सौ काम छोड़कर भोजन करें। एक हजार काम छोड़कर स्नान करें। एक लाख काम छोड़कर दान करें, और करोड़ों काम छोड़कर भगवान का भजन करना चाहिए। भगवान की कथा, स्तुति आरती करने और सुनने से जीवन की सारी व्यथा नष्ट हो जाती है।
25 दिसंबर 2025 को पौष माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि है। इस तिथि पर धनिष्ठा नक्षत्र और वज्र योग का संयोग बन रहा है। दिन के शुभ मुहूर्त की बात करें तो गुरुवार को अभिजीत मुहूर्त 12:00 − 12:41 मिनट तक रहेगा। स्कन्द षष्ठी के व्रत का खास महत्व है, जो मुख्यतौर पर माता पार्वती और शिव जी के पुत्र भगवान कार्तिकेय को समर्पित है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, सफलतापूर्वक स्कन्द षष्ठी का व्रत रखने से घर-परिवार में खुशियों का वास होता है. साथ ही संतान की लंबी आयु और खुशहाल जीवन का आशीर्वाद मिलता है. सूर्योदय: सुबह 07 बजकर 12 मिनट पर

प्रात: काल में धनिष्ठा रहेगा. धनिष्ठा नक्षत्र के बाद शतभिषा नक्षत्र का आरंभ
2025 के आखिरी महीने दिसंबर में 25 तारीख को स्कन्द षष्ठी का व्रत रखा जा रहा है. हालांकि, इस दिन ईसाई धर्म के लोगों का प्रमुख त्योहार ‘क्रिसमस’ भी मनाया जाएगा. 25 दिसंबर 2025 को प्रात: काल से लेकर दोपहर करीब 2 बजे तक पौष माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि रहेगी. पंचमी तिथि के बाद षष्ठी तिथि का आरंभ होगा
नवग्रहों की स्थिति
- केतु ग्रह: सिंह राशि में 25 दिसंबर 2025 को रहेंगे.
- शनि ग्रह: मीन राशि में 25 दिसंबर 2025 को रहेंगे.
- बुध ग्रह: वृश्चिक राशि में 25 दिसंबर 2025 को रहेंगे.
- राहु ग्रह और चंद्र ग्रह: कुंभ राशि में 25 दिसंबर 2025 को रहेंगे.
- देवगुरु बृहस्पति ग्रह: मिथुन राशि में 25 दिसंबर 2025 को रहेंगे.
- सूर्य ग्रह, शुक्र ग्रह और मंगल ग्रह: धनु राशि में 25 दिसंबर 2025 को रहेंगे.
संभावना जताई जा रही है कि उत्तर प्रदेश में आगामी चुनाव में योगी आदित्यनाथ को फिर से मुख्यमंत्री बनाए जाने की अपेक्षा केंद्र में उन्हें अहम जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। इसके बाद वर्ष 2029 में होने वाले चुनाव में यदि भाजपा बहुमत लाती है तो अमित शाह को प्रधानंमी बनाया जा सकता है। ऐसे में योगी आदित्यनाथ को गृहमंत्री या रक्षामंत्री जैसे अहम पद की जिम्मेदारी मिल सकती है।
अमित शाह की जन्म दिनांक 22 अक्टूबर 1964, समय 5:25, स्थान मुंबई है। इसके अनुसार अमित शाह की कन्या लग्न की कुंडली में जन्मस्थ शनि छठे, राहु दसवें और गुरु नवम भाव में विराजमान हैं। दूसरे भाव में सूर्य और बुध की युति और एकादश भाव में मंगल विराजमान हैं और बारहवें भाव में शुक्र विराजमान है। लाल किताब के संकेतों के अनुसार, अमित शाह भविष्य में प्रधानमंत्री पद के एक मजबूत दावेदार हो सकते हैं। यदि उनकी कुंडली का विशलेषण करें तो उनके ग्रह नक्षत्र ज्यादा प्रबल है जो 99 प्रतिशत उनके पीएम बनाने के संकेत देता है। कोई बड़ा उलटफेर या उनकी बीमारी ही इन्हें पीएम बनने से रोक सकती है।
महादशा: शाह की कुंडली में गुरु की महादशा में शनि की अंतर्दशा चल रही है। 23/7/26 के बाद गुरु में बुध की अंतर्दशा चलेगी। इसके बाद गुरु में केतु और इसके बाद गुरु में शुक्र की अंतर्दशा चलेगी। गुरु की महादशा वर्ष 2040 तक रहेगी। यह समय बहुत शानदार रहने वाला है। यदि लाल किताब की दशा को माने तो 22 अक्टूबर 2026 से लेकर 22 अक्टूबर 2032 तक मंगल की महादशा चलेगा जिसमें उनके सितारे बुलंदी पर होंगे।
शाह की मेष राशि मंगल की है और उन पर साढ़ेसाती प्रथम चरण प्रारंभ हुआ है। यदि दशा उन्हें या तो बहुत ऊंचाइयों पर ले जाएगी या उन्हें पद खोना पड़ सकता है।
जीवन में कृष्ण पक्ष (अमावस्या से पूर्णिमा तक, घटता चाँद, अंधकार, आत्मचिंतन का समय) और शुक्ल पक्ष (पूर्णिमा से अमावस्या तक, बढ़ता चाँद, प्रकाश, ज्ञान-विकास का समय) चंद्रमा की कलाओं के घटने-बढ़ने पर आधारित हैं, यह जीवन के उतार-चढ़ाव और संतुलन को दर्शाते हैं—शुक्ल पक्ष प्रगति, आशा और बाहरी विकास के लिए जबकि कृष्ण पक्ष आंतरिक परिवर्तन, ध्यान और नकारात्मकता को दूर करने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है, दोनों जीवन चक्र के अभिन्न अंग हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, दोनों पक्ष जीवन में संतुलन के लिए आवश्यक हैं; जहाँ शुक्ल पक्ष बाहरी विस्तार देता है, वहीं कृष्ण पक्ष आंतरिक गहराई और सुधार का मौका देता है। चन्द्रशेखर
समय, कर्म और ऊपर से होने वाली लीला ही किस्मत है” चन्द्रशेखर जोशी
बगला मुखी पीठ देहरादून का कहना है कि यह जीवन के गहरे सत्य को दर्शाता है, जहाँ किस्मत (भाग्य) कोई रहस्यमयी शक्ति नहीं, बल्कि हमारे वर्तमान और पिछले कर्मों का समय (काल) के साथ मिलने वाला फल है, जिसमें ईश्वर की इच्छा (लीला) भी शामिल है, यानी कर्म, समय और ईश्वरीय विधान (दैव) मिलकर ही भाग्य बनाते हैं और हमें अपने कर्मों पर ध्यान देना चाहिए, क्योंकि ये ही भविष्य तय करते हैं। महामाई पीतांबरा श्री बगलामुखी शक्ति पीठ धर्मपुर विधानसभा
फोकस
तुम अच्छा करो या बुरा मै उसमें हस्तक्षेप नहीं करूंगा
मै तुम्हारे साथ रहूंगा हर पल साथ रहूंगा
उसका साक्षी बनूंगा जो कर्म तुम कर रहे हो
और फिर तुम्हारे प्रारब्ध बनेंगे अच्छे या बुरे
उसका फल तुम भोगोंगे क्योंकि वो कर्म तुमने किए हैं
श्रीकृष्ण बोले, तो उद्धव ने कहा प्रभु आप तो साथ खड़े हो, देख रहे हो कि अमुक अच्छे कर्म कर रहा है तो अच्छे फल मिल जाएगा, और बुरे कर्म की गठरी बाध रहा है तो इसके पाप की गठरी बंध जाएगी, इसको बुरे कर्म का फल मिलेगा, परन्तु रोक नहीं रहे हो आप, प्रभु , क्या यह गलत नहीं है ,
श्रीकृष्ण उवाच : सबको यह पता है कि मैं कण कण में विराजमान हु, हर जीव के साथ हु, और जो इस बात को ध्यान में रखता है कि मैं हर पल उसके साथ हूं , वो जीवन में कभी कोई गलत कर्म नहीं करता, और कोई गलत कर्म करता है तो सबसे पहले वहां मेरी उपेक्षा करता है कि यहां ईश्वर नहीं है और मुझे इग्नोर करने वाला मानव एक दिन स्वयं इग्नोर हो जाता है
चन्द्रशेखर जोशी की प्रस्तुति बगला मुखी पीठ देहरादून.
प्रत्यंगिरा और बगलामुखी देवी में क्या अंतर है;
दोनों ही तंत्र की शक्तिशाली महाविद्याएँ हैं, जिनमें मुख्य अंतर उनके कार्यक्षेत्र का है:
बगलामुखी शत्रुओं के वाणी और कर्म को स्तंभित (रोकने) करने और उन्हें भ्रमित करने में माहिर हैं, जबकि प्रत्यंगिरा (विशेषकर विपरीत प्रत्यंगिरा) तांत्रिक प्रयोगों और नकारात्मक शक्तियों को वापस भेजने में अत्यंत उग्र और प्रभावी हैं, वे शत्रु के कर्म को उसी रूप में लौटाती हैं और अत्यंत उग्र नरसिंह स्वरूप से जुड़ी हैं, जो उन्हें प्रत्यंगिरा से अधिक शक्तिशाली बनाती है।
बगलामुखी जहाँ स्तंभन (रोकने) की शक्ति देती हैं, वहीं प्रत्यंगिरा विनाश और सुरक्षा (रक्षण) की परम शक्ति हैं, खासकर जब शत्रु तंत्र-मंत्र का प्रयोग कर रहा हो।
चन्द्रशेखर जोशी
त्रिची का रंगनाथ स्वामी मंदिर, भारत के सबसे बड़े प्राचीन मंदिर परिसर
श्रीरंगम का यह मन्दिर श्री रंगनाथ स्वामी को समर्पित है, जहां स्वयं श्री विष्णु शेषनाग शैय्या पर विराजे हुए हैं।
मंदिर का क्षेत्रफल लगभग156 एकड़, परिधि 4 किमी है।
कावेरी के तट पर तीन पवित्र रंगनाथ मंदिर हैं :
आदि रंग : श्रीरंगपट्टण का रंगनाथस्वामी मंदिर
मध्य रंग : शिवनसमुद्रम का रंगनाथस्वामी मंदिर
अन्त्य रंग : श्रीरंगम का रंगनाथस्वामी मंदिर
वनवास काल मे, इस मंदिर में देवताओं की, भगवान राम के द्वारा पूजा की जाती थी और रावण पर श्री राम की विजय के बाद मंदिर को, राजा विभीषण को सौंप दिया गया।
भगवान श्री विष्णु विभिषण के सामने उपस्थित हुए और इसी स्थान पर ‘रंगनाथ’ के रूप में रहने की इच्छा व्यक्त की, और तब से भगवान् विष्णु श्री रंगनाथस्वामी के रूप में यहां वास करते हैं।
श्रीरंगम भगवान विष्णु के 108 पवित्र स्थानों की सूची में सबसे ऊपर है।
जय विष्णु-लक्ष्मी, जय रंगनाथ स्वामी !
चन्द्रशेखर की प्रस्तुति
एस्ट्रोलोजी प्रिडिक्शन : 2026 : 04 जनवरी 2026 को सूर्य और शनि के बीच 72 डिग्री का कोण बनेगा, जिससे एक दुर्लभ ‘पंचांक योग’ का निर्माण होगा और,,
चन्द्रशेखर जोशी बगला मुखी पीठ देहरादून
2026 में सूर्य और शनि की युति का प्रभाव ज्योतिषीय दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, 2026 में सूर्य और शनि की ज्योतिषीय स्थिति मौजूदा राजनीतिक व्यवस्थाओं के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकती है, जिससे महत्वपूर्ण सुधारों, नेतृत्व में बदलाव और संभावित राजनीतिक आंदोलनों की स्थिति बन सकती है।
राजनीतिक आंदोलनों की बात करे तो ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, यह युति नेतृत्व में बदलाव, सरकार में सुधारों के दबाव और नए राजनीतिक गठबंधनों का संकेत देती है।
2026 में शनि का मीन राशि में गोचर शासन और जवाबदेही को प्रभावित करेगा। इससे नौकरशाही में सुधारों का दबाव बन सकता है और नेताओं को अपनी ईमानदारी बनाए रखने के लिए जन दबाव का सामना करना पड़ सकता है।
भारत की कुंडली में 2026 में शनि का गोचर चंद्रमा के करीब होगा, जो संभावित रूप से सार्वजनिक अशांति और राजनीतिक झटकों का संकेत देता है। इससे कुछ राज्यों, विशेष रूप से दक्षिण और पूर्वी भारत में, नए राजनीतिक आंदोलनों या सत्ता परिवर्तन की संभावना है।
विशेष कार्य सिद्धि हेतु बगला मुखी विशेष योनि कुंड
बगलामुखी मंदिर एक सिद्धपीठ है, जहां पांडवों ने अपने वनवास और तपस्या के वर्षों के दौरान मां बगलामुखी की पूजा की थी। भगवान राम ने हनुमान की सलाह पर रावण पर विजय प्राप्त करने के लिए मां बगलामुखी की पूजा की थी। उनकी शक्ति और प्रतिष्ठा इतनी प्रबल है, और उनके भक्तों को शत्रुओं के कुकर्मों से मुक्ति दिलाने की उनकी क्षमता में गहरी आस्था है, कि दुनिया भर से लोग अपनी समस्याओं के समाधान के लिए मां बगलामुखी मंदिर में आते हैं। वर्षों से, प्रधानमंत्रियों, फिल्म सितारों और अन्य प्रभावशाली पदों पर आसीन व्यक्तियों सहित जीवन के विभिन्न क्षेत्रों के महत्वपूर्ण लोग मां बगलामुखी को नमन करने आए हैं। यह एक ऐसा स्थान है जहां आपकी प्रार्थनाएं कभी अनसुनी नहीं होंगी और मां आपको आपकी मनोकामना पूरी करेंगी।
हित चौरासी का पाठ एक संपूर्ण साधना है जो जीवन को सफल, आनंदमय और आध्यात्मिक रूप से परिपूर्ण बनाती है।
चन्द्रशेखर जोशी की प्रस्तुति
गोस्वामी श्री हित हरिवंश महाप्रभु द्वारा रचित एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है, जो राधा-कृष्ण की भक्ति और आध्यात्मिक शिक्षाओं पर केंद्रित है और चतुरसी पंथ के लिए महत्वपूर्ण है.
नियमित पाठ से प्रत्यक्ष रूप से राधा-कृष्ण के दर्शन होने की गारंटी है, और यह कहा जाता है कि यह आपका अंतिम जन्म हो सकता है।
सुरक्षा कवच: इसके पाठ से कोई भी ग्रह-नक्षत्र, भूत-प्रेत, या नकारात्मक शक्ति साधक को छू नहीं सकती; यह एक शक्तिशाली सुरक्षा कवच का काम करता है।