25 जनवरी;सूर्य रथ सप्तमी, भानु सप्तमी, आरोग्य सप्तमी & नर्मदा जयंती और भीष्म अष्टमी & रवियोग और सर्वार्थसिद्धि योग का विशेष संयोग& ग्रहों का खास असर

25 जनवरी ; माघ मास शुक्ल पक्ष सप्तमी तिथि है। आज का दिन धार्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ माना गया है। आज सूर्य रथ सप्तमी, भानु सप्तमी, आरोग्य सप्तमी के साथ-साथ रवियोग और सर्वार्थसिद्धि योग का विशेष संयोग & शुभ मुहूर्तों को देखते हुए बहुत ही खास रहने वाला है, क्योंकि आज ग्रहों की स्थिति कुछ खास असर दिखा रही है। BY CHANDRA SHEKHAR JOSHI CHIEF EDITOR & G.S.; STATE PRESS CLUB UTTRAKHAND & BAGULA MUKHI PEETH DEHRADUN Mob. 9412932030

मां नर्मदा का प्राकट्य भगवान शिव के विग्रह के माध्यम से हुआ है, इसलिए वे शिव की पुत्री के रूप में जगप्रसिद्ध

25 जनवरी 2026, रविवार का दिन बहुत ही विशेष है। आज रथ सप्तमी (भानु सप्तमी) है, जिसे सूर्य जयंती के रूप में मनाया जाता है।  साथ ही आज नर्मदा जयंती और भीष्म अष्टमी का भी संयोग बन रहा है। ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 05:26 से 06:19 तक अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:12 से 12:55 तक (अति शुभ)  & राहुकाल: सायं 04:34 से 05:54 तक

मां नर्मदा को वरदान देते हुए भगवान विष्णु ने कहा है-

‘नर्मदे त्वं महाभागा सर्वपापहरी भव। त्वदप्सु या: शिला: सर्वा: शिवकल्पा भवन्तु ता:॥’  हे नर्मदे! तुम बड़ी भाग्यवान हो। तुम इस संसार के समस्त प्राणियों के पाप-ताप को हरण करने वाली रहोगी। तुम्हारे जल में स्थित सब पाषाण (पत्थर) शिवतुल्य होंगे। उनकी पूजा ‘नर्मदेश्वर’ अर्थात् साक्षात् शिव के रूप में होगी। 

दि 27.01.2026 मंगलवार   गुप्त नवरात्र समाप्त, महानंदा नवमी, श्री हरि जयंती, सर्वार्थसिद्धि व रवियोग दिन 11:09 से प्रारम्भन 12:23 तक, महापात योग दिन 12:05 से सायं 5:05 तक

 25 जनवरी को माघ माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि &  25 जनवरी 2026 को माघ माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि है। इस तिथि पर रथ सप्तमी का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन रेवती नक्षत्र और सिद्ध योग का संयोग बन रहा है। दिन के शुभ मुहूर्त की बात करें तो रविवार को अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:11 से 12:54 मिनट रहेगा। राहुकाल शाम 16:30 − 17:50 मिनट तक रहेगा। & सूर्य रथ सप्तमी पर रवियोग और सर्वार्थसिद्धि योग का दुर्लभ संयोग &  सप्तमी तिथि रात्रि 11.11 तक होगी तदुपरान्त अष्ठमी तिथि होगी & यात्रा प्रारंभ करने से पूर्व शुद्ध घी अथवा शिखरन या खीर खाकर, जल से भरे कलश का शगुन लेकर यात्रा प्रारंभ करें।

दिवस विशेष – भद्रा रात्रि 11-11 से प्रारम्भ, सूर्य रथ सप्तमी, आरोग्य व अचला सप्तमी, भानु सप्तमी, मन्वादि, गंगा में अरुणोदय स्नान, देवनारायण व नवल मात्रंग जयती, पंचक दिन 1-36 तक, पशु मेला 4 दिन का प्रारंभ रामदेव जी (नागौर) में, गंडमूल संपूर्ण दिनरात,

मां नर्मदा के अनेक नाम हैं जिनमें भगवान शिव की जटाओं में वास के कारण उन्हें ‘जटाशंकरी’, सोमकला से उत्पन्न होने के कारण ‘सोमोद्भवा’, मेकल पर्वत द्वारा धारण किए जाने के कारण ‘मेकलसुता’, अत्यन्त वेगवती होने के कारण ‘रेवा’ और अमरता का वरदान प्राप्त होने के कारण ‘नर्मदा’ (न-मृता) प्रसिद्ध हैं। मां नर्मदा को दक्षिण गंगा भी कहा जाता है क्योंकि यह भारतवर्ष के दक्षिण भाग में स्थित हैं। 

स्कंद पुराण अनुसार सरस्वती का जल तीन दिन में, यमुना का जल एक सप्ताह में, गंगा का जल स्नान करते ही जीव को पवित्र कर देता है किन्तु मां नर्मदा का तो दर्शन मात्र ही जीव के जन्म-जन्मांतर के पापों को क्षय अर्थात् नष्ट कर देता है। शास्त्रानुसार मां नर्मदा सर्वत्र पूज्यनीया मानी गई हैं। नर्मदा पुराण के अनुसार मां नर्मदा के तट पर जो एक रात्रि भी व्यतीत कर लेता है वह अपनी सौ पीढ़ियों को तृप्ति व मुक्ति प्रदान कर देता है। मां नर्मदा के संगम पर स्नान करने से अश्वमेध यज्ञ के समान फल प्राप्त होता है।

श्रीमद्भभागवत के अनुसार कलियुग में धर्म अपने केवल एक पैसे से स्थित है। शास्त्रानुसार कलियुग में केवल नाम जप व दान से ही अनन्त पुण्यफल की प्राप्ति कही गई है। यह बात सत्य है कि तीर्थ व पवित्र नदियों के तटों पर स्नान, दान, जप, होम आदि करने का कई गुना अधिक पुण्यफल प्राप्त होता है किन्तु यह बात भी उतनी ही सत्य है कि तीर्थ व पवित्र नदियों के तटों पर जो पापकर्मों का संचयन किया जाता है उसका दोष भी अनन्त गुना होता है। 

शास्त्र का वचन है-

‘यं यं वांछ्यति कामं, तं तं प्राप्नोति वै सर्वं नर्मदाया: प्रसादत:॥’

– जो भी श्रद्धालु पूर्ण श्रद्धा, निश्छल व निर्मल प्रेम से मां नर्मदा से जो भी याचना करता है मां उसे तत्क्षण पूर्ण कर देती हैं।

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