वर्ष 2026 स्वामी विवेकानंद जयंती-9 जनवरी, शुक्रवार

9 जनवरी 2026 के दिन की शुरुआत माघ माह के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि से होगी, जो दिन के अंत तक रहेगी. इसके अलावा प्रात: काल में उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र रहेगा, जिसका समापन दोपहर में 2 बजे के आसपास होगा. उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र के बाद हस्त नक्षत्र का आरंभ होगा, जिसका समापन दिन के साथ ही होगा. सूर्योदय- सुबह 06:50 सूर्यास्त- शाम 05:29 & यात्रा शकुन-शुक्रवार को मीठा दही खाकर यात्रा पर निकलें। BY CHANDRA SHEKHAR JOSHI 9412932030

आज का मंत्र-ॐ द्रां द्रीं द्रौं स: शुक्राय नम:। आज का उपाय- मन्दिर में छैने से बनी मिठाई चढ़ाएं। वनस्पति तंत्र उपाय-गूलर के वृक्ष में जल चढ़ाएं।

भारत के महान आध्यात्मिक गुरु, देशभक्त और युवाओं के प्रेरणास्त्रोत स्वामी विवेकानंद की 163वीं जन्म वर्षगाँठ इस वर्ष विशेष संयोग लेकर आई है। आमतौर पर हम सभी स्वामी जी का जन्मदिन 12 जनवरी को ‘राष्ट्रीय युवा दिवस’ के रूप में मनाते हैं, लेकिन भारतीय संस्कृति और हिन्दू पंचांग का पालन करने वाले अनुयायियों के लिए इस बार उनकी जयंती की तारीख अंग्रेजी कैलेंडर से अलग है। पंचांग की गणना के अनुसार, वर्ष 2026 में स्वामी विवेकानंद जयंती 9 जनवरी, शुक्रवार को मनाई जा रही है। वर्ष 2026 में स्वामी विवेकानंद जयंती 9 जनवरी, शुक्रवार ;

स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी, 1863 को कोलकाता के एक कुलीन बंगाली परिवार में हुआ था। अंग्रेजी (ग्रेगोरियन) कैलेंडर के अनुसार यह तारीख हर साल 12 जनवरी ही रहती है। लेकिन, हिन्दू वैदिक पंचांग के अनुसार उनका जन्म ‘पौष मास’ की पूर्णिमा के सात दिन बाद यानी ‘कृष्ण पक्ष की सप्तमी’ तिथि को हुआ था। चूँकि हिन्दू तिथियाँ चंद्रमा की गति पर आधारित होती हैं, इसलिए अंग्रेजी तारीखों के मुकाबले इनमें हर साल बदलाव आता है। इसी गणना के आधार पर साल 2026 में पौष कृष्ण सप्तमी 9 जनवरी को पड़ रही है।

 9 जनवरी 2026 को राहुकाल के साथ-साथ भद्रा का अशुभ साया भी मंडरा रहा है. सबसे खास बात ये है कि शुक्रवार को एक या दो नहीं, बल्कि 12 घंटे से ज्यादा भद्रा की काली छाया रहेगी. ऐसे में मांगलिक कार्य करने के लिए बहुत ही कम वक्त मिलेगा. दरअसल, राहुकाल और भद्रा में शुभ कामों को करने से बचने की सलाह दी जाती है.

9 जनवरी 2026 के दिन की शुरुआत माघ माह के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि से होगी, जो दिन के अंत तक रहेगी. इसके अलावा प्रात: काल में उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र रहेगा, जिसका समापन दोपहर में 2 बजे के आसपास होगा. उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र के बाद हस्त नक्षत्र का आरंभ होगा, जिसका समापन दिन के साथ ही होगा.

शुक्रवार के दिन की शुरुआत शोभन योग से हो रही है, जो दोपहर में करीब 5 बजे तक रहेगा. शोभन योग के बाद अतिगण्ड योग का आरंभ होगा, जो दिन के अंत तक रहने वाला है. हालांकि, इस बीच सुबह 7 बजे के आसपास आडल योग और रवि योग बनेगा, जो दोपहर में 01:40 मिनट तक रहने वाला है.

 09 जनवरी, शुक्रवार का दिन है. आज माघ माह के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि है. आज देशभर में स्वामी विवेकानंद जयंती भी मनाई जा रही है. पंचांग के मुताबिक आज भद्रा का साया रहेगा जो कि सुबह 7 बजकर 15 मिनट से शाम 7 बजकर 39 मिनट तक रहेगा. हिंदू धर्म में भद्रा का अशुभ मुहूर्त माना गया है और इस दौरान कोई भी शुभ या मांगलिक कार्य करना वर्जित होता है. कहते हैं कि भद्रा में किए गए काम का शुभ फल नहीं मिलता. शुभ कार्य के लिए अभिजित मुहूर्त काफी महत्वपूर्ण होता है जो कि आज दोपहर 12 बजकर 7 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 47 मिनट तक रहेगा

स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी 1863 को कोलकाता में हुआ था उनका असली नाम नरेन्द्रनाथ दत्त था। वे एक समृद्ध और शिक्षित परिवार में पैदा हुए थे, जिसके कारण उन्हें बचपन से ही अच्छे संस्कार और शिक्षा प्राप्त हुई। उनके पिता, विश्वनाथ दत्त, एक प्रतिष्ठित वकील थे और मां भुवनेश्वरी देवी एक धार्मिक और अत्यंत सरल स्वभाव की महिला थीं। स्वामी विवेकानंद का पालन-पोषण एक ऐसे वातावरण में हुआ, जो धार्मिकता, अध्यात्म, और उच्च संस्कारों से भरा हुआ था। उनके माता-पिता ने उन्हें बहुत अच्छे संस्कार दिए और छोटी उम्र में ही स्वामी विवेकानंद में गहरी धार्मिक भावना और अध्ययन की इच्छा देखने को मिली।

भारत के महान आध्यात्मिक गुरु, देशभक्त और युवाओं के प्रेरणास्त्रोत स्वामी विवेकानंद की 163वीं जन्म वर्षगाँठ इस वर्ष विशेष संयोग लेकर आई है। आमतौर पर हम सभी स्वामी जी का जन्मदिन 12 जनवरी को ‘राष्ट्रीय युवा दिवस’ के रूप में मनाते हैं, लेकिन भारतीय संस्कृति और हिन्दू पंचांग का पालन करने वाले अनुयायियों के लिए इस बार उनकी जयंती की तारीख अंग्रेजी कैलेंडर से अलग है। पंचांग की गणना के अनुसार, वर्ष 2026 में स्वामी विवेकानंद जयंती 9 जनवरी, शुक्रवार को मनाई जा रही है।

स्वामी विवेकानंद के प्रारंभिक शिक्षा का आरंभ कलकत्ता के प्रिंस बयल स्कूल से हुआ था, जहां उन्होंने अपनी शिक्षा की नींव रखी। वे एक मेधावी छात्र थे, और उनके विद्यालय में हर विषय में उत्कृष्टता प्राप्त की। वे विशेष रूप से इतिहास, संस्कृत और दर्शनशास्त्र में रुचि रखते थे। उनकी धार्मिकता के प्रति रुचि और ज्ञान की प्यास इतनी गहरी थी कि वे अक्सर अपने गुरु से या अपने साथियों से जीवन के गूढ़ सवालों के बारे में सवाल पूछा करते थे। उनका यह जिज्ञासा उन्हें जल्द ही एक खोजी और ज्ञानवर्धक मार्ग पर ले गई।

स्वामी विवेकानंद का मननशील और विचारशील स्वभाव था, जो उन्हें सामान्य बच्चों से अलग करता था। वे एक समय में दो अलग-अलग तरह की मानसिकता रखते थे – एक तरफ वे धार्मिक गुरुओं की शिक्षाओं को गहराई से समझने की कोशिश करते थे, तो दूसरी ओर वे पश्चिमी विचारधारा और विज्ञान के प्रति भी गहरी रुचि रखते थे। जब वे रामकृष्ण परमहंस से मिले, तब उनके जीवन में एक महत्वपूर्ण मोड़ आया। स्वामी विवेकानंद ने रामकृष्ण परमहंस से शिक्षा ली और उनके दर्शन को आत्मसात किया। यही वह समय था जब वे अपने जीवन के उद्देश्य और मार्ग पर स्पष्ट रूप से अग्रसर हुए।

स्वामी विवेकानंद के बचपन और युवावस्था में ही उनके मन में भारतीय संस्कृति और समाज की बेहतरी के लिए एक जुनून और प्रतिबद्धता पैदा हो गई थी। उन्होंने अपने जीवन के पहले दिनों में ही समाज में व्याप्त अंधविश्वास, भेदभाव और सामाजिक असमानता के खिलाफ आवाज उठाना शुरू कर दिया था। उनका यह मानना था कि भारतीय समाज को पुनः जागृत करने और उसे अपनी पुरानी महानता की ओर वापस लौटने की जरूरत थी।

इस प्रकार, स्वामी विवेकानंद का प्रारंभिक जीवन ज्ञान की खोज, समाज के प्रति संवेदनशीलता और उच्च आदर्शों की ओर एक यात्रा के रूप में विकसित हुआ, जो उनके बाद के जीवन में व्यापक रूप से परिलक्षित हुआ

आप धन्य है। आप ईश्वर के समान है! जो किसी भी परिस्थिति में अपने धर्म के मार्ग से विचलित नहीं होते है।

स्वामी विवेकानन्द की ख्याति देश विदेश में फैली हुई थी। एक बार कि बात है। विवेकानन्द समारोह के लिए विदेश गए थे। और उनके समारोह में बहुत से विदेशी लोग आये हुए थे! उनके द्वारा दिए गए स्पीच से एक-विदेशी महिला बहुत ही प्रभावित हुईं।

और वह विवेकानन्द के पास आयी और स्वामी विवेकानन्द से बोली कि मैं आपसे विवाह करना चाहती हूँ ताकि आपके जैसा ही मुझे गौरवशाली पुत्र की प्राप्ति हो। इसपर स्वामी विवेकानन्द बोले कि क्या आप जानती है। कि ” मै एक सन्यासी हूँ ” भला मै कैसे विवाह कर सकता हूँ यदि आप चाहो तो मुझे आप अपना पुत्र बना लो। इससे मेरा सन्यास भी नही टूटेगा और आपको मेरे जैसा पुत्र भी मिल जाएगा। यह बात सुनते ही वह विदेशी महिला स्वामी विवेकानन्द के चरणों में गिर पड़ी और बोली कि आप धन्य है। आप ईश्वर के समान है! जो किसी भी परिस्थिति में अपने धर्म के मार्ग से विचलित नहीं होते है।

भारत सरकार ने स्वामी विवेकानंद के विचारों को जन-जन तक पहुँचाने और युवाओं को प्रेरित करने के लिए उनकी अंग्रेजी जन्म तिथि यानी 12 जनवरी को स्थाई रूप से ‘राष्ट्रीय युवा दिवस’ (National Youth Day) घोषित किया हुआ है। वर्ष 1985 से प्रतिवर्ष 12 जनवरी को पूरे देश में सरकारी और गैर-सरकारी स्तर पर यह दिवस मनाया जाता है।

स्वामी विवेकानंद आधुनिक भारत के ऐसे संत थे जिन्होंने पूरी दुनिया में सनातन धर्म और वेदान्त दर्शन का डंका बजाया। अपने गुरु रामकृष्ण परमहंस की शिक्षाओं को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने बेलुड़ मठ और रामकृष्ण मिशन की स्थापना की। उनका शिकागो में दिया गया भाषण आज भी ऐतिहासिक माना जाता है। उनका जीवन और उनके विचार— “उठो, जागो और तब तक नहीं रुको जब तक लक्ष्य ना प्राप्त हो जाए”— आज भी करोड़ों युवाओं के लिए सफलता का मूलमंत्र हैं।

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