अंग्रेजों पर स्वतन्त्रता सेनानी गोविंद बल्लभ पंत जी का इतना डर था कि काशीपुर को काली सूची में डाल दिया था,, काशीपुर को जिला बना कर काली सूची से निकालेगे मुख्यमंत्री?: सुर्खियां

देश के महान सुपूत के नाम काशीपुर जनपद बनाने हेतु कमर कसे सर्वदलीय शक्तियां: उमेश जोशी पूर्व अध्यक्ष बार एसोसियेशन काशीपुर– HIMALAYAUK LEADING NEWSPORTAL & DAILY NEWSPAPER & YOUTUBE CHANNEL

पण्डित गोविन्द बल्लभ पंत : काशीपुर पंडित गोविंद बल्लभ पंत जी की कर्मभूमि रही है। उनके नाम पर काशीपुर को जिला घोषित कर कुमायूं को तोहफा देगे मुख्यमंत्री:

गोविंद बल्लभ पंत का जन्म 10 सितंबर 1887 को अल्मोड़ा के निकट खूंट गाँव में हुआ था।

मुख्यमंत्री:15 अगस्त 1947 से 27 मई 1954 तक संयुक्त प्रांत और बाद में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया। 1955-1961 तक वे भारत के गृहमंत्री भी रहे,

हिमालय गौरव उत्तराखंड दैनिक समाचार पत्र यूट्यूब चैनल & लीडिंग न्यूज PORTAL & Daily Newspaper के काशीपुर संवाददाता पंकज शर्मा ने बताया कि महान स्वतंत्रता सेनानी, देश के पूर्व गृहमंत्री पंडित गोविंद बल्लभ पंत जी की जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित करने पूर्व जस्टिस श्री राजेश टंडन जी ने उनकी स्मृति में पौधरोपण कर देश के महान स्वतंत्रता सेनानी को श्रद्धांजलि अर्पित की। महापौर काशीपुर ने कहा कि पंडित गोविंद बल्लभ पंत देश के महान नेताओं में से एक है, जिन्होंने अपनी त्याग और तपस्या से इस देश को न सिर्फ आजाद कराया बल्कि आजादी के बाद देश के नवनिर्माण में भी भूमिका निभाई,

काशीपुर बार एसोसियेशन काशीपुर के पूर्व अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता उमेश जोशी ने बताया कि आदरणीय गोविंद बल्लभ पंत ने अपनी वकालत की शुरुआत काशीपुर से की थी और वहीं पर उन्होंने प्रेम सभा की स्थापना भी की, जो उनके राजनीतिक और सामाजिक जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था। काशीपुर उनके शुरुआती राजनीतिक और सामाजिक कार्यों का केंद्र था, जहां से उन्होंने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में योगदान दिया और बाद में उत्तर प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री बने।

उमेश जोशी ने कहा कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पढ़ाई पूरी करने के बाद, गोविंद बल्लभ पंत ने अल्मोड़ा में वकालत शुरू की, और फिर रानीखेत के बाद काशीपुर आ गए, जहाँ उन्होंने वकालत जारी रखी।

उन्होंने कहा अंग्रेजों का उन पर इतना डर था कि काशीपुर को काली सूची में डाल दिया गया था, और पंत जी के कारण काशीपुर को “गोविंद गढ़” के नाम से भी संबोधित किया जाता था।

उमेश जोशी ने कहा कि भारत के महान रत्न को यही सच्ची श्रद्धांजलि होगी कि काशीपुर को जनपद बनाने हेतु सर्वदलीय शक्तियां इस पुण्य कार्य में जुट जाए और काशीपुर को विकास की राह में आगे बढ़ाए

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