03 अक्तूबर 2025 को अश्विन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि है। इस दिन पापकुंशा एकादशी है तिथि-आश्विन शुक्ल पक्ष एकादशी, & पंचांग के माध्यम से समय एवं काल की सटीक गणना & 3 अक्टूबर 2025 दिन शुक्रवार आश्विन माह, शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि है। 3 अक्टूबर 2025 का दिन कई राशियों के लिए नई उम्मीदें लेकर आएगा. गूलर के वृक्ष में जल चढ़ाएं। शुक्रवार को मीठा दही खाकर यात्रा पर निकलें।
पापांकुशा एकादशी हिंदू धर्म की प्रमुख एकादशियों में से एक है, जो आश्विन शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को आती है। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है और इसे करने से व्यक्ति के सभी पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस दिन व्रत, पूजा, दान और श्रीहरि के नाम का जाप करने से जीवन में शुभता और समृद्धि आती है।

सूर्य अयन-दक्षिणायन
विक्रम संवत-2082
शक संवत-1947
सम्वत्सर-पिंगल
दिशाशूल-पश्चिम
ऋतु-शरद
नक्षत्र-श्रवण
योग-धृति
करण-वणिज
चंद्रराशि-मकर
सूर्यराशि-कन्या
पापांकुशा एकादशी शुक्रवार, 03 अक्टूबर 2025 को रखा जा रहा है। इस बार उदया तिथि के अनुसार 03 अक्टूबर को रखा जाएगा और पारण 04 अक्टूबर को द्वादशी तिथि में किया जाएगा।
पांकुशा एकादशी का नाम दो शब्दों से मिलकर बना है: ‘पाप’ (अपराध या गलत कार्य) और ‘अंकुश’ (हाथी को नियंत्रित करने वाला औजार)। इस एकादशी को करने से सभी पापों का नाश होता है और व्यक्ति सद्मार्ग पर चलता है, इसलिए इसे ‘पापों पर अंकुश लगाने वाली’ एकादशी कहा जाता है।
पूजन की विधि: पापांकुशा एकादशी का व्रत दशमी तिथि (एक दिन पहले) से ही शुरू हो जाता है।
1. दशमी के दिन नियम: दशमी तिथि के दिन सात्विक भोजन ग्रहण करें और जौ, मसूर, चना, चावल, उड़द, मूंग आदि अनाजों का सेवन न करें।
2. एकादशी के दिन संकल्प: 03 अक्टूबर को एकादशी के दिन प्रातःकाल जल्दी उठकर स्नान करें। स्वच्छ (पीले रंग के) वस्त्र धारण करें और हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें।
3. विष्णु पूजा: पूजा स्थल पर भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। उन्हें रोली, अक्षत, पीले फूल, तुलसी दल, धूप, दीप और नैवेद्य (फल, मिष्ठान्न) अर्पित करें।
4. मंत्र जाप: भगवान विष्णु के मंत्र ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ या विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
5. व्रत कथा: पापांकुशा एकादशी की व्रत कथा का श्रवण या पाठ करें।
6. रात्रि जागरण: संभव हो तो रात्रि में जागरण कर भगवान विष्णु के भजन-कीर्तन करें।
7. पारण: अगले दिन यानी द्वादशी तिथि 04 अक्टूबर को पारण के शुभ समय में व्रत खोलें। व्रत खोलने से पहले ब्राह्मणों या जरूरतमंदों को भोजन, अन्न, वस्त्र और दक्षिणा दान अवश्य करें।
व्रत के लाभ:
* पापों से मुक्ति: मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से व्यक्ति के सभी संचित या जाने-अनजाने में किए गए पाप नष्ट हो जाते हैं और वह यमलोक के कष्टों से मुक्त हो जाता है।
* अर्थ और मोक्ष की प्राप्ति: शास्त्रों के अनुसार, यह एकादशी व्रत करने वाले को अर्थ (धन, समृद्धि) और मोक्ष (जन्म-मरण के बंधन से मुक्ति) दोनों प्रदान करती है।
* सुख-समृद्धि: इस दिन भगवान विष्णु के पद्मनाभ स्वरूप की पूजा करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है।
* दान का महत्व: इस दिन दान-पुण्य करने का विशेष महत्व है, जिससे व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है।
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पंचांग या पंचागम् हिन्दू कैलेंडर है जो भारतीय वैदिक ज्योतिष में दर्शाया गया है। पंचांग मुख्य रूप से 5 अवयवों का गठन होता है, अर्थात् तिथि, वार, नक्षत्र, योग एवं करण। पंचांग मुख्य रूप से सूर्य और चन्द्रमा की गति को दर्शाता है। हिन्दू धर्म में हिन्दी पंचांग के परामर्श के बिना शुभ कार्य जैसे शादी, नागरिक सम्बन्ध, महत्वपूर्ण कार्यक्रम, उद्घाटन समारोह, परीक्षा, साक्षात्कार, नया व्यवसाय या अन्य किसी तरह के शुभ कार्य नहीं किये जाते ।