माता की पूजा आरती के बिना अधूरी;  दुर्गतिनाशिनी त्वंहि दारिद्रादि विनाशिनीम्।  22 मार्च श्री गणेश चतुर्थी & मां कूष्मांडा की पूजा; SPECIAL BAGLA MUKHI ARTI

ARTI; BAGLA MUKHI PEETH; BANJARAWALA DEHRADUN ; CHANDRA SHEKHAR JOSHI 9412932030

या देवी सर्वभू‍तेषु मां कूष्माण्डा रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ & वक्र तुण्डाय हुं। विनायक चतुर्थी के दिन नवरात्र के दौरान केवल 1008 मंत्रों का जप करके किसी एक द्रव्य से 108 बार आहुति देकर भी लाभ पा सकते हैं।

 22 मार्च 2026 के दिन चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि है. यह चैत्र नवरात्रि का चौथा दिन होगा. चैत्र नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा की जाती है. इसके साथ ही वासुदेव चतुर्थी मनाई जाएगी.

22 मार्च के दिन कौन-कौन से शुभ संयोग & 22 मार्च को चैत्र शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि और रविवार का दिन है। चतुर्थी तिथि रविवार को रात 9 बजकर 17 मिनट तक रहेगी। 22 मार्च को चैत्र नवरात्र का चौथा दिन है। रविवार को दोपहर बाद 3 बजकर 42 मिनट तक वैधृति योग रहेगा। साथ ही 22 मार्च को रात 10 बजकर 43 मिनट तक भरणी नक्षत्र रहेगा। इसके अलावा रविवार को विनायक श्री गणेश चतुर्थी का व्रत किया जाएगा। 

22 मार्च 2026, रविवार को चैत्र शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि है, जो रात 9:17 बजे तक रहेगी। इस दिन भरणी नक्षत्र (रात 10:43 बजे तक), वैधृति योग (दोपहर 3:42 बजे तक) और राहुकाल (शाम 4:50 से 6:23 बजे तक) का संयोग रहेगा। यह दिन विनायक चतुर्थी व्रत और चैत्र नवरात्र का चौथा दिन है।  राहुकाल): शाम 04:50 बजे से 06:23 बजे तक शुभ समय (अभिजीत मुहूर्त): दोपहर 12:21 बजे से 01:10 बजे तक ब्रह्म मुहूर्त- 05:06 ए एम से 05:54 ए ए & गोधूलि मुहूर्त- 06:49 पी एम से 07:12 पी एम सूर्योदय-सुबह 6:222 am सूर्यास्त- शाम 6:33 pm

विशेष व्रत/त्योहार: विनायक चतुर्थी व्रत (चतुर्थी तिथि के कारण) चैत्र नवरात्र का चौथा दिन (कूष्मांडा देवी पूजा) विश्व जल दिवस 

रविवार को विनायक श्री गणेश चतुर्थी व्रत किया जाएगा। नवरात्र के दौरान पड़ने के कारणइस चतुर्थी व्रत का महत्व और भी बढ़ गया है। यहां एक महत्वपूर्ण बात यह बता दें कि नवरात्र के दौरान मां दुर्गा के नौ स्वरूपों के साथ ही विभिन्न शक्तियों या देवी-देवताओं की उपासना का भी बड़ा महत्व होता है। लिहाजा 22 मार्च को श्री गणेश भगवान की उपासना करना, उनके मंत्रों का जप करना और उनके निमित्त विशेष उपाय करना आपके लिए बड़ा ही लाभकारी सिद्ध होगा।विनायक चतुर्थी के दिन हम आपको विशेष रूप से मंत्र महार्णव में दिये गये भगवान गणेश के वक्रतुण्ड और उच्छिष्ट गणपति मंत्र प्रयोग के बारे में बताएंगे। विनायक श्री गणेश चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की विधि पूर्वक पूजा करने के बाद भगवान श्री गणेश जी के वक्रतुण्डाय मंत्र का पुरस्चरण यानि की जप करना चाहिए।

धन-दौलत में वृद्धि करना चाहते हैं, तो विनायक चतुर्थी के दिन अन्न में घी मिलाकर 108 आहुतियां दें और हर बार आहुति के साथ मंत्र पढ़ें। मंत्र हैं- वक्र तुण्डाय हुं। इसके अलावा अगर आप चाहते हैं कि आपको अचानक बड़ा धन लाभ हो जाये, आपकी जमा-पूंजी में बढ़ोतरी हो जाये, तो विनायक चतुर्थी के दिन आपको नारियल के टुकड़े की एक हजार आहुतियां देनी चाहिए और साथ ही वक्रतुण्ड मंत्र का जप करना चाहिए। मंत्र है-वक्र तुण्डाय हुं।

विनायक चतुर्थी के दिन आपको पहले 1008 बार वक्रतुण्ड मंत्र का जप करना चाहिए। फिर भगवान का ध्यान करते हुए अष्टद्रव्यों में से किसी एक द्रव्य की 108 आहुतियां देनी चाहिए। उन अष्टद्रव्यों के नाम भी आपको बता दूं-गन्ने का रस, सत्तू, केला, चिउड़ा, तिल, मोदक, नारियल और धान का लावा।विनायक चतुर्थी के दिन इस प्रकार वक्रतुण्ड मंत्र का जप करके किसी एक द्रव्य की आहुति देने से आपको हर तरह की आर्थिक समस्याओं से छुटकारा मिलेगा। जानकारी के लिए आपको बता दूं कि वैसे तो ये उपाय किसी भी पक्ष की चतुर्थी से लेकर उसी पक्ष की अगली चतुर्थी तक किया जाता है। इसमें रोज 10 हजार मंत्रों का जप करके अष्टद्रव्यों में से किसी एक द्रव्य से 108 आहुतियां देनी चाहिए। लेकिन जो लोग इतना न कर पायें, वोविनायक चतुर्थी के दिन नवरात्र के दौरान केवल 1008 मंत्रों का जप करके किसी एक द्रव्य से 108 बार आहुति देकर भी लाभ पा सकते हैं।

देवी कूष्मांडा को ब्रह्मांड की निर्माता कहा जाता है। नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा होती है। इस दिन पूजा के बाद मां कूष्मांडा की आरती करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है।  माता रानी के नौ रूप होते हैं, जिन्हें नवरात्रि में पूजा जाता हैं। मां अंबे के हर एक रूप की एक अलग महिमा बताई गई है। माता के इन नौ स्वरूपों की पूजा करके साधक जीवन में शक्ति, साहस, निडरता, लीडरशिप जैसा गुण प्राप्त कर सकता है। हर शक्ति को पूजने की एक तरीका बताया गया है। ताकि साधक को अपनी पूजा का पूर्ण फल प्राप्त हो सके। देवी कूष्मांडा नवरात्रि के चौथे दिन की देवी हैं। नौ दिवसीय नवरात्रों में चौथे दिन देवी कुष्मांडा की आराधना की जाती है। भक्त पूरे भक्ति भाव से मां दुर्गा के चौथे स्वरूप की पूजा-अर्चना कर, उनके नाम का उपवास रखते हैं। इस दिन देवी कूष्मांडा की पूजा के बाद उनकी आरती जरूर करनी चाहिए। माता कूष्मांडा की पूजा उनकी आरती के बिना अधूरी मानी जाती है। 

 देवी कूष्मांडा माता जगदंबा की चौथे स्वरूप में जानी जाती हैं। माता का स्वरूप शक्ति, ऊर्जा और सृष्टि की रचनाकार का प्रतीक है। देवी कूष्मांडा की आठ भुजाएं हैं। कहा जाता है कि मां कुष्मांडा ने ही ब्रह्मांड की रचना की थी। माता कुष्मांडा की पूजा से विघ्न-बाधाएं दूर होती हैं। जैसे उन्होंने संसार का अंधकार मिटाया था, उसी तरह से अपने भक्तों के जीवन को भी प्रकाश से भर देती है। इसलिए चैत्र नवरात्रि के चौथे दिन देवी की पूजा के दौरान आपको कुछ मंत्रों का जप अवश्य करना चाहिए। 

मां कूष्माण्डा के मंत्रों का जाप करने से आप जीवन में हमेशा उन्नति की ओर अग्रसर होते हैं। बीज मंत्रों का जाप एक माला (108) बार करना चाहिए। मां कुष्मांडा अपने भक्तों को यश-बल और समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं। देवी की पूजा से सभी प्रकार के रोग और शारीरिक परेशानियां दूर होती है। 

मां कुष्मांडा की आरती

कुष्मांडा जय जग सुखदानी।

मुझ पर दया करो महारानी॥

पिगंला ज्वालामुखी निराली।
शाकंबरी माँ भोली भाली॥

लाखों नाम निराले तेरे ।
भक्त कई मतवाले तेरे॥

भीमा पर्वत पर है डेरा।
स्वीकारो प्रणाम ये मेरा॥

सबकी सुनती हो जगदंबे।
सुख पहुँचती हो माँ अंबे॥

तेरे दर्शन का मैं प्यासा।
पूर्ण कर दो मेरी आशा॥

माँ के मन में ममता भारी।
क्यों ना सुनेगी अरज हमारी॥

तेरे दर पर किया है डेरा।
दूर करो माँ संकट मेरा॥

मेरे कारज पूरे कर दो।
मेरे तुम भंडारे भर दो॥

तेरा दास तुझे ही ध्याए।
भक्त तेरे दर शीश झुकाए॥

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