नेपाल के बाद अब फ्रांस में बवाल & सैकड़ों की संख्या में सरकार के खिलाफ सड़कों पर & राजधानी पेरिस में बुधवार (10 सितंबर) को आगजनी और तोड़फोड़ की कई घटनाएं & नेपाल में हुए उग्र प्रदर्शन को देखते हुए फिलहाल काठमांडू एयरपोर्ट को बंद कर दिया गया है & द हिमालयन टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक बुद्ध एयर ने 11 सितंबर से उड़ानें फिर से शुरू करने की घोषणा की. एयरलाइन ने पुष्टि की है कि यात्री अब इसकी आधिकारिक वेबसाइट, मोबाइल एप्लिकेशन, अन्य ऑनलाइन पोर्टल और ट्रैवल एजेंसियों के माध्यम से टिकट बुक कर सकते हैं. & नेपाल में केपी शर्मा ओली के इस्तीफे के बाद अब कयास लगाए जा रहे हैं कि सुशीला कार्की देश की अगली प्रधानमंत्री होंगी. Gen-Z नेताओं ने 5 घंटे तक सुशीला कार्की के साथ वर्चुअली मीटिंग की. इसके बाद हुई वोटिंग में सुशीला कार्की को 58 फीसदी वोट मिले हैं, जबकि बालेन शाह को 32 फीसदी ही वोट मिले हैं. HIMALAYAUK LEADING NEWSPORTAL & YOUTUBE CHANNEL & DAILY NEWSPAPER .

चन्द्र ग्रहण का राजनीति पर असर : गणना सटीक;;
फ्रांस के लोग राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के खिलाफ प्रदर्शन के लिए सड़क पर उतरे हैं. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि मैक्रों सरकार ने उनके लिए कोई काम नहीं किया. लोग जीवनस्तर में सुधार को लेकर सरकार से उम्मीद कर रहे हैं, लेकिन खराब वित्तीय प्रबंधन स्थिति बिगाड़ कर रहा है. लोग प्रस्तावित बजट कटौती की वजह से भी गुस्से में हैं.
प्रदर्शनकारियों ने सड़कों को जाम कर दिया है. हालांकि, फ्रांस अभी तक पूरी तरह बंद नहीं है. सुरक्षा बलों की तैनाती के बाद दर्जनों प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया गया है. इस दौरान पुलिस के साथ प्रदर्शनकारियों की झड़प भी हुई है.
नेपाल में शुरुआती दो दिनों तक हुए बवाल के बाद तीसरे दिन बुधवार (10 सितंबर) सुबह सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा. फिलहाल देश की कमान सेना के हाथों में है और अंतरिम सरकार के लिए चेहरे की तलाश की जा रही है. नेपाल आर्मी चीफ जनरल अशोक राज सिगडेल ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत की अपील की थी. लिहाजा दोनों के बीच मसले को लेकर बात हो सकती है.
नेपाल में सोशल मीडिया प्रतिबंध को लेकर भड़के विरोध प्रदर्शनों के बाद सरकार ने सोमवार (8 सितंबर) को अपना फैसला वापस ले लिया था. तीन दिन पहले सरकार ने फेसबुक, एक्स (पूर्व ट्विटर) और व्हाट्सएप समेत 26 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बैन लगाने का आदेश दिया था. इस फैसले के विरोध में राजधानी काठमांडू सहित कई हिस्सों में हिंसक प्रदर्शन हुए. प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पों में अब तक कम से कम 23 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 300 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं.
नेपाल के संचार, सूचना और प्रसारण मंत्री पृथ्वी सुब्बा गुरुंग ने कैबिनेट की आपात बैठक के बाद ऐलान किया कि प्रतिबंध हटा लिया गया है. उन्होंने बताया कि सूचना मंत्रालय ने संबंधित एजेंसियों को निर्देश दिया है कि वे ‘जेन जेड’ समूह की मांगों के अनुरूप सोशल मीडिया सेवाओं को बहाल करें.
सोमवार को हालात तब बिगड़ गए जब प्रदर्शनकारियों का एक समूह संसद भवन परिसर में घुस गया. इसके बाद पुलिस को भीड़ पर काबू पाने के लिए पानी की बौछार, आंसू गैस और गोलियों का सहारा लेना पड़ा.
सरकार ने प्रदर्शन कर रहे युवाओं से आंदोलन खत्म करने की अपील की है. वहीं, फेसबुक, एक्स और व्हाट्सएप जैसी लोकप्रिय सोशल मीडिया साइटें सोमवार रात से फिर से काम करने लगी हैं.
नेपाल के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि gen-z के विरोध प्रदर्शन में मरने वालों की संख्या 30 हो गई हो तो वहीं 1033 लोग घायल हैं. काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक बुधवार 713 घायलों को अस्पताल से छुट्टी मिल चुकी है. देशभर के 28 अस्पतालों में घायलों का इलाज चल रहा है
दो दिनों के विरोध प्रदर्शन के बीच प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के इस्तीफ़ा देने के बाद अब नेपाल के राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल और नेपाली सेना ने प्रदर्शनकारियों को बातचीत के लिए बुलाया है.
लेकिन राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल हैं कहां? माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री ओली के इस्तीफ़े से अचानक पैदा हुए हालात में प्रशासन की बागडोर उन्हीं के हाथ में है.
राष्ट्रपति के सचिवालय के मुताबिक़, जब प्रदर्शनकारी महाराजगंज स्थित शीतल निवास में घुस गए, तो नेपाली सेना ने उन्हें (राष्ट्रपति) वहां से निकल जाने की सलाह दी, क्योंकि उनकी सुरक्षा को ख़तरा पैदा हो सकता था.
इसके तुरंत बाद ही प्रदर्शनकारी राष्ट्रपति कार्यालय और भवन में घुस गए और तोड़फोड़ करते हुए उसमें आग लगा दी.
राष्ट्रपति को नेपाल आर्मी की सुरक्षा प्राप्त थी. उन्होंने शाम छह बजे एक अज्ञात स्थान से ‘जेन ज़ी’ आंदोलन के प्रतिनिधियों को बातचीत के लिए आमंत्रित किया.
नेपाली सेना ने इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी है कि राष्ट्रपति को कहां ले जाया गया और वह इस समय कहां हैं.
नेपाली आर्मी के प्रवक्ता राजाराम बासनेत ने बीबीसी को बताया कि उन्हें राष्ट्रपति समेत किसी भी शीर्ष नेताओं की लोकेशन के बारे में नहीं पता.
पूर्व चीफ़ सेक्रेटरी लीलामणि पौडियाल ने बीबीसी को बताया कि उनका मानना है कि राष्ट्रपति ही इस समय देश चला रहे हैं, जोकि संविधान के अनुसार सेना के सुप्रीम कमांडर भी हैं.
उन्होंने कहा, “हालात तब तक सामान्य नहीं होंगे, जब तक सुरक्षा एजेंसियां सक्रिय नहीं होंगी. हालांकि सेना अभी सक्रिय रूप से काम रही है और उसके सुप्रीम कमांडर राष्ट्रपति ही हैं.”
वह कहते हैं कि प्रदर्शनकारियों के प्रतिनिधियों को बुलाया जाना चाहिए और इस बातचीत की अगुवाई राष्ट्रपति को करनी चाहिए.