13 जनवरी माघ कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि,मकर संक्रांति के पहले लोहड़ी का पर्व, बड़ा परिवर्तन संकेत , संकट,  किस्मत का खेल बदलने वाला है, 14 जनवरी को षट्तिला एकादशी ;सर्वार्थ सिद्धि और अमृत सिद्धि योग;  

13 जनवरी 2026 को माघ माह के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि है। इस दिन देशभर में लोहड़ी का पर्व बड़े ही धूम-धाम के साथ मनाया जाता है। इस तिथि पर विशाखा नक्षत्र और शुला योग का संयोग & सूर्योदय- सुबह 7:13 am सूर्यास्त- शाम 5:44 pm &  13 जनवरी 2026, मंगलवार के लिए सभी 12 राशियों के जीवन से जुड़े अहम संकेत & जनवरी 2026 में ग्रहों की बड़ी चाल बदलने जा रही है। 12 से 18 जनवरी के बीच शुक्र, सूर्य, मंगल और बुध मकर राशि में प्रवेश करेंगे। ज्योतिष के अनुसार वृश्चिक, धनु और कुंभ राशि वालों के लिए यह सप्ताह तनाव, आर्थिक नुकसान और रिश्तों में परेशानी ला सकता है।

CHANDRA SHEKHAR JOSHI 9412932030; BAGULA MUKHI PEETH DEHRADUN

किस्मत का खेल बदलने वाला है, क्योंकि इस हफ्ते ग्रहों की चाल में बड़ा उलटफेर होने जा रहा है। अगले हफ्ते यानी 12 से 18 जनवरी 2026 के बीच, चार ग्रह अपनी जगह बदलेंगे। 13 जनवरी को शुक्र मकर राशि में दाखिल होगा, फिर 14 जनवरी को सूर्य भी वहीं जाएगा। इसके बाद, 16 जनवरी को मंगल और 17 जनवरी को बुध मकर राशि में आएंगे। ज्योतिषियों का मानना है कि मकर राशि में चार ग्रहों की ये जमावट तीन राशियों के लिए मुश्किलें ला सकती है।

13 जनवरी को माघ कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि और मंगलवार का दिन है। दशमी तिथि मंगलवार दोपहर बाद 3 बजकर 18 मिनट तक रहेगी। 13 जनवरी को रात 12 बजकर 7 मिनट तक विशाखा नक्षत्र रहेगा। इसके अलावा मंगलवार को लोहड़ी का त्यौहार मनाया जाएगा।  दशमी तिथि दिन 3.18 तक होगी तदुपरान्त एकादशी तिथि होगी ।

 आज माघ माह की कृष्ण पक्ष दशमी तिथि, विशाखा से अनुराधा नक्षत्र परिवर्तन, राहुकाल, दिशा शूल, शुभ चौघड़िया, चंद्र राशि परिवर्तन, तथा लोहड़ी व भोगी पर्व जैसे विशेष योग

हर साल मकर संक्रांति के पहले लोहड़ी का पर्व मनाया जाता है। सिख समुदाय और पंजाबियों के लिए लोहड़ी त्यौहार का खास महत्व है। पंजाब समेत हरियाणा और दिल्ली में लोहड़ी पर्व की काफी धूम रहती है। लोहड़ी के दिन शाम के समय गोबर के उपले और लकड़ियों को इकट्ठा कर के जलाया जाता है। इसके बाद उस आग में तिल, मक्का, मूंगफली और रेवड़ी डाल जाता है। आग के चारों तरफ परिक्रमा कर के प्रार्थना भी की जाती है। 

मकर संक्रांति का दिन बेहद ही शुभ माना जाता है। इस दिन सूर्य देव धनु से अपने पुत्र की राशि मकर में प्रवेश करते हैं। मकर राशि में सूर्य के गोचर शुरू करते ही शुभ और मांगलिक कार्यों की शुरुआत हो जाती है। इसके अलावा इस दिन सूर्य देव उत्तरायण हो जाते हैं। ‘उत्तरायण’ का अर्थ है सूर्य का उत्तर की ओर गमन। 

माघ माह में प्रदोष व्रत 16 जनवरी 2026 को रखा जाएगा। पंचांग के अुनसार, त्रयोदशी तिथि का आरंभ 15 जनवरी को रात 8 बजकर 16 मिनट पर होगा। त्रयोदशी तिथि का समापन 16 जनवरी 2026 को रात 10 बजकर 21 मिनट पर होगा। प्रदोष पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5 बजकर 47 मिनट से रात 8 बजकर 49 मिनट तक रहेगा।

शुक्र प्रदोष का महत्व

आपको बता दें कि प्रदोष का व्रत जिस दिन पड़ता है उसका नाम उसी दिन के हिसाब से रखा जाता है। माघ माह का यह प्रदोष व्रत शुक्रवार के दिन पड़ रहा है इसलिए इसे शुक्र प्रदोष कहा जाएगा। शुक्र प्रदोष व्रत करने से सौन्दर्य, भोग, वैवाहिक सुख और धन-सम्पदा की प्राप्ति होती है। यह व्रत स्त्रियों के लिए विशेष रूप से कल्याणकारी माना जाता है। इस व्रत से वैवाहिक जीवन सुखमय होता है और घर में देवी लक्ष्मी का वास होता है। शुक्र प्रदोष का व्रत करने से शुक्र ग्रह से संबंधित परेशानियों से भी छुटकारा मिलता है। 

वृश्चिक राशि का स्वामी मंगल होता हैं। ऐसे जातक स्थिर प्रवृति के होते हैं। ये जिद्दी, उत्साही, स्पष्टवादी, परिश्रमी, ईमानदार, समझदार, ज्ञानी, साहसी, दृढ़संकल्प, शीघ्र उत्तेजित हो जाने वाले व अपनी मेंहनत से कार्य करने वाले होते हैं। अपना निर्णय लेने में सक्षम होते हैं। इनको द्वा व्यवसाय, पुलिस, शोधकार्य, साधना, खनिज़ पदार्थों का व्यवसाय, खेती, पुरातत्त्व विज्ञान आदि कार्यों में सफलता मिलती है।

13 जनवरी 2026 : आज का दिन व् कई राशियों के लिए सौभाग्य के साथ आर्थिक लाभ भी लेकर आ रहा है। मेष , कर्क, सिंह, वृश्चिक, धनु और मीन राशि वालों के लिए दिन अत्यंत शुभ रहेगा।  13 जनवरी 2026: माघ मास के शुक्ल पक्ष का आज दसवां दिन है और दिन मंगलवार का है, जो हनुमान जी को समर्पित माना जाता है। आज सूर्य देव धनु राशि में विराजमान रहेंगे, जबकि चंद्रमा तुला से वृश्चिक राशि में गोचर करेंगे। ग्रह-नक्षत्रों की यह स्थिति कई राशियों के लिए धन लाभ, करियर में उन्नति और पारिवारिक सुख लेकर आ रही है, वहीं कुछ राशियों को आज सावधानी बरतने की आवश्यकता है। मेष, कर्क, सिंह, वृश्चिक, धनु और मीन राशि वालों के लिए आज का दिन विशेष रूप से शुभ रहने वाला है।

14 जनवरी 2026 को षट्तिला एकादशी पर बन रहे हैं सर्वार्थ सिद्धि और अमृत सिद्धि योग।  षट्तिला एकादशी माघ महीने के कृष्ण पक्ष की एकादशी को कहते हैं। इस दिन भक्त छह तरीकों से तिल का उपयोग करके भगवान विष्णु की पूजा करते हैं। षट्तिला का अर्थ ही छह तिल है। इसलिए इस एकादशी का नाम षट्तिला एकादशी पड़ा। इस व्रत में तिल का विशेष महत्व है। माघ माह में आने वाली षटतिला एकादशी का खास महत्व है। षटतिला एकादशी के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने से व्यक्ति की हर मनोकामना पूरी होती है और उसे जीवन में वैभव प्राप्त होता है। इसके साथ ही षटतिला एकादशी का व्रत करने से सुख-सौभाग्य, धन-धान्य में वृद्धि होती है।

माघ महीने में पड़ती है और इस साल यह तिथि 14 जनवरी की है। इस दिन विशेष योग जैसे सर्वार्थ सिद्धि और अमृत सिद्धि योग बन रहे हैं। इन योगों में पूजा करने से साधक को दोगुना पुण्य प्राप्त होता है और व्रत का फल अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन षट्तिला एकादशी का व्रत रखा जाएगा और भगवान विष्णु की विधि विधान से पूजा की जाएगी। षटतिला एकादशी के दिन भक्त छह प्रकार से तिल का उपयोग करते हैं – तिल से स्नान, तिल से तर्पण, तिल का दान, तिल युक्त भोजन, तिल से हवन और तिल मिश्रित जल का सेवन। यह व्रत भगवान विष्णु को प्रसन्न करने और मोक्ष प्राप्ति के लिए किया जाता है।

हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार एकादशी तिथि भगवान विष्णु को बेहद प्रिय है। पौराणिक मान्यता के अनुसार इस व्रत की महिमा स्वयं श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को बताई थी। एकादशी व्रत के प्रभाव से जातक को मोक्ष मिलता है और सभी कार्य सिद्ध हो जाते हैं, दरिद्रता दूर होती है। अकाल मृत्यु का भय नहीं सताता, शत्रुओं का नाश होता है, धन, ऐश्वर्य, कीर्ति, पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता रहता है। एकादशी का व्रत सभी व्रतों में सर्वोच्च माना गया है। ऐसा कहा जाता है कि इस व्रत को करने से व्यक्ति जन्म मरण के बंधन से मुक्त हो जाता है और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। साथ ही उसे सभी पापों से मुक्ति मिलती है। एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिलती है और पुण्य की प्राप्ति होती है। जो व्यक्ति सच्ची श्राद्धा और भक्ति से इस व्रत को करते हैं उसकी सभी परेशानियों से उसे छुटकारा मिलता है। साल भर में आने वाली सभी एकादशियों का फल अलग-अलग मिलता है। सालभर में कुल 24 एकादशी आती हैं। हर महीने एक कृष्ण पक्ष की एकादशी और दूसरी शुक्ल पक्ष की एकादशी आती है। इसी के साथ कुल एकादशी की संख्या सालभर में 24 होती है।

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