26 सितंबर आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी और पंचमी तिथि, नवरात्रि की चतुर्थी तिथि
26 सितंबर विशाखा नक्षत्र के शुभ संयोग में रवियोग और सर्वार्थ सिद्धि योग का भी संयोग
मां दुर्गा को फायरिंग कर सलामी दी जाती है
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Shekhar Joshi Editor
26 सितंबर 2025 को अश्विन माह के शुक्ल पक्ष की शारदीय नवरात्रि की चतुर्थी तिथि, शारदीय नवरात्रि का चौथा दिन, शुक्रवार को सूर्योदय 06:11 ए एम, सूर्यास्त 06:13 अपराह्न, उपांग ललिता की पूजा के साथ देवी का आशीर्वाद जरूर लें जिससे बुरे योगों से मिल जाए मुक्ति और शुभता का बना रहे असर।
अभिजीत मुहूर्त 11:45 − 12:32 मिनट तक, राहुकाल सुबह 10:39 − 12:08 मिनट तक, 27 सितंबर को ग्रहों के राजा सूर्य नक्षत्र गोचर करेंगे , द्रिक पंचांग के अनुसार, 26 सितंबर 2025 को आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी और पंचमी तिथि रहेगी. साथ ही विशाखा नक्षत्र, अनुराधा नक्षत्र, विष्कुम्भ योग, प्रीति योग, विष्टि करण, बव करण और बालव करण का निर्माण हो रहा है. हालांकि, शुक्रवार को किसी भी ग्रह का राशि गोचर नहीं हो रहा है, लेकिन इससे एक दिन बाद 26 अगस्त को मान-सम्मान, यश, पिता, नेतृत्व क्षमता और उच्च पद के दाता सूर्य देव हस्त नक्षत्र में गोचर करेंगे. सूर्य के इस गोचर का गहरा प्रभाव सभी राशियों
26 सितंबर दिन शुक्रवार है और तिथि आश्विन मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया उपरांत चतुर्थी तिथि। ऐसे में चंद्रमा का गोचर तुला उपरांत वृश्चिक राशि में होगा। ऐसे में चंद्रमा धन योग उपरांत अधि योग का निर्माण करेंगे जबकि शुक्रवार के दिन चंद्रमा और शुक्र एक दूसरे से केंद्र योग भी बनाएंगे। विशाखा नक्षत्र के संयोग में सर्वार्थ सिद्धि और रवियोग का भी संयोग बन रहा है। ऐसे में मिथुन, सिंह, समेत 5 राशियों के लिए बहुत ही भाग्य़शाली रहेगा। देवी लक्ष्मी की कृपा के साथ शुभ योग का भी मिलेगा
झारखंड की राजधानी रांची के दुर्गा पूजा आयोजन की पूरे देश में अपनी एक अलग पहचान है। यहाँ डोरंडा स्थित जैप 1 में 1880 से अनूठी परंपरा से पूजा चली आ रही है। यहां जैप वन के जवान प्रतिमा की स्थापना नहीं करते बल्कि कलश स्थापना कर नौ दिनों तक मां दुर्गा की पूजा करते है। कलश 9 दिन जहां देशभर में मां दुर्गा की पूजा अर्चना होती है। तो वही जैप 1 में कलश पूजा की जाती है।
कलश स्थापना के साथ नवरात्रि की शुरुआत हुई है और अगले 9 दिनों तक सभी जवान और उनका परिवार पूरी उत्साह के साथ पूजा अर्चना करेंगे। वहीं इस पूजा में खास रूप से मां दुर्गा को फायरिंग कर सलामी दी जाती है। स्थापना के साथ ही पूजा आरंभ हो गई है। पूजा के दौरान फायरिंग कर मां को सलामी दी जाती है।
जैप वन की सभी महिलाएं कलश स्थापना के साथ ही अखंड दीप प्रज्वलित करती है और नवमी तक यह दीप जलती रहती है। जैप 1 कमांडेंट राकेश रंजन ने बताया कि 1880 से चली आ रही परंपरा का आज निर्वहन हुआ है और पूरे विधि विधान के साथ 9 दिनों तक पूजा अर्चना होगी। इस परंपरा को बचाए रखने का प्रयास लगातार किया जाता रहा है। ताकि आने वाली पीढ़ियों को जैप वन की पूजा अर्चना के महत्व की जानकाजैप वन की महिलाओं का मानना है कि अगले 9 दिनों तक पूजा अर्चना करने से मां दुर्गा प्रसन्न होती है और उनके परिवार जो पुलिस सेवा में है उनकी रक्षा करती है। इन 9 दिनों तक जैप वन में उत्साह का माहौल रहता है और हर रोज चंडी पाठ का आयोजन होता है। वहीं, महानवमी के मौके पर जैप 1 के जवान नौ कन्याओं की पूजा करते हैं।