1 फरवरी 2026, माघी पूर्णिमा ‘बत्तिसी पूर्णिमा’, रविदास जयंती, दान, पितरों का आशीर्वाद, होली का डांडा गाड़ा जाता है

1 फरवरी 2026 को माघ शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि और रविवार का दिन है। पूर्णिमा तिथि 1 फरवरी को देर रात 3 बजकर 39 मिनट तक रहेगी। 1 फरवरी को सुबह 10 बजकर 19 मिनट तक प्रीति योग रहेगा, उसके बाद आयुष्मान योग लग जाएगा। साथ ही 1 फरवरी को रात 11 बजकर 58 मिनट तक पुष्य नक्षत्र रहेगा। CALL US; CHANDRA SHEKHAR JOSHI CHIEF EDITOR & BAGLA MUKHI PEETH DEHRADUN Mob. 9412932030

1 फरवरी 2026 को माघ शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि और रविवार का दिन है। पूर्णिमा तिथि 1 फरवरी को देर रात 3 बजकर 39 मिनट तक रहेगी। 1 फरवरी को सुबह 10 बजकर 19 मिनट तक प्रीति योग रहेगा, उसके बाद आयुष्मान योग लग जाएगा। साथ ही 1 फरवरी को रात 11 बजकर 58 मिनट तक पुष्य नक्षत्र रहेगा। इसके अलावा इस दिन पृथ्वी लोक की भद्रा है। इसके अलावा माघी पूर्णिमा व्रत रखा जाएगा और रविदास जयंती भी मनाई जाएगी।

हर साल माघ के महीने में शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को माघ पूर्णिमा का व्रत रखा जाता है। इस दिन पवित्र नदियों पर स्नान के साथ ही दान-पुण्य का महत्व है। यह पूर्णिमा पुत्र और सौभाग्य देने वाली मानी जाती है। इस दिन भगवान विष्णु की उपासना के साथ ही देवी लक्ष्मी, महादेव और चंद्रदेव के पूजन का भी विधान है। भगवान सत्यनारायण की कथा कराना बेहद फलदायी होता है। सूर्योदय और सूर्यास्त इन दोनों समय पर विष्णु जी और मां लक्ष्मी की आराधना करनी चाहिए। 

माघ पूर्णिमा 1 फरवरी 2026 को है और इस दिन रवि पुष्य नामक बेहद शुभ योग भी रहेगा। पुष्य नक्षत्र के स्वामी शनि देव हैं और अधिष्ठाता देवता बृहस्पति इसलिए इस नक्षत्र को शुभ माना जाता है। वहीं जब रविवार के दिन यह नक्षत्र होता है तो इसे रवि पुष्य योग कहा जाता है। माघ पूर्णिमा के दिन इस शुभ योग के बनने से दान-पुण्य के साथ ही कुछ अन्य उपाय करने से भी लाभ की प्राप्ति हो सकती है। 

पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 1 फरवरी 2026, रविवार की सुबह 5 बजकर 52 पर होगी और 1 फरवरी को पूर्णिमा तिथि देर रात 3 बजकर 39 मिनट (2 फरवरी की सुबह) तक रहेगी। ऐसे में उदया तिथि के अनुसार पूर्णिमा व्रत 1 फरवरी को ही रखा जाएगा।

माता लक्ष्मी की करें पूजा- पूर्णिमा और रवि पुष्य योग में आपको माता लक्ष्मी की पूजा करनी चाहिए। सूर्यास्त के बाद इस दिन माता लक्ष्मी की पूजा करने से शुभ फलों की आपको प्राप्ति होती है। पूजा के दौरान आपको माता लक्ष्मी के मंत्र ‘ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः’ का 108 बार जप करना चाहिए। 

इन चीजों की खरीदारी करना शुभ- रवि पुष्य योग , में कुछ चीजों की खरीदारी करने से आपको लाभ मिल सकता है। ये चीजें हैं- सोना, चांदी, इलेक्ट्रोनिक सामान, नया वाहन और जमीन। माना जाता है कि रवि पुष्य योग में इन चीजों को खरीदने से बरकत आती है। 

सूर्य-चंद्र की करें उपासना- माघ पूर्णिमा के दिन रवि पुष्य योग है इसलिए इस दिन सूर्य और चंद्रमा की उपासना करने से आपके जीवन के सभी दुख दूर हो सकते हैं। आपको करियर में सफलता मिल सकती है और बिगड़े काम भी बन सकते हैं। 

इन चीजों का करें दान- माघ पूर्णिमा के दिन आपको रवि पुष्य नक्षत्र में दान करने से भी शुभ फल प्राप्त हो सकते हैं। इस दिन आपको गेहूं, गुड़, तिल, पीले रंग के भोज्य पदार्थ और पीले वस्त्र दान करने चाहिए। इन चीजों का दान करने से आपको देवी-देवताओं के साथ ही पितरों का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है। 

मंत्र सिद्धि- रवि पुष्य योग और माघ पूर्णिमा के शुभ संयोग में आप मंत्र सिद्धि भी प्राप्त कर सकते हैं। इस दिन अपने इष्ट देव के मंत्र या फिर गायत्री मंत्र का जप करने से आपकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और मानसिक शांति भी आप प्राप्त करते हैं। इसके साथ ही आप अन्य देवी-देवताओं के मंत्र भी इस दिन कर सकते हैं। माघ पूर्णिमा के दिन किसी भी मंत्र का जप शुरू करने के बाद आपको अगली पूर्णिमा तक हर दिन इस मंत्र का जप करना है।

 कर्क राशि में चंद्रमा और मकर राशि में सूर्य के प्रवेश होने से माघी पूर्णिमा का योग बनता है और नक्षत्रों में से माघ नक्षत्र के नाम पर माघी पूर्णिमा के नाम की उत्पत्ति हुई है। इसे ‘बत्तीस पूर्णिमा’ के नाम से भी जाना जाता है। माघी पूर्णिमा के इस दूसरे नाम के पीछे भी एक वजह छुपी हुई है। मान्यता के अनुसार इस पूर्णिमा के दिन दान-दक्षिणा करने से बत्तीस गुना फल मिलता है। कहते हैं जो कोई भी इस व्रत को करता है उसकी सारी मनोकामनाएं पूरी हो जाती है। इसलिए माघी पूर्णिमा को ‘बत्तिसी पूर्णिमा’ भी कहा जाता है। पुत्र और सौभाग्य को देने वाली इस पूर्णिमा का व्रत करने से व्यक्ति सारे दुःखों से छुटकर मोक्ष को प्राप्त होता है।

माघ पूर्णिमा तिथि 1 फरवरी 2026 की सुबह 05:52 से 2 फरवरी की सुबह 03:38 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार माघ पूर्णिमा व्रत 1 फरवरी को रखा जाएगा। इस दिन चंद्रोदय समय शाम 05:26 का है। माघ पूर्णिमा के दिन कभी भी स्नान-दान कर सकते हैं क्योंकि पूरे दिन शुभ मुहूर्त रहेगा। सुबह 5 बजकर 24 मिनट से शुरू होकर सुबह 6 बजकर 17 मिनट तक रहेगा।

इस दिन दान का बड़ा महत्व होता है। इस दिन तिल का दान सबसे अहम माना जाता है। इसके अलावा वस्त्र, भोजन, गुड़, कपास, घी, लड्डू, फल, अन्न आदि का दान भी किया जाता है। ‘मत्स्य पुराण’ के अनुसार माघ महीने की पूर्णिमा के शुभ दिन पर जो व्यक्ति ब्राह्मणों और गरीबों को दान करता है, उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है और वह स्वर्गलोक को जाता है। 

माघी पूर्णिमा के दिन नदियों और संगम में स्नान करने का भी प्रचलन है। शास्त्रों के अनुसार पौष मास की पूर्णिमा से माघ मास की पूर्णिमा तक पवित्र नदियों और खासकर की प्रयाग नदी में स्नान करने से सूर्य और चंद्रमा युक्त दोषों से छुटकारा मिलता है और स्वर्ग की प्राप्ति होती है इसलिए इस दिन को पुण्य योग भी कहा जाता है। अर्थात् जो लोग लंबे समय तक स्वर्गलोक का आनंद लेना चाहते हैं, उन्हें माघ मास में सूर्य के मकर राशि में प्रवेश होने पर तीर्थ स्नान अवश्य करना चाहिए। कहते हैं कि माघी पूर्णिमा के दिन स्वयं विष्णु भगवान प्रयाग नदी में डुबकी लगाने आते हैं और वहां डुबकी लगाने आए सभी भक्तों का दुःख हर लेते हैं। इस दिन स्नान के समय गायत्री मंत्र का जाप करना फलदायी होता है।

होली का डांडा कहीं माघ पूर्णिमा के दिन गाड़ा जाता है तो कहीं होलाष्टक के पहले दिन इसका रोपण किया जाता है। इस साल माघ पूर्णिमा 1 फरवरी को है तो वहीं होलाष्टक की शुरुआत 24 फरवरी से होगी। आप अपने यहां की परंपरा के अनुसार इनमें से किसी भी दिन होली का डांडा गाड़ सकते हैं।

  • 1 फरवरी 2026 – जो लोग माघ पूर्णिमा के दिन होली का डांडा रोपते हैं वो 1 फरवरी को ये शुभ काम करेंगे।
  • 24 फरवरी 2026 – जो लोग होलाष्टक की शुरुआत में होली का डांडा रोपते हैं वो 24 फरवरी को ये काम करेंगे।
  • 2 मार्च 2026 – जहां होलिका दहन से एक दिन पहले डांडा रोपण का काम किया जाता है। वहां ये शुभ काम 2 मार्च को किया जाएगा। 
  • ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 5 बजकर 24 मिनट से 6 बजकर 17 मिनट तक
  • प्रात: संध्या- सुबह 5 बजकर 57 मिनट से 7 बजकर 13 मिनट तक
  • अभिजीत मुहूर्त- दोपहर 12 बजकर 30 मिनट से 1 बजकर 15 मिनट तक
  • विजय मुहूर्त- दोपहर 2 बजकर 45 मिनट से 3 बजकर 31 मिनट तक
  • माघ शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि- 1 फरवरी को देर रात 3 बजकर 39 मिनट तक
  • पुष्य नक्षत्र – 1 फरवरी को रात 11 बजकर 58 मिनट तक
  • प्रीति योग – 1 फरवरी को सुबह 10 बजकर 19 मिनट तक 
  • 1 फरवरी 2026 व्रत-त्योहार- माघ शुक्ल पक्ष पूर्णिमा, रविदास जयंती
  • पूर्णिमा के दिन विष्णु भगवान की पूजा-उपासना की जाती है।
  • इस दिन भगवान सत्यनारायण की कथा कराना भी बेहद शुभ माना जाता है।
  • इस दिन लोग धूप-दीप, तुलसी, पान, सुपारी रोली-मोली, तिल, दूर्वा से भगवान विष्णु की उपासना करते हैं।
  • भगवान को पंचामृत का भोग लगाया जाता है। 
  • प्रसाद के लिए आटे को भुनकर उसमे शक्कर और केले की फली मिलाकर पंजीरी बनाई जाती है।
  • होली के उत्सव की शुरुआत डांडा रोपण के साथ होती है। डांडा का अर्थ है एक लकड़ी या स्तंभ। जिस स्थान पर होलिका दहन किया जाता है उस जगह पर कुछ दिन पहले एक लकड़ी रोपी जाती है जिसे होली का डांडा कहते हैं। फिर इसके चारों तरफ लोग लकड़ियां, उपले और सूखे पत्ते इकट्ठा करना शुरू कर देते हैं जिससे होलिका का ढेर बन जाता है। फिर इस ढेर को होलिका दहन के दिन शुभ मुहूर्त में जलाया जाता है। लेकिन होलिका जलाने से पहले डांडे को निकाल लिया जाता है क्योंकि इस डांडे को भगवान विष्णु के भक्त प्रहलाद का प्रतीक माना जाता है। कई जगहों पर लोग दो डांडा भी रोपते हैं। जिनमें से एक को प्रहलाद का प्रतीक तो दूसरे को होलिका का प्रतीक माना जाता है। होलिका दहन के समय प्रहलाद के प्रतीक डांडे को निकाल लिया जाता है और होलिका के डांडे को जलने दिया जाता है।  

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