कई विशेष त्योहार काली चौदस, हनुमान पूजा और मासिक शिवरात्रि ; 19 OCT 2025

19 अक्तूबर 2025 को कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि है। इस तिथि पर उत्तर फाल्गुनी नक्षत्र औ इंद्र योग का संयोग & रविवार को अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:39 − 12:25 मिनट तक रहेगा। राहुकाल शाम 16:16 − 17:40 मिनट & 19 अक्टूबर 2025 से कार्तिक मास का 13वां दिन  & कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि है, जो कि 01:51 पी एम तक जारी रहेगी। इसके बाद चतुर्दशी तिथि लग जाएगी &  कई विशेष त्योहार काली चौदस, हनुमान पूजा और मासिक शिवरात्रि 

भक्ति सभी ग्रहों के प्रभावों पर विजय प्राप्त करती है:
जब आप ईमानदारी से महामाई बगला मुखी, और रुद्र अवतार और श्रीकृष्ण का जप मंदिर में करते हैं और भक्ति-योग में संलग्न होते हैं, तो आप ग्रहों के नियंत्रण में नहीं, बल्कि दिव्य संरक्षण में कार्य कर रहे होते हैं ,
दिव्य संरक्षण से भक्त सूर्य के समान हो जाता है जो ग्रहों की छाया से प्रभावित नहीं होता ।

शरण में आना ही पड़ेगा : सुख हो या दुख, संकट हो, या शुभ कार्य,, जीवन में उन्नति होनी हो या बाधा हर पल सामने आती हो,, आईएएस हो या टॉप राजनेता,
सबको ज्योतिष की शरण में तो जाना ही पड़ेगा,, महामाई की शरण में जाना ही पड़ेगा,, अन्यथा आसमानी सितारे विपरीत होकर जीवन में मानसिक तनाव में उलझा देगे,, सितारे विपरीत हुए तो
आईएएस होकर भी पुलिस थाने में रिपोर्ट दर्ज को विवश होना पड़ेगा,, सुप्रीम जज होने पर भी मानसिक रूप से परेशान होकर मीडिया के पास अपना गुब्बार निकालने जाना पड़ेगा
भक्ति सभी ग्रहों के प्रभावों पर विजय प्राप्त करती है

यदि आप संकट , चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, तो भगवती पीतांबरा श्री बगलामुखी की पीठ में आपको देगे बेहतर आध्यात्मिक उपचार योजना,,

महामाई के दिव्य महामंत्र का जाप और उनको भेट चढ़ाए,,
बगला मुखी पीठ बंजारा वाला देहरादून में दिव्य अलौकिक शिवलिंग में प्रात 9 बजे से पूर्व जलाभिषेक करवा ले
बगला मुखी पीठ बंजारा वाला देहरादून में गोधूली बेला में रुद्र अवतार वीर बजरंगी के मुंह से अनायास निकलने वाले जल का टीका लगवाए,

ध्यान रहे कि एस्ट्रोलॉजी प्रिडिक्शन आपको बता सकता है कि क्या होने वाला है, लेकिन बगला मुखी पीठ आपको संकेत देगी कि उससे कैसे पार पाया जाए।
ज्योतिष शास्त्र में ग्रह ना केवल भाग्य को प्रभावित करते हैं, बल्कि शरीर के विभिन्न अंगों का भी प्रतिनिधित्व करते हैं। ज्योतिष शास्त्र में ग्रह और मानव शरीर का है अनोखा सम्बन्ध

  • रविवार के उपाय – रविवार के दिन सूर्य देव को प्रसन्न करने के लिए कई उपाय किए जा सकते हैं। आप सूर्य देव को अर्घ्य देते हुए ‘ॐ सूर्याय नमः ॐ वासुदेवाय नमः ॐ आदित्य नमः’ मंत्र का उच्चारण करें। लाल चंदन का तिलक लगाकर और लाल रंग का वस्त्र पहनकर घर से बाहर निकलने से कार्यों में सफलता मिलती है। घर के मुख्य दरवाजे के दोनों तरफ देसी घी का दिया जलाने से माता लक्ष्मी भी प्रसन्न होती हैं और घर में धन संपत्ति बढ़ती है। सूर्य देवता को गुड़, दूध, चावल और कपड़े का दान करने से सभी काम सफल होते हैं। इसके अलावा, बरगद के पेड़ का पत्ता लेकर अपनी मनोकामना लिखकर बहते जल में बहाने से मनोकामना पूरी होती है। साथ ही पीपल के पेड़ के नीचे आटे का चौमुखी दीपक जलाने से जीवन में सुख-समृद्धि और यश की प्राप्ति होती है।
  • काली चौदस के दिन करें ये उपाय – काली चौदस पर एक पीले कपड़े में हल्दी, 11 गोमती चक्र, चांदी का सिक्का और 11 कौड़ियां बांधकर ‘श्रीं लक्ष्मी नारायणाय नमः’ मंत्र का 108 बार जाप करें और इसे तिजोरी में रखें। इससे व्यवसाय में आ रही बाधाएं दूर होती हैं। काली माता के चरणों में लौंग का जोड़ा अर्पित करने से नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है। मां काली को चने की दाल और गुड़ का भोग लगाना भी शुभ होता है। काली माता के बीज मंत्र ‘ॐ क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं दक्षिणे कालिके क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं स्वाहा’ का 108 बार जाप करने से शत्रुओं का नाश होता है और मां काली की कृपा प्राप्त होती है।
  • मासिक शिवरात्रि के दिन करें ये उपाय – मासिक शिवरात्रि पर भगवान शिव का अभिषेक करें और उन्हें बेलपत्र, धतूरा, भांग आदि अर्पित करें। साथ ही शिव जी के पंचाक्षर मंत्र का जाप 11 बार रुद्राक्ष की माला से करें, जिससे शिव जी की कृपा बनी रहती है। धन संबंधी परेशानियों के लिए शिवलिंग पर गन्ने का रस अर्पित करें, जिससे धन लाभ के योग बनते हैं। ग्रहों के अशुभ प्रभाव से मुक्ति के लिए शिवलिंग का शहद से अभिषेक करें, जिससे कुंडली में गुरु ग्रह की स्थिति मजबूत होती है और अशुभ प्रभाव कम होते हैं।
  • काली चौदस – काली चौदस, जिसे भूत चतुर्दशी भी कहा जाता है, मुख्य रूप से गुजरात में दीवाली उत्सव के दौरान मनाई जाती है। यह चतुर्दशी तिथि पर तब निर्धारित होती है जब मध्य रात्रि में चतुर्दशी तिथि प्रचलित होती है, जिसे महा निशिता काल कहा जाता है। इस दिन मध्यरात्रि में श्मशान जाकर अंधकार की देवी और वीर वेताल की पूजा की जाती है। काली चौदस को रूप चौदस और नरक चतुर्दशी से अलग समझना चाहिए। इसे बंगाल काली पूजा से भी भ्रमित नहीं करना चाहिए, जो एक दिन बाद अमावस्या तिथि पर मनाई जाती है। इसलिए काली चौदस की तिथि का अवलोकन करते समय सावधानी बरतनी चाहिए।
  • हनुमान पूजा – हनुमान पूजा दीवाली से एक दिन पहले की जाती है, जो काली चौदस के दिन आती है। इस दिन हनुमान जी की पूजा करने से बुरी आत्माओं से सुरक्षा और शक्ति की प्राप्ति होती है। पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान राम ने हनुमान जी को वरदान दिया था कि उनसे पहले हनुमान जी का पूजन किया जाएगा। इसलिए लोग दीवाली से पहले हनुमान जी की पूजा करते हैं। अयोध्या के हनुमानगढ़ी मंदिर में इस दिन हनुमान जन्मोत्सव मनाया जाता है, जबकि उत्तर भारत में अधिकांश भक्त चैत्र पूर्णिमा पर हनुमान जन्मोत्सव मनाते हैं।
  • मासिक शिवरात्रि – महाशिवरात्रि भगवान शिव और शक्ति के मिलन का विशेष पर्व है, जो हर साल फाल्गुन या माघ माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन भगवान शिव लिंग के रूप में प्रकट हुए थे और भगवान विष्णु और ब्रह्माजी ने उनकी पूजा की थी। महाशिवरात्रि भगवान शिव के जन्मदिवस के रूप में मनाई जाती है और श्रद्धालु इस दिन शिवलिंग की पूजा-अर्चना करते हैं। मासिक शिवरात्रि का व्रत करने से भगवान शिव की कृपा से कठिन कार्य भी पूरे हो सकते हैं। इस व्रत को विवाहित जीवन में सुख-शांति और विवाह की कामना के लिए भी किया जाता है। मंगलवार के दिन पड़ने वाली शिवरात्रि विशेष शुभ मानी जाती है। शिवरात्रि की पूजा मध्य रात्रि में निशिता काल के दौरान की जाती है, जो भगवान शिव के भोले-भाले स्वभाव को दर्शाती है।

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