दशहरा 2025; 2 अक्टूबर ; इस दिन दसों दिशाएं खुली रहती हैं ; दशहरा के दिन शाम को 10 दीए जलाने चाहिए

2 अक्टूबर को दोपहर के 2 बजकर 9 मिनट से लेकर 2 बजकर 56 मिनट तक  दशहरा पूजन के लिए सबसे उत्तम मुहूर्त & 02 अक्तूबर 2025) रावण दहन दशहरा के दिन हमेशा प्रदोष काल में ही किया जाता है. कल 2 अक्टूबर को रावण दहन शाम 06:06 से 07:12 तक होगा. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दशहरा पर दसों दिशाओं में दीया जलाने का विधान है. इसलिए हर व्यक्ति को दशहरा के दिन 10 दीए जलाने चाहिए. इन सभी दीयों में सरसों के तेल का उपयोग करें. इसके अलावा, 5 दीया पवित्र और पूजनीय पौधों जैसे तुलसी, पीपल, शमी, बरगद और केले आदि के पास रखें, जिनमें आपको तिल के तेल का उपयोग करना चाहिए.

इस पावन और शुभ दिन आपको दसों दिशाओं में दीया जलाना चाहिए. इनमें पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण के अलावा पूर्व-उत्तर (ईशान कोण), दक्षिण-पूर्व (आग्नेय कोण), पश्चिम-उत्तर (वायव्य कोण), दक्षिण-पश्चिम (नैऋत्य कोण), उर्ध्व (ऊपर की ओर) शामिल हैं.

इस दिन सुबह और शाम भगवान राम के लिए पूजा के समय दीया जलाएं. बाकी सभी जगह आप शाम के समय दीया जलाएं. यह शुभ माना गया है.

2 अक्टूबर, गुरुवार के दिन शाम के 7 बजकर 2 मिनट पर दशमी तिथि का समापन 

दशमी तिथि पर   दशहरा का पर्व मनाया जाएगा। इसे विजयदशमी के नाम से भी जाना जाता है, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व है। इस दिन सदियों से रावण दहन किया जाता है और शस्त्र पूजन का भी विधान होता है। हर वर्ष आश्विन माह की शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि के दिन यह त्योहार मनाया जाता है। विजयदशमी पर ही मां दुर्गा ने महिषासुर नामक राक्षस का वध किया था। यही कारण है कि यह तिथि मां दुर्गा से भी जुड़ी हुई है।

रावण जलने के बाद एक छोटा सा काम करने से आपके घर से नकारात्मक ऊर्जा  दहन & रावण दहन किया जाता है और शस्त्र पूजन का भी विधान होता है। हर वर्ष आश्विन माह की शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि के दिन यह त्योहार मनाया जाता है। विजयदशमी पर ही मां दुर्गा ने महिषासुर नामक राक्षस का वध किया था। यही कारण है कि यह तिथि मां दुर्गा से भी जुड़ी हुई है।

 1 अक्टूबर, बुधवार को शाम के 7 बजकर 2 मिनट से दशमी तिथि का आरंभ हो जाएगा। वहीं, अगले दिन यानी 2 अक्टूबर, गुरुवार के दिन शाम के 7 बजकर 2 मिनट पर दशमी तिथि का समापन होगा। लेकिन शास्त्रीय विधान के अनुसार, उदय तिथि 2 अक्टूबर को पड़ने से इस पूरे दिन को दशमी तिथि माना जाएगा। ऐसे में दशहरा 2 अक्टूबर का रहेगा।

जब दशहरा के दिन रावण पूरी तरह जल जाए, तो उसमें से बची थोड़ी लकड़ी या राख को घर में लाकर रखना चाहिए। इसे ऐसे स्थान पर रखें जहां किसी भी व्यक्ति की उस पर नजर न पड़ पाए। इस उपाय को करने से जातक के घर से नकारात्मक ऊर्जा हमेशा दूर रहती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। 

दशहरा 02 अक्तूबर 2025 दिन गुरुवार को है. धार्मिक मान्यता है कि, इसी दिन भगवान राम ने रावण और माता दुर्गा ने महिषासुर का वध किया था. इसलिए यह पर्व असत्य पर सत्य की जीत के तौर पर मनाया जाता है. इस दिन जीवन में सुख-समृद्धि के लिए लोग तमाम उपाय करते हैं, लेकिन दीपक जलाना बेहद शुभ माना जाता है. लेकिन, आपको दीया जलाने का लाभ तभी मिलेगा, जब आप सही दिशा में दीया जलाएंगे. अब सवाल है कि आखिर, दशहरा के दिन कितने दीये जलाना शुभ होता है? दशहरा पर किस दिशा में दीपक जलाने के लिए कौन सी दिशा सबसे उत्तम?

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