा करता है, उसके पितरों को शांति और मोक्ष का लाभ होता है.
7 सितंबर 2025 को रात को पूर्ण चंद्र ग्रहण होने के कारण सूतक दोपहर में ही लग जाएगा. शास्त्रों के अनुसार सूतक लगने के बाद सामान्य पूजा-पाठ, नैवेद्य अर्पण और कथा-श्रवण वर्जित हो जाते हैं. ग्रहण काल में किया गया मंत्र-जप, ध्यान और स्तोत्र पाठ सामान्य दिनों से हजार गुना फलदायी माना गया है. ग्रहण समाप्ति के बाद स्नान, दान का महत्व है.

सितंबर 2025 को चंद्र ग्रहण और भाद्रपद पूर्णिमा है. साथ ही इस दिन से पितृ पक्ष भी शुरू हो रहे हैं. भादो की पूर्णिमा पर ब्रह्म मुहूर्त में स्नान दान करने पर समस्त पापों से मुक्ति मिलती है. इस दिन पूर्णिमा का श्राद्ध भी होगा लेकिन सूतक काल लगने से ये श्राद्ध अमावस्या पर किया जाएगा.वहीं चंद्र ग्रहण का सूतक शुरू होने से पहले खाने-पीने की चीजों में तुलसी डाल दें, मंदिर के पट बंद कर दें.
7 सितंबर 2025 का पंचांग और ग्रह-गोचर
- थि: पूर्णिमा (समाप्ति रात 11:38 बजे)
- नक्षत्र: शतभिषा (रात्रि 9:41 बजे तक), फिर पूर्वाभाद्रपदा
- योग: सुकर्मा (सुबह 6:10–9:23 बजे तक)
- भद्रा: 12:43 बजे दोपहर तक
- सूतक: 12:57 बजे दोपहर से (ग्रहण आरंभ से 9 घंटे पहले)
- चंद्र राशि: कुंभ
- सूर्य राशि: सिंह
- विशेष: पूर्ण चंद्र ग्रहण (आरंभ 9:58 PM, मध्य 11:42 PM, मोक्ष 1:26 AM)
वैदिक ज्योतिष में पंचांग को समय का प्रतिनिधि माना जाता है। जहाँ आधुनिक युग में लोग समय जानने के लिए कैलेंडर और घड़ी का सहारा लेते हैं, वहीं हिंदू धर्म के अनुयायी समय की गणना और शुभ-अशुभ मुहूर्त जानने के लिए पंचांग का प्रयोग करते हैं। पंचांग के माध्यम से केवल सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और चंद्रास्त की जानकारी ही नहीं मिलती, बल्कि दिनभर के सभी शुभ और अशुभ मुहूर्तों का भी विवरण प्राप्त होता है।
07 सितंबर 2025 को भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि & उपाय-विष्णु मन्दिर में स्वर्ण चढ़ाएं। & वनस्पति तंत्र उपाय-बेल के वृक्ष में जल चढ़ाएं। इलायची खाकर … ज्योतिष दृष्टि से 7 सितंबर 2025, वार रविवार का दिन बेहद खास है। रविवार को भाद्रपद माह की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा और प्रतिपदा तिथि रहेगी। साथ ही शतभिषा नक्षत्र, पूर्वभाद्रपदा नक्षत्र, सुकर्मा योग, धृति योग, विष्टि करण, बव करण और बालव करण बन रहा है। इसके अलावा देर रात 09:58 से लेकर अगले दिन की सुबह 01:26 मिनट तक भारत में चंद्र ग्रहण दिखाई देगा। ऐसे में पूरे दिन समय-समय पर मानव जीवन में परिवर्तन आएगा।
आज के व्रत, त्योहार और विशेष घटनाएं : व्रत पूर्णिमा/पितृतर्पण (महालय) प्रारंभ/भद्रा/खग्रास चन्द्रग्रहण & 7 सितंबर 2025 को शनि की राशि कुंभ और गुरु ग्रह के नक्षत्र पूर्वाभाद्रपद में 12482 सेकंड तक चंद्र ग्रहण लगेगा

7 सितंबर 2025 को देर रात 11:38 मिनट तक भाद्रपद माह की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि रहेगी, जिसके बाद प्रतिपदा तिथि का आरंभ हो रहा है। ऐसे में इस दिन भाद्रपद पूर्णिमा भी मनाई जाएगी। भाद्रपद पूर्णिमा के दिन लगने वाला चंद्र ग्रहण कुंभ राशि व पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में लगेगा। दरअसल, चंद्र देव 6 सितंबर 2025 को सुबह 11 बजकर 21 मिनट पर शनि की राशि कुंभ में गोचर करेंगे, जहां पर वह 8 सितंबर की दोपहर 2 बजकर 28 मिनट तक रहेंगे। इस बीच 7 सितंबर की रात 9 बजकर 40 मिनट पर चंद्र देव गुरु के नक्षत्र पूर्वाभाद्रपद में गोचर करेंगे, जहां पर वह 8 सितंबर 2025 की रात 8 बजकर 2 मिनट तक रहेंगे।
सत्यनारायण व्रत का उल्लेख प्रमुख रूप से स्कंदपुराण में मिलता है. कथा में वर्णन है कि इस व्रत को करने से जीवन की हर बाधा दूर होती है, परिवार में सुख-शांति आती है और धन-धान्य की वृद्धि होती है.
सत्यनारायण को भगवान विष्णु का ही एक सुलभ और गृहस्थों के लिए अनुकूल रूप माना गया है. कथा सुनने-कराने से दरिद्रता का नाश, रोगों से मुक्ति, संतान सौभाग्य और मानसिक शांति प्राप्त होती है.
भारत के अधिकांश क्षेत्रों में पूर्णिमा की रात यह कथा कराने की परंपरा है. विशेषकर भाद्रपद पूर्णिमा पर इसे और भी अधिक लाभकारी माना गया है.
धर्मसिंधु के अनुसार पूर्णिमायां तु यः स्नाति दानं जप्यं च यः कुर्यात्. तस्य पुण्यफलं तात गंगास्नानस्य तद्भवेत्. अर्थात पूर्णिमा को किया गया स्नान, जप और दान गंगास्नान के बराबर फलदायी होता है.
मुहूर्त चिंतामणि में स्पष्ट उल्लेख है कि पूर्णिमा देवताओं के लिए अत्यंत प्रिय है. यह तिथि चंद्रमा की पूर्ण कलाओं का प्रतीक है और जप, तप, व्रत, दान और कथा-श्रवण के लिए उत्तम मानी जाती है.
मान्यता है कि भाद्रपद पूर्णिमा की सत्यनारायण कथा से विवाह और संतान में आने वाली अड़चनें दूर होती हैं. व्यापार में उन्नति और परिवार में सौहार्द बढ़ता है. पितृ पक्ष से ठीक पहले होने के कारण पूर्वजों की आत्मा तृप्त होती है.
स्कंदपुराण के अनुसार सत्यनारायण व्रत सभी इच्छाओं को पूर्ण करने वाला. वहीं पद्मपुराण के अनुसार पूर्णिमा व्रत से दान और जप का पुण्य सहस्रगुना होता है. जबकि मुहूर्त चिंतामणि में लिखा है कि पूर्णिमा की तिथि देव-पूजन, दान और व्रत के लिए श्रेष्ठ है लेकिन भद्रा काल में गृह-प्रवेश या विवाह न करें.
श्रद्धालुओं को चाहिए कि इस दिन सुबह सूतक से पहले सत्यनारायण कथा कर सकते हैं, रात को ग्रहण काल में मंत्र-जप करें और चंद्र ग्रहण समाप्त के बाद स्नान-दान द्वारा पुण्य को पूर्ण करें.