सत्ता का कारक सूर्य, बुद्धि का बुध, साहस का मंगल और भ्रम का राहू एक साथ मिलते हैं, तो यह पद, प्रतिष्ठा और करियर में बड़े उलटफेर का संकेत & उच्च पदों पर बैठे लोगों के लिए मान-हानि का कारण & ‘पद-प्रतिष्ठा’ पर महासंकट ^ ‘ग्रहों का जाल’ & सटीक समय का पालन ही आज आपको ग्रहों के इस प्रतिकूल प्रभाव से बचा सकता है: % अभिजीत मुहूर्त: 12:09:39 PM से 12:56:22 PM (किसी भी महत्वपूर्ण कार्य के लिए यह समय ‘सुरक्षा कवच’ की तरह है). सत्ता और साख को बनाए रखने के लिए & चतुर्ग्रही दबाव को नियंत्रित करने के लिए ये उपाय वैज्ञानिक और ज्योतिषीय रूप से अनिवार्य हैं. सबसे पहले मंगल और राहू की शांति के लिए हनुमान चालीसा का पाठ करें. बुध और राहू की युति वाणी दोष पैदा करती है, इसलिए आज महत्वपूर्ण चर्चाओं में ‘साइलेंट मोड’ पर रहें और कम बोलें. अपनी सत्ता और साख को बनाए रखने के लिए तांबे के लोटे में जल भरकर सूर्य देव को अर्घ्य दें और आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करें.
सूचना: बगलामुखी जयंती 2026 शुक्रवार, 24 अप्रैल , वैशाख महीने की अष्टमी तिथि को मनाई जाएगी। महामाई पीतांबरा श्री बगलामुखी शक्ति पीठ स्थान बंजारा वाला देहरादून में बगला मुखी जयंती भव्य और शानदार ढंग से मनाएं जाने में आपके सहयोग की जल्द अपेक्षा,, BY CHANDRA SHEKHAR JOSHI 9412932030

BY CHANDRA SHEKHAR JOSHI BAGLA MUKHI PEETH DEHRADUN 9412932030
05 मार्च प्रबल सकारात्मक प्रभावों को दर्शाता है। यह उच्च रेटिंग दिन की तिथि, नक्षत्र और योग के कारण है, जो सामूहिक रूप से समृद्धि, स्थिरता और सफल परिणामों को बढ़ाते हैं। & 05 मार्च का दिन है और चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि & 05 मार्च को चैत्र माह की कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि है। द्वितीया तिथि 17:08 तक रहेगी, फिर इसके बाद तृतीया तिथि शुरू होगी। वहीं उत्तर फाल्गुनी नक्षत्र और शुला योग का संयोग
5 मार्च 2026 राशिफल: कुंभ में सूर्य-बुध-राहू-मंगल की चतुर्ग्रही युति से मचेगी खलबली! 5 मार्च 2026, गुरुवार को कुंभ राशि में सूर्य, बुध, राहू और मंगल की दुर्लभ ‘चतुर्ग्रही युति’ बन रही है. ज्योतिषीय गणना के अनुसार, जब सत्ता का कारक सूर्य, बुद्धि का बुध, साहस का मंगल और भ्रम का राहू एक साथ मिलते हैं, तो यह पद, प्रतिष्ठा और करियर में बड़े उलटफेर का संकेत देता है. आज वृषभ, सिंह, वृश्चिक और कुंभ राशि के जातकों को अपनी सामाजिक साख बचाने के लिए विशेष सावधानी बरतनी होगी. आज का सबसे शुभ अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:09 PM से 12:56 PM तक है.
5 मार्च 2026 राशिफल: कुंभ में सूर्य-बुध-राहू-मंगल की चतुर्ग्रही युति से मचेगी खलबली! जानें किन 4 राशियों के पद और प्रतिष्ठा पर है खतरा. आज का सटीक पंचांग और शुभ मुहूर्त यहाँ देखें. 5 मार्च 2026, गुरुवार को कुंभ राशि में सूर्य, बुध, राहू और मंगल की दुर्लभ ‘चतुर्ग्रही युति’ बन रही है.

कुंभ राशि (11 नंबर) में ग्रहों का एक विस्फोटक जमावड़ा है. सूर्य और राहू की युति यहां ‘ग्रहण दोष’ निर्मित कर रही है, जो उच्च पदों पर बैठे लोगों के लिए मान-हानि का कारण बन सकती है. वहीं मंगल और बुध का राहू के साथ मिलना ‘जड़त्व’ और ‘अंगारक’ प्रभाव पैदा करता है, जिससे मतिभ्रम और गलत निर्णय लेने की संभावना प्रबल हो जाती है. मीन राशि में शनि की उपस्थिति गुप्त शत्रुओं को बल देगी, जो आपकी छवि को नुकसान पहुँचाने का प्रयास
5 मार्च 2026 का दिन ‘धैर्य और विवेक’ की पराकाष्ठा का है. कुंभ राशि के ये चार ग्रह आपको उकसाने और भ्रमित करने की पूरी कोशिश करेंगे, लेकिन यदि आप मर्यादा और संयम में रहकर निर्णय लेंगे, तो हस्त नक्षत्र की सकारात्मक ऊर्जा आपको हर षड्यंत्र से सुरक्षित बाहर निकाल लाएगी. अभिजीत मुहूर्त- 12:02 − 12:48 ब्रह्रा मुहूर्त- सुबह 05:05 से 05:55 तक
विजय मुहूर्त: दोपहर 02:35 से 03:22 तक गोधूलि मुहूर्त- शाम 06: 18 से 06:43 तक अमृत काल- दोपहर 03:50 से शाम 05:35 तक

PHOTO; KAMAKHYA PEETH SE PADHARE MAHARAJ JI
11 मार्च 2026 को 120 दिन बाद बृहस्पति मिथुन राशि में मार्गी होंगे. ज्योतिष के अनुसार इस ग्रह परिवर्तन से करियर, शिक्षा और धन में बड़ा बदलाव संभव है, 120 दिनों तक वक्री रहने के बाद 11 मार्च 2026 को बृहस्पति मिथुन राशि में मार्गी होने जा रहे हैं. ज्योतिषीय दृष्टि से यह एक महत्वपूर्ण परिवर्तन माना जा रहा है, क्योंकि जब कोई शुभ ग्रह वक्री अवस्था से निकलकर मार्गी होता है तो कई रुके हुए कार्य दोबारा गति पकड़ने लगते हैं.
इस ग्रह परिवर्तन के बाद कई लोगों के जीवन में करियर, व्यापार, शिक्षा और आर्थिक मामलों में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं. खासतौर पर कुछ राशियों के लिए यह समय धन और अवसर लेकर आ सकता है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब बृहस्पति वक्री होता है तो वह अपनी ऊर्जा को भीतर की ओर केंद्रित करता है. इस दौरान कई लोगों को निर्णय लेने में भ्रम, योजनाओं में देरी या आर्थिक मामलों में रुकावट का अनुभव हो सकता है.
पिछले लगभग चार महीनों में भी कई लोगों ने महसूस किया होगा कि कुछ महत्वपूर्ण कार्य बार-बार टल रहे हैं या अपेक्षित परिणाम नहीं मिल पा रहे हैं.
लेकिन 11 मार्च के बाद जब बृहस्पति मार्गी होंगे, तो यह स्थिति धीरे-धीरे बदल सकती है. मार्गी बृहस्पति को विस्तार, अवसर और प्रगति का संकेत माना जाता है. इस समय शिक्षा, करियर, निवेश और नए विचारों से जुड़े क्षेत्रों में गति देखने को मिल सकती है.
बृहस्पति को शुभ ग्रह माना जाता है, लेकिन हर राशि पर इसका प्रभाव समान नहीं होता. कुछ लोगों को इस समय जल्दबाजी में निर्णय लेने से बचना चाहिए.
विशेष रूप से निवेश, साझेदारी या बड़े आर्थिक निर्णय लेने से पहले सोच-समझकर कदम उठाना जरूरी हो सकता है.
ज्योतिषीय दृष्टि से ग्रहों का प्रभाव व्यक्ति की जन्म कुंडली के आधार पर अलग-अलग हो सकता है, इसलिए व्यक्तिगत परामर्श के बिना बड़े निर्णय लेना उचित नहीं माना जाता.
ज्योतिष शास्त्र में बृहस्पति का महत्व
ज्योतिष ग्रंथों में बृहस्पति को अत्यंत शुभ ग्रह माना गया है. कहा जाता है कि जब गुरु की कृपा होती है तो व्यक्ति के जीवन में ज्ञान, सम्मान और समृद्धि बढ़ती है.
शास्त्रों में कहा गया है:
देवानां च ऋषीणां च गुरुं काञ्चन सन्निभम्।
बुद्धिभूतं त्रिलोकेशं तं नमामि बृहस्पतिम्॥
अर्थात बृहस्पति देवताओं और ऋषियों के गुरु हैं और वे ज्ञान तथा बुद्धि के प्रतीक माने जाते हैं.
11 मार्च 2026 को बृहस्पति का मिथुन राशि में मार्गी होना ज्योतिषीय दृष्टि से एक महत्वपूर्ण घटना माना जा रहा है. लगभग चार महीनों के बाद गुरु की सीधी चाल कई लोगों के जीवन में नई ऊर्जा और अवसर लेकर आ सकती है.
भक्ति के बिना जीवन उद्देश्यहीन है, यह जीवन को आनंदमयी और सार्थक बनाती है।
मनुष्य जीवन में भक्ति मानसिक शांति, आत्मिक संतोष और ईश्वर से जुड़ने के लिए अनिवार्य है। यह जीवन को सही दिशा, सात्विक गुण, और उद्देश्य प्रदान करती है, जिससे मन के क्लेश, डर और अहंकार दूर होते हैं। भक्ति से जीवन सुसंस्कृत बनता है, हमें धर्म-अधर्म का ज्ञान होता है, और यह कर्मों को पवित्र कर दुखों से मुक्ति का मार्ग दिखाती है। चन्द्रशेखर
श्री कृष्ण उवाच :
तू करता वही है, जो तू चाहता है
होता वही है, जो मैं चाहता हूँ
तू वही कर, जो मैं चाहता हूँ
फिर होगा वही, जो तू चाहता है. जय जय श्री राधे श्याम : चंद्रशेखर जोशी
महामाई बगलामुखी और 64 योगिनियां: 8×8 के चक्र में कार्य करती हैं। वे हर दिशा से सुरक्षा और ऊर्जा प्रदान करती हैं।
चन्द्रशेखर जोशी बगला मुखी पीठ देहरादून
बगलामुखी साधना में 64 योगिनियों का स्मरण या पूजा करने से साधना में चमत्कारिक परिणाम देखने को मिलते हैं,
माँ बगलामुखी और 64 योगिनियों का संबंध तंत्र साधना में अत्यंत गहरा, शक्तिशाली और रहस्यमयी है। जो ब्रह्मांडीय ऊर्जा और विभिन्न तांत्रिक सिद्धियों की संचालिका हैं।
तंत्र के अनुसार, 64 योगिनियाँ माँ बगलामुखी सहित सभी महाविद्याओं की सेविका और रक्षक मानी जाती हैं। जब साधक माँ बगलामुखी की साधना (पीतांबरा साधना) करता है, तो 64 योगिनियाँ साधना स्थल को सुरक्षा प्रदान करती हैं और उसे सफल बनाने में सहायक होती हैं।
माँ बगलामुखी को ‘ब्रह्मास्त्र रूपिणी’ कहा जाता है, जो शत्रुओं और दुष्ट शक्तियों को पंगु बना देती हैं। जब इनके साथ 64 योगिनियों की पूजा की जाती है, तो यह शक्ति और अधिक प्रबल हो जाती है, जो कोर्ट-कचहरी, कानूनी विवाद, और गुप्त शत्रुओं से पूर्ण सुरक्षा प्रदान करती है।
64 योगिनियों को सिद्धियों की स्वामिनी माना जाता है। इनकी उपासना से स्वास्थ्य, धन, यश, व्यापार में वृद्धि और असाध्य रोगों से मुक्ति मिलती है।
माँ बगलामुखी की साधना में, विशेष रूप से जब शत्रु अधिक शक्तिशाली हों, तो 64 योगिनी पूजा (चतुष्षष्टि योगिनी पूजा) अनिवार्य मानी जाती है ताकि साधना निर्विघ्न संपन्न हो।
यह आत्मिक शक्ति, शारीरिक और मानसिक आरोग्य, और सांसारिक सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करती है।
जब आप घोर अंधकार से घिरे हों और प्रकाश की कोई उम्मीद न हो। आपने इससे बाहर निकलने के लिए हर संभव प्रयास किया है, लेकिन कुछ भी कारगर नहीं लगता। नकारात्मक शक्तियां हर तरफ फैली हुई हैं, आपको नुकसान पहुंचाने, आपको धमकाने की कोशिश कर रही हैं; आप चिल्लाते हैं, चीखते हैं, लेकिन कोई मदद नहीं मिलती। अंधकार के इस गड्ढे से आपको कोई नहीं बचा सकता।
फिर एक ऐसा क्षण आता है जब आप कोशिश करते-करते थक जाते हैं, गिर पड़ते हैं, लगभग हार मानने ही वाले होते हैं, लेकिन तभी अचानक, आपको अपने भीतर से एक शक्ति का अहसास होता है। यह आपको इतनी ताकत और आत्मविश्वास देती है कि आप उठ खड़े होते हैं, शेर की तरह दहाड़ते हैं और एक ही झटके में सारी नकारात्मक शक्तियों को परास्त कर देते हैं; यही अचानक मिली आंतरिक शक्ति माँ बगलामुखी है।