25 फरवरी 2026. ग्रहों की स्थिति & होलिका दहन 3 मार्च 2026 की रात अचूक उपाय & ज्योतिष शास्त्र में इस रात को ‘सिद्धि की रात’, होलिका दहन जौ ,काले तिल अर्पण करें।

 नकारात्मकता और उग्रता अधिक  & सुबह-शाम कपूर जलाएं और गंगाजल का छिड़काव करें। BY CHANDRA SHEKHAR JOSHI Mob. 9412932030

मार्च में वृश्चिक राशि के जातकों के लिए परिवर्तन कुछ न कुछ बड़े हेरफेर को देने वाला है। कार्यक्षेत्र में चुनौती से भरे लेकिन लाभकारी अवसर मिल सकते हैं। परिवार में कुछ उलझनें होंगे जिन्हें शांति से सुलझाने से ही लाभ मिलेगा। 2026 में होलाष्टक 24 फरवरी से शुरू होकर 3 मार्च (होलिका दहन) तक रहेगा। इन 8 दिनों में ग्रहों का स्वभाव काफी उग्र रहता है, इसलिए कुछ विशेष सावधानियां बरतनी जरूरी होती हैं। यहाँ विस्तृत विवरण दिया गया है कि इन 8 दिनों में आपको क्या करना चाहिए 

2026 का पहला चंद्र ग्रहण 03 मार्च 2026 दोपहर 3:21 बजे से शुरू होकर शाम 6:46 बजे तक रहेगा। उपच्छाया से पहला स्पर्श- दोपहर 02:16 से प्रारंभ। यह भारत में यह 30 मिनट तक यानी शाम 06:26 से 6:46 तक यह नजर आएगा। 3 मार्च 2026 को लगने वाले इस चंद्र ग्रहण के सूतक काल और उससे जुड़े नियमों की पूरी जानकारी & चंद्र ग्रहण का सूतक ग्रहण शुरू होने से 9 घंटे पहले शुरू हो जाता है। सूतक काल को एक ‘अशुद्ध’ समय माना जाता है, इसलिए इन बातों का खास ख्याल रखें: ग्रहण के नकारात्मक प्रभाव को कम करने के लिए ये कार्य करें: ग्रहण शाम 6:46 पर समाप्त होगा, इसलिए शुद्धिकरण के बाद ही शाम की पूजा और भोजन करना शुभ रहेगा। होलिका दहन की अग्नि में कभी भी प्लास्टिक, चमड़ा या कचरा न डालें। इस अवसर पर पवित्र अग्नि में केवल प्राकृतिक सामग्री- जैसे गोबर के उपले, लकड़ी, अनाज और जड़ी-बूटियां ही अर्पित करें।

होलिका दहन पर 3 मार्च 2026 की रात ये 5 अचूक उपाय

होलिका दहन के समय एक सूखा नारियल लें और उसमें थोड़ा सा बूरा/चीनी और घी भर दें। इसे जलती हुई होलिका की अग्नि में अर्पित कर दें। होलिका दहन की रात एक सरसों के तेल का दीपक चौखट पर जलाएं। साथ ही, परिवार के सभी सदस्यों के सिर से एक-एक गोमती चक्र सात बार वार कर यानी उतारकर अग्नि में डाल दें। परिवार पर लगी बुरी नजर हटती है और घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त हो जाती है। कोई व्यक्ति लगातार बीमार रहता है, तो होलिका दहन की राख (ठंडी होने के बाद) अगले दिन सुबह ले आएं। इस राख को रोगी के शरीर पर हल्का सा लगाएं या उसके माथे पर तिलक करें।

कुश या तुलसी के पत्ते: ग्रहण शुरू होने से पहले दूध, दही और बचे हुए खाने में तुलसी के पत्ते या ‘कुश’ घास डाल दें। इससे भोजन दूषित नहीं होता।

मंत्र जाप: यह समय ध्यान और मंत्र सिद्धि के लिए सर्वश्रेष्ठ है। अपनी राशि के अनुसार बताए गए मंत्रों का मानसिक जाप करते रहें।

ग्रहण के बाद स्नान: ग्रहण समाप्त होते ही पूरे घर में गंगाजल छिड़कें और खुद भी स्नान करें।

दान का महत्व: स्नान के बाद सामर्थ्य अनुसार अनाज, वस्त्र या धन का दान जरूर करें।

भोजन से परहेज: सूतक शुरू होने के बाद भारी भोजन न करें। हालांकि, बच्चों, बुजुर्गों और बीमार व्यक्तियों के लिए इसमें छूट होती है।

मूर्ति स्पर्श वर्जित: मंदिरों के पट बंद कर दिए जाते हैं। घर के मंदिर को भी पर्दे से ढंक देना चाहिए और मूर्तियों को छूना नहीं चाहिए।

धारदार वस्तुओं का प्रयोग: कैंची, चाकू या सुई जैसी नुकीली चीजों का इस्तेमाल न करें, खासकर गर्भवती महिलाओं को इससे बचना चाहिए।

नकारात्मक विचार: इस दौरान विवाद, क्रोध या किसी की बुराई करने से बचना चाहिए क्योंकि मानसिक ऊर्जा इस वक्त संवेदनशील होती है।

 इन 8 दिनों में हर दिन एक ग्रह उग्र होता है, इसलिए मन बेचैन हो सकता है:

1. पहला दिन (अष्टमी):- चंद्रमा- शिवजी को जल और दूध अर्पित करें।

2. दूसरा दिन (नवमी):- सूर्य- विष्णुजी को गुड़ की खीर अर्पित करें।

तीसरा दिन (दशमी):- शनि- शनि भगवान को तेल और काले तिल अर्पित करें।

4. चौथा दिन (एकादशी):- शुक्र- माता लक्ष्मी को कमल का फूल अर्पित करें।

पांचवां दिन (द्वादशी):- गुरु (बृहस्पति)- भगवान विष्णु और बृहस्पति देव को पीले फूल अर्पित करें।

 छठा दिन (त्रयोदशी):- बुध- माता दुर्गा को चुनरी अर्पित करें।

7. सातवां दिन (चतुर्दशी):- मंगल- हनुमानजी को सिंदुर, गुड़ और चना अर्पित करें।

8. आठवां दिन (पूर्णिमा):- चंद्रमा और भैरव महाराज को कच्चा दूध अर्पित करें।

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