10 नवंबर को मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि & 10 नवंबर 2025 को मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि है। इस तिथि पर पुनर्वसु नक्षत्र और साध्य योग का संयोग बन रहा है। सोमवार को अभिजीत मुहूर्त 11:39 − 12:22 मिनट तक रहेगा। राहुकाल सुबह 07:59 − 09:20 मिनट तक रहेगा। नक्षत्र पुनर्वसु 10 नव. 6:48 PM तक BY CHANDRA SHEKHAR JOSHI Mob. 9412932030, BAGULA MUKHI PEETH DEHRADUN
तिथि-मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष षष्ठी, आज का पक्ष-कृष्ण पक्ष आज का वार-सोमवार नक्षत्र पुनर्वसु – Nov 09 08:04 PM – Nov 10 06:48 PM पुष्य – Nov 10 06:48 PM – Nov 11 06:18 PM & सूर्योदय – 6:41 AM सूर्यास्त – 5:40 PM & विक्रम संवत 2082 माह पूर्णिमांत कार्तिक
पंचांग दैनिक ज्योतिषीय कैलेंडर है जो ग्रहों और सूक्ष्म स्थितियों के आधार पर चंद्र दिवस के बारे में बहुमूल्य जानकारी प्रदान करता है। इसमें पाँच विशेषताएँ शामिल हैं- तिथि (द लूनर डे), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र (चन्द्र मेंशन), योग (चन्द्र-सौर दिवस) और करण (आधा चन्द्र दिवस)। इन पांच विशेषताओं के आधार पर, ज्योतिषी किसी भी नए कार्य या हिंदू धार्मिक अनुष्ठान को शुरू करने के लिए मुहूर्त या शुभ समय का निर्धारण करते हैं और इसके साथ-साथ अशुभ समय को भी देखते हैं जिससे हर किसी को बचना चाहिए।

11 November भाग्य जाग जाएगा: उपाय बगला मुखी पीठ बंजारा वाला देहरादून
मंगलवार, 11 नवंबर: अदभुत संयोग अदभुत उपाय : पुष्य नक्षत्र 11 नव. 6:17 PM तक & 11 नवंबर 2025 को पुष्य नक्षत्र और सर्वार्थ सिद्धि योग का अद्भुत संयोग बन रहा है। यह दिन मंगलवार है, जो इस योग के प्रभाव को और भी बढ़ाता है। पुष्य नक्षत्र को ‘नक्षत्रों का राजा’ कहा जाता है और सर्वार्थ सिद्धि योग में किए गए सभी कार्य सफल होते हैं।
पुष्य नक्षत्र, सर्वार्थ सिद्धि योग: बरगद के वृक्ष पर गन्ने का रस , गाय का दूध चढ़ा कर और वही की गीली मिट्टी से माथे पर तिलक लगाया जाएगा, घी का दिया जलेगा,, इससे भाग्य उदय हो जाएगा, किस्मत जाग जायेगी और वही पर आसन में बैठ कर 2 अरदास मनौती मांग कर जल संकल्प होगा, फिर दक्षिणा, मिष्ठान भेट करे,
यह उपाय ब्रह्म मुहूर्त या शाम 6 बजकर 20 मिनट से पहले किया जाएगा जब तक पुष्य नक्षत्र रहेगा।
इसके उपरांत देवगुरु बृहस्पति 11 नवंबर 2025 को रात 10 बजकर 11 मिनट पर कर्क राशि में वक्री होंगे, जिसका ज्योतिषीय प्रभाव पड़ेगा।
और
काल भैरव जयंती 12 नवंबर को होगी, लेकिन अष्टमी तिथि 11 नवंबर को सुबह 11:08 बजे शुरू होगी।
मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा होगी, क्योंकि इस दिन की गई पूजा सुख, सौभाग्य और समृद्धि लाती है। भगवान विष्णु की पूजा करना भी विशेष फलदायी होता है।
गुरु अपनी अतिचारी अवस्था में हैं. पूरे साल 12 बाद देवगुरु बृहस्पति कर्क राशि में वक्री होंगे, जिसका समय रात 10 बजकर 11 मिनट होगा. इसके बाद 5 दिसंबर तक इसी अवस्था में रहेंगे, गुरु के राशि परिवर्तन के समय कुछ उपाय किए तो भाग्य जाग उठेगा,
कुमकुम, चावल, हल्दी, घी, तेल, धूप, फल आदि) दान & विवाह को छोड़कर, आप किसी भी नए कार्य, व्यापारिक लेनदेन, निवेश, शिक्षा या किसी नए कोर्स की शुरुआत बिना पंचांग देखे कर सकते हैं। आर्थिक परेशानियों से मुक्ति पाने के लिए लक्ष्मी सहस्त्रनाम, लक्ष्मी सूक्त, श्रीसूक्त या कनकधारा स्तोत्र का पाठ करें। जीवन में आने वाली कई बाधाएं दूर होती हैं और कार्यों में सफलता मिलती है। 11 अक्टूबर को रवि पुष्य नक्षत्र और सर्वार्थ सिद्धि योग का अत्यंत दुर्लभ शुभ संयोग बन रहा है। इस शुभ संयोग में व्यक्ति अगर कोई शुभ कार्य करता है तो वह अटल और चिरस्थाई होगा।
पुष्य नक्षत्र प्रारंभ: 10 नवंबर 2025, शाम 06:48 बजे से & पुष्य नक्षत्र समाप्त: 11 नवंबर 2025, शाम 06:17 बजे तक & सर्वार्थ सिद्धि योग: यह योग पूरे दिन प्रभावी रहेगा क्योंकि यह पुष्य नक्षत्र के साथ बन रहा है। & बरगद के वृक्ष के उपाय: इस दिन बरगद के वृक्ष पर गन्ने का रस और गाय का दूध चढ़ाएं। वहीं की गीली मिट्टी से माथे पर तिलक लगाएं और घी का दिया जलाएं। माना जाता है कि इससे भाग्य उदय होता है और किस्मत चमक जाती है।
सर्वार्थ सिद्धि योग क्या है? हर इच्छा पूरी होगी : कुछ नक्षत्रों और कुछ सप्ताह के दिनों के संयोग से यह शुभ योग बनता है। जैसा कि इसके नाम “सर्वार्थ सिद्धि” से पता चलता है, इस शुभ दिन पर हर इच्छा पूरी होगी। लोगों में यह भी आम धारणा है कि अगर कोई इस शुभ समय में कोई काम शुरू करता है तो उसे सफलता अवश्य मिलती है। इसलिए इस योग को सबसे फलदायी ज्योतिषीय योगों में से एक माना जाता है।
इस योग के लिए कुछ प्रतिबंध भी हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि हिंदू ज्योतिष के अनुसार इस योग के कुछ संयोजनों को सौभाग्यशाली माना जाता है जबकि कुछ अन्य को अशुभ माना जाता है। इस योग के कुछ संयोजन निम्नलिखित हैं:
रविवार – उ.आषाढ़, उ.भद्रा, हस्त, मूल, अश्विनी, उ.फाल्गुनी, पुष्य आदि।
सोमवार – रोहिणी, मृगशिरा, पुष्य, अनुराधा, श्रवण आदि।
मंगलवार – उत्तरा भाद्रपद, अश्विनी, आश्लेषा, कृतिका आदि।
बुधवार – अनुराधा, हस्त, रोहिणी, मृगशिरा (मार्गशीर्ष), कृत्तिका आदि।
गुरुवार – अनुराधा, रेवती, पुनर्वस, पुष्य, अश्विनी आदि।
शुक्रवार – पुनर्वसु, अश्विनी, रेवती, अनुराधा, श्रवण आदि।
शनिवार – स्वाति, श्रावण, रोहिणी आदि।
हिंदू ज्योतिष के अनुसार सर्वार्थ सिद्धि योग के कुछ संयोगों को शुभ माना जाता है, जबकि कुछ को अशुभ माना जाता है। अब यह स्पष्ट है कि इस विशेष योग के लिए कुछ शर्तें हैं। यदि यह योग सोमवार को मृगशिरा, रोहिणी, अनुराधा, पुष्य और श्रवण नक्षत्र आदि के साथ बनता है तो यह बहुत शुभ होता है।

चन्द्रशेखर जोशी
बगला मुखी पीठ देहरादून
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