17 October Ka Panchang: 17 अक्तूबर 2025 को कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि है। इस तिथि पर मघा नक्षत्र और शुक्ला योग का संयोग बन रहा है। & वृक्ष के जड़ में अर्पित ^ रमा एकादशी पर श्री सूक्त का पाठ करें और मां लक्ष्मी को कमल का फूल चढ़ाएं. & रमा एकादशी के दिन हनुमान जी को लाल फूल अर्पित करने से साथ 11 बार हनुमान चालीसा का पाठ करें. & 7 अक्टूबर 2025 को कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी और द्वादशी तिथि रहेगी. साथ ही मघा नक्षत्र, पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र, शुक्ल योग, ब्रह्म योग, बालव करण, कौलव करण और तैतिल करण का निर्माण हो रहा है. इसके अलावा शुक्र देव हस्त नक्षत्र में और सूर्य देव तुला राशि में गोचर करेंगे. ज्योतिष शास्त्र में शुक्र को प्यार का कारक माना गया है, जबकि सूर्य समृद्धि के दाता हैं. ऐसे में 12 राशियों के प्रेम जीवन पर इन दोनों ग्रहों के गोचर का अच्छा-खासा प्रभाव पड़ेगा.
BY CHANDRA SHEKHAR JOSHI CHIEF EDITOR ; HIMALAYAUK NEWS (Leading newsportal & youtyube channel & Daily Newspaper)

ॐ नमोः नारायणाय॥
ॐ श्री विष्णवे च विद्महे वासुदेवाय धीमहि।
तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥
दन्ताभये चक्र दरो दधानं, कराग्रगस्वर्णघटं त्रिनेत्रम्।
धृताब्जया लिंगितमब्धिपुत्रया, लक्ष्मी गणेशं कनकाभमीडे।।
रमा एकादशी उपाय
17 अक्तूबर 2025 को कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि है। इस तिथि पर मघा नक्षत्र और शुक्ला योग का संयोग & शुक्रवार को अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:40 − 12:25 मिनट & राहुकाल सुबह 10:37 − 12:02 मिनट तक & 17 अक्टूबर 2025 के दिन कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी और द्वादशी तिथि है. शुक्रवार का दिन शुक्र ग्रह को समर्पित होता है.
कार्तिक का महीना चल रहा है और कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी को रमा एकादशी के नाम से जाना जाता है. यह एकादशी इसलिए भी खास होती है, क्योंकि यह धनतेरस से एक दिन पहले और चातुर्मास की आखिरी एकादशी होती है. रमा एकादशी पर भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की एक साथ पूजा करने से अपार सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है.
रमा एकादशी का व्रत हर साल कार्तिक महीने की कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को रखा जाता है. एकादशी तिथि की शुरुआत 16 अक्टूबर को सुबह 10:35 से होगी और 17 अक्टूबर को सुबह 11:12 पर समाप्त हो जाएगी. 17 अक्टूबर को उदयातिथि मान्य रहेगी, इसलिए इसी दिन रमा एकादशी का व्रत रखा जाएगा.
17 अक्टूबर को सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लें. इसके बाद पूजाघर में दीप जलाकर व्रत का संकल्प लें. पूजा के लिए सबसे पहले भगवान विष्णु का पंचामृत से अभिषेक करें. इसके बाद भगवान को पीला चंदन, अक्षत, मौली, फल, फूल, मेवा, तुलसीदल, नैवेद्य आदि अर्पित करें. फिर मां लक्ष्मी की भी विधि विधान से पूजा करें. अब धूप-दीप प्रज्वलित कर रमा एकादशी की व्रत कथा सुनें और आखिर में आरती करें.
रमा एकादशी की पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन समय में एक मुचकुंद नामक राजा था. वह बहुत ही दानी और धर्मात्मा था. साथ ही भगवान विष्णु का परम भक्त भी था. इसलिए समस्त प्रजा उसका आदर सम्मान करती थी और राजा के साथ-साथ पूरी प्रजा भी एकादशी का व्रत रखती थी. राजा मुचकुंद की कन्या चंद्रभागा का विवाह राजा चंद्रसेन के पुत्र शोभन से हुआ. एकादशी के दिन राजा मुचकुंद के साथ शोभन ने भी एकादशी का व्रत किया. लेकिन उसे भूख सहन नहीं हो पाई और वह मृत्यु को प्राप्त हो गया. पति की मृत्यु बाद चंद्रभागा अपने पिता के साथ रहने लगी.

एकादशी व्रत के पुण्य फल के कारण मृत्यु के बाद अगले जन्म में शोभन को मंदरांचल पर्वत पर आलीशान राज्य की प्राप्ति हुई. लेकिन वह अस्थिर था. एक बार मुचुकुंदपुर के ब्राह्मण तीर्थ यात्रा करते हुए शोभन के दिव्य नगर पहुंचे. उन्होंने सिंहासन पर विराजमान शोभन को देखते ही पहचान लिया. तीर्थ यात्रा से लौटकर ब्राह्मणों ने चंद्रभागा को सारी बातें बताई. चंद्रभागा ने अपने व्रत के पुण्य प्रभाव से शोभन से मिलने का निश्चय किया. उसने अपनी तपस्या के पुण्य से शोभन के अस्थिर नगर स्थिर करने का वरदान दिया. इस प्रकार, रमा एकादशी के व्रत के प्रभाव से दोनों फिर से साथ रहने लगे.
ब्रह्ममुहूर्त में उठकर सूर्योदय होते ही तुलसी के पौधे में जल अर्पित करें. इसके अलावा हनुमान जी की स्तुति करने से लाभ मिलेगा.
रमा एकादसी के दिन गेंहू या चावल से बने शुद्ध प्रसाद का वितरण करें. इसके साथ मां लक्ष्मी की अराधना करने से लाभ मिलेगा. रुद्राक्ष की माला से 108 बार श्री विष्णु के किसी भी मंत्र का जाप करें. किसी कारणवश ऐसा न कर पाए तो गरीबों को भोजन का दान करें. व्रत वाले दिन गंगाजल से स्नान करने के बाद सुबह-शाम घी का दीपक जलाएं और श्रीविष्णु के नाम का जाप करने से मानसिक लाभ मिलेगा.
आज कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष एकादशी है। इस तिथि पर शुक्ल योग और मघा नक्षत्र बना रहेगा। आज कार्तिक मास 17 अक्टूबर दिन शुक्रवार है। आज कोई व्रत और त्योहार नहीं है। आप पूजा के लिए शुभ मुहूर्त का ध्यान रखना बहुत ही आवश्यक है। जिसके लिए लोगों को पंचांग देखने की जरूरत पड़ती है। हिन्दू धर्म में रोजाना पूजा के लिए शुभ मुहूर्त को ध्यान में रखा जाता है, इसलिए इस पंचांग में हम आपको शुभ समय और राहु काल का समय भी बताएंगे ताकि आपको अपनी पूजा का पूरा फल मिल सके। हिंदू पंचांग को वैदिक पंचांग के नाम से जाना जाता है। पंचांग के माध्यम से समय और काल की सटीक गणना की जाती है। पंचांग मुख्य रूप से पांच भागों से बना होता है। ये पांच भाग हैं तिथि, नक्षत्र, वार, योग और करण।
वृश्चिक राशि उपाय हरे रंग के वस्त्र धारण करें इसके अलावा शिवलिंग पर जलाभिषेक जरूर करें.
मीन राशि उपाय जरूरतमंदों में दूध से बनी चीजों का दान करने से मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होगी.