20 फरवरी 2026 को फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि है। इस तिथि पर उत्तरभाद्रपदा नक्षत्र और साध्य योग का संयोग बन रहा है। दिन के शुभ मुहूर्त की बात करें तो शुक्रवार को अभिजीत मुहूर्त 12:05 − 12:50 मिनट तक रहेगा। ज्योतिष में अभिजीत मुहूर्त को बहुत ही शुभ माना जाता है। BY CHANDRA SHEKHAR JOSHI Mob. 9412932030

20 फरवरी 2026, शुक्रवार है. आज फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि है. आज सर्वार्थ सिद्धि योग के साथ अमृत सिद्धि योग और रवि योग का निर्माण हो रहा है. इन सभी योगों को बेहद ही शुभ
होली के पहले 8 दिनों का समय को होलाष्टक कहते हैं। इन आठ दिनों में हिरण्यकश्यप ने भक्त प्रहलाद तो प्राताड़ित किया था। भगवान शिव द्वारा कामदेव को भस्म करने के बाद देवी रति ने उन्हें पुनर्जीवित कर देने के लिए शिवजी से प्रार्थना की थी। और इन आठ दिनों में सभी ग्रह अपनी उग्रावस्था में रहते हैं। इसलिए इन आठ दिनों को अशुभ मानकर कोई शुभ कार्य नहीं किया जाता है। 3 मार्च 2026 को पूर्ण चंद्रग्रहण भी लग रहा है, जो भारत में दिखाई देगा। इस कारण होलाष्टक का प्रभाव और भी संवेदनशील हो गया है। अष्टमी को चंद्रमा, नवमी तिथि को सूर्य, दशमी को शनि, एकादशी को शुक्र और द्वादशी को गुरु, त्रयोदशी को बुध, चतुर्दशी को मंगल तथा पूर्णिमा को राहु उग्र स्वभाव के हो जाते हैं। इन ग्रहों के निर्बल होने से मनुष्य की निर्णय क्षमता क्षीण हो जाती है। इस कारण मनुष्य अपने स्वभाव के विपरीत फैसले कर लेता है।
मौसम परिवर्तन होता है, सूर्य का प्रकाश तेज हो जाता है और साथ ही हवाएं भी ठंडी रहती है। ऐसे में व्यक्ति रोग की चपेट में आ सकता है और मन की स्थिति भी अवसाद ग्रस्त रहती है। इसीलिए मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं।
. 20 फरवरी को शुक्रवार है, जो कई महत्वपूर्ण योग का संयोग लेकर आ रहा है. इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग का विशेष संयोग बन रहा है, जो कार्यों की सफलता और शुभ फल देने वाला माना जाता है. हालांकि पूरे दिन पंचक और भद्रा का प्रभाव भी रहेगा, सूर्योदय का समय : 06: 56 ए एम सूर्यास्त का समय : 06: 16 पी एम
20 फरवरी को तृतीया तिथि शाम 2 बजकर 38 मिनट तक रहेगी. उदयातिथि के आधार पर पूरे दिन तृतीया ही मानी जाएगी. नक्षत्र उत्तर भाद्रपद शाम 8 बजकर 7 मिनट तक रहेगा, उसके बाद रेवती नक्षत्र लग जाएगा. योग साध्य शाम 6 बजकर 23 मिनट तक प्रभावी रहेगा. करण गर दोपहर 2 बजकर 38 मिनट तक रहेगा.
सूर्योदय 6 बजकर 55 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 6 बजकर 15 मिनट पर होगा. शुभ मुहूर्त की बात करें तो शुक्रवार को ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5 बजकर 14 मिनट से 6 बजकर 5 मिनट तक, अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 12 मिनट से 12 बजकर 58 मिनट तक, विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 28 मिनट से 3 बजकर 14 मिनट तक और गोधूलि मुहूर्त शाम 6 बजकर 12 मिनट से 6 बजकर 38 मिनट तक रहेगा. अमृत काल दोपहर 3 बजकर 28 मिनट से शाम 5 बजकर 1 मिनट तक है. वहीं, सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग और रवि योग का संयोग शाम 8 बजकर 7 मिनट से अगले दिन सुबह 6 बजकर 54 मिनट तक रहेगा. यह समय नए कार्य, पूजा-पाठ, विवाह या अन्य शुभ कार्यों के लिए विशेष रूप से उत्तम है.
राहुकाल सुबह 11 बजकर 10 मिनट से दोपहर 12 बजकर 35 मिनट तक, यमगंड दोपहर 3 बजकर 25 मिनट से 4 बजकर 50 मिनट तक, गुलिक काल सुबह 8 बजकर 20 मिनट से 9 बजकर 45 मिनट तक रहेगा. भद्रा रात 1 बजकर 51 मिनट से अगले दिन सुबह 6 बजकर 54 मिनट तक और पंचक पूरे दिन मान्य रहेगा. पंचक और भद्रा के कारण अग्नि कार्य, यात्रा या नई शुरुआत से बचना चाहिए. शुक्रवार माता लक्ष्मी और शुक्र ग्रह को समर्पित है. इस दिन माता लक्ष्मी की भक्ति भाव से व्रत-पूजन करने से सुख-शांति और धन-धान्य की प्राप्ति होती है.
अभिजित मुहूर्त 12:13 पी एम से 12:58 पी एम तक रहेगा. विजय मुहूर्त 02:29 पी एम से 03:14 पी एम तक रहेगा. ब्रह्म मुहूर्त 05:14 ए एम से 06:05 ए एम तक रहेगा. आज निशिता मुहूर्त 12:10 ए एम, फरवरी 21 से 01:01 ए एम, फरवरी 21 तक रहेगा. गोधूलि मुहूर्त 06:13 पी एम से 06:39 पी एम तक रहेगा. अमृत काल 03:28 पी एम से 05:01 पी एम तक रहेगा. सर्वार्थ सिद्धि योग 08:07 पी एम से 06:55 ए एम, फरवरी 21 तक रहेगा. अमृत सिद्धि योग 08:07 पी एम से 06:55 ए एम, फरवरी 21 तक रहेगा. रवि योग 08:07 पी एम से 06:55 ए एम, फरवरी 21 तक रहेगा.
दुर्मुहूर्त 09:12 ए एम से 09:57 ए एम, 12:58 पी एम से 01:44 पी एम तक रहेगा. राहुकाल 11:11 ए एम से 12:36 पी एम तक रहेगा. यमगण्ड 03:26 पी एम से 04:51 पी एम तक रहेगा. गुलिक काल 08:21 ए एम से 09:46 ए एम तक रहेगा. पञ्चक पूरे दिन रहेगा. भद्रा 01:51 ए एम, फरवरी 21 से 06:55 ए एम, फरवरी 21 तक रहेगा.
वर्ष 2026 में होलाष्टक 24 फरवरी (मंगलवार) से शुरू हो रहा है और 3 मार्च (मंगलवार) को होलिका दहन के साथ समाप्त होगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इन 8 दिनों में सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि और राहु जैसे ग्रह उग्र स्वभाव में रहते हैं, इसलिए किसी भी शुभ कार्य (विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन आदि) की मनाही होती है।