27 सितंबर 2025) अश्विन माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि, सूर्योदय 06:13, सूर्यास्त 06:10 & 27 सितंबर 2025 को नवरात्रि के छठे दिन की महत्ता, स्कंदषष्ठी व्रत और देवी स्कंदमाता की आराधना का महत्व & शनिवार को पंचमी तिथि है और नवरात्रि का छठा दिन। इस दिन माँ स्कंदमाता की पूजा की जाती है, जो करुणा, मातृत्व और शक्ति की प्रतीक हैं। By Chandra Shekhar Joshi- Chief Editor;
द्रिक पंचांग के अनुसार, 27 सितंबर 2025 को आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी और षष्ठी तिथि रहेगी. साथ ही अनुराधा नक्षत्र, ज्येष्ठा नक्षत्र, प्रीति योग, आयुष्मान योग, बालव करण और कौलव करण का निर्माण हो रहा है. इसके अलावा शनिवार को सुबह 7 बजकर 14 मिनट पर ग्रहों के राजा सूर्य हस्त नक्षत्र में कदम रखेंगे. ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को मान-सम्मान, पिता, उच्च पद और नेतृत्व क्षमता का दाता माना जाता है

नवरात्रि के छठें दिन मां दुर्गा के षष्ठम स्वरूप माता कात्यायनी की पूजा का विधान है। पांचवें दिन शुक्रवार को मां स्कंदमाता की आराधना की गयी। महर्षि कात्यायन द्वारा सर्वप्रथम पूजे जाने के कारण देवी दुर्गा के इस स्वरूप का नाम देवी कात्यायनी पड़ा। महर्षि कात्यायन की कठिन तपस्या से प्रसन्न होकर उनकी इच्छानुसार उनके यहां पुत्री के रूप में कात्यायनी पैदा हुई थीं। महर्षि ने इनका पालन-पोषण किया था।
20 अक्टूबर को दिवाली मनाई जाएगी, जिससे एक दिन पहले 19 अक्टूबर को छोटी दिवाली का पर्व मनाया जाएगा. इस दिन लोग भगवान गणेश और मां लक्ष्मी की पूजा करते हैं. साथ ही रात में पटाखे जलाते हैं. द्रिक पंचांग की मानें तो इस बार कुछ लोगों के लिए छोटी दिवाली से पहले का समय बहुत शानदार रहने वाला है. दरअसल, छोटी दिवाली से पहले ग्रहों के राजा ‘सूर्य’ राशि परिवर्तन करेंगे, जिसके शुभ प्रभाव से कई राशियों को लाभ होगा.
देवी कात्यायनी अमोद्य फलदायिनी हैं। इनकी पूजा अर्चना द्वारा सभी संकटों का नाश होता है। मां कात्यायनी दानवों तथा पापियों का नाश करने वाली हैं। देवी कात्यायनी जी के पूजन से भक्त के भीतर अद्भुत शक्ति का संचार होता है। इस दिन साधक का मन ‘आज्ञा चक्र’ में स्थित रहता है। योग साधना में इस आज्ञा चक्र का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। साधक का मन आज्ञा चक्र में स्थित होने पर उसे सहजभाव से मां कात्यायनी के दर्शन प्राप्त होते हैं। साधक इस लोक में रहते हुए अलौकिक तेज से युक्त रहता है।
मां कात्यायनी का स्वरूप अत्यन्त दिव्य और स्वर्ण के समान चमकीला है। यह अपनी प्रिय सवारी सिंह पर विराजमान रहती हैं। इनकी चार भुजायें भक्तों को वरदान देती हैं। इनका एक हाथ अभय मुद्रा में है, तो दूसरा हाथ वरदमुद्रा में है। अन्य हाथों में तलवार तथा कमल का फूल है।
माँ स्कंदमाता की पूजा करने से भक्त को अपार शांति, सौभाग्य और संतानों की उन्नति का आशीर्वाद मिलता है। जो साधक भक्ति भाव से इन्हें प्रसन्न करते हैं, उनके जीवन में दरिद्रता और दुखों का नाश होता है। माँ स्कंदमाता की कृपा से घर-परिवार में सुख-समृद्धि और शांति का वास होता है।
छोटी दिवाली से दो दिन पहले 17 अक्टूबर 2025 को दोपहर 1 बजकर 53 मिनट पर ग्रहों के राजा ‘सूर्य’ तुला राशि में गोचर करेंगे. 16 नवंबर 2025 की दोपहर 1 बजकर 44 मिनट तक सूर्य देव इसी राशि में रहेंगे. हालांकि, इस समय सूर्य देव कन्या राशि में संचार कर रहे हैं.
मां कात्यायनी की उपासना से कुंवारी कन्याओं को मनोवांछित वर की प्राप्ति होती है। पूजा के दौरान इस मंत्र का जप जरूर करें। ॐ कात्यायनी महामाये महायोगिन्यधीश्वरि। नंदगोपसुतम् देवि पतिम् मे कुरुते नम:॥
देवी कात्यायनी का मंत्र
या देवी सर्वभूतेषु मां कात्यायनी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
देवी कात्यायनी की आरती
जय जय अम्बे, जय कात्यायनी।
जय जगमाता, जग की महारानी।
बैजनाथ स्थान तुम्हारा।
वहां वरदाती नाम पुकारा।
कई नाम हैं, कई धाम हैं।
यह स्थान भी तो सुखधाम है।
हर मंदिर में जोत तुम्हारी।
कहीं योगेश्वरी महिमा न्यारी।
हर जगह उत्सव होते रहते।
हर मंदिर में भक्त हैं कहते।
कात्यायनी रक्षक काया की।
ग्रंथि काटे मोह माया की।
झूठे मोह से छुड़ाने वाली।
अपना नाम जपाने वाली।
बृहस्पतिवार को पूजा करियो।
ध्यान कात्यायनी का धरियो।
हर संकट को दूर करेगी।
भंडारे भरपूर करेगी।
जो भी मां को भक्त पुकारे।
कात्यायनी सब कष्ट निवारे।