20 अक्तूबर 2025 को कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 15:46 मिनट तक है। फिर इससे बाद अमावस्या तिथि शुरू हो जाएगी जिसमें दिवाली का पर्व मनाया जाएगा। इस तिथि पर हस्त नक्षत्र औ वैधृति योग का संयोग बन रहा है। दिवाली के दिन 5, 7, 9, 11, 21, 51, 101, 251…आज कितने भी दिए जला सकते हैं। बस इस बात का ध्यान रखें कि दीयों की संख्या विषम में होनी चाहिए। लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त शाम 7 बजकर 8 मिनट से शुरू होकर रात 8 बजकर 18 मिनट तक रहेगा। BY CHANDRA SHEKHAR JOSHI Mob. 9412932030
दिवाली की रात तंत्र साधना

20 अक्तूबर 2025 को कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 15:46 मिनट तक है। फिर इससे बाद अमावस्या तिथि शुरू हो जाएगी जिसमें दिवाली का पर्व मनाया जाएगा। इस तिथि पर हस्त नक्षत्र औ वैधृति योग का संयोग बन रहा है। दिन के शुभ मुहूर्त की बात करें तो सोमवार को अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:39 − 12:24 मिनट तक रहेगा। राहुकाल सुबह 07:49 − 09:13 मिनट तक रहेगा।
दिवाली की रात्रि में लक्ष्मी पूजन किया जाता है इसलिए आपको सूर्यास्त के बाद गलती से भी झाडू नहीं लगाना चाहिए। इसका कारण यह है कि झाडू का संबंध माता लक्ष्मी से है और लक्ष्मी पूजन में झाडू को भी शामिल किया जाता है। इसलिए गलती से भी इस दिन सूर्यास्त के बाद झाडू न लगाएं।
20 दिवाली पर कम से कम 13 या 26 छोटे दीपक जलाने चाहिए। साथ में दो बड़े दीपक भी जलाने चाहिए। दिवाली की पूजा में आपको लौंग का एक जोड़ा माता लक्ष्मी को अर्पित करना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ऐसा करने से धन-धान्य की आपको प्राप्ति होती है।
दिवाली का त्योहार कार्तिक कृष्ण पक्ष की अमावस्या के दिन मनाया जाता है। इस दिन मुख्य रूप से माता लक्ष्मी, भगवान गणेश, सरस्वती माता और मां काली की पूजा होती है। दिवाली पर लक्ष्मी पूजन के लिए प्रदोष काल का समय सर्वोत्तम माना जाता है जो सूर्यास्त के बाद का समय होता है। तो वहीं माता कालीदिवाली का त्योहार 20 अक्टूबर 2025 को मनाया जाएगा, 21 को नहीं, क्योंकि इस दिन प्रदोष काल के समय अमावस्या तिथि मिल रही है। बता दें दिवाली पूजन अमावस्या के दिन प्रदोष काल में करना उत्तम माना जाता है। की पूजा के लिए महानिशीथ काल समय शुभ होता है। दिवाली के दिन लक्ष्मी पूजा मुहूर्त 20 अक्टूबर 2025 की शाम 07:08 से रात 08:18 बजे तक रहेगा। तो वहीं प्रदोष काल शाम 05:46 से रात 08:18 तक और वृषभ काल शाम 07:08 से रात 09:03 पुराणों के अनुसार कार्तिक अमावस्या की रात में महालक्ष्मी धरती पर आती हैं और हर घर में विचरण करती हैं। ऐसे में जो भी घर स्वच्छ और प्रकाशवान होता है वहां माता अंश रूप में ठहर जाती हैं।
दिवाली के दिन पूजा के दौरान नए खरीदे गए झाडू को भी पूजा में शामिल करना चाहिए। इस झाडू को उत्तर या फिर पूर्व दिशा में आप पूजा के दौरान रख सकते हैं। इस बात का ध्यान रखें कि सूर्यास्त के बाद झाडू इस दिन न लगाएं और इस दिन झाडू पर पैर लगाने से भी बचें।
दिवाली के दिन हस्त नक्षत्र रात्रि 8 बजकर 17 मिनट तक रहेगा और उसके बाद चित्रा नक्षत्र लग जाएगा। हस्त नक्षत्र के स्वामी जहां चंद्रमा हैं वहीं चित्रा मंगल का नक्षत्र है। दिवाली की पूजा में इत्र रखना बेहद शुभ होता है। माना जाता है कि इत्र को इस दिन पूजा स्थल पर रखने से आर्थिक उन्नति आपको प्राप्त होती है। पूजा के दौरान आप माता लक्ष्मी को इत्र अर्पित कर सकते हैं।
पुराणों के अनुसार कार्तिक अमावस्या की रात में महालक्ष्मी धरती पर आती हैं और हर घर में विचरण करती हैं। ऐसे में जो भी घर स्वच्छ और प्रकाशवान होता है वहां माता अंश रूप में ठहर जाती हैं। घर के कोने-कोने में दीपक जलाकर रखें। वहीं घर के मंदिर में एक घी का बड़ा दीपक और दूसरा सरसों के तेल का बड़ा दीपक जरूर र दिवाली की रात तंत्र साधना करने से सिद्धि जल्दी मिलती है। खें। ध्यान रहे कि ये दीपक पूरी रात जलते रहना चाहिए।
दिवाली पर करें इन राम मंत्रों का जाप;
श्री रामचन्द्राय नमः।श्री राम जय राम जय जय राम:।रामाय रामभद्राय रामचन्द्राय वेधसे। रघुनाथाय नाथाय सीतायाः पतये नमः॥
दिवाली के दिन इन लक्ष्मी मंत्रों के जप से प्राप्त होगा धन-धान्य
ॐ देव्यै नमः। ॐ पुण्यगन्धायै नमः ॐ ब्रह्माविष्णुशिवात्मिकायै नमः
लकड़ी की चौकी लाल कपड़ा लक्ष्मी-गणेश की मूर्तिकुमकुमहल्दी की गांठरोलीपानबातीसुपारीलोंगअगरबत्तीधूपदीपकमाचिसघीगंगाजलपंचामृतफूलफलकपूरगेहूंदूर्वा घासजनेऊखील बताशेचांदी के सिक्के और कलावा