29 अक्तूबर 2025 को कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि & उत्तराषाढ़ा नक्षत्र और धृति योग का संयोग & बुधवार को अभिजीत मुहूर्त नहीं रहेगा & 31 अक्टूबर 2025, शुक्रवार को चोर पंचक & समापन 4 नवंबर 2025 को होगा & दिक पंचांग के अनुसार कार्तिक पूर्णिमा तिथि 4 नवंबर को रात 10 बजकर 36 मिनट पर शुरू होगी और 5 नवंबर को शाम 6 बजकर 48 मिनट पर समाप्त होगी. ऐसे में उदयातिथि के अनुसार इस साल देव दीपावली 5 नवंबर 2025, बुधवार को मनाई जाएगी. BY CHANDRA SHEKHAR JOSHI 9412932030
29 अक्टूबर 2025, बुधवार का दिन है और कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि & सूर्योदय का समय : 06: 31 ए एम सूर्यास्त का समय : 05: 38 पी एम चंद्रोदय का समय: 01:04 पी एम चंद्रास्त का समय : 11:41 पी एम
षाढ़ के महीने में भगवान विष्णु चार माह के लिए योग निद्रा में चले जाते हैं और इसके साथ हिंदू धर्म में शुभ व मांगलिक कार्य वर्जित होते हैं. इसके बाद कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन जब भगवान विष्णु योग निद्रा से जागते हैं तो मांगलिक कार्यों की शुरुआत होती है. इस एकादशी को देवउठनी एकादशी कहा जाता है और सनातन धर्म में इसका विशेष महत्व माना गया है. इस साल देवउठनी एकादशी 2 नवंबर 2025 को है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यदि देवउठनी एकादशी के दिन कुछ चीजों का दान किया जाए तो जीवन में आ रही कई बाधाएं दूर होती हैं.

देवउठनी एकादशी के दिन जगत के पालनहार श्रीहरि भगवान विष्णु का पूजन किया जाता है. कई लोग इस दिन एकादशी का व्रत भी रखते हैं और फिर अगले दिन द्वादशी पर व्रत का पारण करते हैं. देवउठनी एकादशी का व्रत बहुत ही फलदायी माना गया है और इस दिन भगवान विष्णु ही उपासना की जाती है. इस व्रत में रातभर जागरण कर भगवान का नाम जपते हैं और इसमें अन्न ग्रहण करना वर्जित होता है. हिंदू धर्म में देवउठनी एकादशी का विशेष महत्व है और इस दिन दान करना बेहद महत्वपूर्ण माना गया है.
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यदि आप देवउठनी एकादशी का व्रत रख रहे हैं तो व्रत का पारण करने के बाद ब्राह्म्ण को भोजन अवश्य कराना चाहिए. इसके साथ ही उन्हें कुछ दक्षिणा भी दी जाती है. इसके अलावा इस दिन अन्न का दान सबसे महत्वपूर्ण माना गया है. कहते हैं कि देवउठनी एकादशी के दिन धान, गेहूं, मक्का, बाजरा, उड़द, गुड़ का दान करना शुभ होता है. इसके अलावा वस्त्र का भी दान किया जाता है. इस एकादशी के दिन सिंघाड़ा, शकरकंदी, गन्ना और सभी मौसमी फलों का दान करना महत्वूपर्ण व लाभकारी माना गया है. इससे भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है.
हिंदू धर्म में देव दीपावली का विशेष महत्व माना गया है क्योंकि इस दिन सभी देवी-देवता काशी के गंगा घाट पर स्नान करने आते हैं और ऐसे में यदि वहां दीप जलाएं तो व्यक्ति को सभी प्रकार के कष्टों से मुक्ति मिलती है. बता दें कि देव दीपावली हर साल कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि के दिन मनाई जाती है और इसे कार्तिक पूर्णिमा भी कहते हैं. इस दिन गंगा स्नान का विशेष महत्व होता है और शिव की अराधना करने से जीवन से रोग, दोष व कष्ट दूर हो जाते हैं.
5 नवंबर को देव दीपावली के दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 52 मिनट से लेकर सुबह 5 बजकर 44 मिनट तक रहेगा. इस मुहूर्त में गंगा स्नान करना बेहद ही शुभ व फलदायी माना गया है. इस दिन अभिजीत मुहूर्त नही है. लेकिन शाम को गोधूलि मुहूर्त है जो कि शाम 5 बजकर 33 मिनट से लेकर 5 बजकर 59 मिनट तक रहेगा.
देव दीपावली के दिन दीप जलाने का शुभ मुहूर्त
देव दीपावली के दिन प्रदोष काल में दीप जलाएं जाते हैं और इस दिन दीप जलाने से सभी देवी-देवताओं का आशीर्वाद मिलता है. पंचांग के अनुसार देव दीपावली के दिन दीप जलाने का शुभ मुहूर्त शाम 5 बजकर 15 मिनट से लेकर शाम 7 बजकर 50 मिनट तक रहेगा.