22 जनवरी 2026 को माघ माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि है। इस तिथि पर शतभिषा नक्षत्र और वरीघा योग का संयोग बन रहा है। दिन के शुभ मुहूर्त की बात करें तो गुरुवार को अभिजीत मुहूर्त 12:11 से 12:53 मिनट रहेगा। राहुकाल दोपहर 13:51 − 15:00 मिनट तक रहेगा। सूर्योदय- सुबह 7:13 am सूर्यास्त- शाम 5:51 pm सर्वार्थ सिद्धि योग: प्रातः 10:13 से अगले दिन सुबह 07:13 तक & 22 जनवरी 2026, गुरुवार है. आज माघ माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि है और इस दिन गणेश चतुर्थी का पर्व मनाया जाता है जिसे गौरीगणेश जयंती भी कहते हैं. इस दिन भगवान गणेश का पूजन किया जाता है और यह पूजन यदि शुभ मुहूर्त में किया जाए तो बहुत ही फलदायी होता है.
BY CHANDRA SHEKHAR JOSHI CHIEF EDITOR 9412932030 & G.S. : STATE PRESS CLUB UTTRAKHAND

मां भुवनेश्वरी, दस महाविद्या (दस देवियों) में से चौथी और शक्ति की सर्वोच्च देवी हैं, जिन्हें ब्रह्मांड की साम्राज्ञी, आदि पराशक्ति और मदर नेचर (प्रकृति की माता) के रूप में पूजा जाता है, जो सभी सृष्टि का आधार हैं और जीवन, चेतना, और ब्रह्मांडीय संतुलन की प्रतीक हैं। वह आकाश के समान व्यापक और असीम हैं, भक्तों को मानसिक शांति, समृद्धि और आत्म-साक्षात्कार प्रदान करती हैं, और उन्हें अंकुश, पाश, अभय मुद्रा और तीन नेत्रों से सुशोभित दर्शाया जाता है।
भुवनेश्वरी अर्थात संसार भर के ऐश्वयर् की स्वामिनी आदिशक्ति दुर्गा माता के दस महाविद्याओं का पंचम स्वरूप है जिस रूप में इनहोने त्रिदेवो को दर्शन दिये थे। देवी भागवत पुराण में इस बात का स्पष्टीकरण मिलता है। इन देवी के कई मंत्र हैं जो क्लिष्ट होने के साथ गुरुगम्य भी हैं पर एक सरल सा एकाक्षरी बीज मंत्र है माँ भुवनेश्वरी का “ह्रीं” इसका मन्दिर में भगवान के सम्मुख बैठकर 5 मिनट, 10 या 15 मिनट मन ही मन जप करना शुभ फलों व माता भुवनेशी की कृपा को दिलाने वाला होता है।
गुरुवार, 22 जनवरी 2026 धार्मिक, ज्योतिषीय और शुभ कार्यों की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। आज विक्रम संवत 2082, सिद्धार्थ संवत्सर, माघ मास शुक्ल पक्ष तथा विनायक चतुर्थी का पावन संयोग & भद्रा दिन 2-38 से रात्रि 2-29 तक, विनायक चतुर्थी, वरद् व कुंद चतुर्थी, तिल चौथ, पंचक, श्री गणेश पूजा
22 जनवरी को माघ शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि और गुरुवार का दिन है। चतुर्थी तिथि गुरुवार देर रात 2 बजकर 29 मिनट तक रहेगी। 22 जनवरी को शाम 5 बजकर 38 मिनट तक वरीयान योग रहेगा। साथ ही गुरुवार को दोपहर 2 बजकर 27 मिनट तक शतभिषा नक्षत्र रहेगा। इसके अलावा 22 जनवरी को विनायक श्री गणेश चतुर्थी का व्रत किया जाएगा। शतभिषा नक्षत्र- 22 जनवरी 2026 को दोपहर 2 बजकर 27 मिनट तक वरीयान योग- 22 जनवरी 2026 को शाम 5 बजकर 38 मिनट तक 22 जनवरी 2026 व्रत-त्यौहार- विनायक श्री गणेश चतुर्थी का व्रत
प्रत्येक महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक श्री गणेश चतुर्थी मनाई जाती है। बता दें कि माघ शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को तिल चतुर्थी, कुन्द चतुर्थी अथवा तिलकुन्द चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन भगवान गणेश की पूजा में तिल और कुन्द के फूलों का बड़ा ही महत्व है। माघ शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक श्री गणेश चतुर्थी व्रत के साथ ही उमा चतुर्थी के रूप में भी मनाया जाता है। इस दिन विशेष रूप से महिलाओं के द्वारा कुन्द और अन्य पुष्पों से, गुड़ से और नमक से गौरी पूजा की जाती है। ऐसा करने से व्यक्ति को हर तरह की सुख-समृद्धि मिलती है। लिहाजा इस दिन भगवान श्री गणेश के साथ ही माता गौरी की पूजा का भी विधान है। .माघ शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि- 22 जनवरी 2026 को देर रात 2 बजकर 29 मिनट तक
गुप्त नवरात्रि में साधक माँ के नौ रूपो के साथ साथ दस महाविद्याओं की भी पूजा करते हैं. खासकर जो लोग तंत्र साधना करते हैं वो गोपनीय तरीके से गुप्त नवरात्री में दस महाविद्याओं की पूजा करते हैं. गुप्त नवरात्री के चतुर्थ दिन माँ भुवनेश्वरी की पूजा की जाती है. मां भुवनेश्वरी 10 महाविद्याओं में चतुर्थ स्वरूप विद्या मानी जाती है. मां भुवनेश्वरी को तीनों लोकों की ईश्वरी माना जाता है. मां भुनेश्वरी साक्षात पूरे संसार को धारण करती हैं और इसका पालन पोषण करती हैं. मां भुवनेश्वरी को जगत माता और जगत धात्री के नाम से भी जाना जाता है. मां भुवनेश्वरी आकाश, वायु, पृथ्वी, अग्नि और जल का निर्माण करती हैं. शास्त्रों में मां भुनेश्वरी को मूल प्रकृति कहा जाता है. शास्त्रों में बताया गया है कि माँ भुवनेश्वरी भगवान् शिव के वाम भाग में विराजमान रहती है. इनकी पूजा करने से ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है और जीवन की सभी समस्याएं दूर हो जाती हैं. माँ भुनेश्वरी की पूजा करने से मनुष्य की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं.
उधदिनधुतिमिंदु किरीटां तुंग कुचां नयन त्रययुक्ताम् ।
स्मेरमुखीं वरदांगकुशपाशाभीतिकरां प्रभजे भुवनेशीम् ।
सनातन धर्म में बसंत पंचमी का पर्व बहुत ही शुभ व पवित्र माना गया है. यह पर्व मां सरस्वती को समर्पित है और इस दिन ऋतुराज बसंत के आगमन का दिन माना जाता है. माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि 23 जनवरी 2026 को अर्धरात्रि 2 बजकर 28 मिनट पर शुरू होगी और 24 जनवरी को रात 1 बजकर 46 मिनट पर समाप्त होगी. उदयातिथि के अनुसार बसंत पंचमी का पर्व 23 जनवरी 2026 को मनाई जाएगी.

बसंत पंचमी का पर्व मां सरस्वती को समर्पित है और शास्त्रों के अनुसार इसी दिन ब्रह्मा जी के मुख से उनकी उत्पत्ति हुई थी. इसलिए बसंत पंचमी को मां सरस्वती के जन्मोत्सव के रूप में भी मनाया जाता है. इस दिन मां सरस्वती का विधि-विधान से पूजन किया जाता है. इस दिन मां सरस्वती की पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 7 बजकर 12 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 35 मिनट तक रहेगा. यदि इस शुभ मुहूर्त में पूजा न कर पाएं तो अभिजीत मुहूर्त को भी शुभ माना जाता है. इस मुहूर्त में भी मां सरस्वती का पूजन किया जा सकता है.
मां सरस्वती को ज्ञान, वाणी, विवेक, संगीत, विद्या और स्वर की देवी कहा गया है. बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती का पूजन करने से जातक की बुद्धि तेज होती है, स्मरण शक्ति बढ़ती है और एकाग्रता में भी वृद्धि होती है. बसंत पंचमी का दिन छात्रों के लिए बहुत ही खास होता है और इस दिन यदि मां सरस्वती का पूजन किया जाए तो पढ़ाई में एकाग्रता बढ़ती है और सफलता के रास्ते खुलते हैं. बसंत पंचमी के दिन पीले रंग का विशेष महत्व होता है और इस दिन पीले वस्त्र पहनना शुभ माना गया है. इसके अलावा मां सरस्वती को भी पीले रंग के फूल अर्पित करने चाहिए और पीले रंग की मिठाई का भोग लगाना चाहिए.