19 November 2025: दैनिक पंचांग के अनुसार आज 19 नवंबर 2025, बुधवार का दिन है. आज मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि है और दर्श अमावस्या भी आज मनाई जा रही है. & चतुर्दशी – 09:43 ए एम तक & सूर्योदय का समय : 06: 47 ए एम & सूर्यास्त का समय : 05: 26 पी एम & आज अभिजित मुहूर्त कोई नहीं. विजय मुहूर्त 01:53 पी एम से 02:35 पी एम तक रहेगा. ब्रह्म मुहूर्त 05:00 ए एम से 05:54 ए एम तक रहेगा. & राहुकाल 12:06 पी एम से 01:26 पी एम तक रहेगा & 19 नवंबर को सूर्योदय के बाद मार्गशीर्ष अमावस्या तिथि प्रारंभ हो रही है. & हिंदू धर्म के अनुसार, दर्श अमावस्या के दिन चंद्र देव की विशेष पूजा का विधान है। इस दिन पूरी श्रद्धा के साथ चंद्रमा की आराधना करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। साथ ही, इस पावन तिथि पर पितरों की पूजा, तर्पण, स्नान एवं दान करना विशेष फलदायी माना गया है। पूर्वजों के निमित्त अनुष्ठान करने की परंपरा के कारण इस दिन को ‘श्राद्ध अमावस्या’ भी कहा जाता है।

BY CHANDRA SHEKHAR JOSHI EDITOR Mob. 9412932030
दर्श अमावस्या के धार्मिक उपाय; इस दिन दान-पुण्य का विशेष महत्व है, इसलिए इस दिन दान-दक्षिणा देना फलदायी माना जाता है। दर्श अमावस्या पर ब्राह्मणों को भोजन करवाने का भी खास महत्व है। इस दिन मीठे में खीर का दान करना भी शुभ माना जाता है। इस तिथि पर पितरों की आत्मा की शांति के लिए 16 दीपक जलाने की भी परंपरा है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन पितृ आपके घर आते हैं, इसलिए उनके लिए घर में रोशनी की जाती है, साथ ही उनके लिए उचित स्थान पर मिष्ठान और पूड़ी रखी जाती है, ताकि वे भूखे वापस न जाए। इस दिन पिंडदान और तर्पण करने से पितृ प्रसन्न होते हैं और आशीर्वाद देते हैं।
मार्गशीर्ष अमावस्या की तिथि 19 नवंबर दिन बुधवार को प्रात: 9 बजकर 43 मिनट पर प्रारंभ हो रही है. इस तिथि का समापन 20 नवंबर दिन गुरुवार को दोपहर 12 बजकर 16 मिनट पर होगा. & 19 नवंबर को सूर्योदय के बाद मार्गशीर्ष अमावस्या तिथि लग रही है. वहीं 20 नवंबर को दोपहर सवा 12 बजे खत्म हो रही है. ऐसे में मार्गशीर्ष की दर्श अमावस्या 19 नवंबर को है. इस बार मार्गशीर्ष अमावस्या और मार्गशीर्ष की दर्श अमावस्या होगी.
मार्गशीर्ष या अगहन अमावस्या, मार्गशीर्ष के कृष्ण पक्ष की आखिरी तिथि होती है. साल 2025 में यह अमावस्या 19 नवंबर, बुधवार को पड़ रही है. अमावस्या शुरू: 19 नवंबर, सुबह 09:43 बजे अमावस्या समाप्त: 20 नवंबर, दोपहर 12:16 बजे
मार्गशीर्ष अमावस्या का दिन बेहद शुभ और पवित्र माना जाता है. इस दिन पितरों की कृपा पाने, दान-पुण्य करने और नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने के लिए विशेष पूजा की जाती है. सही शुभ मुहूर्त में किए गए उपाय मनोकामनाओं की पूर्ति और सौभाग्य बढ़ाने में सहायक होते हैं.
हिंदू धर्म में मार्गशीर्ष माह को बहुत पवित्र माना जाता है. इसे अगहन मास भी कहते हैं, इसलिए इसकी अमावस्या को अगहन अमावस्या भी कहा जाता है. हर अमावस्या अपनी जगह खास होती है, क्योंकि इस दिन स्नान, दान और तर्पण का महत्व बहुत ज्यादा होता है. लेकिन मार्गशीर्ष इसलिए और खास है क्योंकि भगवान श्रीकृष्ण ने गीता में कहा है कि महीनों में वह मार्गशीर्ष हैं. माना जाता है कि गीता का उपदेश भी इसी महीने में दिया गया था, इसलिए इस अमावस्या का महत्व कई गुना बढ़ जाता है.
स्वाति नक्षत्र और सौभाग्य योग का संयोग & तिथि-मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष चतुर्दशी, आज का पक्ष-कृष्ण पक्ष आज का वार-बुधवार कृष्ण पक्ष चतुर्दशी – Nov 18 07:12 AM – Nov 19 09:43 AM कृष्ण पक्ष अमावस्या – Nov 19 09:43 AM – Nov 20 12:17 PM आज का नक्षत्र स्वाति – Nov 18 05:01 AM – Nov 19 07:59 AM विशाखा – Nov 19 07:59 AM – Nov 20 10:58 AM
एक माह में तीस तिथियां होती हैं और ये तिथियां दो पक्षों में विभाजित होती हैं। शुक्ल पक्ष की आखिरी तिथि को पूर्णिमा और कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि अमावस्या कहलाती है। तिथि के नाम – प्रतिपदा, द्वितीया, तृतीया, चतुर्थी, पंचमी, षष्ठी, सप्तमी, अष्टमी, नवमी, दशमी, एकादशी, द्वादशी, त्रयोदशी, चतुर्दशी, अमावस्या/पूर्णिमा
आप दिन-विशेष की ग्रह-चाल, शुभ-अशुभ समय आदि से अवगत हो सकते हैं, जो निर्णय लेने व कार्य योजना बनाने में मददगार हो सकता है। वैदिक ज्योतिष में पंचांग को समय का प्रतिनिधि माना जाता है। जहाँ आधुनिक युग में लोग समय जानने के लिए कैलेंडर और घड़ी का सहारा लेते हैं, वहीं हिंदू धर्म के अनुयायी समय की गणना और शुभ-अशुभ मुहूर्त जानने के लिए पंचांग का प्रयोग करते हैं। पंचांग के माध्यम से केवल सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और चंद्रास्त की जानकारी ही नहीं मिलती, बल्कि दिनभर के सभी शुभ और अशुभ मुहूर्तों का भी विवरण प्राप्त होता है।
पंचांग एक वैदिक समय निर्धारण उपकरण है — एक प्रकार की वैदिक घड़ी — जो केवल उस विशेष भौगोलिक स्थान के लिए मान्य होती है, जिसके अनुरूप वह तैयार किया गया हो। यही कारण है कि विश्व के प्रत्येक नगर के लिए अलग-अलग पंचांग बनाए जाते हैं।
शास्त्रों में कहा गया है कि देवताओं से पहले पितरों को खुश करना चाहिए. जैसे श्राद्ध पक्ष की अमावस्या को सर्वपितृ अमावस्या मनाई जाती है, उसी तरह अगहन अमावस्या पर व्रत रखने से भी पितर प्रसन्न होते हैं. अगर किसी की कुंडली में पितृ दोष हो, संतान सुख न मिल रहा हो, या भाग्य स्थान में राहू नीच का हो, तो इस अमावस्या का व्रत बहुत लाभ देता है. माना जाता है कि इस व्रत से पितर ही नहीं, बल्कि देवता, ऋषि और सभी जीव-जंतुओं की तृप्ति होती है
आपके काम बनते-बनते बिगड़ जाते हैं, या सफलता मिलते-मिलते हाथ से निकल जाती है, तो यह पितरों की नाराज़गी भी हो सकती है. ऐसे में ; मार्गशीर्ष अमावस्या को अगहन अमावस्या भी कहा जाता है. मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को मार्गशीर्ष अमावस्या होती है. मार्गशीर्ष अमावस्या के दिन स्नान और दान करते हैं. पितरों की तृप्ति के लिए तर्पण, श्राद्ध कर्म आदि करते हैं. इस बार मार्गशीर्ष अमावस्या 19 नवंबर को है या 20 नवंबर को? यह सवाल इसलिए है क्योंकि मार्गशीर्ष अमावस्या की तिथि दोनों दिन है. ऐसे में मार्गशीर्ष की दर्श अमावस्या भी इसके साथ लगी हुई है.
सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह में 10:58 ए एम से लेकर अगले दिन 21 नवंबर को सुबह 06:49 ए एम तक है. वहीं दिन का शुभ समय यानि अभिजीत मुहूर्त 11:45 ए एम से दोपहर 12:28 पी एम तक है. मार्गशीर्ष अमावस्या पर स्नान के बाद अपनी क्षमता के अनुसार अन्न, वस्त्र आदि का दान करें.
जिन लोगों को पितृ दोष से मुक्ति के लिए श्राद्ध, पिंडदान, पंचबलि कर्म करना है, वे लोग मार्गशीर्ष की दर्श अमावस्या को ये सब कर सकते हैं. दर्श अमावस्या पर पितृ दोष मुक्ति के उपाय का समय दिन में 11:30 बजे से लेकर दोपहर 02:30 बजे तक होता है.
दर्श अमावस्या के दिन पितरों के लिए स्नान, दान, तर्पण आदि करना चाहिए. इससे पितरों का आशीर्वाद मिलता है. पितर खुश होकर उन्नति और खुशहाली का आशीर्वाद देते हैं. मान्यताओं के अनुसार, जो लोग दर्श अमावस्या के दिन व्रत उपासना करते हैं, उन पर भगवान शिव और चंद्र देवता की विशेष कृपा होती है। चंद्र देव लोगों को शीतलता और शांति प्रदान करते हैं। शास्त्रों में कहा गया है कि, इस दिन पूर्वज धरती पर आते हैं और अपने परिजनों को आशीर्वाद देते हैं, सलिए इस दिन पूर्वजों के लिए प्रार्थना करने का विधान है। यह तिथि पितृदोष से मुक्ति पाने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी गई है। जो लोग करियर, आर्थिक स्थिति या पारिवारिक कलह से परेशान हैं, दर्श अमावस्या पर यदि वे पूजा पाठ करें तो उनके सभी दुखों का निवारण होता है। दर्श अमावस्या की तिथि पितृदोष से मुक्ति पाने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी गई है। यह अमावस्या पितरों को प्रसन्न करने और भगवान शिव व चंद्रदेव का आशीर्वाद पाने के लिए मनाई जाती है।

दर्श अमावस्या के दिन वैसे तो ब्रह्म मुहूर्त में ही किसी पवित्र नदी में स्नान करने का विधान है, लेकिन अगर आपके लिए यह संभव न हो पाए तो आप घर में ही गंगाजल मिलाकर स्नान आदि से निवृत हो जाएं। इसके बाद व्रत का संकल्प लें और पूजा की तैयारियां शुरू कर दें। इस दिन भगवान शिव, माता पार्वती, चंद्रमा और तुलसी की पूजा विधि पूर्वक की जाती है। सबसे पहले अपने पूजा स्थल की सफाई करके वहां गंगाजल का छिड़काव करें। फिर मंदिर में दीपक जलाकर पूजा विधि प्रारंभ करें। अब भगवान शिव और माता पार्वती की मूर्ति स्थापित कर उनका जलाभिषेक करें। इसके साथ ही चंद्रदेव का भी आह्वान करें। इसके बाद आप शिवलिंग पर दूध, फूल, धतूरा, अक्षत, चंदन,रोली, तुलसी दल, बेलपत्र और पंचामृत चढ़ाएं। इसके बाद आप माता पार्वती को 16 श्रृंगार की सामग्री अर्पित करें। अब भगवान शिव और माता पार्वती के समक्ष धूप जलाने के बाद ‘ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप करें’। इसके बाद चंद्रमा की भी स्तुति करें। फिर दर्श अमावस्या की व्रत कथा सुनें और शिव चालीसा का पाठ करें। अंत में भगवान से मंगल कामना करते हुए उनकी आरती उतारें। अब आप तुलसी माता की पूजा-अर्चना करें, फिर तुलसी के पौधे में जल अर्पित करें। तुलसी माता के समक्ष दीप- धूप जलाएं और उनकी आराधना करें।इसके बाद उपासक फलाहार ग्रहण करें और पूरे दिन व्रत का पालन करें। अगले दिन भगवान की पूजा के बाद ही व्रत का पारण करें।
Yr Contribution; HIMALAYA GAURAV UTTRAKHAND; CA; 30023706551 , STATE BANK OF INDIA. Saharanpur Road. Dehradun. IFS CODE; SBIN0003137 . Mob 9412932030